Connect with us

टेक्नॉलॉजी

MWC 2025: HMD के नए स्मार्टफोन्स और ईयरबड्स की धमाकेदार एंट्री

Published

on

MWC 2025: HMD के नए स्मार्टफोन्स और ईयरबड्स की धमाकेदार एंट्री

मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस (MWC 2025) आज से बार्सिलोना में शुरू हो चुका है। इस इवेंट के दौरान HMD Global ने कई डिवाइसेस लॉन्च किए हैं। इनमें स्मार्टफोन, TWS ईयरफोन्स, फीचर फोन और एक फ्लिप फोन शामिल हैं। इन नए डिवाइसेस में HMD X1, HMD Barca 3210, HMD Amped Buds और HMD 2660 Flip फोन शामिल हैं। यहां हम आपको इन सभी डिवाइसेस के बारे में विस्तार से जानकारी दे रहे हैं।

HMD के लेटेस्ट लॉन्च

HMD ने पिछले साल FC बार्सिलोना के साथ साझेदारी की थी। अब कंपनी ने FCB-थीम वाला फ्यूज़न स्मार्टफोन और HMD Barca 3210 फीचर फोन लॉन्च किया है।

Barca Fusion स्मार्टफोन

कंपनी ने Barca Fusion स्मार्टफोन को एक स्मार्ट आउटलुक के साथ लॉन्च किया है, जिसमें गोल्डन FCB लोगो दिया गया है। इसके अलावा, फोन के बैक पैनल पर खिलाड़ियों के ऑटोग्राफ भी हैं। इस स्मार्टफोन के कोर स्पेसिफिकेशंस वही हैं, जो HMD Fusion के सितंबर 2024 में लॉन्च किए गए मॉडल में थे।

HMD Barca 3210 फीचर फोन

इस फीचर फोन में सिर्फ क्लब का लोगो दिया गया है। इसके अलावा, इसमें खिलाड़ियों के संदेश, कस्टम वॉलपेपर और प्रसिद्ध स्नेक गेम भी शामिल हैं। कंपनी ने एक विशेष Barca Fusion एडिशन भी पेश किया है, जो कलेक्टर्स के लिए खास बनाया गया है। कंपनी का दावा है कि इस फोन में यूजर्स को हर सुबह खिलाड़ियों की आवाज सुनने को मिलेगी।

HMD Barca 3210 फोन को बार्सिलोना फुटबॉल क्लब के दो रंगों – Blau और Grana में लॉन्च किया गया है।

HMD X1 स्मार्टफोन: टीनेजर्स के लिए खास

HMD ने टीनेजर्स के लिए एक खास X1 स्मार्टफोन लॉन्च किया है। इस फोन को Xplora के साथ पार्टनरशिप में तैयार किया गया है, जिससे माता-पिता को बच्चों के स्मार्टफोन पर पूरा नियंत्रण मिलेगा।

Xplora की सदस्यता 4.99 यूरो प्रति माह है, जिसमें यूजर्स को इमरजेंसी SOS, लो बैटरी अलर्ट, रिमोट डिवाइस एक्सेस और इंटरनेट व सोशल मीडिया पर कंट्रोल जैसी सुविधाएं मिलती हैं।

MWC 2025: HMD के नए स्मार्टफोन्स और ईयरबड्स की धमाकेदार एंट्री

HMD Amped Buds के फीचर्स

HMD Amped Buds में 1,600mAh की बैटरी दी गई है, जो 95 घंटे का बैकअप प्रदान करती है। इन ईयरबड्स का डिजाइन स्लिम है और इनमें इन-ईयर डिज़ाइन, स्टेम और सिलिकॉन ईयर टिप्स दी गई हैं।

इन ईयरबड्स का केस IPX4 रेटेड है और बड्स IP54 सर्टिफाइड हैं। चार्जिंग के लिए इनमें USB-C पोर्ट दिया गया है।

ऑडियो क्वालिटी

ऑडियो क्वालिटी की बात करें तो HMD Amped Buds में 10mm ड्राइवर दिया गया है। ये बड्स एक्टिव नॉइज़ कैंसलेशन सपोर्ट करते हैं।

HMD के ये लेटेस्ट बड्स Google Fast Pair सपोर्ट करते हैं और एक साथ दो डिवाइसेस से कनेक्ट हो सकते हैं। इन्हें तीन कलर ऑप्शन्स – ब्लैक, सायन और पिंक में लॉन्च किया गया है।

