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Mehul Choksi Arrested: भारत के सामने कानूनी चुनौती! चोकसी की वापसी में लग सकता है लंबा वक्त

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Mehul Choksi Arrested: भारत के सामने कानूनी चुनौती! चोकसी की वापसी में लग सकता है लंबा वक्त

Mehul Choksi Arrested: फरार हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी को 12 अप्रैल को बेल्जियम में गिरफ्तार किया गया है. वह कैंसर का इलाज कराने के बहाने बेल्जियम गया था और वहां से स्विट्जरलैंड भागने की फिराक में था. लेकिन इससे पहले ही भारतीय जांच एजेंसियों ने उसे पकड़ लिया.

गिरफ्तारी पर खुशी लेकिन वापसी मुश्किल

पीएनबी घोटाले के व्हिसल ब्लोअर हरिप्रसाद एसवी ने चोकसी की गिरफ्तारी पर खुशी जताई. उन्होंने कहा कि भारत के जिन लोगों को चोकसी ने धोखा दिया उनके लिए यह एक राहत की खबर है. पर उन्होंने साथ ही कहा कि उसे भारत लाना आसान नहीं होगा.

यूरोप में होंगे बड़े वकील तैयार

हरिप्रसाद ने कहा कि चोकसी के पास बहुत पैसा है और वह यूरोप के सबसे बड़े वकीलों को हायर करेगा. जैसे विजय माल्या ने किया. पहले एंटीगुआ में भी उसे पकड़ा गया था लेकिन अपने वकीलों के जरिए वह निकल गया. अब बेल्जियम से लाना भी लंबा और मुश्किल काम होगा.

भारत की कानूनी चुनौती

हरिप्रसाद का कहना है कि जब किसी विदेशी देश से डील करनी होती है तो वहां के कानून और प्रक्रिया का पालन करना पड़ता है. इसमें समय लगता है. चोकसी के पास करोड़ों की संपत्ति है और दुनिया के सबसे महंगे वकीलों की फौज भी है. फिर भी उम्मीद है कि सरकार उसे वापस ला सकेगी.

चोकसी पर भारी घोटाले का आरोप

मेहुल चोकसी पर लगभग 14000 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप है. उसकी कंपनी गितांजलि जेम्स ने बैंक अधिकारियों से मिलीभगत कर फर्जी एलओयू और एफएलसी जारी किए. इससे पीएनबी को भारी नुकसान हुआ. ईडी और सीबीआई उसके खिलाफ कई चार्जशीट दाखिल कर चुके हैं.

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चेन्नई एयरपोर्ट पर घना कोहरा, तीन उड़ानों का रूट बदला, यात्रियों में भारी खलबली

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चेन्नई एयरपोर्ट पर घना कोहरा, तीन उड़ानों का रूट बदला, यात्रियों में भारी खलबली

चेन्नई एयरपोर्ट पर रविवार सुबह मौसम ने यात्री और एयरपोर्ट स्टाफ दोनों की मुश्किलें बढ़ा दीं। सुबह के समय घने कोहरे की वजह से कई घंटों तक उड़ानें बाधित रहीं। खासकर सुबह साढ़े पांच बजे से दृश्यता इतनी कम हो गई कि कई फ्लाइटों का रूट बदलना पड़ा। कोहरे ने न केवल उड़ानों की लैंडिंग और टेकऑफ़ प्रक्रिया को प्रभावित किया बल्कि यात्रियों के लिए भी परेशानी बढ़ा दी। चेन्नई आने वाली कम से कम तीन फ्लाइटों को नजदीकी हवाई अड्डों की ओर मोड़ दिया गया, जिससे हवाई यातायात प्रभावित हुआ।

दृश्यता 150 मीटर तक कम, उड़ानों का रूट बदला गया

मौसम विभाग और एयरपोर्ट अधिकारियों की मानें तो रविवार तड़के चेन्नई मीनांबक्कम एयरपोर्ट पर मध्यम से घना कोहरा छाया रहा। सुबह साढ़े पांच बजे तक दृश्यता लगभग 1500 मीटर थी, जो तेजी से गिरकर साढ़े छह बजे तक 350 मीटर रह गई। इसके बाद दृश्यता में और गिरावट आई और लगभग साढ़े सात बजे तक यह 150 मीटर तक पहुंच गई। इस कम दृश्यता के कारण कई उड़ानों में देरी हुई और कुछ फ्लाइटों को अन्य हवाई अड्डों की ओर रूट बदलने के लिए मजबूर होना पड़ा।

