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WhatsApp अकाउंट हैकिंग के संकेत, फर्जी गतिविधियों से रहें सावधान, तुरंत अपनाएं ये आसान सुरक्षा उपाय

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WhatsApp अकाउंट हैकिंग के संकेत, फर्जी गतिविधियों से रहें सावधान, तुरंत अपनाएं ये आसान सुरक्षा उपाय

WhatsApp भारत में सबसे अधिक उपयोग होने वाला मैसेजिंग ऐप है। यहाँ रोज़मर्रा के भुगतान, निजी दस्तावेज़ और व्यक्तिगत चैट जैसी महत्वपूर्ण गतिविधियाँ होती हैं। इसलिए, अगर आपका WhatsApp हाल ही में अजीब व्यवहार कर रहा है, तो संभावना है कि कोई आपके अकाउंट में अनधिकृत प्रवेश कर गया हो। सबसे पहला संकेत होता है अचानक लॉगआउट। अगर आपको “Your phone number is no longer registered” जैसा संदेश दिखाई दे या आपका अकाउंट बिना किसी कारण के लॉगआउट हो जाए, तो समझ जाएँ कि आपका नंबर किसी और डिवाइस पर रजिस्टर कर दिया गया है। इसके अलावा, अगर आपके दोस्त या परिवार वाले ऐसे मैसेज रिसीव कर रहे हैं जो आपने नहीं भेजे, तो यह भी स्पष्ट संकेत है कि आपका WhatsApp किसी और के नियंत्रण में हो सकता है।

संदिग्ध गतिविधियों की अन्य पहचान

अपने WhatsApp सेटिंग्स में जाकर “Linked Devices” चेक करें। अगर आपको कोई डिवाइस, ब्राउज़र या लोकेशन दिखाई दे जिसे आप पहचान नहीं पाते, तो आपका अकाउंट किसी और डिवाइस पर खुला हो सकता है। इसके अलावा, अगर आपका फोन अचानक गर्म होने लगे, बैटरी जल्दी खत्म होने लगे या फोन स्लो हो जाए, तो यह भी संदिग्ध गतिविधि का संकेत है। कुछ हद तक, अगर व्हाट्सऐप में अचानक अनजाने ग्रुप, कांटैक्ट या ब्रॉडकास्ट लिस्ट दिखाई दें, तो समझ जाएँ कि आपका अकाउंट धोखाधड़ी के लिए इस्तेमाल हो रहा है।

WhatsApp को तुरंत सुरक्षित करने के आसान उपाय

सबसे पहले, व्हाट्सऐप की टू-स्टेप वेरिफिकेशन चालू करें। इसके लिए Settings → Account → Two-step Verification → Enable करें और 6 डिजिट का PIN सेट करें। यह सबसे मजबूत सुरक्षा परत है, जो बिना अनुमति के लॉगिन नहीं होने देती। इसके बाद, Linked Devices में जाकर सभी अनजाने डिवाइस से लॉगआउट करें और केवल अपने फोन पर ही लॉगिन करें। अगर ऐप अभी भी अजीब व्यवहार कर रहा है, तो WhatsApp को अनइंस्टॉल कर दोबारा इंस्टॉल करें। नई इंस्टॉलेशन से सभी अनजाने सत्र हट जाएंगे।

फोन और ऐप को अपडेट रखें और मालवेयर स्कैन करें

हैकर्स अक्सर पुराने ऐप और सिस्टम को निशाना बनाते हैं। इसलिए अपने फोन और WhatsApp को हमेशा अपडेट रखें। सुरक्षा पैच इंस्टॉल करना न भूलें। इसके अलावा, फोन को मालवेयर के लिए स्कैन करना भी जरूरी है। Android उपयोगकर्ता Google Play Protect और iPhone यूज़र अपने डिवाइस की बिल्ट-इन सिक्योरिटी का इस्तेमाल कर सकते हैं। किसी भी अजीब या अनजान नाम वाले ऐप को तुरंत डिलीट कर दें। इन सरल कदमों से आप अपने WhatsApp को मिनटों में सुरक्षित कर सकते हैं।

