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PM Kisan Scheme: PM-KISAN की 21वीं किस्त जल्द! सरकार नवंबर के पहले हफ्ते में कर सकती है बड़ा ऐलान
PM Kisan Scheme: देशभर के किसानों के लिए फिर से राहत की खबर आने वाली है। केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों के सहयोग से किसानों के रजिस्ट्रेशन और वेरिफिकेशन का बड़ा अभियान शुरू किया है। इसका उद्देश्य किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना से जोड़ना है, जिसके तहत हर पात्र किसान को सालाना ₹6,000 की वित्तीय सहायता दी जाती है। यह राशि तीन समान किस्तों में सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है।
कब आएगी 21वीं किस्त और क्या है सस्पेंस
करीब 10 करोड़ किसान इस समय 21वीं किस्त का इंतज़ार कर रहे हैं। पहले उम्मीद की जा रही थी कि यह ₹2,000 की किस्त दिवाली से पहले आएगी। लेकिन अब रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार इसे नवंबर के पहले सप्ताह में जारी कर सकती है, यानी बिहार विधानसभा चुनावों से ठीक पहले। हालांकि, इस बारे में अभी तक केंद्र सरकार की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

केंद्रीय कृषि मंत्री की बड़ी घोषणा
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हाल ही में बताया कि जल्द ही पात्र किसानों के खातों में ₹2,000 की अगली किस्त जमा कर दी जाएगी। उन्होंने राज्यों से आग्रह किया है कि वे आधार सीडिंग, ई-केवाईसी और सत्यापन की प्रक्रिया जल्द पूरी करें ताकि भुगतान में कोई देरी न हो। उन्होंने जम्मू-कश्मीर का उदाहरण देते हुए बताया कि जिन किसानों के भूमि रिकॉर्ड अधूरे हैं, यदि राज्य सरकारें उन्हें सत्यापित कर भेजें तो वे भी इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। इसी सिलसिले में केंद्र सरकार ने 8.5 लाख किसानों के खातों में ₹171 करोड़ की राशि जमा की थी।
चुनावी आचार संहिता और किस्त का सवाल
बिहार में इस समय चुनावी आचार संहिता लागू है, जिससे सवाल उठता है कि क्या इस दौरान भुगतान किया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, नई योजनाओं की घोषणा आचार संहिता में नहीं की जा सकती, लेकिन पहले से स्वीकृत योजनाओं जैसे पीएम किसान के तहत भुगतान जारी रह सकता है। इसलिए अगर तकनीकी औपचारिकताएं पूरी हो जाती हैं तो नवंबर के पहले सप्ताह में किसानों के खातों में पैसे पहुंच सकते हैं।
किन किसानों को नहीं मिलेगा लाभ
कृषि मंत्रालय ने साफ चेतावनी दी है कि जिन किसानों ने अभी तक ई-केवाईसी, आधार लिंकिंग या बैंक विवरण अपडेट नहीं किए हैं, उन्हें अगली किस्त नहीं मिलेगी। राज्य सरकारों को निर्देश दिया गया है कि वे पात्र लाभार्थियों की सूची जल्द केंद्र को भेजें। पीएम किसान योजना फरवरी 2019 में शुरू की गई थी और आज इसके तहत 100 मिलियन से अधिक किसान लाभान्वित हो रहे हैं। यह योजना भारत के कृषि परिवारों के लिए एक स्थायी आर्थिक सहारा बन चुकी है।
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मेटा में संभावित छंटनी से कर्मचारी परेशान, कंपनी की भविष्य की रणनीति AI पर केंद्रित
टेक्नोलॉजी जगत की दिग्गज कंपनी मेटा प्लेटफॉर्म्स में एक बार फिर बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी की चर्चा जोर पकड़ने लगी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कंपनी अपने कुल वर्कफोर्स का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा कम कर सकती है। इसका मतलब है कि करीब 16,000 कर्मचारियों की नौकरी पर संकट मंडरा सकता है। सूत्रों का कहना है कि यह कदम मुख्य रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ते खर्च को संतुलित करने के उद्देश्य से उठाया जा सकता है।