चेन्नई एयरपोर्ट पर घना कोहरा, तीन उड़ानों का रूट बदला, यात्रियों में भारी खलबली

उड़ानें तिरुचिरापल्ली और बेंगलुरु की ओर मोड़ी गईं

अधिकारियों ने बताया कि कोहरे के चलते कुआलालंपुर और हैदराबाद से आने वाली दो उड़ानों को तिरुचिरापल्ली की ओर डायवर्ट कर दिया गया। वहीं एक निजी एयरलाइन की फ्लाइट को बेंगलुरु वापस लौटना पड़ा। इससे यात्रियों को काफी असुविधा हुई और एयरपोर्ट पर तनाव की स्थिति बनी रही। हालांकि अधिकारियों ने बताया कि जैसे-जैसे दिन बढ़ा, दृश्यता में सुधार हुआ और उड़ानों का संचालन सामान्य होने लगा। यात्रियों से भी धैर्य रखने का अनुरोध किया गया।

मौसम में सुधार की उम्मीद, उड़ान संचालन जल्द होगा सामान्य

मौसम विभाग ने बताया कि दिन के दौरान कोहरे में कमी आने की संभावना है और दृश्यता सामान्य होने लगेगी। इससे एयरपोर्ट पर उड़ानों का संचालन जल्द ही सामान्य होने की उम्मीद है। हालांकि इस घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया कि घने कोहरे और खराब मौसम के चलते हवाई यातायात प्रभावित हो सकता है। एयरपोर्ट प्रशासन ने यात्रियों से सहयोग और धैर्य बनाए रखने की अपील की है ताकि वेड़ बेहतर तरीके से उड़ान संचालन सुनिश्चित किया जा सके।

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India-Bangladesh Relations: क्या पाकिस्तान उठा रहा है भारत-बांग्लादेश हालात का फायदा, संसद में उठा मुद्दा

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India-Bangladesh Relations: क्या पाकिस्तान उठा रहा है भारत-बांग्लादेश हालात का फायदा, संसद में उठा मुद्दा

India-Bangladesh Relations: संसद के बजट सत्र के दौरान शुक्रवार 6 फरवरी 2026 को लोकसभा में भारत और बांग्लादेश के द्विपक्षीय संबंधों को लेकर गंभीर सवाल उठे। जनता दल यूनाइटेड के सांसद गिरिधारी यादव, दिनेश चंद्र यादव और रामप्रीत मंडल ने केंद्र सरकार से पूछा कि क्या मौजूदा समय में भारत और बांग्लादेश के रिश्ते किसी संवेदनशील दौर से गुजर रहे हैं। सांसदों ने यह भी जानना चाहा कि अगर ऐसा है तो इसके पीछे क्या कारण हैं और इसका भारत के राष्ट्रीय हितों पर क्या असर पड़ सकता है। सवालों के दौरान यह आशंका भी जताई गई कि कहीं पाकिस्तान इस स्थिति का फायदा उठाने की कोशिश तो नहीं कर रहा है। इसके साथ ही बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों विशेषकर हिंदुओं के खिलाफ हिंसा और सार्वजनिक हत्याओं की खबरों को लेकर सरकार के रुख पर भी स्पष्ट जवाब मांगा गया।

क्या पाकिस्तान उठा सकता है हालात का फायदा

जदयू सांसदों ने विदेश मंत्रालय से यह भी पूछा कि भारत-बांग्लादेश संबंधों में यदि किसी तरह की नरमी या तनाव है तो क्या पाकिस्तान जैसे देश इसका रणनीतिक लाभ उठाने का प्रयास कर रहे हैं। सांसदों का कहना था कि पड़ोसी देशों के बीच किसी भी तरह की अस्थिरता का सीधा असर राष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है। इसके अलावा उन्होंने यह भी सवाल किया कि बांग्लादेश में अंतरिम सरकार के गठन के बाद अल्पसंख्यकों के खिलाफ सामने आई घटनाओं पर भारत सरकार ने क्या कोई औपचारिक बातचीत की है। सांसदों ने चिंता जताई कि अगर समय रहते इन मुद्दों को गंभीरता से नहीं लिया गया तो क्षेत्रीय स्थिरता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

