देश
Pahalgam Attack: गृहमंत्री अमित शाह के आदेश से शुरू हुई पाकिस्तानियों के खिलाफ कार्रवाई! पाकिस्तानियों को देश से बाहर करने की मुहिम
Pahalgam Attack: पहलगाम में आतंकवादी हमले के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं। हमले में पाकिस्तान प्रशिक्षित चार आतंकवादियों ने 26 लोगों की जान ली थी। इसके बाद भारत ने सिंधु जल संधि रोकने और पाकिस्तान के दूतावास को बंद करने जैसे पांच बड़े फैसले लिए हैं। साथ ही सभी पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा रद्द कर उन्हें देश छोड़ने का आदेश दिया गया है।
राज्यों को पाकिस्तानी नागरिकों की पहचान का आदेश
48 घंटे की डेडलाइन खत्म होने के बावजूद बड़ी संख्या में पाकिस्तानी नागरिक भारत में रह रहे हैं। इस पर गृह मंत्री अमित शाह ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बात की है और आदेश दिया है कि वे अपने राज्यों में पाकिस्तानी नागरिकों की पहचान करें और उन्हें बाहर निकालें। इस दिशा में तेजी से कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
महाराष्ट्र ने शुरू की कड़ी कार्रवाई
अमित शाह के निर्देश के बाद महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में रहने वाले पाकिस्तानियों की सूची बनानी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री फडणवीस ने गृह मंत्री को फोन पर जानकारी दी है कि महाराष्ट्र पुलिस ने सभी पाकिस्तानी नागरिकों की पहचान कर ली है। फडणवीस ने साफ कर दिया है कि जो समय पर भारत नहीं छोड़ेंगे उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
#WATCH | Attari, Punjab | A Pakistani national on her way back to Pakistan says, "We had come here on 1.5 month visa to attend a relative's wedding, and are returning within 15 days… Whatever happened was wrong, someone else did this act and people like us have to pay for it…… pic.twitter.com/dbbA3mrBum
— ANI (@ANI) April 26, 2025
पुणे और अलीगढ़ में चल रहा पाकिस्तानियों का सत्यापन
पुणे जिला प्रशासन ने अब तक 111 पाकिस्तानी नागरिकों की पहचान कर उन्हें 27 अप्रैल तक भारत छोड़ने का निर्देश दिया है। मेडिकल वीजा वालों को 29 अप्रैल तक की छूट दी गई है। वहीं अलीगढ़ में जिलाधिकारी ने बताया कि लगभग 50 पाकिस्तानी नागरिक वहां मौजूद हैं और प्रशासन केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम कर रहा है।
शादी और परिवार पर भी संकट
पाकिस्तान से शादी या परिवार के कार्यक्रमों के लिए भारत आए लोग अब मुश्किल में हैं। पंजाब से एक पाकिस्तानी नागरिक ने बताया कि वह डेढ़ महीने के वीजा पर आया था लेकिन अब पंद्रह दिन में लौट रहा है। राजस्थान के शैतान सिंह और सुरेंद्र सिंह की शादियों पर भी संकट आ गया है। वहीं राधा भिल को अपने दो साल के बेटे से दोबारा बिछड़ने का डर सता रहा है।
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आप पार्टी के फैसले पर राघव चड्ढा का तीखा जवाब खामोशी को कमजोरी मत समझो
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AAP ने राज्यसभा में राघव चड्ढा से छीना उपनेता पद, बड़ा फैसला सामने आया
राजनीतिक हलकों में उस समय हलचल तेज हो गई जब Aam Aadmi Party ने अपने राज्यसभा सांसद Raghav Chadha को उपनेता पद से हटा दिया। उनकी जगह Ashok Mittal को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर यह भी स्पष्ट कर दिया है कि अब राघव चड्ढा को सदन में पार्टी के प्रतिनिधि के तौर पर बोलने का अवसर नहीं दिया जाए। इस फैसले के बाद साफ संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी उनके संसदीय रोल को सीमित करने के मूड में है।
संसद में सक्रियता के बीच अचानक लिया गया फैसला
पिछले कुछ समय से Raghav Chadha संसद में जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठा रहे थे। उन्होंने एयरपोर्ट पर महंगी चाय से लेकर डिलीवरी बॉयज की समस्याओं तक कई विषयों पर आवाज बुलंद की थी। ऐसे समय में यह कार्रवाई चौंकाने वाली मानी जा रही है। सूत्रों के मुताबिक अब संसद में उन्हें मिलने वाले समय में भी कटौती की जा सकती है, जिससे उनकी सक्रियता पर असर पड़ना तय माना जा रहा है।