HMD के फीचर फोन

MWC 2025 में कंपनी ने कई फीचर फोन भी लॉन्च किए हैं, जिनमें HMD Flip 2660, HMD 130 और HMD 150 Music शामिल हैं।

HMD 2660 Flip फोन

HMD Flip 2660 में 2.8-इंच QVGA डिस्प्ले और 1.77-इंच का कवर QVCA स्क्रीन दी गई है। इसमें 0.3MP कैमरा, IP54 रेटिंग, इमरजेंसी बटन और 1,450mAh बैटरी दी गई है। यह फोन Cosy Black, Twilight Violet और Raspberry Red कलर ऑप्शन्स में आता है।

HMD 130 और HMD 150 Music

HMD 130 और HMD 150 Music में 2.4-इंच QVGA डिस्प्ले, एसडी कार्ड सपोर्ट, S30+ OS और 2,500mAh की रिमूवेबल बैटरी दी गई है। इन फोन में 2W स्पीकर और प्लेबैक कंट्रोल बटन दिए गए हैं।

HMD 150 Music का डिजाइन थोड़ा प्रीमियम है और इसमें फ्लैश के साथ एक QVGA कैमरा भी दिया गया है।

कीमत और उपलब्धता

HMD Global ने अभी तक इन नए लॉन्च किए गए डिवाइसेस की कीमतों की घोषणा नहीं की है। हालांकि, उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही कंपनी इनकी कीमतों का खुलासा करेगी और ये डिवाइसेस बाजार में उपलब्ध होंगे।

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

टेक्नॉलॉजी

नकली ऐप्स दिखते हैं असली जैसे जानिए कैसे पहचानें और बचाएं अपनी मेहनत की कमाई

Published

on

नकली ऐप्स दिखते हैं असली जैसे जानिए कैसे पहचानें और बचाएं अपनी मेहनत की कमाई

देश में इन दिनों फर्जी ट्रेडिंग ऐप्स के जरिए लोगों को ठगने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इस गंभीर खतरे को देखते हुए सरकार ने नई एडवायजरी जारी की है और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। ठग आकर्षक रिटर्न का लालच देकर लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं और बाद में उनकी मेहनत की कमाई हड़प लेते हैं। सबसे खतरनाक बात यह है कि ये ऐप्स दिखने में बिल्कुल असली प्लेटफॉर्म जैसे लगते हैं जिससे आम लोगों के लिए असली और नकली के बीच फर्क करना बेहद मुश्किल हो जाता है। यही वजह है कि बड़ी संख्या में लोग इस स्कैम का शिकार हो रहे हैं।

कैसे काम करता है यह खतरनाक स्कैम

सरकारी एडवायजरी के अनुसार फर्जी ट्रेडिंग ऐप्स का इंटरफेस और डिजाइन बड़े और भरोसेमंद प्लेटफॉर्म्स जैसा बनाया जाता है। ठग सोशल मीडिया विज्ञापनों मैसेजिंग ऐप्स और फर्जी लिंक के जरिए लोगों को इन ऐप्स को डाउनलोड करने के लिए प्रेरित करते हैं। एक बार जब यूजर ऐप इंस्टॉल कर लेता है तो उसे निवेश के नाम पर पैसा जमा करने के लिए कहा जाता है। असल में यह पैसा किसी निवेश में नहीं लगता बल्कि सीधे ठगों के बैंक खातों में चला जाता है। कई बार यूजर को फर्जी डैशबोर्ड पर मुनाफा दिखाया जाता है ताकि वह और ज्यादा पैसा निवेश करे। इस तरह धीरे धीरे यूजर बड़ी रकम गंवा बैठता है।

नकली ऐप्स दिखते हैं असली जैसे जानिए कैसे पहचानें और बचाएं अपनी मेहनत की कमाई

बचाव के लिए जरूरी सावधानियां

सरकार ने इस तरह के स्कैम से बचने के लिए कुछ जरूरी सावधानियां बताई हैं जिनका पालन करना बेहद जरूरी है। सबसे पहले किसी भी ऐप में पैसा निवेश करने से पहले बैंक डिटेल्स को ऑफिशियल सोर्स से जरूर जांचें। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि पैसा सही जगह जा रहा है। दूसरी बात यह है कि हमेशा UPI हैंडल और पेमेंट गेटवे की सत्यता की जांच करें क्योंकि फर्जी ऐप्स अक्सर संदिग्ध पेमेंट विकल्प इस्तेमाल करती हैं। तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी भी ट्रेडिंग ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसके वेरिफाइड लेबल या प्रमाणन को जरूर देखें। यह एक अहम संकेत होता है कि प्लेटफॉर्म सुरक्षित और कानूनी है।

