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Gold ATM से अब बेचें सोना! सीधे अकाउंट में मिलेगा पैसा ज्वैलर्स की जगह अब Gold ATM
Gold ATM: हम सभी पुराने सोने के आभूषण बेचने के लिए ज्वैलर्स के पास जाते हैं। ज्वैलर हमें पुराने सोने के मूल्य में अपनी मर्जी से कटौती कर के पैसा देता है। लेकिन इस प्रक्रिया में हम अक्सर धोखा खा जाते हैं। चीन ने इस समस्या का समाधान खोज लिया है और शंघाई में गोल्ड एटीएम स्थापित किया है। अब लोग आसानी से अपने पुराने सोने को एटीएम में डाल कर उसे बेच सकते हैं।
गोल्ड एटीएम की सुविधाएँ
यह गोल्ड एटीएम सोने के आभूषण, सिक्के और बिस्किट्स को स्वीकार करता है। न्यूनतम वजन 3 ग्राम होना चाहिए और शुद्धता 50% से अधिक होनी चाहिए। मशीन 1,200°C तापमान पर सोने को पिघलाकर उसकी शुद्धता और वजन को सेंसर तकनीक से जांचती है। इसके बाद सोने का मूल्य शंघाई गोल्ड एक्सचेंज के नवीनतम दरों पर तय किया जाता है और प्रोसेसिंग शुल्क काट कर बाकी राशि सीधे ग्राहक के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी जाती है।
Gold ATM in Shanghai: Drop your jewellery, it checks purity, melts it, calculates value, and credits your account instantly.
If this comes to India, traditional gold lenders might need a new business model.
Transparency in. Exploitation out. pic.twitter.com/KgjI7nxCP9— Harsh Goenka (@hvgoenka) April 21, 2025
सुविधाजनक और तेज़ प्रक्रिया
यह पूरी प्रक्रिया बहुत सरल और तकनीकी रूप से उन्नत है। सोने को मशीन में डालने के बाद, वह खुद-ब-खुद उसे पिघला देती है और उसकी शुद्धता और वजन की जांच करती है। सबसे खास बात यह है कि पूरे प्रोसेस में सिर्फ 30 मिनट का समय लगता है। इसमें न तो कोई पहचान पत्र की आवश्यकता होती है और न ही किसी तरह के दस्तावेजों की।
शंघाई में शुरू हुआ नया पहल
यह गोल्ड एटीएम शंघाई में शुरू किया गया है और इसे शेनझेन स्थित किंगहुड ग्रुप द्वारा तैयार किया गया है। इसके कार्य करने का तरीका बेहद सरल है। उपयोगकर्ताओं को सिर्फ अपना सोना मशीन में डालना होता है और इसके बाद प्रक्रिया अपने आप पूरी हो जाती है। इसमें कोई मानवीय हस्तक्षेप नहीं होता और हर कदम तकनीकी रूप से नियंत्रित किया जाता है।
धोखाधड़ी से सुरक्षा
गोल्ड एटीएम में कोई धोखाधड़ी का खतरा नहीं है क्योंकि यह पूरी प्रक्रिया ऑटोमेटेड है। कोई भी बाहरी व्यक्ति सोने के मूल्य में कोई बदलाव नहीं कर सकता। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ग्राहक को अपनी मेहनत की पूरी कीमत मिलती है और उसे सीधे बैंक खाते में जमा कर दी जाती है।
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कम बजट में बड़ा मुनाफा, ये बिजनेस आइडिया बदल सकते हैं आपकी जिंदगी
आज के दौर में लोग पारंपरिक नौकरी से हटकर खुद का काम करने की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। हर कोई चाहता है कि वह अपने फैसले खुद ले और अपनी मेहनत के हिसाब से कमाई करे। हालांकि कई बार लोग सिर्फ इस वजह से पीछे हट जाते हैं क्योंकि उनके पास ज्यादा पूंजी नहीं होती। लेकिन सच्चाई यह है कि हर बिजनेस के लिए बड़ी रकम की जरूरत नहीं होती। आज कई ऐसे छोटे बिजनेस आइडिया मौजूद हैं जिन्हें आप सिर्फ 5000 रुपये के बजट में भी शुरू कर सकते हैं। अगर सही प्लानिंग और मेहनत की जाए तो ये छोटे काम भी समय के साथ अच्छी आय का जरिया बन सकते हैं।
घर से शुरू करें खाने का बिजनेस
