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USB Type-C पोर्ट से फोन को बनाएं मिनी लैपटॉप, पावर बैंक और स्ट्रीमिंग डिवाइस
आजकल के सभी स्मार्टफोन USB Type-C पोर्ट के साथ आते हैं। ज्यादातर लोग इस पोर्ट का इस्तेमाल केवल फोन चार्ज करने के लिए करते हैं, लेकिन यह पोर्ट इससे कहीं ज्यादा काम आता है। USB Type-C न केवल फास्ट चार्जिंग का समर्थन करता है बल्कि तेज़ डेटा ट्रांसफर भी करता है। इस पोर्ट की मदद से आप अपने फोन को कई अन्य कार्यों के लिए भी इस्तेमाल कर सकते हैं। चलिए जानते हैं कि कैसे आप अपने स्मार्टफोन के USB Type-C पोर्ट का उपयोग पांच रोचक और उपयोगी तरीकों से कर सकते हैं।
अपने फोन को स्टोरेज डिवाइस या पावर बैंक में बदलें
USB Type-C OTG फीचर की मदद से आप अपने स्मार्टफोन को एक पावरफुल स्टोरेज डिवाइस की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं। इस पोर्ट के जरिए आप फोन को लैपटॉप या किसी अन्य डिवाइस से कनेक्ट करके डेटा ट्रांसफर कर सकते हैं। चाहे आप अपने फोन से लैपटॉप में डेटा भेजना चाहें या लैपटॉप से फोन में डेटा लाना चाहते हों, यह पोर्ट बेहद काम का है। इसके अलावा, आजकल के ज्यादातर स्मार्टफोन रिवर्स चार्जिंग सपोर्ट के साथ आते हैं। इसका मतलब है कि आप अपने फोन के USB Type-C पोर्ट के जरिए किसी अन्य फोन, ईयरबड्स, नेकबैंड या अन्य डिवाइस को चार्ज कर सकते हैं। केवल Type-C से Type-C केबल की जरूरत होगी। आप आपात स्थिति में अपने फोन को पावर बैंक की तरह भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
स्मार्टफोन को स्ट्रीमिंग और मिनी लैपटॉप में बदलें
USB Type-C पोर्ट की मदद से आप अपने फोन को एक स्ट्रीमिंग डिवाइस से कनेक्ट कर सकते हैं। इसके जरिए आप अपने फोन की स्क्रीन का कंटेंट टीवी या बड़ी स्क्रीन पर स्ट्रीम कर सकते हैं। यह फीचर फिल्म देखने या प्रेजेंटेशन के लिए बहुत उपयोगी है। इसके अलावा, Type-C पोर्ट की मदद से आप कीबोर्ड और माउस कनेक्ट करके अपने फोन को मिनी लैपटॉप की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं। खासकर सैमसंग फोन में Dex फीचर है, जो फोन की इंटरफेस को पीसी जैसा बना देता है। इसके जरिए आप ऑफिस का काम, डॉक्यूमेंट एडिटिंग या ब्राउज़िंग बड़ी स्क्रीन और कीबोर्ड-माउस के साथ कर सकते हैं।
ऑडियो-विजुअल उपकरणों के लिए पोर्ट का उपयोग
USB Type-C पोर्ट का उपयोग ऑडियो और वीडियो उपकरणों को कनेक्ट करने के लिए भी किया जा सकता है। आप इस पोर्ट के जरिए अपने Type-C वाले ईयरफोन या हेडफोन कनेक्ट कर सकते हैं। इसके अलावा, HDMI हब की मदद से आप अपने फोन को प्रोजेक्टर या बड़े डिस्प्ले से कनेक्ट कर सकते हैं और फोन का कंटेंट बड़ी स्क्रीन पर देख सकते हैं। यही नहीं, आप म्यूजिक सिस्टम को भी अपने फोन के USB Type-C पोर्ट से जोड़ सकते हैं, जिससे फोन की ऑडियो क्वालिटी बेहतर अनुभव के लिए इस्तेमाल की जा सकती है।
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Netflix Playground लॉन्च बच्चों के लिए नया ऐप क्या बदलेगा डिजिटल एंटरटेनमेंट का तरीका
Netflix ने बच्चों के लिए कंटेंट की दुनिया में एक बड़ा कदम उठाते हुए नया ऐप ‘Netflix Playground’ लॉन्च किया है। यह ऐप खासतौर पर 8 साल तक और उससे कम उम्र के बच्चों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। कंपनी का उद्देश्य एक ऐसा सुरक्षित और मनोरंजक डिजिटल स्पेस तैयार करना है जहां बच्चे बिना किसी चिंता के सीख सकें और खेल सकें। इस ऐप के जरिए नेटफ्लिक्स ने पारंपरिक वीडियो स्ट्रीमिंग से आगे बढ़कर इंटरैक्टिव एक्सपीरियंस की दिशा में कदम बढ़ाया है, जिससे बच्चों को केवल देखने नहीं बल्कि खेलने और सीखने का मौका मिलेगा।
इंटरैक्टिव गेम्स और किड्स फ्रेंडली कंटेंट की भरमार
Netflix Playground एक स्टैंडअलोन ऐप के रूप में काम करेगा, जिसमें यूजर अपने मौजूदा नेटफ्लिक्स अकाउंट से लॉग इन कर सकते हैं। इस ऐप में बच्चों के लिए खास क्यूरेटेड सेक्शन होगा जिसमें गेम्स और एक्टिविटीज शामिल होंगी। इसमें लोकप्रिय कैरेक्टर्स जैसे Peppa Pig और Elmo जैसे किरदारों के साथ खेलने का अनुभव मिलेगा। इसके अलावा बच्चों को पजल्स, मेमोरी गेम्स, कलरिंग और क्रिएटिव टास्क जैसे कई विकल्प मिलेंगे। खास बात यह है कि यह ऐप ऑफलाइन भी काम करेगा, जिससे बच्चे बिना इंटरनेट के भी इसका उपयोग कर सकेंगे।

