देश
Sawan 3rd Somwar: तीसरे सोमवार को गूंजा हर हर महादेव, देशभर में शिवभक्तों की जबरदस्त भीड़
Sawan 3rd Somwar: सावन का महीना शुरू हो चुका है और आज सावन का तीसरा सोमवार है। यह पूरा महीना भगवान शिव को समर्पित होता है। ऐसे में आज देशभर के शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। भक्त उपवास रखकर और विशेष पूजा-अर्चना कर भगवान शिव का आशीर्वाद लेने पहुंचे हैं।
#WATCH | Varanasi, UP | Mangal Aarti being performed at Kashi Vishwanath Temple during the holy month of Shraavan.
(Source: Kashi Vishwanath Mandir) pic.twitter.com/jqD5wN4pHS
— ANI (@ANI) July 28, 2025
काशी में गूंजे हर हर महादेव के जयकारे
वाराणसी के प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर में तीसरे सोमवार की सुबह मंगल आरती के साथ शुरुआत हुई। शिवभक्तों की लंबी कतारें मंदिर के बाहर देखी गईं। प्रशासन की ओर से भक्तों पर फूलों की वर्षा की गई जिससे माहौल और भी भक्ति में डूब गया। हर ओर ‘हर हर महादेव’ की गूंज सुनाई दी।
#WATCH | Varanasi, UP | Kashi Vishwanath Temple Administration and District Administration shower flower petals on devotees lined up outside the temple.
(Source: Kashi Vishwanath Mandir) pic.twitter.com/CMk1hZLjyf
— ANI (@ANI) July 28, 2025
दिल्ली से देवघर तक शिवमंदिरों में विशेष पूजा
राजधानी दिल्ली के चांदनी चौक स्थित गौरी शंकर मंदिर में भी श्रद्धालुओं ने बड़ी श्रद्धा से पूजा अर्चना की। झारखंड के देवघर में बाबा बैद्यनाथ मंदिर में भी भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। यहाँ विशेष पूजा की गई और जलाभिषेक के लिए लंबी कतारें देखने को मिलीं।
#WATCH | Gujarat | Prayers offered at Koteshwar Mahadev Temple in Ahmedabad on the first Monday of the holy month of Shraavan. In Gujarat, Shraavan starts with Amavasya. pic.twitter.com/ak5xRqiyRk
— ANI (@ANI) July 28, 2025
उज्जैन और अयोध्या में शिव आराधना का अद्भुत नजारा
उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में आज की सुबह मंगल आरती के साथ हुई। भारी संख्या में भक्त मंदिर पहुंचे और भगवान शिव का जलाभिषेक किया। वहीं अयोध्या के क्षीरेश्वरनाथ मंदिर और नागेश्वरनाथ मंदिर में भी भक्तों ने शिवजी को गंगाजल अर्पित किया और पूजा की।
#WATCH | Ayodhya, Uttar Pradesh | Devotees offer prayers at Kshireshwar Nath temple on the third Monday of the 'saavan' month. pic.twitter.com/Px8MqoiY4g
— ANI (@ANI) July 28, 2025
राजस्थान, अहमदाबाद और हरिद्वार में भी दिखा उल्लास
राजस्थान के तारकेश्वर महादेव मंदिर और अहमदाबाद के कोटेश्वर महादेव मंदिर में भी बड़ी संख्या में भक्तों ने पूजा की। हरिद्वार के दक्षेश्वर महादेव मंदिर में भी श्रद्धालुओं ने जल चढ़ाकर शिव को प्रसन्न करने की कोशिश की। पूरे उत्तर भारत में शिवभक्ति की लहर देखने को मिल रही है।
देश
धामी और मोदी की अहम बैठक में उत्तराखंड को मिले बड़े विकास संकेत
नई दिल्ली में आज उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य के विकास कार्यों में केंद्र सरकार द्वारा दिए जा रहे सहयोग और मार्गदर्शन के लिए प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि केंद्र के सहयोग से उत्तराखंड तेजी से विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को उत्तराखंड आने का निमंत्रण भी दिया और राज्य की सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाते हुए विशेष भेंट स्वरूप मां सुरकंडा देवी की रेप्लिका, बद्री गाय का घी, विभिन्न जिलों से मंगाए गए राजमा के पांच प्रकार और शहद प्रस्तुत किए।
बुनियादी ढांचे और परियोजनाओं पर केंद्र से मिले सहयोग की सराहना
मुख्यमंत्री धामी ने केंद्र सरकार द्वारा राज्य को दी गई विभिन्न परियोजनाओं और वित्तीय सहायता के लिए प्रधानमंत्री का विशेष धन्यवाद किया। इसमें हरिद्वार कुंभ 2027 के लिए 500 करोड़ रुपये की सहायता, नदी जोड़ो परियोजना के तहत अध्ययन, राजाजी नेशनल पार्क के चौरासी कुटिया विकास के लिए 100 करोड़ रुपये की स्वीकृति शामिल है। इसके अलावा पिथौरागढ़ की नैनी सैनी हवाई पट्टी के लिए एमओयू, चारधाम यात्रा में सुरक्षित हेली सेवाओं का संचालन, ऋषिकेश में बिजली लाइनों के भूमिगतकरण, देहरादून रिंग रोड, मसूरी रोड और चम्पावत बाईपास जैसी परियोजनाएं भी शामिल हैं। इन सभी प्रयासों से राज्य में आधारभूत ढांचे को मजबूती मिल रही है और पर्यटन एवं आवागमन को गति मिल रही है।