अगर आपको खाना बनाना पसंद है तो यह हुनर आपके लिए कमाई का शानदार जरिया बन सकता है। आप घर से टिफिन सर्विस या स्नैक्स बनाने का छोटा बिजनेस शुरू कर सकते हैं। इसमें ज्यादा निवेश की जरूरत नहीं होती और 3000 से 5000 रुपये में जरूरी सामान लेकर काम शुरू किया जा सकता है। सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स के जरिए आप आसानी से अपने ग्राहकों तक पहुंच बना सकते हैं। शुरुआत में भले ही मुनाफा कम हो लेकिन धीरे-धीरे ग्राहक बढ़ने पर यह बिजनेस आपको हर महीने 10 से 20 हजार रुपये तक की कमाई दे सकता है।

हैंडमेड प्रोडक्ट्स से बढ़ाएं कमाई
अगर आपको कुछ नया और क्रिएटिव बनाना पसंद है तो हैंडमेड प्रोडक्ट्स का बिजनेस आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकता है। मोमबत्तियां साबुन और आर्टिफिशियल ज्वेलरी जैसी चीजें कम लागत में बनाई जा सकती हैं। करीब 3000 से 5000 रुपये के निवेश से इस काम की शुरुआत की जा सकती है। इन प्रोडक्ट्स को आप ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और स्थानीय बाजार में बेच सकते हैं। सही मार्केटिंग और मेहनत से यह छोटा बिजनेस हर महीने 15 हजार से 50 हजार रुपये तक की कमाई दे सकता है और समय के साथ इसे बड़े स्तर पर भी ले जाया जा सकता है।
ऑनलाइन कोचिंग से बनाएं मजबूत भविष्य
अगर आपको किसी विषय की अच्छी जानकारी है तो आप ऑनलाइन कोचिंग या ट्यूशन शुरू करके कमाई कर सकते हैं। इसके लिए ज्यादा निवेश की जरूरत नहीं होती और 1000 से 5000 रुपये में बेसिक सेटअप तैयार किया जा सकता है। जैसे व्हाइटबोर्ड इंटरनेट और मोबाइल या लैपटॉप के जरिए आप पढ़ाना शुरू कर सकते हैं। जैसे-जैसे छात्रों की संख्या बढ़ेगी आपकी कमाई भी बढ़ती जाएगी। यह बिजनेस खासतौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो पार्ट टाइम में अतिरिक्त आय कमाना चाहते हैं और धीरे-धीरे इसे फुल टाइम करियर में बदल सकते हैं।
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IDBI बैंक के शेयरों में सोमवार को रिकॉर्ड गिरावट, निजीकरण प्रक्रिया ने निवेशकों को किया चिंतित
मिडिल ईस्ट में जारी तनावों के बीच भारतीय शेयर बाजार ने सप्ताह के पहले कारोबारी दिन मजबूत उछाल दिखाया, जब BSE सेंसेक्स करीब 400 अंक बढ़ा। लेकिन इस रैली के बावजूद IDBI बैंक के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई। सोमवार के कारोबारी सत्र में बैंक के शेयरों की कीमत में इंट्राडे स्तर पर करीब 16 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई। विशेषज्ञों के अनुसार इस गिरावट की मुख्य वजह IDBI बैंक के लंबे समय से प्रतीक्षित निजीकरण प्रक्रिया से जुड़ी रिपोर्टों के कारण निवेशकों में पैदा हुई अनिश्चितता है।
निजीकरण प्रक्रिया से जुड़ी आशंकाएं
राष्ट्रीय स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर दोपहर 1:17 बजे IDBI बैंक के शेयर ₹77.40 यानी लगभग 16.03 प्रतिशत गिर गए। यह गिरावट इस बात की ओर संकेत है कि निवेशक निजीकरण प्रक्रिया को लेकर सावधान हैं। सरकार और LIC मिलकर IDBI बैंक में कुल 60.7 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की योजना बना रहे हैं। इस प्रक्रिया में खरीदार को बैंक में प्रबंधन नियंत्रण और बहुमत वाली हिस्सेदारी मिल जाएगी। निवेशक मानते हैं कि यदि यह प्रक्रिया पूरी होती है तो बैंक का मूल्य बढ़ेगा और संचालन में सुधार होगा, लेकिन वर्तमान स्थिति ने उन्हें असमंजस में डाल दिया है।

बिडिंग प्रक्रिया में निवेशकों की चिंता
