टेक्नॉलॉजी
Mosquito Drone: जंग में अब दिखेगा मच्छर… लेकिन करेगा दुश्मन की बर्बादी! चीन का खुफिया ड्रोन सामने आया
Mosquito Drone: चीन ने आधुनिक युद्ध की परिभाषा को ही बदल देने वाली तकनीक इजाद कर ली है। नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ डिफेंस टेक्नोलॉजी (NUDT) की रोबोटिक्स लैब ने ऐसा ड्रोन बनाया है जो आकार में एक मच्छर जितना है लेकिन इसकी ताकत युद्ध में दुश्मनों को चौंका सकती है। इस ड्रोन को ‘मॉस्किटो ड्रोन’ कहा जा रहा है और यह इतनी छोटी संरचना वाला है कि इसे नंगी आंखों से पहचानना भी मुश्किल हो सकता है। लेकिन इसकी ताकत बेहद खतरनाक है।
दिखने में मच्छर, तकनीक में कमाल
इस ड्रोन की लंबाई मात्र 1.3 सेंटीमीटर है और इसमें दो छोटे पंख होते हैं जो मच्छर के पंखों जैसे दिखते हैं। इसके साथ तीन बेहद बारीक पैर भी होते हैं जो इसे ज़मीन पर टिके रहने में मदद करते हैं। खास बात यह है कि इसे एक स्मार्टफोन के जरिए भी कंट्रोल किया जा सकता है। इसकी बायोनिक डिजाइन इसे अन्य माइक्रो ड्रोनों से अलग बनाती है। इसका उद्देश्य किसी को मारना नहीं बल्कि दुश्मन की जासूसी करना और उनकी गतिविधियों की निगरानी करना है।
Chinese military unveils mosquito-sized drones that can perform battlefield missions | Christopher McFadden, Interesting Engineering
The drone features a pair of flapping “wings” and “legs” and is designed for covert military operations.
China’s National University of Defence… pic.twitter.com/V1VZz5w3Ft
— Owen Gregorian (@OwenGregorian) June 22, 2025
युद्ध के मैदान में छुपा हथियार
चीन की इस नई खोज का उपयोग खासतौर पर सैन्य और रक्षा क्षेत्रों में किया जाएगा। यह ड्रोन युद्ध के दौरान दुश्मनों के इलाके में गुप्त निगरानी और खोज अभियान चला सकता है। इसकी मदद से सैनिक बिना जोखिम के दुश्मन की स्थिति, संख्या और गतिविधियों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। यह राहत कार्यों में भी सहायक हो सकता है जैसे मलबे के नीचे दबे लोगों की खोज या किसी विषैली गैस की मौजूदगी का पता लगाना।
कुछ कमियाँ भी हैं मौजूद
हालांकि यह ड्रोन जितना आश्चर्यजनक है, उतनी ही इसमें कुछ सीमाएं भी हैं। इसकी बैटरी बहुत छोटी है, जिससे यह ज्यादा देर तक उड़ान नहीं भर सकता। साथ ही इसका पेलोड कैपेसिटी भी बहुत सीमित है यानी यह ज्यादा भारी सामान नहीं उठा सकता। इसकी उड़ान सीमा भी बहुत कम है। लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि इन कमियों को भविष्य में तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से दूर किया जा सकता है।
भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से और मजबूत होगा
इस ड्रोन में कई सेंसर लगे हैं जो हवा की गुणवत्ता, पानी की स्थिति और तापमान जैसी सूचनाएं भी जुटा सकते हैं। इसे और ज्यादा स्मार्ट बनाने के लिए AI फीचर्स जोड़े जा सकते हैं जिससे यह खुद निर्णय ले सकेगा कि उसे कब कहां जाना है या कब खतरा है। यह एक प्रोटोटाइप है और भविष्य में इसका अपग्रेड वर्जन आने की पूरी संभावना है। अगर यह ड्रोन पूरी तरह से विकसित हो गया तो यह दुनिया की सैन्य शक्तियों का चेहरा पूरी तरह बदल सकता है।
