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SEBI ने Sanjay Dalmia पर लगाई बड़ी कार्रवाई, Golden Tobacco में धन हेरफेर का आरोप

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SEBI ने Sanjay Dalmia पर लगाई बड़ी कार्रवाई, Golden Tobacco में धन हेरफेर का आरोप

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने गोल्डन तंबाकू लिमिटेड (GTL) मामले में नया आदेश जारी किया है। इस आदेश के तहत दालमिया ग्रुप के चेयरमैन संजय दालमिया के खिलाफ कार्रवाई की गई है। GTL पर कई वर्षों से फंड के गबन और वित्तीय विवरणों में हेरफेर करने का आरोप है। SEBI ने इस मामले में संजय दालमिया को सिक्योरिटीज मार्केट में प्रवेश से प्रतिबंधित कर दिया और उन्हें जुर्माना भी लगाया।

संजय दालमिया पर 2 साल का बाजार प्रतिबंध

SEBI ने आदेश में GTL प्रमोटर संजय दालमिया को दो वर्षों के लिए प्रतिभूति बाजार में प्रवेश करने से प्रतिबंधित कर दिया। इसके साथ ही उन पर 30 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। SEBI ने यह कार्रवाई कंपनी और उसके प्रमुख अधिकारियों द्वारा कथित रूप से संपत्तियों के दुरुपयोग, वित्तीय विवरणों में गड़बड़ी और आवश्यक खुलासे न करने के मामले में की है।

साथ ही, अनुराग दालमिया को डेढ़ साल के लिए मार्केट में प्रवेश से रोका गया और उन पर 20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। पूर्व GTL निदेशक अशोक कुमार जोशी को भी एक साल के लिए बाजार में प्रवेश से प्रतिबंधित किया गया और उन्हें 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।

SEBI ने Sanjay Dalmia पर लगाई बड़ी कार्रवाई, Golden Tobacco में धन हेरफेर का आरोप

SEBI के आरोपों का विवरण

SEBI के आदेश के अनुसार, GTL ने वित्तीय वर्ष 2010 से 2015 के बीच अपनी सहायक कंपनी GRIL को 175.17 करोड़ रुपये ऋण और अग्रिम राशि के रूप में ट्रांसफर किए और इसे अपनी वार्षिक रिपोर्ट में आउटस्टैंडिंग दिखाया। SEBI ने आरोप लगाया कि कुल अग्रिम राशि में से केवल 36 करोड़ रुपये लौटाए गए और शेष राशि GRIL से प्रमोटर-संबंधित संस्थाओं को ट्रांसफर कर दी गई।

इसके अलावा, SEBI ने कहा कि GTL के प्रमोटर और निदेशकों ने कंपनी की महत्वपूर्ण भूमि संपत्तियों से संबंधित समझौते किए, जिन्हें शेयरधारकों को सही ढंग से नहीं बताया गया। इसमें तीसरे पक्ष के साथ भूमि की बिक्री या लीज़ के समझौते शामिल थे, जो या तो कंपनी के हित में नहीं थे या जिनका स्टॉक एक्सचेंज में पारदर्शी खुलासा नहीं किया गया।

यह मामला SEBI की कंपनी संचालन और वित्तीय पारदर्शिता पर सख्त निगरानी को दर्शाता है। GTL के प्रमोटर और निदेशकों द्वारा शेयरधारकों को उचित जानकारी न देने और वित्तीय विवरणों में गड़बड़ी करने के आरोपों के चलते SEBI ने कड़े कदम उठाए हैं, जिनमें बाजार प्रवेश पर प्रतिबंध और भारी जुर्माना शामिल हैं। यह आदेश अन्य कंपनियों और प्रमोटरों के लिए सावधानी और जिम्मेदार प्रबंधन का संदेश भी है।

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Budget 2026 में नई डिजाइन इंस्टिट्यूट पूर्व भारत में खुलने का ऐतिहासिक फैसला

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Budget 2026 में नई डिजाइन इंस्टिट्यूट पूर्व भारत में खुलने का ऐतिहासिक फैसला

