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Post Office: बैंक FD छोड़ो! पोस्ट ऑफिस स्कीम से कम रिस्क में ज्यादा रिटर्न पाओ

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Post Office: बैंक FD छोड़ो! पोस्ट ऑफिस स्कीम से कम रिस्क में ज्यादा रिटर्न पाओ

Post Office: आज के समय में लगभग हर व्यक्ति बचत के महत्व को समझ चुका है। यही वजह है कि लोग अपनी ज़रूरतों और भविष्य की योजनाओं को देखते हुए अलग-अलग जगहों पर निवेश कर रहे हैं। परंतु एक सवाल सबके मन में रहता है कि कहां निवेश करें जिससे पैसा सुरक्षित भी रहे और अच्छा रिटर्न भी मिले। कुछ लोगों को शेयर बाजार से डर लगता है तो कुछ बैंक की गिरती ब्याज दरों से परेशान हैं। ऐसे में पोस्ट ऑफिस की सेविंग स्कीमें एक बेहतरीन विकल्प बनकर उभरती हैं जो न सिर्फ पैसा सुरक्षित रखती हैं बल्कि स्थिर और आकर्षक ब्याज दर भी देती हैं।

बुजुर्गों के लिए वरदान है सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम

अगर आप रिटायरमेंट के बाद नियमित आय और सुरक्षित निवेश की योजना तलाश रहे हैं तो सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम (SCSS) आपके लिए परफेक्ट है। इसमें 7.4% तक का ब्याज मिलता है जो कि बैंक FD से कहीं ज्यादा है। इस योजना की सबसे खास बात यह है कि इसमें टैक्स में भी छूट मिलती है, सेक्शन 80C के तहत। इसमें अधिकतम निवेश सीमा तय होती है और 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोग ही इसमें निवेश कर सकते हैं। यह योजना खासतौर पर बुजुर्गों के लिए बनाई गई है ताकि वे अपने बुढ़ापे में आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर रह सकें।

Post Office: बैंक FD छोड़ो! पोस्ट ऑफिस स्कीम से कम रिस्क में ज्यादा रिटर्न पाओ

 टैक्स बचाने और गारंटीड रिटर्न के लिए NSC है बेहतरीन

नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट (NSC) उन लोगों के लिए शानदार विकल्प है जो जोखिम से बचना चाहते हैं और टैक्स भी बचाना चाहते हैं। इसमें पांच साल की लॉक-इन अवधि होती है और अभी यह योजना करीब 7.7% का ब्याज दे रही है। इसमें भी 80C के तहत टैक्स में छूट मिलती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें मिलने वाला रिटर्न पूरी तरह गारंटीड होता है और यह मार्केट की उथल-पुथल से बिल्कुल सुरक्षित रहता है।

बेटी की पढ़ाई और शादी के लिए Sukanya Yojana सबसे खास

सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) विशेष रूप से बेटियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए शुरू की गई है। यह योजना उन माता-पिता के लिए बहुत ही लाभकारी है जो अपनी बेटी की पढ़ाई और शादी के लिए पहले से फंड बनाना चाहते हैं। इसमें इस समय 8.2% का आकर्षक ब्याज मिल रहा है, जो किसी भी सेविंग स्कीम से ज्यादा है। इसके अलावा इसमें भी टैक्स छूट मिलती है और यह योजना लॉन्ग टर्म निवेश के लिए सबसे सुरक्षित और असरदार साबित होती है।

पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉजिट: बैंक FD से ज्यादा रिटर्न

अगर आप बैंक FD के विकल्प की तलाश में हैं तो पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉजिट स्कीम एक बेहतर विकल्प है। इसमें 1 से 5 साल तक की मियाद के लिए निवेश किया जा सकता है। एक साल के डिपॉजिट पर 6.9% और 5 साल के डिपॉजिट पर 7.5% ब्याज मिल रहा है। यह स्कीम भी पूरी तरह सरकार द्वारा समर्थित है, इसलिए इसमें जोखिम न के बराबर है। जो लोग मध्यम अवधि में सुरक्षित निवेश चाहते हैं, उनके लिए यह योजना बिल्कुल सही है।

 

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IDBI बैंक के शेयरों में सोमवार को रिकॉर्ड गिरावट, निजीकरण प्रक्रिया ने निवेशकों को किया चिंतित

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IDBI बैंक के शेयरों में सोमवार को रिकॉर्ड गिरावट, निजीकरण प्रक्रिया ने निवेशकों को किया चिंतित