स्कैम का शिकार होने पर तुरंत करें यह काम

अगर कोई व्यक्ति इस तरह के फाइनेंशियल स्कैम का शिकार हो जाता है तो उसे तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। देरी करने से पैसे वापस मिलने की संभावना कम हो जाती है। ऐसे मामलों में तुरंत नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करना चाहिए और पूरी जानकारी देनी चाहिए। इसके अलावा सरकार के साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। समय रहते सही कदम उठाने से नुकसान को कम किया जा सकता है और ठगों के खिलाफ कार्रवाई में मदद मिलती है।

Continue Reading

टेक्नॉलॉजी

साइबर अपराध पर डिजिटल स्ट्राइक की तैयारी, सरकार ने बनाया बड़ा सुरक्षा प्लान

Published

on

साइबर अपराध पर डिजिटल स्ट्राइक की तैयारी, सरकार ने बनाया बड़ा सुरक्षा प्लान

पिछले कुछ वर्षों में साइबर क्राइम के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी गई है। ऑनलाइन ठगी और डेटा चोरी के मामलों ने आम लोगों को आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक तनाव भी दिया है। इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए सरकार ने देशभर में साइबर अपराध के खिलाफ एक बड़ी रणनीति तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने साइबर फ्रॉड को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ते हुए कहा है कि डेटा चोरी और साइबर धोखाधड़ी देश के लिए बड़ा खतरा बन चुकी है। इस चुनौती से निपटने के लिए Indian Cyber Crime Coordination Centre के माध्यम से एक व्यापक योजना तैयार की जा रही है जो अलग अलग एजेंसियों को एक साथ जोड़कर काम करेगी।

2018 में हुई थी I4C की शुरुआत

I4C यानी इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर की स्थापना वर्ष 2018 में की गई थी। यह संस्था गृह मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करती है और देश में साइबर अपराध से निपटने के लिए एक नोडल एजेंसी के रूप में काम करती है। इसका मुख्य उद्देश्य विभिन्न राज्यों की पुलिस एजेंसियों बैंकिंग सिस्टम और अन्य संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है। I4C एक ऐसा प्लेटफॉर्म प्रदान करता है जहां सभी संबंधित एजेंसियां मिलकर साइबर अपराध की जांच और रोकथाम में सहयोग करती हैं। इससे न केवल मामलों की जांच तेज होती है बल्कि अपराधियों तक पहुंचना भी आसान हो जाता है।

साइबर अपराध पर डिजिटल स्ट्राइक की तैयारी, सरकार ने बनाया बड़ा सुरक्षा प्लान

शिकायत से लेकर कार्रवाई तक की पूरी प्रक्रिया

जब कोई नागरिक साइबर फ्रॉड की शिकायत हेल्पलाइन नंबर या ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से दर्ज करता है तो यह शिकायत सीधे I4C के अंतर्गत आने वाले सिस्टम में दर्ज हो जाती है। इसके बाद यह मामला ‘सिटीजन फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम’ के माध्यम से संबंधित स्थानीय पुलिस और बैंक तक पहुंचता है। इस प्रक्रिया के जरिए ठगी के पैसे को तुरंत फ्रीज करने की कार्रवाई की जाती है ताकि अपराधियों को धन निकालने का मौका न मिले। रिपोर्ट के अनुसार इस प्रणाली के जरिए अब तक हजारों करोड़ रुपये की राशि को फ्रॉड होने से बचाया जा चुका है। इस पूरी प्रक्रिया के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया यानी SOP भी लागू है जिसमें पुलिस बैंक और अन्य एजेंसियां मिलकर काम करती हैं।