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Elon Musk ने एप्पल-गूगल साझेदारी पर किया भड़काऊ हमला, कहा ये है अनुचित शक्ति केंद्रीकरण
टेक्नोलॉजी जगत में एक बार फिर बड़ा विवाद छिड़ गया है। टेस्ला और xAI के संस्थापक Elon Musk ने एप्पल और गूगल के बीच हाल ही में हुई साझेदारी पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस गठजोड़ को “अनुचित शक्ति का केंद्रीकरण” करार दिया है। यह साझेदारी iPhone के वॉइस असिस्टेंट सिरी में गूगल के AI असिस्टेंट को शामिल करने को लेकर है। मस्क का कहना है कि गूगल पहले से ही एंड्रॉइड और क्रोम जैसी बड़ी प्लेटफॉर्म्स का मालिक है, ऐसे में एप्पल का AI गूगल को सौंपना उसकी ताकत को असहज रूप से बढ़ाएगा। उन्होंने इसे पूरी इंडस्ट्री के लिए नुकसानदेह भी बताया है।
Elon Musk की तीखी प्रतिक्रिया और xAI कंपनी की स्थिति
Elon Musk ने गूगल की इस साझेदारी की घोषणा के बाद X (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि गूगल के पास पहले से ही कई बड़े प्लेटफॉर्म हैं और एप्पल का AI भी उन्हें देना सही नहीं होगा। इससे टेक्नोलॉजी में एकाधिकार की समस्या और बढ़ेगी। यह ध्यान देने वाली बात है कि मस्क की अपनी AI कंपनी xAI भी AI के क्षेत्र में सक्रिय है। xAI ने कुछ साल पहले एजेंटिक AI Grok को लॉन्च किया था, जो AI वर्चुअल असिस्टेंट के तौर पर काम करता है। इसी वजह से मस्क के लिए यह गठजोड़ एक प्रतिद्वंद्वी की ताकत को बढ़ाने जैसा लग रहा है।
This seems like an unreasonable concentration of power for Google, given that the also have Android and Chrome
— Elon Musk (@elonmusk) January 12, 2026
Grok पर चल रहे विवाद और कानूनी झगड़े
Elon Musk की कंपनी xAI और एप्पल के बीच पहले से ही विवाद जारी है। मस्क ने एप्पल और OpenAI पर मुकदमा दायर किया है जिसमें उन्होंने Apple App Store की नीतियों को Grok के लिए हानिकारक बताया है। वहीं Grok AI को लेकर कई देशों में भी विवाद उठे हैं। इंडोनेशिया और मलेशिया ने Grok को अश्लील और आपत्तिजनक कंटेंट जनरेट करने के आरोप में बैन कर दिया है। भारत और यूरोपीय यूनियन की सरकारों ने भी Grok की कार्यप्रणाली पर आपत्ति जताई है। भारत सरकार की IT मंत्रालय ने Grok से हानिकारक कंटेंट हटाने के आदेश जारी किए, जिनका पालन xAI ने किया।
एप्पल-गूगल साझेदारी से iPhone यूजर्स को होंगे फायदे
जहां एक ओर यह साझेदारी विवादों का विषय बनी हुई है, वहीं लाखों iPhone यूजर्स के लिए यह एक बड़ी सुविधा साबित होगी। गूगल जेमिनी AI के सपोर्ट से सिरी पहले से भी ज्यादा स्मार्ट और सक्षम बन जाएगा। यूजर्स अब सिरी के जरिए कई नई सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे जैसे कि लाइव ट्रांसलेशन और बेहतर वॉइस कमांड। यह अपडेट iPhone, iPad और एप्पल के अन्य डिवाइसेज में उपलब्ध होगा। रिपोर्ट्स के अनुसार, एप्पल इस साझेदारी के लिए गूगल को हर साल लगभग 1 बिलियन डॉलर की राशि देगा। इससे दोनों टेक दिग्गजों को अपने AI क्षेत्र को मजबूत करने में मदद मिलेगी, लेकिन एलन मस्क जैसे विशेषज्ञों की चिंता भी बढ़ेगी कि कहीं इस गठजोड़ से बाजार में असंतुलन न पैदा हो जाए।
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