रिपोर्टों के अनुसार संभावित खरीदारों द्वारा प्रस्तुत बोली सरकार द्वारा निर्धारित रिज़र्व प्राइस से कम रही। इसके परिणामस्वरूप यह आशंका बढ़ गई है कि सरकार मौजूदा बोली प्रक्रिया को रद्द कर सकती है और नए शर्तों के तहत पुनः निविदा प्रक्रिया शुरू कर सकती है। इस स्थिति ने निवेशकों के मन में अनिश्चितता पैदा कर दी है। भारी बिकवाली का दबाव इस शेयर पर देखा जा रहा है, क्योंकि निवेशक निजीकरण की प्रक्रिया का पुनर्मूल्यांकन कर रहे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह की अनिश्चितता शेयर बाजार में अस्थिरता को बढ़ावा देती है।
IDBI निजीकरण प्रक्रिया का इतिहास
IDBI बैंक के निजीकरण की प्रक्रिया 2022 में शुरू की गई थी। यह सरकार की बैंकिंग क्षेत्र में हिस्सेदारी कम करने की रणनीति का हिस्सा है। वर्तमान में Life Insurance Corporation of India बैंक में 49.24 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है, जबकि भारत सरकार की हिस्सेदारी 45.48 प्रतिशत है। निजीकरण प्रक्रिया का उद्देश्य बैंक के संचालन में सुधार करना और निवेशकों के लिए आकर्षक बनाना है। इस लंबित प्रक्रिया के कारण निवेशकों में सतत चिंता और शेयरों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।
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मेटा में संभावित छंटनी से कर्मचारी परेशान, कंपनी की भविष्य की रणनीति AI पर केंद्रित
टेक्नोलॉजी जगत की दिग्गज कंपनी मेटा प्लेटफॉर्म्स में एक बार फिर बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी की चर्चा जोर पकड़ने लगी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कंपनी अपने कुल वर्कफोर्स का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा कम कर सकती है। इसका मतलब है कि करीब 16,000 कर्मचारियों की नौकरी पर संकट मंडरा सकता है। सूत्रों का कहना है कि यह कदम मुख्य रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ते खर्च को संतुलित करने के उद्देश्य से उठाया जा सकता है।
संभावित छंटनी से कर्मचारियों में बढ़ा तनाव
कॉरपोरेट फाइलिंग के अनुसार 31 दिसंबर 2025 तक मेटा में करीब 79,000 लोग काम कर रहे थे। अगर कंपनी अपने वर्कफोर्स में 20 फीसदी की कटौती करती है, तो यह पिछले सालों की छंटनी के बाद अब तक की सबसे बड़ी होगी। हालांकि, फिलहाल यह कदम केवल संभावित माना जा रहा है और कोई आधिकारिक तारीख तय नहीं की गई है। पिछले अनुभव से कर्मचारियों में भारी तनाव और असुरक्षा की स्थिति पैदा होने की संभावना जताई जा रही है।

मेटा का फोकस एआई पर: भविष्य की रणनीति
कंपनी पिछले एक साल से AI क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने में लगी हुई है। इसके लिए मेटा ने कई टॉप एआई रिसर्चर्स को अपनी सुपरइंटेलिजेंस टीम में शामिल किया है और उन्हें आकर्षक पैकेज ऑफर किए हैं। इसका उद्देश्य कंपनी को अधिक प्रभावी और तेजी से काम करने वाली टीम तैयार करना है, जो AI की मदद से बेहतर प्रोडक्टिविटी दे सके। विशेषज्ञों का कहना है कि मेटा की यह रणनीति उसके भविष्य के कारोबार और तकनीकी प्रतिस्पर्धा के लिहाज से अहम कदम है।
बड़े निवेश और दीर्घकालिक योजनाएं
मेटा कंपनी 2028 तक डेटा सेंटर निर्माण पर लगभग 600 अरब डॉलर खर्च करने की योजना बना रही है। यह निवेश कंपनी के AI और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह छंटनी और AI में निवेश कंपनी की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। हालांकि, इस बीच कर्मचारियों के लिए यह स्थिति चिंता और अनिश्चितता का समय है। आने वाले हफ्तों में मेटा की ओर से आधिकारिक बयान और अंतिम निर्णय की घोषणा का इंतजार किया जा रहा है।
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