संभावित छंटनी से कर्मचारियों में बढ़ा तनाव
कॉरपोरेट फाइलिंग के अनुसार 31 दिसंबर 2025 तक मेटा में करीब 79,000 लोग काम कर रहे थे। अगर कंपनी अपने वर्कफोर्स में 20 फीसदी की कटौती करती है, तो यह पिछले सालों की छंटनी के बाद अब तक की सबसे बड़ी होगी। हालांकि, फिलहाल यह कदम केवल संभावित माना जा रहा है और कोई आधिकारिक तारीख तय नहीं की गई है। पिछले अनुभव से कर्मचारियों में भारी तनाव और असुरक्षा की स्थिति पैदा होने की संभावना जताई जा रही है।

मेटा का फोकस एआई पर: भविष्य की रणनीति
कंपनी पिछले एक साल से AI क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने में लगी हुई है। इसके लिए मेटा ने कई टॉप एआई रिसर्चर्स को अपनी सुपरइंटेलिजेंस टीम में शामिल किया है और उन्हें आकर्षक पैकेज ऑफर किए हैं। इसका उद्देश्य कंपनी को अधिक प्रभावी और तेजी से काम करने वाली टीम तैयार करना है, जो AI की मदद से बेहतर प्रोडक्टिविटी दे सके। विशेषज्ञों का कहना है कि मेटा की यह रणनीति उसके भविष्य के कारोबार और तकनीकी प्रतिस्पर्धा के लिहाज से अहम कदम है।
बड़े निवेश और दीर्घकालिक योजनाएं
मेटा कंपनी 2028 तक डेटा सेंटर निर्माण पर लगभग 600 अरब डॉलर खर्च करने की योजना बना रही है। यह निवेश कंपनी के AI और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह छंटनी और AI में निवेश कंपनी की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। हालांकि, इस बीच कर्मचारियों के लिए यह स्थिति चिंता और अनिश्चितता का समय है। आने वाले हफ्तों में मेटा की ओर से आधिकारिक बयान और अंतिम निर्णय की घोषणा का इंतजार किया जा रहा है।
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मिडिल ईस्ट संकट से भारतीय शेयर बाजार में गिरावट, विप्रो और सिप्ला पर दबाव
मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध और वैश्विक अनिश्चितताओं का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। लगातार तीन दिनों से बाजार लाल निशान पर बंद हो रहे हैं। शुक्रवार को सेंसेक्स 1,470.50 अंक या 1.93 प्रतिशत गिरकर 74,563.92 अंक पर बंद हुआ, वहीं एनएसई निफ्टी 50 में 488.05 अंक या 2.06 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 23,151.10 के स्तर पर बंद हुआ। निवेशकों में चिंता बढ़ रही है और बाजार की इस अस्थिर स्थिति के बीच ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने कुछ प्रमुख कंपनियों को अपनी अंडरपरफॉर्म लिस्ट में शामिल किया है।
विप्रो: परामर्श सेवाओं में कमजोर मांग के चलते सावधानी बरतने की सलाह
ब्रोकरेज हाउस जेफरीज ने विप्रो के शेयर को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है। फर्म का मानना है कि कंपनी का शेयर मौजूदा स्तर से गिरकर करीब 180 रुपये तक जा सकता है, जो बीएसई पर पिछले बंद भाव 202.51 रुपये से लगभग 21 प्रतिशत कम है। जेफरीज के अनुसार वित्त वर्ष 2026 में विप्रो की मुख्य रेवेन्यू में लगातार दूसरे साल गिरावट आ सकती है। परामर्श सेवाओं वाले सेगमेंट में मांग कमजोर बनी हुई है और इसी वजह से कंपनी का प्रदर्शन प्रभावित हो सकता है।

सिप्ला: अमेरिका में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और सप्लाई समस्या से दबाव
