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OnePlus CEO पेट लाउ पर ताइवान में गैरकानूनी कारोबार के आरोप, गिरफ्तारी खतरे में

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चीनी स्मार्टफोन निर्माता कंपनी OnePlus CEO पिट लाउ की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। ताइवान की शिलिन डिस्ट्रिक्ट प्रॉसिक्यूटर्स ऑफिस ने वनप्लस के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। आरोप है कि वनप्लस ने ताइवान में अवैध तरीके से कारोबार चलाया और भर्ती प्रक्रिया में धांधली की। इस मामले में वनप्लस पर चीन और ताइवान के संबंधी कानूनों के उल्लंघन का गंभीर आरोप है। कंपनी ने बिना अनुमति ताइवान में सॉफ्टवेयर रिसर्च, डेवलपमेंट, टेस्टिंग और वेरिफिकेशन के लिए 70 से अधिक कर्मचारियों को काम पर रखा, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा माना जा रहा है।

मामला क्या है?

ताइवान की प्रॉसिक्यूटर्स ऑफिस के अनुसार, वनप्लस ने ताइवान की जमीन पर कानून का उल्लंघन किया है। वनप्लस के सीईओ पिट लाउ पर ताइवान के अधिनियम का उल्लंघन करने का आरोप है, जो भूमि पर रहने वाले लोगों के संबंधों को नियंत्रित करता है। अभियोजकों का कहना है कि वनप्लस ने बिना अनुमति के ऑपरेशन चलाकर देश की सुरक्षा को खतरे में डाला है। वनप्लस का मुख्यालय चीन के शेनझेन शहर में है और यह 2021 से ओप्पो का स्वतंत्र उप-ब्रांड है। पिट लाउ ओप्पो के चीफ प्रोडक्ट ऑफिसर भी हैं। फिलहाल इस मामले में वनप्लस और ओप्पो दोनों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

चीन और ताइवान के बीच बढ़ता तनाव

चीन और ताइवान के बीच लंबे समय से राजनीतिक और आर्थिक तनाव बना हुआ है। ताइवान सरकार चीनी कंपनियों द्वारा स्थानीय टेक्नोलॉजी टैलेंट की भर्ती में कथित गड़बड़ी को लेकर कड़ी नज़र रखे हुए है। पिछले कुछ सालों में ताइवान ने कई चीनी कंपनियों पर फर्जी कंपनियों और विदेशी संस्थाओं के माध्यम से कर्मचारियों की भर्ती का आरोप लगाया है। अगस्त 2025 में भी ताइवान ने 16 चीनी कंपनियों के खिलाफ जांच शुरू की थी। विशेषज्ञों का मानना है कि वनप्लस के खिलाफ यह मुकदमा ताइवान में चीन के तकनीकी प्रभुत्व को रोकने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।

वनप्लस की चुनौतियां और भविष्य की संभावनाएं

वनप्लस के लिए यह मामला एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि इससे कंपनी की प्रतिष्ठा और कारोबार दोनों पर असर पड़ सकता है। ताइवान के कानूनी और राजनीतिक दबाव के बीच वनप्लस को अपने संचालन को सुधारने और नियमों का पालन सुनिश्चित करने की जरूरत है। साथ ही, चीन और ताइवान के बीच बढ़ते तनाव के कारण कई अन्य चीनी टेक्नोलॉजी कंपनियों की भी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। वनप्लस और ओप्पो को इस मामले में स्पष्ट और पारदर्शी कदम उठाने होंगे ताकि कंपनी के ग्राहकों और निवेशकों का विश्वास बना रहे। आने वाले समय में इस विवाद के कारण वनप्लस के कारोबार और विस्तार योजनाओं पर भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

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