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Karnataka Congress में सत्ता संघर्ष! सिद्धारमैया ने पार्टी हाई कमांड से मांगी स्पष्टता, DK शिवकुमार ने छुपाया रहस्य

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Karnataka Congress में नेतृत्व को लेकर संकट गहराता जा रहा है। मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने पार्टी के उच्च नेतृत्व से सार्वजनिक रूप से कहा कि “इस उलझन को समाप्त किया जाए।” वहीं, उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने “पाँच से छह वरिष्ठ नेताओं के बीच शक्ति-साझा करने के गुप्त समझौते” की पुष्टि की है, लेकिन उन्होंने विस्तार से जानकारी देने से इनकार किया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे का समाधान केवल सोनिया गांधी और राहुल गांधी से चर्चा के बाद ही होगा।

शक्ति-साझा समझौता और विवाद का कारण

शिवकुमार ने स्वीकार किया कि मुख्यमंत्री पद को लेकर कुछ नेताओं के बीच मई 2023 में खड़गे के निवास पर एक गुप्त समझौता हुआ था, जिसके तहत सिद्दारमैया पहले ढाई साल और शिवकुमार शेष अवधि में मुख्यमंत्री बने रहते। हालांकि, सिद्दारमैया ने हमेशा कहा कि “कांग्रेस सरकार पूरे पांच साल पूरी करेगी।” 22 नवंबर को खड़गे के साथ बैठक के बाद उनका रुख नरम हुआ और अब वे कहते हैं कि “इस उलझन को समाप्त करने का निर्णय हाई कमान करेगी।”

दोनों गुटों के रुख और दबाव

शिवकुमार के समर्थक जोर दे रहे हैं कि यह समझौता मान्य होना चाहिए और इसे नज़रअंदाज करना कांग्रेस की विश्वसनीयता और संगठनात्मक नेता शिवकुमार की निष्ठा को कमजोर करेगा। वहीं, सिद्दारमैया के समर्थक किसी भी समझौते से इनकार करते हैं और उनके 2023 में कांग्रेस विधायक दल के नेता के रूप में निर्वाचित होने को प्रमाण मानते हैं। डीके शिवकुमार ने सिद्दारमैया को वरिष्ठ नेता और पार्टी का बड़ा संसाधन बताया और कहा कि उनका फोकस आगामी बजट और 2028-2029 के चुनावों पर होना चाहिए।

हाई कमान पर जिम्मेदारी और विपक्ष का दबाव

अधिकारियों और कई विधायकों के दिल्ली पहुंचने के बाद सिद्दारमैया ने कहा, “आने दो, देखें क्या कहते हैं।” कांग्रेस सूत्र बताते हैं कि उपमुख्यमंत्री चाहते हैं कि नेतृत्व विवाद किसी कैबिनेट फेरबदल से पहले सुलझ जाए। दूसरी ओर, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने कहा कि कर्नाटक को “केयरटेकर या विदाई लेने वाले मुख्यमंत्री” की जरूरत नहीं है और कांग्रेस को सत्र शुरू होने से पहले इस नेतृत्व संकट का समाधान करना चाहिए। अब दोनों गुट खुले तौर पर उलझन को स्वीकार कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदारी सीधे हाई कमान पर डाल रहे हैं। अंतिम निर्णय कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व – खड़गे, सोनिया गांधी और राहुल गांधी – द्वारा लिया जाएगा।

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