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‘ChiChi Call’ वायरल वीडियो स्कैम: ऑनलाइन यूजर्स को बनाया जा रहा शिकार

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‘ChiChi Call’ वायरल वीडियो स्कैम: ऑनलाइन यूजर्स को बनाया जा रहा शिकार

इंटरनेट पर एक नया स्कैम तेजी से फैल रहा है, जिसे ‘ChiChi Call’ वायरल वीडियो या वेरा हिल (Vera Hill) लीक वीडियो के नाम से पेश किया जा रहा है। सोशल मीडिया यूजर्स को इन लिंक पर क्लिक करने के लिए उकसाया जाता है। यह दावा किया जा रहा है कि फिलीपींस की इंफ्लुएंसर वेरा हिल का निजी वीडियो लीक हो गया है। हालांकि, साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसा कोई वीडियो मौजूद नहीं है और यह पूरी योजना ऑनलाइन ठगी का हिस्सा है। इस घोटाले का मकसद यूजर्स का पर्सनल डेटा चुराना और संवेदनशील जानकारी हासिल करना है।

वेरा हिल और वायरल वीडियो की असली स्थिति

वेरा हिल, जिन्हें ऑनलाइन ChiChi के नाम से जाना जाता है, फिलीपींस के Siargao से हैं और पॉपुलर लाइफस्टाइल और ट्रैवल इंफ्लुएंसर हैं। सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही क्लिप्स का वेरा हिल से कोई संबंध नहीं है। एनालिस्ट्स ने पुष्टि की कि वायरल लिंक या तो एडिटेड हैं या किसी और वीडियो को जोड़कर फर्जी बनाया गया है। टिकटॉक, फेसबुक, टेलीग्राम और रेडिट जैसे प्लेटफॉर्म्स पर जो लिंक शेयर किए जा रहे हैं, वे नकली और खतरनाक हैं। इस तरह के स्कैम से फॉलोअर्स के डेटा और ब्राउज़र गतिविधियों को आसानी से ट्रैक किया जा सकता है।

‘ChiChi Call’ वायरल वीडियो स्कैम: ऑनलाइन यूजर्स को बनाया जा रहा शिकार

ऑनलाइन ठगी की तकनीक और खतरनाक मैलवेयर

स्कैमर्स SEO पॉइजनिंग तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। वे ब्लॉग पोस्ट और सोशल मीडिया अकाउंट्स में कीवर्ड डालकर सर्च रिजल्ट्स में दिखाई देते हैं, जैसे “ChiChi Video Call Full” और “ChiChi Vera Hill Vial Link”। यूजर्स इन लिंक पर क्लिक करते ही नकली स्ट्रीमिंग पेज या फेसबुक लॉगिन वैरिफिकेशन पेज पर चले जाते हैं। कई बार उन्हें ब्राउज़र प्लगइन इंस्टॉल करने के लिए कहा जाता है, जो असल में मैलवेयर होता है। यह मैलवेयर कीबोर्ड पर टाइप की गई जानकारी, बैंकिंग क्रेडेंशियल और व्यक्तिगत डेटा चुरा सकता है। बार-बार अलग-अलग पेज पर रीडायरेक्ट होना और वीडियो देखने के लिए प्लगइन इंस्टॉल करने का मैसेज मैलवेयर का साफ संकेत है।

कानूनी खतरे और सावधानी की सलाह

भारत में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 और भारतीय दंड संहिता के तहत गैर-सहमति से अंतरंग सामग्री बनाना, शेयर करना या फैलाना गंभीर अपराध है। अगर कोई व्यक्ति ‘ChiChi Call’ या ऐसे किसी फेक वीडियो को साझा करता है, तो उसे कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि यूजर्स को किसी भी वायरल वीडियो की प्रामाणिकता जांचने के बाद ही क्लिक करना चाहिए। किसी भी अवैध या हानिकारक सामग्री को शेयर करने से बचना चाहिए और व्यक्तिगत डेटा को सुरक्षित रखना चाहिए।

