भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने बुधवार को कहा कि हर पूर्वानुमान में त्रुटि की संभावना रहती है, लेकिन केंद्रीय बैंक के महंगाई पूर्वानुमान में कोई “सिस्टमिक बायस” नहीं है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि RBI अपने महंगाई पूर्वानुमान तैयार करने के लिए विभिन्न मॉडल्स और विशेषज्ञों की सलाह का उपयोग करता है। गुप्ता ने कहा कि कभी-कभी पूर्वानुमान सटीक नहीं होते, लेकिन यह केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक “वैश्विक घटना” है।
महंगाई और वैश्विक परिप्रेक्ष्य
कुछ लोगों की चिंताओं के बीच, गुप्ता ने बताया कि RBI की महंगाई की भविष्यवाणियों में सटीकता सुनिश्चित करने के लिए ऐतिहासिक पैटर्न, सर्वेक्षण, विशेषज्ञ सलाह और मंत्रालयों के साथ परामर्श का उपयोग किया जाता है। उन्होंने कहा कि महंगाई पूर्वानुमान पर उठ रहे सवालों का कारण यह मानना है कि आंकड़े अधिक दिखाए जा रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि इसी वजह से RBI ने हाल के महीनों में नीतिगत दरों में और कटौती नहीं की। डिप्टी गवर्नर ने यह भी बताया कि अन्य देशों में भी इस तरह की त्रुटियां सामान्य हैं।
बैलेंस ऑफ पेमेंट डेटा और वैश्विक व्यापार
डिप्टी गवर्नर ने यह भी कहा कि RBI बैलेंस ऑफ पेमेंट (BOP) डेटा को मासिक आधार पर जारी करने पर विचार कर रहा है। वर्तमान में यह डेटा तिमाही आधार पर जारी किया जाता है। उन्होंने कहा कि यह कदम वैश्विक व्यापार नीतियों में महत्वपूर्ण बदलावों के बीच लिया जा रहा है। बैलेंस ऑफ पेमेंट डेटा देश की बाहरी स्थिति का संकेत देता है और इसके मासिक अपडेट से नीति निर्माण और आर्थिक विश्लेषण में सुधार होगा।
मीडिया आलोचना और CPI सुधार
मीडिया में महंगाई पूर्वानुमान के बारे में आलोचना के संदर्भ में गुप्ता ने कहा कि मीडिया लेख पढ़ना “मज़ेदार” होता है, लेकिन RBI इन दृष्टिकोणों को गंभीरता से लेता है। उन्होंने कहा कि हर पूर्वानुमान में त्रुटि की संभावना रहती है और कोई भी पूर्वानुमान हमेशा सही नहीं होता। उन्होंने यह भी बताया कि सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा आने वाले समय में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) में संशोधन RBI के लिए उपयोगी साबित होगा। यह सुधार महंगाई की वास्तविक स्थिति को बेहतर ढंग से प्रतिबिंबित करेगा और नीति निर्णयों में सहायक होगा।