मिडिल ईस्ट में जारी तनावों के बीच भारतीय शेयर बाजार ने सप्ताह के पहले कारोबारी दिन मजबूत उछाल दिखाया, जब BSE सेंसेक्स करीब 400 अंक बढ़ा। लेकिन इस रैली के बावजूद IDBI बैंक के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई। सोमवार के कारोबारी सत्र में बैंक के शेयरों की कीमत में इंट्राडे स्तर पर करीब 16 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई। विशेषज्ञों के अनुसार इस गिरावट की मुख्य वजह IDBI बैंक के लंबे समय से प्रतीक्षित निजीकरण प्रक्रिया से जुड़ी रिपोर्टों के कारण निवेशकों में पैदा हुई अनिश्चितता है।

निजीकरण प्रक्रिया से जुड़ी आशंकाएं

राष्ट्रीय स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर दोपहर 1:17 बजे IDBI बैंक के शेयर ₹77.40 यानी लगभग 16.03 प्रतिशत गिर गए। यह गिरावट इस बात की ओर संकेत है कि निवेशक निजीकरण प्रक्रिया को लेकर सावधान हैं। सरकार और LIC मिलकर IDBI बैंक में कुल 60.7 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की योजना बना रहे हैं। इस प्रक्रिया में खरीदार को बैंक में प्रबंधन नियंत्रण और बहुमत वाली हिस्सेदारी मिल जाएगी। निवेशक मानते हैं कि यदि यह प्रक्रिया पूरी होती है तो बैंक का मूल्य बढ़ेगा और संचालन में सुधार होगा, लेकिन वर्तमान स्थिति ने उन्हें असमंजस में डाल दिया है।

IDBI बैंक के शेयरों में सोमवार को रिकॉर्ड गिरावट, निजीकरण प्रक्रिया ने निवेशकों को किया चिंतित

बिडिंग प्रक्रिया में निवेशकों की चिंता

रिपोर्टों के अनुसार संभावित खरीदारों द्वारा प्रस्तुत बोली सरकार द्वारा निर्धारित रिज़र्व प्राइस से कम रही। इसके परिणामस्वरूप यह आशंका बढ़ गई है कि सरकार मौजूदा बोली प्रक्रिया को रद्द कर सकती है और नए शर्तों के तहत पुनः निविदा प्रक्रिया शुरू कर सकती है। इस स्थिति ने निवेशकों के मन में अनिश्चितता पैदा कर दी है। भारी बिकवाली का दबाव इस शेयर पर देखा जा रहा है, क्योंकि निवेशक निजीकरण की प्रक्रिया का पुनर्मूल्यांकन कर रहे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह की अनिश्चितता शेयर बाजार में अस्थिरता को बढ़ावा देती है।

IDBI निजीकरण प्रक्रिया का इतिहास

IDBI बैंक के निजीकरण की प्रक्रिया 2022 में शुरू की गई थी। यह सरकार की बैंकिंग क्षेत्र में हिस्सेदारी कम करने की रणनीति का हिस्सा है। वर्तमान में Life Insurance Corporation of India बैंक में 49.24 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है, जबकि भारत सरकार की हिस्सेदारी 45.48 प्रतिशत है। निजीकरण प्रक्रिया का उद्देश्य बैंक के संचालन में सुधार करना और निवेशकों के लिए आकर्षक बनाना है। इस लंबित प्रक्रिया के कारण निवेशकों में सतत चिंता और शेयरों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।

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मेटा में संभावित छंटनी से कर्मचारी परेशान, कंपनी की भविष्य की रणनीति AI पर केंद्रित

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मेटा में संभावित छंटनी से कर्मचारी परेशान, कंपनी की भविष्य की रणनीति AI पर केंद्रित

टेक्नोलॉजी जगत की दिग्गज कंपनी मेटा प्लेटफॉर्म्स में एक बार फिर बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी की चर्चा जोर पकड़ने लगी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कंपनी अपने कुल वर्कफोर्स का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा कम कर सकती है। इसका मतलब है कि करीब 16,000 कर्मचारियों की नौकरी पर संकट मंडरा सकता है। सूत्रों का कहना है कि यह कदम मुख्य रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ते खर्च को संतुलित करने के उद्देश्य से उठाया जा सकता है।

संभावित छंटनी से कर्मचारियों में बढ़ा तनाव

कॉरपोरेट फाइलिंग के अनुसार 31 दिसंबर 2025 तक मेटा में करीब 79,000 लोग काम कर रहे थे। अगर कंपनी अपने वर्कफोर्स में 20 फीसदी की कटौती करती है, तो यह पिछले सालों की छंटनी के बाद अब तक की सबसे बड़ी होगी। हालांकि, फिलहाल यह कदम केवल संभावित माना जा रहा है और कोई आधिकारिक तारीख तय नहीं की गई है। पिछले अनुभव से कर्मचारियों में भारी तनाव और असुरक्षा की स्थिति पैदा होने की संभावना जताई जा रही है।

मेटा में संभावित छंटनी से कर्मचारी परेशान, कंपनी की भविष्य की रणनीति AI पर केंद्रित