सिम कार्ड ब्लॉकिंग और सिम बाइंडिंग से कसा शिकंजा

सरकार केवल शिकायतों पर ही कार्रवाई नहीं कर रही है बल्कि साइबर अपराध में इस्तेमाल होने वाले सिम कार्ड और मोबाइल डिवाइस पर भी सख्ती बरत रही है। गृह मंत्रालय के अनुसार अब तक लाखों सिम कार्ड ब्लॉक किए जा चुके हैं और कई मोबाइल उपकरणों को भी निष्क्रिय किया गया है। इसके अलावा मैसेजिंग ऐप्स पर साइबर अपराध रोकने के लिए सिम बाइंडिंग को अनिवार्य किया जा रहा है। इस व्यवस्था के तहत यूजर का सिम और ऐप एक दूसरे से जुड़ा रहेगा जिससे फर्जी अकाउंट और धोखाधड़ी की संभावना कम हो जाएगी। सरकार ने सभी प्लेटफॉर्म्स को इसे लागू करने के लिए समय सीमा दी है और उम्मीद जताई जा रही है कि इन कदमों से साइबर अपराध के मामलों में उल्लेखनीय कमी आएगी।

Continue Reading

टेक्नॉलॉजी

Microsoft Copilot पर बड़ा फैसला, अब गलती की जिम्मेदारी यूजर्स पर डाली

Published

on

Microsoft Copilot पर बड़ा फैसला, अब गलती की जिम्मेदारी यूजर्स पर डाली

टेक दिग्गज Microsoft ने अपने लोकप्रिय AI टूल Microsoft Copilot को लेकर एक बड़ा बदलाव किया है। कंपनी ने स्पष्ट कर दिया है कि Copilot का इस्तेमाल मुख्य रूप से मनोरंजन और सहायक टूल के तौर पर किया जाना चाहिए। इसके साथ ही कंपनी ने यह भी कहा है कि अगर AI किसी तरह की गलती करता है तो उसकी जिम्मेदारी यूजर की होगी, न कि Microsoft की। इस फैसले ने AI के उपयोग और उसकी विश्वसनीयता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

Copilot क्या है और क्यों है खास

Copilot एक एडवांस AI टूल है जिसे काम को तेज और आसान बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। यह Microsoft 365 जैसे प्लेटफॉर्म पर Excel, PowerPoint और Word जैसे ऐप्स के साथ काम करता है और यूजर्स की प्रोडक्टिविटी बढ़ाने में मदद करता है। शुरुआत में इसे एंटरप्राइज यूजर्स के लिए पेश किया गया था, लेकिन अब इसे आम यूजर्स तक भी पहुंचाया जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार Microsoft के पास Copilot नाम से जुड़े 70 से ज्यादा प्रोडक्ट मौजूद हैं, जो इसकी बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाते हैं।

Microsoft Copilot पर बड़ा फैसला, अब गलती की जिम्मेदारी यूजर्स पर डाली

AI की सीमाएं बनी बदलाव की वजह

इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ी वजह AI की सीमाएं हैं। Copilot जैसे टूल Large Language Models पर आधारित होते हैं, जिनमें कभी-कभी गलत या काल्पनिक जानकारी देने की समस्या होती है, जिसे हैलुसिनेशन कहा जाता है। इसी तरह के AI मॉडल जैसे GPT और Claude भी कभी-कभी त्रुटियां कर सकते हैं। हालांकि इन तकनीकों में लगातार सुधार हो रहा है, लेकिन पूरी तरह सटीकता अभी भी एक चुनौती बनी हुई है। यही कारण है कि Microsoft ने अपनी जिम्मेदारी सीमित करने का फैसला लिया है।

यूजर्स के लिए क्या है नई सलाह

Microsoft ने यह साफ किया है कि Copilot अब भी काम के लिए उपयोगी है, लेकिन इसे अंतिम निर्णय लेने वाले सिस्टम के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। कंपनी की सलाह है कि यूजर्स Copilot से मिली जानकारी को एक संदर्भ के रूप में लें और महत्वपूर्ण मामलों में उसे जरूर जांचें। इसके साथ ही यह कदम संभावित कानूनी जोखिमों से बचने की रणनीति का भी हिस्सा है। दिलचस्प बात यह है कि इन बदलावों के बावजूद Microsoft Copilot को लगातार बेहतर बना रहा है और नए AI टूल्स पर काम कर रहा है, जिससे भविष्य में यह तकनीक और ज्यादा प्रभावी बन सके।

Continue Reading

Trending