पर्यटन, आध्यात्मिक विकास और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को राज्य में चल रही नई पहलों की जानकारी देते हुए बताया कि उत्तराखंड को आध्यात्मिक आर्थिक क्षेत्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। बेल केदार, अंजनीसैंण-टिहरी और लोहाघाट-श्यामलाताल जैसे क्षेत्रों को इस योजना के तहत चिन्हित किया गया है। शीतकालीन यात्रा के प्रारंभ होने से श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। आदि कैलास यात्रा में भी पिछले कुछ वर्षों में यात्रियों की संख्या में बड़ा इजाफा हुआ है और हेली सेवा की शुरुआत ने यात्रा को और सुगम बनाया है। इसके साथ ही रिवर राफ्टिंग, पैराग्लाइडिंग और कयाकिंग जैसी साहसिक गतिविधियों को बढ़ावा देकर पर्यटन को नई दिशा दी जा रही है। स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने के लिए ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ जैसे ब्रांडों के माध्यम से स्वरोजगार को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।
रेल कनेक्टिविटी, एक्सप्रेसवे और औद्योगिक विकास पर जोर
मुख्यमंत्री ने राज्य की कनेक्टिविटी और औद्योगिक विकास को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव प्रधानमंत्री के समक्ष रखे। इनमें दिल्ली-हल्द्वानी एक्सप्रेसवे का निर्माण, RRTS परियोजना का विस्तार ऋषिकेश और हरिद्वार तक करना, टिहरी झील में सी-प्लेन सेवा शुरू करना और टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन सहित विभिन्न रेल परियोजनाएं शामिल हैं। इसके अलावा रक्षा उपकरण निर्माण इकाइयों की स्थापना के लिए नीति समर्थन, कोटद्वार हरिद्वार और देहरादून में डिफेंस हब विकसित करने का प्रस्ताव भी रखा गया। मुख्यमंत्री ने पंतनगर एयरपोर्ट विस्तार, चिन्यालीसौड़ एयरस्ट्रिप और बनबसा लैंड पोर्ट परियोजना के विकास पर भी जोर दिया। इन सभी योजनाओं के माध्यम से राज्य की कनेक्टिविटी, व्यापार, पर्यटन और रोजगार के अवसरों में व्यापक वृद्धि की संभावना है।
देश
अक्षरधाम में 108 फीट विशाल प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा देख हर कोई रह गया हैरान
दिल्ली के विश्व प्रसिद्ध स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर में गुरुवार को एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक पल देखने को मिला जब तपोमूर्ति श्रीनीलकंठवर्णी की 108 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा विधि संपन्न की गई। यह दिव्य अनुष्ठान वैश्विक BAPS संस्था के प्रमुख महंतस्वामी महाराज के करकमलों द्वारा मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुआ। इस भव्य आयोजन में अमेरिका यूरोप अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया समेत दुनिया भर से 300 से अधिक संत और महंत शामिल हुए। पूरे परिसर में भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला और वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।
पंचधातु से बनी 108 फीट ऊंची अद्भुत प्रतिमा
यह प्रतिमा पंचधातु से निर्मित है और इसे एक ही चरण में तैयार किया गया है जो इसे और भी विशेष बनाता है। करीब एक साल की मेहनत के बाद तैयार हुई इस प्रतिमा को 8 फीट ऊंचे पृष्ठतल पर स्थापित किया गया है। इस विशाल मूर्ति के निर्माण में अक्षरधाम के शिल्पी संतों के साथ लगभग 50 कारीगरों और स्वयंसेवकों ने अपना योगदान दिया। इस प्रतिमा में भगवान स्वामीनारायण के नीलकंठवर्णी रूप की कठिन तपस्या को दर्शाया गया है जो उन्होंने पुलहाश्रम मुक्तिनाथ में एक पैर पर खड़े रहकर की थी। यह मूर्ति न केवल कला का उत्कृष्ट उदाहरण है बल्कि आध्यात्मिक तप और त्याग का जीवंत प्रतीक भी है।

नीलकंठवर्णी की तपस्या और आध्यात्मिक यात्रा का संदेश
