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RBI MPC सदस्य राम सिंह का बयान: इस समय रेपो रेट कट करना अर्थव्यवस्था के लिए जोखिमपूर्ण और अनावश्यक
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) के बाहरी सदस्य राम सिंह का मानना है कि इस समय अतिरिक्त ब्याज दर में कटौती करना जोखिम भरा हो सकता है। उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति में यह आवश्यक नहीं है। राम सिंह ने इंटरव्यू में बताया कि मौद्रिक और राजकोषीय उपायों का प्रभाव अभी भी जारी है और बैंक और वित्तीय संस्थान अभी धीरे-धीरे रेपो दर कटौती के लाभों को ग्राहकों तक पहुंचा रहे हैं।
नीति दर स्थिर रखने का निर्णय
राम सिंह ने 1 अक्टूबर को MPC की बैठक में नीति दर को स्थिर रखने के पक्ष में मतदान किया। हालांकि, उन्होंने नीति रुख को ‘सहायक’ से ‘तटस्थ’ में बदलने का समर्थन किया। उनका कहना है कि नाममात्र और वास्तविक GDP वृद्धि दोनों पर ध्यान देना जरूरी है क्योंकि ये अलग-अलग विश्लेषणात्मक उद्देश्यों के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कम मुद्रास्फीति व्यवसायों के लिए अच्छी नहीं है क्योंकि इसका असर निवेश और रोजगार निर्णयों पर पड़ता है।
मौद्रिक उपायों का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
राम सिंह ने कहा कि इस वर्ष 1% रेपो दर कटौती का प्रभाव अभी पूरी तरह से महसूस नहीं हुआ है। इसलिए, वर्तमान स्थिति में अतिरिक्त कटौती अर्थव्यवस्था के लिए अत्यधिक हो सकती है और जोखिम पैदा कर सकती है। उन्होंने बताया कि इस वित्तीय वर्ष की पहली दो तिमाहियों में मांग और क्रेडिट वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए कई मौद्रिक उपायों को लागू किया गया, जिसने अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दिया।
GST और निवेश में वृद्धि
MPC के बाहरी सदस्य ने कहा कि बजट में आयकर छूट के बाद, GST दर राहत जैसी कई नीतियों का निवेश और मांग पर सकारात्मक प्रभाव दिखाई दे रहा है। उन्होंने जोर दिया कि अब मौजूदा उपायों को सिस्टम में काम करने देना चाहिए और इस समय नई नीति दर कटौती की कोई आवश्यकता नहीं है। राम सिंह का कहना है कि मौजूदा नीतियाँ प्रभावी साबित हो रही हैं और उन्हें पूरा असर दिखाने का समय दिया जाना चाहिए।
भविष्य की राह और वैश्विक स्थिति
राम सिंह ने यह भी उल्लेख किया कि उच्च अमेरिकी टैरिफ के मुद्दे पर अधिक स्पष्टता आने की उम्मीद है। यह वैश्विक व्यापार और आर्थिक वातावरण पर असर डाल सकता है। इस समय, भारतीय अर्थव्यवस्था को मौजूदा नीतिगत उपायों के माध्यम से स्थिरता और वृद्धि के लिए सही दिशा में रखा गया है। उन्होंने संकेत दिया कि RBI को अब तत्काल रेपो दर में कटौती करने की आवश्यकता नहीं है।