Budget 2026: 1 फरवरी 2026 को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लगातार नौवीं बार देश का बजट पेश किया। इस बार के बजट में शिक्षा क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गईं। बजट में आयुर्वेद, फार्मास्यूटिकल्स, डिजाइन, तकनीकी शिक्षा और विद्यार्थियों की सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया गया है। बजट 2026 इस बात का स्पष्ट संकेत देता है कि आने वाले वर्षों में शिक्षा को रोजगार और विकास से सीधे जोड़ने की योजना है। इसके तहत पारंपरिक चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए तीन नए आयुर्वेद संस्थान स्थापित करने की घोषणा की गई है। साथ ही दवाओं की गुणवत्ता नियंत्रण के लिए ड्रग टेस्टिंग लैब्स को भी अपग्रेड किया जाएगा।

शिक्षा क्षेत्र में नए विश्वविद्यालय टाउनशिप का निर्माण

इस बजट का एक बड़ा और महत्वूपर्ण कदम देश के शिक्षा परिदृश्य को बदलने वाला है। सरकार ने पूरे देश में पांच विश्वविद्यालय टाउनशिप बनाने का ऐलान किया है। इन टाउनशिप में शिक्षा, अनुसंधान, छात्रावास, खेलकूद और स्टार्टअप्स के लिए समर्पित सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को ऐसा माहौल प्रदान करना है जहां वे पढ़ाई के साथ-साथ नवाचार और नए विचारों पर काम कर सकें। इसके अलावा पांच नए विश्वविद्यालय खोलने की भी घोषणा की गई है, जिससे उच्च शिक्षा तक पहुंच बेहतर होगी और विभिन्न राज्यों में शिक्षा के नए अवसर उत्पन्न होंगे।

फार्मास्यूटिकल शिक्षा को मिलेगा बल

फार्मास्यूटिकल सेक्टर पर भी बजट में खास जोर दिया गया है। इस क्षेत्र को मजबूत करने के लिए तीन नए फार्मास्यूटिकल शिक्षा संस्थान खोलने की घोषणा की गई है। ये संस्थान दवा निर्माण, अनुसंधान और गुणवत्ता नियंत्रण पर केंद्रित होंगे। इससे भारत के फार्मास्यूटिकल सेक्टर की स्थिति और मजबूती पाएगी और देश में दवाओं के क्षेत्र में नवाचार और प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।

डिजाइन शिक्षा और डिजिटल कौशल को मिलेगी नई उड़ान

बजट में पूर्वी भारत में एक नया भारतीय डिजाइन संस्थान (IIND) खोलने की घोषणा की गई है। इससे इस क्षेत्र के छात्रों को बेहतर शिक्षा प्राप्त करने का मौका मिलेगा और उन्हें देश के दूसरे हिस्सों में स्थानांतरित होने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके साथ ही डिजिटल और क्रिएटिव स्किल्स को बढ़ावा देने के लिए ABGC कंटेंट क्रिएटर लैब्स शुरू की जाएंगी। IIT मुंबई की मदद से देश के 15,000 सेकेंडरी स्कूलों और 500 कॉलेजों में ये लैब्स स्थापित की जाएंगी। इन लैब्स में छात्र डिजिटल कंटेंट, गेमिंग, एनीमेशन और नई तकनीकों से जुड़ी स्किल्स सीख सकेंगे। वित्त मंत्री ने हर जिले में उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए लड़कियों के छात्रावास बनाने की भी घोषणा की है, जिससे छात्राओं को बेहतर शिक्षा के लिए सुविधाजनक और सुरक्षित माहौल मिलेगा।

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Budget 2026 में क्रिप्टोकरेंसी पर बड़ा बदलाव या पुराने नियमों का ही सफर जारी

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Budget 2026 में क्रिप्टोकरेंसी पर बड़ा बदलाव या पुराने नियमों का ही सफर जारी