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Airtel और Zscaler ने मिलकर भारत में साइबर फ्रॉड पर लगाया कड़ा शिकंजा

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Airtel और Zscaler ने मिलकर भारत में साइबर फ्रॉड पर लगाया कड़ा शिकंजा

भारती Airtel ने भारत में साइबर फ्रॉड और डिजिटल खतरों से निपटने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। कंपनी ने कैलिफोर्निया बेस्ड AI सिक्योरिटी प्लेटफॉर्म Zscaler के साथ पार्टनरशिप का ऐलान किया है। इस साझेदारी के तहत एयरटेल और Zscaler मिलकर एडवांस साइबर थ्रेट डिटेक्शन और प्रिवेंशन मैकेनिज्म तैयार करेंगे। एयरटेल ने बताया कि इस पहल के जरिए यूजर्स को ऑनलाइन धोखाधड़ी और फर्जी कॉल्स से बचाया जाएगा। कंपनी का कहना है कि यह कदम डिजिटल इंडिया को सुरक्षित बनाने और यूजर्स के डेटा की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए लिया गया है।

भारत में स्थापित होगा AI & Cyber Threat रिसर्च सेंटर

नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित एआई समिट में Airtel ने अपने AI रिसर्च सेंटर के लिए हुए पार्टनरशिप का खुलासा किया। यह सेंटर एडवांस साइबर थ्रेट रिसर्च पर काम करेगा और भारत के पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर को साइबर हमलों से बचाएगा। एयरटेल के मुताबिक यह एक मल्टी-स्टेकहोल्डर डिजिटल इनिशिएटिव है। इसके जरिए बैंकिंग, टेलीकॉम, एनर्जी और डिजिटल यूजर्स सहित विभिन्न इंडस्ट्रीज के असैट्स को साइबर थ्रेट्स से सुरक्षित किया जाएगा। सेंटर भारत की नेशनल सिक्योरिटी और अर्थव्यवस्था को साइबर खतरों से बचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

Airtel और Zscaler ने मिलकर भारत में साइबर फ्रॉड पर लगाया कड़ा शिकंजा

अमेरिकी Zscaler के साथ मिलकर होगा रिसर्च

एयरटेल ने बताया कि AI रिसर्च सेंटर में अमेरिकी कंपनी Zscaler की ThreatLabz टीम हर महीने लाखों साइबर अटैम्प्ट्स को मॉनिटर करेगी। ThreatLabz के मुताबिक हाल ही में भारत में 1.2 मिलियन इंट्रूसन अटैम्प्ट्स दर्ज किए गए हैं। ये अटैम्प्ट्स लगभग 20 हजार सोर्स से हुए और भारत के 58 डिजिटल एंटीटीज को टारगेट किया गया। एयरटेल के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट गोपाल विट्ठल ने कहा कि रिसर्च सेंटर के जरिए यूजर्स सुरक्षित डिजिटल अनुभव का लाभ उठा सकेंगे। Zscaler के CEO जय चौधरी का कहना है कि यह सेंटर भारत को एक सिक्योरिटी क्लाउड उपलब्ध कराएगा जो पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर को साइबर हमलों से बचाएगा।

AI डिटेक्शन टूल से बढ़ेगा यूजर्स का सुरक्षा कवच

एयरटेल ने पहले ही अपने नेटवर्क में AI डिटेक्शन टूल को लागू किया है जो कॉल और मैसेज के जरिए होने वाले साइबर फ्रॉड को पकड़ता है। यह टूल फर्जी कॉल्स और मैसेज को नेटवर्क लेवल पर डिटेक्ट करता है और यूजर को तुरंत स्पैम की चेतावनी देता है। इस टूल की मदद से यूजर्स ऑनलाइन धोखाधड़ी और साइबर क्राइम से सुरक्षित रहते हैं। एयरटेल की इस पहल के बाद अन्य टेलीकॉम ऑपरेटर्स ने भी इसी तरह के AI टूल को अपने नेटवर्क में शामिल करना शुरू कर दिया है। इसके जरिए भारत में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल और सुरक्षित हो जाएगा।