सिप्ला के शेयर को लेकर भी जेफरीज ने सतर्क रुख अपनाया है। फर्म का कहना है कि कंपनी की अमेरिका से होने वाली कमाई पर दबाव बढ़ सकता है, क्योंकि तीन प्रमुख दवाओं में से दो को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा लैंरेओटाइड दवा की सप्लाई सहयोगी मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर से जुड़ी समस्या के कारण प्रभावित हो रही है। इन चुनौतियों की वजह से वित्त वर्ष 2027 में कंपनी का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स सालाना आधार पर लगभग 15 प्रतिशत घट सकता है। यही कारण है कि जेफरीज ने इस शेयर पर “अंडरपरफॉर्म” रेटिंग बरकरार रखी है।
हुंडई मोटर इंडिया: मांग मजबूत लेकिन प्रतिस्पर्धा चुनौती बनी
हुंडई मोटर इंडिया के शेयर को लेकर जेफरीज का अनुमान है कि इसमें तेजी की संभावना कम है। फर्म ने इसका टारगेट प्राइस लगभग 1,900 रुपये रखा है, जो पिछले बंद भाव के करीब है। हालांकि, जीएसटी में संभावित कटौती, बाजार में लिक्विडिटी की बेहतर स्थिति और सरकारी वेतन बढ़ोतरी जैसे कारणों से भारत में पैसेंजर व्हीकल की मांग मजबूत रह सकती है। लेकिन ऑटो सेक्टर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और नई वैश्विक चुनौतियां कंपनी के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं।
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मिडिल ईस्ट संघर्ष के बीच चीन का बड़ा कदम, गैसोलीन और डीजल की विदेश शिपमेंट रोकी
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और तेल आपूर्ति की अनिश्चितता के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ गई है। कई देशों में तेल और गैस की उपलब्धता को लेकर हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। इसी बीच चीन ने घरेलू ईंधन संकट को रोकने के लिए मार्च महीने में रिफाइंड ऑयल के निर्यात पर अस्थायी रोक लगा दी है।
चीन का बड़ा फैसला: गैसोलीन, डीजल और एविएशन फ्यूल पर रोक
चीन की सरकारी संस्था National Development and Reform Commission (एनडीआरसी) ने आदेश जारी किया है कि मार्च महीने में गैसोलीन, डीजल और हवाई ईंधन की विदेशों में शिपमेंट रोकी जाए। इसका उद्देश्य घरेलू बाजार में ईंधन की कमी को रोकना है। बीजिंग का यह कदम ऐसे समय में आया है जब Strait of Hormuz में तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हो रही है और अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी है।

आईईए और अमेरिका ने उठाए कदम, वैश्विक आपूर्ति स्थिर करने की कोशिश
वैश्विक ऊर्जा संकट को देखते हुए International Energy Agency (आईईए) ने भी राहत देने का कदम उठाया। एजेंसी ने कहा कि उसके सदस्य देश आपूर्ति संकट से निपटने के लिए 400 मिलियन बैरल तेल आपातकालीन भंडार से जारी करेंगे। यह 1973 के ऑयल क्राइसिस के बाद ऐसा छठा मौका है जब आईईए ने वैश्विक तेल आपूर्ति स्थिर रखने के लिए इस तरह का कदम उठाया। वहीं, अमेरिका ने अपने Strategic Petroleum Reserve से 172 मिलियन बैरल कच्चा तेल जारी करने का फैसला लिया है।
मध्य पूर्व तनाव और तेल आपूर्ति पर असर
वेस्ट एशिया में तनाव 28 मार्च को बढ़ा जब Israel ने Iran पर हवाई हमले किए। यह संघर्ष अब लगभग दो सप्ताह से जारी है और अगर युद्ध लंबा चलता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर गंभीर असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि चीन के निर्यात रोकने के फैसले और मध्य पूर्व संघर्ष के कारण आने वाले हफ्तों में वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और कीमतों में तेजी बनी रह सकती है।
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