Budget 2026: हाल के वर्षों में भारत में क्रिप्टोकरेंसी और अन्य वर्चुअल डिजिटल असेट्स (VDAs) में निवेशकों की संख्या में तेज़ी से बढ़ोतरी हुई है। हालांकि इस क्षेत्र में निवेश करना आसान नहीं है क्योंकि यहां भारी टैक्स बोझ निवेशकों को परेशान करता है। वर्तमान में लागू कर प्रणाली ने कई निवेशकों को उलझन में डाल दिया है और वे सही दिशा नहीं पकड़ पा रहे। अब जब बजट 2026 पेश होने में मात्र एक दिन बचा है, तो क्रिप्टो उद्योग से जुड़े लोगों, टैक्स विशेषज्ञों और निवेशकों की उम्मीदें फिर से बढ़ गई हैं। सभी की निगाहें सरकार की ओर टिकी हैं कि क्या इस बार टैक्स और नियमों में कोई बड़ा बदलाव होगा या फिर पुरानी प्रणाली जारी रहेगी। आइए जानते हैं क्रिप्टो निवेशकों की बजट से क्या-क्या अपेक्षाएं हैं।

निवेशकों की बजट 2026 से मुख्य अपेक्षाएं

वर्तमान में वर्चुअल डिजिटल असेट्स से होने वाली कमाई पर 30 प्रतिशत की फ्लैट टैक्स दर लगती है, जिसमें केवल संपत्ति की खरीद लागत को ही कटौती के रूप में माना जाता है। इसके अलावा हर लेन-देन पर 1 प्रतिशत टीडीएस (टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स) काटा जाता है, जिससे सरकार को निवेश गतिविधियों का पूरा रिकॉर्ड मिलता है। हालांकि ये सख्त नियम निवेशकों के लिए अतिरिक्त बोझ साबित हो रहे हैं। लगातार टीडीएस कटौती से व्यापार के लिए उपयोग होने वाली रकम लॉक हो जाती है, जिससे छोटे निवेशकों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसी कारण कई निवेशक विदेशी एक्सचेंज या गैर-आधिकारिक प्लेटफॉर्म की ओर रुख कर रहे हैं जहां नियम अपेक्षाकृत आसान हैं। इस स्थिति का सीधा असर देश के घरेलू क्रिप्टो बाजार पर भी पड़ रहा है। ऐसे में निवेशक अब टैक्स प्रणाली में बदलाव और राहत की उम्मीद लगाए हुए हैं।

बजट 2022 ने बदला था क्रिप्टो टैक्सेशन का रुख

भारत सरकार ने डिजिटल संपत्तियों की ओर कुछ वर्षों पहले ध्यान देना शुरू किया था। डिजिटल ट्रांजेक्शन्स में तेजी से वृद्धि को इसके पीछे मुख्य कारण माना गया। इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री ने बजट 2022 में स्पष्ट किया था कि क्रिप्टो और अन्य डिजिटल असेट्स के व्यापार और दायरे में इतनी वृद्धि हुई है कि इनके लिए एक अलग टैक्स सिस्टम बनाना जरूरी हो गया है। इस घोषणा से यह साफ हो गया कि सरकार अब इन संपत्तियों को औपचारिक वित्तीय प्रणाली का हिस्सा मानती है और इन्हें टैक्स नेट में लाना चाहती है।

आगे क्या हो सकता है बजट में?

बजट 2026 के संदर्भ में क्रिप्टो उद्योग, निवेशकों और टैक्स विशेषज्ञों की उम्मीदें हैं कि सरकार टीडीएस की दर कम करे या इसे फिलहाल के मुकाबले और भी निवेशकों के अनुकूल बनाए। साथ ही टैक्स की दरों में कुछ राहत मिले ताकि छोटे निवेशक इस बाजार में और सहजता से आ सकें। इसके अलावा, कुछ लोग यह भी चाहते हैं कि क्रिप्टो को पूरी तरह से पारदर्शी और नियमबद्ध करने के लिए एक व्यापक कानून बनाया जाए, जिससे निवेशकों को सुरक्षा और स्पष्टता मिले। अगर सरकार इन पहलुओं पर सकारात्मक कदम उठाती है, तो यह घरेलू क्रिप्टो बाजार को मजबूत करने में मदद करेगा और भारत को इस क्षेत्र में वैश्विक प्रतिस्पर्धा के करीब ले जाएगा।