एड-फ्री और सुरक्षित अनुभव पर जोर
नेटफ्लिक्स ने इस ऐप को पूरी तरह से एड-फ्री बनाया है और इसमें किसी तरह की इन-ऐप खरीदारी भी शामिल नहीं होगी। इसका मतलब है कि बच्चे बिना किसी बाधा के सुरक्षित तरीके से गेम्स और एक्टिविटीज का आनंद ले सकेंगे। कंपनी का दावा है कि यह ऐप बच्चों के लिए एक सुरक्षित गेमिंग जोन की तरह काम करेगा, जहां उन्हें केवल उम्र के अनुसार ही कंटेंट दिखाया जाएगा। इस प्लेटफॉर्म का उद्देश्य बच्चों के लिए एंटरटेनमेंट, लर्निंग और क्रिएटिविटी का संतुलन बनाना है, जिससे उनका बौद्धिक विकास भी मजेदार तरीके से हो सके।
पैरेंटल कंट्रोल से मिलेगा पूरा नियंत्रण
इस ऐप की एक और खासियत इसका मजबूत पैरेंटल कंट्रोल फीचर है। माता-पिता इस ऐप के जरिए बच्चों की गतिविधियों पर नजर रख सकेंगे और यह तय कर सकेंगे कि बच्चा क्या देखे और क्या खेले। इसमें मैच्योरिटी फिल्टर, टाइटल ब्लॉकिंग और व्यूइंग हिस्ट्री जैसे फीचर्स शामिल हैं। इससे पेरेंट्स को यह भरोसा मिलेगा कि उनका बच्चा सुरक्षित कंटेंट ही एक्सेस कर रहा है। कुल मिलाकर Netflix Playground बच्चों के लिए एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनकर उभर रहा है जो उन्हें सुरक्षित, इंटरैक्टिव और शिक्षाप्रद अनुभव प्रदान करेगा।
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एपल किताब में बड़ा दावा माइक्रोसॉफ्ट बातचीत ने बदल दी स्टीव जॉब्स की सोच
Apple Inc. के 50 साल पूरे होने पर प्रकाशित नई किताब में एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। इस किताब में बताया गया है कि कैसे कंपनी के सह संस्थापक Steve Jobs ने गुस्से और प्रतिस्पर्धा की भावना में आकर iPad बनाने का फैसला लिया। यह घटना टेक दुनिया के इतिहास में एक अहम मोड़ के रूप में देखी जा रही है। किताब के अनुसार एक साधारण बातचीत ने जॉब्स के विचारों को पूरी तरह बदल दिया और उन्होंने एक ऐसा प्रोडक्ट बनाने की ठानी जो भविष्य की दिशा तय कर सके।
माइक्रोसॉफ्ट इंजीनियर से बातचीत बनी वजह
किताब में उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2005 में एक पार्टी के दौरान Microsoft के एक इंजीनियर ने बार बार स्टीव जॉब्स को टैबलेट के भविष्य को लेकर समझाने की कोशिश की। यह पहली बार नहीं था जब जॉब्स ने इस तरह की बात सुनी थी। लेकिन उस समय यह चर्चा उन्हें बार बार परेशान कर रही थी। घर लौटने के बाद उन्होंने मन बना लिया कि अब वे खुद एक ऐसा टैबलेट बनाएंगे जो बाकी सभी से अलग और बेहतर हो। यही गुस्सा और चुनौती आगे चलकर एक बड़े इनोवेशन में बदल गया।

iPad के निर्माण का निर्णय और लॉन्च
इसके बाद स्टीव जॉब्स ने अपनी टीम के साथ एक बैठक की और स्पष्ट निर्देश दिए कि एक नया टैबलेट तैयार किया जाए जो तकनीक की दुनिया में बदलाव लाए। उन्होंने यह भी कहा कि इस डिवाइस में स्टाइलस की आवश्यकता नहीं होगी क्योंकि उपयोगकर्ता अपनी उंगलियों से ही इसे संचालित कर सकते हैं। इस सोच ने iPad को एक अलग पहचान दी। अंततः 27 जनवरी 2010 को iPad लॉन्च किया गया जिसे जॉब्स ने मैजिकल और रिवोल्यूशनरी डिवाइस बताया। यह डिवाइस स्मार्टफोन और लैपटॉप के बीच एक नई श्रेणी के रूप में उभरा और पूरी टेक इंडस्ट्री में एक नया ट्रेंड स्थापित किया।
बिल गेट्स का रिएक्शन और दोनों कंपनियों का रिश्ता
Bill Gates ने iPad लॉन्च के बाद इसे उतना क्रांतिकारी नहीं माना। उन्होंने कहा कि टैबलेट में टच के साथ कीबोर्ड और पेन का संतुलन ज्यादा उपयोगी हो सकता है। हालांकि Apple Inc. और Microsoft के बीच संबंध हमेशा प्रतिस्पर्धा और सहयोग दोनों का मिश्रण रहा है। 1997 में माइक्रोसॉफ्ट ने एपल में निवेश कर उसे आर्थिक संकट से बाहर निकलने में मदद की थी। इसके बावजूद दोनों कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा लगातार जारी रही और इसी प्रतिस्पर्धा ने टेक दुनिया को कई बड़े और महत्वपूर्ण इनोवेशन दिए।
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