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Stock Market Alert: BSE Sensex 500 अंक ऊपर, Nifty 50 ने पार किया 25,500, जानिए किन स्टॉक्स में तेजी
Stock Market Alert: वैश्विक बाजारों में तेजी का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला है। यह तेजी विशेष रूप से अमेरिका में सरकार की शटडाउन समाप्ति की संभावनाओं के कारण उभर रही है। सप्ताह के पहले ट्रेडिंग दिन यानी सोमवार को घरेलू बाजार ने मजबूती दिखाई। बैंकिंग, मेटल और एनर्जी सेक्टर के शेयरों में भारी खरीदारी ने BSE सेंसेक्स को दोपहर के समय 500 से अधिक अंक ऊपर धकेला, जबकि निफ्टी 50 भी 25,500 के ऊपर कारोबार करता नजर आया।
सोमवार को 12:41 बजे सेंसेक्स 508.20 अंक (0.61%) की तेजी के साथ 83,724.48 पर पहुंचा। वहीं, निफ्टी 50 में 153.10 अंक (0.60%) की बढ़त दर्ज की गई और यह 25,645.40 पर कारोबार कर रहा था। इस तेजी ने निवेशकों के बीच उत्साह और भरोसा बढ़ाया।
तेजी के प्रमुख कारण
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी कांग्रेस में शटडाउन समाप्ति की प्रगति ने वैश्विक बाजारों में सकारात्मक भावनाओं को जन्म दिया है। इसके अलावा, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की खरीदारी, कंपनियों के दूसरे तिमाही के मजबूत परिणाम, और देश की आर्थिक वृद्धि के सकारात्मक संकेत भी बाजार को सहारा दे रहे हैं। इन सभी कारकों ने निवेशकों में विश्वास बढ़ाया और शेयरों की मांग को गति दी।
विशेष रूप से बैंकिंग, मेटल और ऊर्जा क्षेत्र में खरीदारी ने सेंसेक्स और निफ्टी को उभारने में मुख्य भूमिका निभाई। निवेशकों ने मौजूदा अवसर का लाभ उठाते हुए मुनाफा कमाने के साथ-साथ लंबी अवधि के निवेश पर भी ध्यान केंद्रित किया।

विश्लेषकों की राय
Geojit Financial Services के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वी.के. विजयकुमार का मानना है कि भारत की प्रदर्शन क्षमता उभरते बाजारों में असाधारण रूप से मजबूत रही है। उन्होंने कहा कि देश में मुद्रास्फीति नियंत्रण में है और घरेलू आर्थिक गतिविधियाँ धीरे-धीरे गति पकड़ रही हैं। इसके अलावा, भारतीय अर्थव्यवस्था अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में अधिक स्थिर और मज़बूत बनी हुई है।
विश्लेषकों के अनुसार, निवेशकों को यह समझना आवश्यक है कि वैश्विक घटनाक्रम, विशेषकर अमेरिका की शटडाउन स्थिति, और घरेलू आर्थिक संकेतक जैसे कि मुद्रास्फीति और औद्योगिक उत्पादन डेटा भविष्य में बाजार की दिशा तय करेंगे।
निवेशकों की निगाहें आगे के संकेतकों पर
वर्तमान समय में निवेशक अमेरिकी शटडाउन के अंतिम निर्णय, मुद्रास्फीति और औद्योगिक उत्पादन डेटा पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं। ये संकेतक भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति और बाजार के भाव को समझने में मदद करेंगे। इसके साथ ही विदेशी निवेश, कंपनी के तिमाही परिणाम, और सरकार की नीतियाँ भी शेयर बाजार में निवेशकों के विश्वास और बाजार की स्थिरता पर असर डालेंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये सभी संकेतक सकारात्मक बने रहते हैं, तो भारतीय शेयर बाजार में लंबे समय तक तेजी बनी रह सकती है और निवेशकों को लाभ की संभावना बढ़ सकती है। यही कारण है कि निवेशक वर्तमान समय में सतर्क रहते हुए भी अवसर का लाभ उठाने में जुटे हैं।
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Silver Price Predictions: चांदी की कीमतों में हो सकता है जबरदस्त उछाल, 2026 तक 200 डॉलर प्रति औंस!
Silver Price Predictions: वर्तमान वैश्विक राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता के दौर में निवेशकों का ध्यान खासतौर पर सोने और चांदी की ओर गया है। जहां शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और गिरावट की स्थिति बनी हुई है, वहीं सोने और चांदी की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। इस बीच वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में चांदी की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाएगी। प्रसिद्ध वित्तीय लेखक रॉबर्ट कियोस्की ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर चांदी के महत्व को बढ़ाते हुए कहा है कि आज के तकनीकी युग में चांदी का महत्त्व सोने से भी अधिक हो गया है। वे इसे आधुनिक तकनीक की रीढ़ मानते हैं, जैसे औद्योगिक युग में लोहे का था।
चांदी के दामों में उछाल की संभावनाएं
कियोस्की ने बताया कि चांदी की कीमतें पिछले दशकों में लगातार बढ़ रही हैं। उदाहरण के तौर पर, 1990 में चांदी की कीमत लगभग 5 डॉलर प्रति औंस थी, जो अब 2026 तक बढ़कर लगभग 92 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच चुकी है। उन्होंने भविष्यवाणी की है कि आने वाले समय में चांदी के दाम 200 डॉलर प्रति औंस तक भी पहुंच सकते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि यह अनुमान गलत भी हो सकता है, लेकिन इसके संभावित उछाल को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह तेजी निवेशकों के बीच एक नई उम्मीद जगाती है कि चांदी अब सिर्फ कीमती धातु नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण तकनीकी धातु बन चुकी है।
चांदी की कीमत बढ़ने के पीछे कारण
चांदी की कीमतों में तेजी के कई अहम कारण हैं। सबसे पहला कारण यह है कि निवेशक इसे सुरक्षित निवेश के रूप में तेजी से अपना रहे हैं। इसके अलावा चांदी की सप्लाई सीमित होती जा रही है, जबकि इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, सोलर पैनल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सर्वर जैसी आधुनिक तकनीकों में इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है। भू-राजनीतिक अनिश्चितता और वैश्विक बाजारों में बढ़ता डर भी चांदी की कीमतों को ऊपर धकेल रहा है। इसके अलावा, भारतीय रुपये की कमजोरी भी घरेलू बाजार में चांदी की कीमतों को प्रभावित कर रही है। वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमत लगभग 95 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच चुकी है, जबकि भारत में यह 3.34 लाख रुपये प्रति किलो के करीब चल रही है।
सोना या चांदी – निवेशकों के लिए बेहतर विकल्प?
बाजार में चांदी के साथ-साथ सोने की कीमतें भी रिकॉर्ड स्तर पर बनी हुई हैं। एमसीएक्स पर 24 कैरेट सोना 10 ग्राम के लिए 1.51 लाख रुपये के पार पहुंच चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि सोने की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है, लेकिन चांदी की चमक उससे कहीं ज्यादा तेज हो सकती है। चांदी तकनीकी जरूरतों में बढ़ती मांग के कारण निवेशकों के लिए एक आकर्षक विकल्प बन रही है। ऐसे में निवेशकों के बीच चर्चा तेज हो गई है कि आने वाले समय में चांदी सोने से भी बेहतर निवेश साबित हो सकती है। बाजार के उतार-चढ़ाव और आर्थिक अनिश्चितता के बीच, यह धातु निवेश को सुरक्षित और लाभकारी बनाने में मदद कर सकती है।
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