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Share Market Crash: शेयर मार्केट में भारी गिरावट, विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बढ़ाया दबाव

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Share Market Crash: शेयर मार्केट में भारी गिरावट, विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बढ़ाया दबाव

Share Market Crash: बजट से पहले कारोबार के आखिरी दिन गुरुवार को शेयर बाजार का माहौल बेहद नकारात्मक रहा। लगातार तीन सत्रों तक बढ़त के बाद गुरुवार को बाजार गिरावट के साथ खुला। सुबह 9:30 बजे BSE सेंसेक्स करीब 619 अंकों की भारी गिरावट के साथ 81,947 के स्तर पर था, जबकि निफ्टी 171 अंकों की कमजोरी के साथ 25,248 के पास कारोबार कर रहा था। यह गिरावट ऐसे समय आई है जब संसद में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आर्थिक सर्वे प्रस्तुत किया, जिसमें भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत विकास का अनुमान लगाया गया। बावजूद इसके बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली जो निवेशकों की चिंता को बढ़ा रही है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दबाव

शेयर बाजार में आई गिरावट की प्रमुख वजह विदेशी निवेशकों द्वारा शेयरों की भारी बिक्री है। जनवरी महीने में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने अब तक 43,686 करोड़ रुपये के भारतीय शेयर बाजार से निकाले हैं। यह आउटफ्लो पिछले साल 2025 के रिकॉर्ड 19 बिलियन डॉलर से भी अधिक है। अकेले 29 जनवरी को ही विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 394 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जिससे बाजार में दबाव और बढ़ गया। हालांकि घरेलू निवेशकों ने 2,638 करोड़ रुपये के शेयर खरीदकर बाजार को कुछ हद तक संभालने की कोशिश की है, लेकिन विदेशी बिकवाली का असर साफ तौर पर देखने को मिल रहा है।

रुपये में गिरावट से बढ़ा अनिश्चितता का माहौल

डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी भी बाजार पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही है। गुरुवार को रुपया 91.9850 के लगभग अपने अब तक के निचले स्तर पर पहुंच गया, जबकि शुक्रवार को यह 91.9125 के स्तर पर खुला। इस महीने रुपये में करीब 2.3 की गिरावट आई है, जो सितंबर 2022 के बाद की सबसे खराब प्रदर्शन वाली अवधि के करीब है। कमजोर रुपये से कंपनियों की इनपुट लागत बढ़ने का खतरा रहता है, जो खासकर उन सेक्टर्स के लिए चुनौती बन सकता है जो कच्चे माल या इंपोर्ट पर निर्भर हैं। निवेशक इस स्थिति को लेकर सतर्क हो गए हैं क्योंकि इससे कंपनियों के मुनाफे और बाजार पर दबाव बढ़ने की संभावना बनी रहती है।

सेक्टोरल इंडेक्स में भी भारी कमजोरी

बाजार में आई गिरावट केवल प्रमुख इंडेक्स तक सीमित नहीं रही, बल्कि सेक्टोरल इंडेक्स भी गिरावट की मार झेल रहे हैं। शुरुआती कारोबार में निफ्टी इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी इंडेक्स 1 फीसदी से अधिक गिरा, जिसमें इसके सभी शेयर नीचे नजर आए। मेटल इंडेक्स में तो लगभग 4 फीसदी की गिरावट हुई, जिससे हिंडाल्को और टाटा स्टील जैसे बड़े शेयर प्रभावित हुए। इसके अलावा फाइनेंशियल, ऑयल एंड गैस और कैपिटल गुड्स सेक्टर भी दबाव में रहे। क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतें और भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं बाजार की अस्थिरता को और बढ़ा रही हैं। जियोजित के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. वी के विजयकुमार के अनुसार बजट के नजदीक आने के साथ बाजार को वैश्विक स्तर पर कई हेडविंड्स और टेलविंड्स का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि जियोपॉलिटिकल तनाव और बढ़ती क्रूड कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चुनौतियां पैदा कर रही हैं, जो निवेशकों की धारणा पर असर डाल रही हैं।

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