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Lok Sabha में अंतरिक्ष चर्चा के बीच विपक्ष ने रोका भाषण, डॉ. जितेंद्र सिंह ने दिया मजेदार जवाब
Lok Sabha में भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री और अंतरिक्ष कार्यक्रम के महत्व पर विशेष चर्चा हुई। इस चर्चा की शुरुआत केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने की। उन्होंने भारत के 2047 तक “विकसित भारत” बनने के लक्ष्य में अंतरिक्ष कार्यक्रम की भूमिका पर जोर दिया।
विपक्ष का विरोध और मंत्री की प्रतिक्रिया
डॉ. जितेंद्र सिंह के भाषण के दौरान विपक्ष के सदस्य लगातार बाधा डालते रहे। उन्होंने नारे लगाए और बिहार में विशेष गहन जांच अभियान के समर्थन में प्लेकार्ड दिखाए। डॉ. सिंह ने इस पर हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, “मैं अभी अंतरिक्ष में खड़ा हूँ, आप मुझे नहीं पकड़ सकते।” उन्होंने पहले ही अपनी सीट को ऊँचा करके अपने चित्र को टीवी स्क्रीन पर दिखने से रोकने की कोशिश की।
In a lighter vein, my remark “Main iss samay Antriksh mein khada hoon, aap mujh tak nahin pahunch sakte” (I am right now standing in Space, you can’t reach me)… came in response to protesting Opposition members’ vain bid to raise their banners higher and higher in an attempt to… pic.twitter.com/Q7VU8FARi0
— Dr Jitendra Singh (@DrJitendraSingh) August 18, 2025
विपक्ष से अपील
विपक्ष के विरोध के बीच डॉ. सिंह ने कहा कि पार्टी मतभेदों से ऊपर उठकर इस महत्वपूर्ण चर्चा में हिस्सा लें। उन्होंने सिर झुकाकर अपील की, “भले ही आप सरकार से नाराज हैं, फिर भी इस चर्चा में भाग लें ताकि राष्ट्र को सही संदेश मिले।” उनका उद्देश्य था कि देशवासियों तक अंतरिक्ष कार्यक्रम की उपलब्धियों का महत्व पहुंचे।
शेर के जरिए भाव व्यक्त किया
डॉ. सिंह ने प्रसिद्ध शायर अहमद फ़राज़ का शेर सुनाया, “किस किस को सुनाएंगे जुदाई का सबब हम, तू मुझसे खफा है तो सुभांशु के लिए आ।” उन्होंने इसे संसद में इस प्रकार समेटा, “किस किस को सुनाएंगे इस शोर-ओ-गुल का सबब हम; तू मुझसे खफा है तो सुभांशु के लिए आ।” इस शेर के माध्यम से उन्होंने विपक्ष को संदेश दिया कि व्यक्तिगत मतभेदों से परे राष्ट्रीय उपलब्धियों को मान्यता देना जरूरी है।
भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की उपलब्धियां
विपक्ष की बाधाओं के बावजूद डॉ. सिंह ने कहा कि भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय विकास में एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन गया है। चंद्रयान-3 और अंतरिक्ष यात्री मिशनों जैसी उपलब्धियों ने देश को वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति के रूप में स्थापित किया है। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे इस चर्चा में सक्रिय भाग लें ताकि युवा पीढ़ी को प्रेरणा मिले।