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AI Impact Summit में Microsoft ने भारत समेत ग्लोबल साउथ के लिए 50 अरब डॉलर निवेश की घोषणा

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AI Impact Summit में Microsoft ने भारत समेत ग्लोबल साउथ के लिए 50 अरब डॉलर निवेश की घोषणा

नई दिल्ली में आयोजित AI Impact Summit 2026 में दुनिया के बड़े टेक लीडर्स और राष्ट्राध्यक्ष शामिल हुए। MeitY द्वारा आयोजित इस एआई महाकुंभ में Google CEO सुंदर पिचाई ने भारत में 15 बिलियन डॉलर के निवेश की घोषणा की। वहीं, Microsoft के वाइस चेयरमैन और प्रेसिडेंट ब्रैड स्मिथ ने भी एआई समिट में बड़े निवेश की घोषणा की। इस मौके पर दोनों कंपनियों ने भारत और ग्लोबल साउथ में एआई इन्फ्रास्ट्रक्चर और स्किल डेवलपमेंट को मजबूत करने की योजना साझा की।

ग्लोबल साउथ में माइक्रोसॉफ्ट का 50 अरब डॉलर का निवेश

ब्रैड स्मिथ ने कहा कि AI के लिए ग्लोबल साउथ में 50 अरब डॉलर यानी लगभग 4 लाख करोड़ रुपये निवेश किए जाएंगे। यह निवेश 2030 तक एआई इंफ्रास्ट्रक्चर और स्किल डेवलपमेंट के लिए खर्च किया जाएगा। उन्होंने बताया कि एआई का फायदा अभी दुनिया में बराबर नहीं बंटा है। ग्लोबल साउथ में भारत, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे देश आते हैं। माइक्रोसॉफ्ट इन क्षेत्रों में AI डेटा सेंटर, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और लोकल लेवल पर AI स्किल डेवलपमेंट पर जोर देगा।

AI Impact Summit में Microsoft ने भारत समेत ग्लोबल साउथ के लिए 50 अरब डॉलर निवेश की घोषणा

भारत में AI टैलेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार

ब्रैड स्मिथ ने कहा कि भारत में एआई टैलेंट की भरमार है, लेकिन सही इंफ्रास्ट्रक्चर और ट्रेनिंग के बिना इसका पूरा लाभ नहीं मिल रहा है। माइक्रोसॉफ्ट इस गैप को भरना चाहती है। इसके लिए टीचर्स और स्टूडेंट्स को AI से जोड़ने की योजना है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग एआई टूल्स का सही उपयोग कर सकें। भारत में नए डेटा सेंटर और ट्रेनिंग प्रोग्राम से स्टार्टअप्स और युवाओं को भी फायदा होगा।

AI के जरिए आम लोगों की जिंदगी आसान होगी

ब्रैड स्मिथ ने कहा कि AI का इस्तेमाल एजुकेशन, हेल्थ, एग्रीकल्चर और गवर्नेंस में बड़ा बदलाव ला सकता है। इसके लिए जरूरी है कि यह टेक्नोलॉजी आम लोगों तक पहुंचे। उन्होंने आगे कहा कि यदि सही इंफ्रा और ट्रेनिंग मिल जाए, तो भारत जैसे देश एआई के जरिए नई ऊंचाइयां छू सकते हैं। AI Summit के बाद India AI Mission को नई गति मिलेगी और सरकार तथा बड़ी टेक कंपनियां मिलकर एआई से लोगों की जिंदगी आसान बनाने पर काम करेंगी।

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