भगवान स्वामीनारायण ने मात्र 11 वर्ष की आयु में घर परिवार त्याग कर लोक कल्याण के लिए एक लंबी आध्यात्मिक यात्रा शुरू की थी। इस दौरान उन्होंने लगभग 12 हजार किलोमीटर की यात्रा कर भारत के प्रमुख तीर्थ स्थलों जैसे बद्रीनाथ केदारनाथ कैलाश मानसरोवर कामाख्या पुरी रामेश्वरम और द्वारका का भ्रमण किया। इसी यात्रा के दौरान उन्होंने नीलकंठवर्णी नाम धारण किया। इस प्रतिमा के माध्यम से तप त्याग करुणा और मानव सेवा जैसे वैश्विक मूल्यों को जन जन तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है ताकि समाज में सकारात्मक सोच और आध्यात्मिक जागरूकता को बढ़ावा मिल सके।
विश्व शांति का संदेश और भव्य आयोजन की झलक
इस महा उत्सव की शुरुआत एक दिन पहले श्रीनीलकंठवर्णी विश्व शांति महायज्ञ के साथ हुई थी जिसमें वैदिक विधि से पूजा अर्चना की गई। महंतस्वामी महाराज ने इस अवसर पर विश्व शांति और आपसी भाईचारे की कामना की। उन्होंने वर्तमान समय में दुनिया के विभिन्न हिस्सों में चल रहे संघर्षों को समाप्त करने की प्रार्थना की और सफेद कबूतर उड़ाकर शांति का संदेश दिया। इस आयोजन ने न केवल धार्मिक बल्कि वैश्विक स्तर पर एकता और सद्भाव का संदेश दिया है। यह आयोजन आने वाले समय में आध्यात्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक पहचान को और मजबूत करेगा।
देश
अक्षरधाम में 108 फीट विशाल प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा, दुनिया देखेगी ऐतिहासिक क्षण
दिल्ली का स्वामीनारायण अक्षरधाम एक बार फिर इतिहास रचने जा रहा है। गुरुवार को यहां तपोमूर्ति श्रीनीलकंठवर्णी की 108 फीट ऊंची विशाल प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी। यह आयोजन वैश्विक BAPS संस्था के प्रमुख ब्रह्मस्वरूप महंतस्वामी महाराज के सान्निध्य में होगा। पंचधातु से निर्मित यह प्रतिमा अपनी तरह की दुनिया की पहली ऐसी विशाल मूर्ति है जो भगवान के कठिन तप को दर्शाते हुए एक चरण पर खड़ी है। इस ऐतिहासिक आयोजन को लेकर तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं और देश-विदेश से सैकड़ों संत और श्रद्धालु इसमें शामिल होने पहुंच रहे हैं।
विश्वभर से संतों का जुटान और भव्य आयोजन
इस विशेष अवसर पर यूरोप, अमेरिका, अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया सहित दुनियाभर से 300 से अधिक संत और महंत दिल्ली पहुंचे हैं। ब्रह्मस्वरूप महंतस्वामी महाराज 19 मार्च को ही दिल्ली पहुंच गए थे। इसके बाद 21 मार्च को उनके स्वागत में भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। 22 मार्च को पंचकुला और कुरुक्षेत्र में नए BAPS मंदिरों की मूर्ति प्रतिष्ठा भी संपन्न हुई। इसी दौरान संतों और भक्तों ने फूलों की होली का उत्सव मनाया। 23 मार्च को पेरिस मंदिर में स्थापित होने वाली मूर्ति का पूजन भी किया गया। इन सभी आयोजनों ने इस महोत्सव को और भी भव्य बना दिया है।

श्रीनीलकंठवर्णी का तप और आध्यात्मिक यात्रा
भगवान स्वामीनारायण ने मात्र 11 वर्ष की आयु में घर छोड़कर सात वर्षों तक पूरे भारत में कठिन तप और यात्रा की थी। इस दौरान उन्होंने 12 हजार किलोमीटर से अधिक की पदयात्रा की और हिमालय, बद्रीनाथ, केदारनाथ, कैलाश मानसरोवर, मुक्तिनाथ, कामाख्या, रामेश्वरम, पुरी, नासिक, पंढरपुर और द्वारका जैसे प्रमुख तीर्थों का भ्रमण किया। इस आध्यात्मिक यात्रा के दौरान उन्होंने ‘नीलकंठ वर्णी’ नाम धारण किया। उनकी तपस्या, त्याग और सेवा का यह स्वरूप आज भी लोगों को प्रेरित करता है और यही भाव इस प्रतिमा के माध्यम से जीवंत किया गया है।
विश्व शांति का संदेश और प्रतिमा की विशेषता
इस 108 फीट ऊंची प्रतिमा को 8 फीट ऊंचे आधार पर स्थापित किया गया है और इसे बनाने में लगभग एक वर्ष का समय लगा। पंचधातु से निर्मित इस प्रतिमा में कांस्य धातु का विशेष उपयोग किया गया है। करीब 50 कारीगरों और संतों ने मिलकर इसे तैयार किया है। यह प्रतिमा पुलहाश्रम में नीलकंठवर्णी द्वारा एक पैर पर खड़े होकर की गई कठिन तपस्या का प्रतीक है। महोत्सव की शुरुआत विश्व शांति महायज्ञ से हुई जिसमें महंतस्वामी महाराज ने वैश्विक एकता और शांति की कामना की। सफेद कबूतर उड़ाकर उन्होंने दुनिया में सद्भाव और मैत्री का संदेश दिया। गुरुवार सुबह 6 बजे से मुख्य प्राण-प्रतिष्ठा विधि शुरू होगी और इसके बाद इसका भव्य लोकार्पण किया जाएगा।
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