देश
लंदन में Mamata Banerjee के खिलाफ विरोध प्रदर्शन टाटा नैनो और महिला अपराधों पर सवाल!
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने oxford university के केलॉग कॉलेज में छात्रों और शिक्षकों को संबोधित किया। उन्होंने राष्ट्रीय एकता महिला सशक्तिकरण और बंगाल सरकार की उपलब्धियों पर बात की। Mamata ने कहा कि वह मरने से पहले देश को एकजुट देखना चाहती हैं।
Mamata के भाषण के दौरान विरोध प्रदर्शन
भाषण के दौरान Mamata Banerjee को विरोध का सामना भी करना पड़ा। एक व्यक्ति ने उनसे बंगाल से टाटा के नैनो प्रोजेक्ट के बाहर जाने पर सवाल किया। Mamata ने इसे गलत बताते हुए कहा कि टाटा और कॉग्निजेंट अभी भी बंगाल में काम कर रहे हैं। उन्होंने माहौल हल्का करने के लिए सवाल पूछने वाले को मिठाई देने की बात कही।
West Bengal Chief Minister Mamata Banerjee has a problem with India becoming the world’s largest economy… This is truly shameful. She is a disgrace to the constitutional office she holds. Who behaves like this on foreign soil? pic.twitter.com/XupCVb4C2i
— Amit Malviya (@amitmalviya) March 27, 2025
कोलकाता मेडिकल कॉलेज मामले पर जवाब
एक अन्य दर्शक ने कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में एक महिला डॉक्टर के बलात्कार और हत्या का मुद्दा उठाया। Mamata ने इसे राजनीति से जोड़ने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि यह मामला केंद्र सरकार के अधीन है और कोर्ट में चल रहा है।
BJP का Mamata पर हमला
भाजपा नेता अमित मालवीय ने इस मुद्दे पर Mamata Banerjee पर निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि Mamata Banerjee को भारत का सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना पसंद नहीं है। उन्होंने Mamata को पश्चिम बंगाल के लिए कलंक बताया और लंदन में उनके खिलाफ प्रदर्शन को जायज़ ठहराया।
Bengali Hindus confront West Bengal Chief Minister Mamata Banerjee at Kellogg College in London, raising angry slogans calling her out for the rape and murder of the lady doctor at RG Kar, crimes against women in Sandeshkhali, the genocide of Hindus, and widespread corruption… pic.twitter.com/eT6JlOWYyZ
— Amit Malviya (@amitmalviya) March 27, 2025
कांग्रेस और TMC का बचाव
TMC सांसद सौगत राय ने Mamata के विरोध की निंदा करते हुए कहा कि यूनिवर्सिटी प्रशासन और इंग्लैंड पुलिस को इस पर कार्रवाई करनी चाहिए। कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने कहा कि किसी भी नेता का विदेश में विरोध नहीं होना चाहिए क्योंकि इससे भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि धूमिल होती है।
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Supreme Court में कपिल सिब्बल को जज की फटकार, ममता बनर्जी की याचिका पर कड़ी टिप्पणी
पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म I-PAC के ऑफिस और उसके को-फाउंडर प्रतीक जैन के घर पर हुई रेड के मामले की सुनवाई के दौरान Supreme Court के जजों ने सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल को फटकार लगाई। कपिल सिब्बल पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का पक्ष रखने कोर्ट में पेश हुए थे। कोर्ट ने उन्हें साफ शब्दों में कहा कि वह जज के मुंह में शब्द न डालें और यह न बताएं कि उन्हें क्या मानना है और क्या नहीं। यह फटकार तब आई जब कपिल सिब्बल ने हाईकोर्ट की सुनवाई को लेकर अपनी असहमति जताई और कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाए।
ईडी की याचिका पर सुनवाई और सीबीआई जांच की मांग
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट प्रवर्तन निदेशालय (ED) की याचिका पर सुनवाई कर रहा है। ED की याचिका में आरोप लगाया गया है कि रेड के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पुलिस अफसरों ने कार्रवाई में दखल दिया। इसके साथ ही ED ने इस मामले में सीबीआई जांच की भी मांग की है। इससे पहले कलकत्ता हाईकोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें पार्टी के राजनीतिक डेटा को गोपनीय रखने की मांग की गई थी। इस फैसले पर कपिल सिब्बल ने आपत्ति जताई और कहा कि हाईकोर्ट को इस मामले की सुनवाई करनी चाहिए।
हाईकोर्ट के रवैये पर सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी
Supreme Court की बेंच, जिसमें जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस विपुल पंचौली शामिल हैं, ने हाईकोर्ट के रवैये को लेकर गहरी नाराजगी जताई। बेंच ने कहा कि वे हाईकोर्ट के व्यवहार से बेहद परेशान हैं। जब कपिल सिब्बल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को यह मानना होगा कि हाईकोर्ट न्याय प्रदान करने में असमर्थ है, तो बेंच ने कड़े लहजे में जवाब दिया, “आप मेरे मुंह में शब्द नहीं डाल सकते। हम तय करेंगे कि हमें क्या मानना है और क्या नहीं।” इस बात से स्पष्ट हुआ कि सुप्रीम कोर्ट ने केस की गंभीरता को समझते हुए खुद अपना रुख साफ कर दिया है।
हाईकोर्ट में सुनवाई और ED के तर्क
कपिल सिब्बल ने यह भी बताया कि हाईकोर्ट ने याचिका की सुनवाई शुरू कर दी है और उनका मानना है कि हाईकोर्ट को अपना फैसला सुनाना चाहिए, जिसके बाद वे अपील कर सकेंगे। वहीं, सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट को बताया कि हाईकोर्ट ने कल सुनवाई टाल दी थी क्योंकि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में पहले से लंबित था। सुनवाई के दौरान ED की तरफ से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने भी हाईकोर्ट से सुनवाई टालने का अनुरोध किया था। उन्होंने कहा कि ऐसी ही याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और हाईकोर्ट ने भी इस पर सहमति जताई थी। हाईकोर्ट ने टीएमसी की याचिका को खारिज करते हुए यह भी कहा था कि ED ने अपने पंचनामे में कहा है कि उनके पास कोई दस्तावेज नहीं है और ममता बनर्जी ने रेड साइट से दस्तावेज अपने साथ ले लिए थे।
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