मेटा का फोकस एआई पर: भविष्य की रणनीति

कंपनी पिछले एक साल से AI क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने में लगी हुई है। इसके लिए मेटा ने कई टॉप एआई रिसर्चर्स को अपनी सुपरइंटेलिजेंस टीम में शामिल किया है और उन्हें आकर्षक पैकेज ऑफर किए हैं। इसका उद्देश्य कंपनी को अधिक प्रभावी और तेजी से काम करने वाली टीम तैयार करना है, जो AI की मदद से बेहतर प्रोडक्टिविटी दे सके। विशेषज्ञों का कहना है कि मेटा की यह रणनीति उसके भविष्य के कारोबार और तकनीकी प्रतिस्पर्धा के लिहाज से अहम कदम है।

बड़े निवेश और दीर्घकालिक योजनाएं

मेटा कंपनी 2028 तक डेटा सेंटर निर्माण पर लगभग 600 अरब डॉलर खर्च करने की योजना बना रही है। यह निवेश कंपनी के AI और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह छंटनी और AI में निवेश कंपनी की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। हालांकि, इस बीच कर्मचारियों के लिए यह स्थिति चिंता और अनिश्चितता का समय है। आने वाले हफ्तों में मेटा की ओर से आधिकारिक बयान और अंतिम निर्णय की घोषणा का इंतजार किया जा रहा है।

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मिडिल ईस्ट संकट से भारतीय शेयर बाजार में गिरावट, विप्रो और सिप्ला पर दबाव

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मिडिल ईस्ट संकट से भारतीय शेयर बाजार में गिरावट, विप्रो और सिप्ला पर दबाव

मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध और वैश्विक अनिश्चितताओं का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। लगातार तीन दिनों से बाजार लाल निशान पर बंद हो रहे हैं। शुक्रवार को सेंसेक्स 1,470.50 अंक या 1.93 प्रतिशत गिरकर 74,563.92 अंक पर बंद हुआ, वहीं एनएसई निफ्टी 50 में 488.05 अंक या 2.06 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 23,151.10 के स्तर पर बंद हुआ। निवेशकों में चिंता बढ़ रही है और बाजार की इस अस्थिर स्थिति के बीच ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने कुछ प्रमुख कंपनियों को अपनी अंडरपरफॉर्म लिस्ट में शामिल किया है।

विप्रो: परामर्श सेवाओं में कमजोर मांग के चलते सावधानी बरतने की सलाह

ब्रोकरेज हाउस जेफरीज ने विप्रो के शेयर को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है। फर्म का मानना है कि कंपनी का शेयर मौजूदा स्तर से गिरकर करीब 180 रुपये तक जा सकता है, जो बीएसई पर पिछले बंद भाव 202.51 रुपये से लगभग 21 प्रतिशत कम है। जेफरीज के अनुसार वित्त वर्ष 2026 में विप्रो की मुख्य रेवेन्यू में लगातार दूसरे साल गिरावट आ सकती है। परामर्श सेवाओं वाले सेगमेंट में मांग कमजोर बनी हुई है और इसी वजह से कंपनी का प्रदर्शन प्रभावित हो सकता है।

मिडिल ईस्ट संकट से भारतीय शेयर बाजार में गिरावट, विप्रो और सिप्ला पर दबाव

सिप्ला: अमेरिका में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और सप्लाई समस्या से दबाव

सिप्ला के शेयर को लेकर भी जेफरीज ने सतर्क रुख अपनाया है। फर्म का कहना है कि कंपनी की अमेरिका से होने वाली कमाई पर दबाव बढ़ सकता है, क्योंकि तीन प्रमुख दवाओं में से दो को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा लैंरेओटाइड दवा की सप्लाई सहयोगी मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर से जुड़ी समस्या के कारण प्रभावित हो रही है। इन चुनौतियों की वजह से वित्त वर्ष 2027 में कंपनी का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स सालाना आधार पर लगभग 15 प्रतिशत घट सकता है। यही कारण है कि जेफरीज ने इस शेयर पर “अंडरपरफॉर्म” रेटिंग बरकरार रखी है।

हुंडई मोटर इंडिया: मांग मजबूत लेकिन प्रतिस्पर्धा चुनौती बनी

हुंडई मोटर इंडिया के शेयर को लेकर जेफरीज का अनुमान है कि इसमें तेजी की संभावना कम है। फर्म ने इसका टारगेट प्राइस लगभग 1,900 रुपये रखा है, जो पिछले बंद भाव के करीब है। हालांकि, जीएसटी में संभावित कटौती, बाजार में लिक्विडिटी की बेहतर स्थिति और सरकारी वेतन बढ़ोतरी जैसे कारणों से भारत में पैसेंजर व्हीकल की मांग मजबूत रह सकती है। लेकिन ऑटो सेक्टर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और नई वैश्विक चुनौतियां कंपनी के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं।

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