अनुशासनहीनता और पार्टी लाइन से अलग रुख बना कारण
सूत्रों के अनुसार पार्टी नेतृत्व को इस बात से आपत्ति थी कि Raghav Chadha कई मुद्दों पर बिना पार्टी से चर्चा किए अपनी बात रख रहे थे। वह किन विषयों पर बोलने वाले हैं इसकी जानकारी भी पहले से साझा नहीं कर रहे थे। पार्टी ने इसको लेकर उन्हें पहले चेतावनी भी दी थी। हालांकि आधिकारिक रूप से कारण स्पष्ट नहीं किया गया है, लेकिन माना जा रहा है कि अनुशासनहीनता और पार्टी लाइन से अलग रुख अपनाना इस फैसले की मुख्य वजह हो सकती है।
चुप्पी और सियासी संकेतों ने बढ़ाई चर्चाएं
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हाल के दिनों में Arvind Kejriwal और Manish Sisodia से जुड़े मामलों पर Raghav Chadha की चुप्पी भी पार्टी को खटक रही थी। राउज एवेन्यू कोर्ट से जुड़े फैसलों के बाद भी उनका कोई सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया, जिससे कई तरह के सवाल उठे। अब इस कार्रवाई के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि राघव चड्ढा आगे क्या रणनीति अपनाते हैं और क्या वह पार्टी के साथ अपने संबंधों को फिर से मजबूत कर पाते हैं या यह घटना किसी बड़े राजनीतिक बदलाव का संकेत साबित होगी।
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गुजरात में आप प्रदेश अध्यक्ष की गिरफ्तारी पर सियासी घमासान, नेताओं ने उठाए सवाल
गुजरात की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रदेश अध्यक्ष इशुदान गढ़वी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई के बाद राज्य की सियासत गरमा गई है और विपक्षी दलों ने इसे लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। आम आदमी पार्टी का आरोप है कि यह गिरफ्तारी राजनीतिक द्वेष से प्रेरित है और पार्टी के बढ़ते प्रभाव को रोकने की कोशिश है।
आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि गुजरात में पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता के दुरुपयोग के जरिए विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है। वहीं दिल्ली की नेता और विधानसभा में विपक्ष की प्रमुख आतिशी ने भी सरकार पर गंभीर सवाल उठाए। उनका कहना है कि बीजेपी सरकार डर के कारण ऐसी कार्रवाई कर रही है क्योंकि जनता अब बदलाव चाहती है।
इस मामले में अरविंद केजरीवाल ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पिछले कुछ महीनों में गुजरात में आप कार्यकर्ताओं के खिलाफ बड़ी संख्या में एफआईआर दर्ज की गई हैं और कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताते हुए कहा कि सरकार विरोधियों को दबाने का प्रयास कर रही है।
गिरफ्तारी को लेकर यह भी जानकारी सामने आई है कि इशुदान गढ़वी खंभालिया थाने में अपने कार्यकर्ताओं से मिलने पहुंचे थे, जहां पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। हालांकि पुलिस की ओर से गिरफ्तारी के कारणों को लेकर अभी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
इशुदान गढ़वी का राजनीतिक सफर भी काफी दिलचस्प रहा है। एक साधारण किसान परिवार से आने वाले गढ़वी ने अपने करियर की शुरुआत पत्रकारिता से की थी और बाद में राजनीति में कदम रखा। 2021 में आम आदमी पार्टी में शामिल होने के बाद उन्होंने तेजी से पहचान बनाई और 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्हें मुख्यमंत्री पद का चेहरा भी घोषित किया गया था।
इस पूरे घटनाक्रम ने गुजरात की राजनीति को एक बार फिर गरमा दिया है। जहां एक ओर आप इसे राजनीतिक उत्पीड़न बता रही है, वहीं सत्ताधारी पक्ष की ओर से अभी तक इस पर स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है, खासकर जब राज्य में चुनावी माहौल धीरे-धीरे बन रहा है।
फिलहाल, यह गिरफ्तारी सिर्फ एक कानूनी कार्रवाई नहीं, बल्कि राजनीतिक बहस का केंद्र बन चुकी है, जो आने वाले समय में राज्य की राजनीति को प्रभावित कर सकती है।
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