India-Bangladesh Relations: क्या पाकिस्तान उठा रहा है भारत-बांग्लादेश हालात का फायदा, संसद में उठा मुद्दा

विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह का जवाब

सवालों का जवाब देते हुए विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने लोकसभा को बताया कि भारत और बांग्लादेश पड़ोसी देश होने के साथ-साथ गहरे ऐतिहासिक, भौगोलिक, सांस्कृतिक, भाषाई और सामाजिक संबंध साझा करते हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के रिश्ते लोगों के विकास और आपसी सहयोग पर आधारित हैं। मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत और बांग्लादेश के बीच कई संस्थागत द्विपक्षीय तंत्र सक्रिय हैं जिनके तहत नियमित संवाद, बैठकें और आदान-प्रदान होते रहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक, स्थिर, शांतिपूर्ण और समावेशी बांग्लादेश का समर्थन करता है और यह संदेश अंतरिम सरकार को सभी प्रासंगिक मंचों पर दिया गया है। मंत्री ने जोर देकर कहा कि बांग्लादेश के साथ भारत के संबंध किसी तीसरे देश के साथ उसके रिश्तों से स्वतंत्र हैं।

अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर भारत की सख्त नजर

विदेश राज्य मंत्री ने सदन को बताया कि भारत सरकार बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सजग है। यह मुद्दा बांग्लादेशी अधिकारियों के समक्ष कई बार उच्चतम स्तर पर उठाया जा चुका है। उन्होंने जानकारी दी कि प्रधानमंत्री ने 4 अप्रैल 2025 को मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के साथ बैठक में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया था। इसके अलावा विदेश मंत्री ने 16 फरवरी 2025 को विदेश सलाहकार तौहीद हुसैन के साथ मुलाकात में भी इस विषय पर चर्चा की थी। मंत्री ने कहा कि भारत सरकार बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों से जुड़ी हर रिपोर्ट पर लगातार नजर रख रही है। साथ ही उन्होंने यह भी दोहराया कि बांग्लादेश के सभी नागरिकों, जिनमें धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यक भी शामिल हैं, के जीवन, स्वतंत्रता और कल्याण की रक्षा करना वहां की सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

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Manipur Violence: मणिपुर में नई सरकार के 24 घंटे बाद भड़की हिंसा, चूराचांदपुर में तनाव फैल गया

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Manipur Violence: मणिपुर में नई सरकार के 24 घंटे बाद भड़की हिंसा, चूराचांदपुर में तनाव फैल गया

Manipur Violence: मणिपुर के चूराचांदपुर में उपमुख्यमंत्रियों नेमचा किपगेन और लोसी दीखो के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान फिर हिंसा भड़क उठी है। इस दौरान सुरक्षाबलों और भीड़ के बीच झड़पें हुईं। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस का उपयोग किया। मणिपुर में पिछले कई वर्षों से जारी हिंसा के बीच केंद्र सरकार ने पिछले साल राष्ट्रपति शासन लगाया था। इसके बाद हाल ही में युमनाम खेमचंद सिंह की अगुवाई में नई सरकार बनी थी।

सरकार गठन के 24 घंटे बाद ही हिंसा का विस्फोट

मणिपुर में राष्ट्रपति शासन हटने और युमनाम खेमचंद सिंह की नई सरकार के गठन के मात्र 24 घंटे बाद ही हिंसा की स्थिति पैदा हो गई। कूकी समुदाय के समूहों ने चूराचांदपुर में सड़कों पर उतरकर अपने समुदाय के विधायकों को सरकार गठन में भाग लेने से मना किया। उन्होंने पूर्ण बंद और प्रदर्शन का आह्वान भी किया। कई जगहों से फायरिंग की खबरें भी मिलीं। कूकी-जॉ क्षेत्र में संयुक्त मोर्चा 7 ने 12 घंटे के बंद का एलान किया है।

Manipur Violence: मणिपुर में नई सरकार के 24 घंटे बाद भड़की हिंसा, चूराचांदपुर में तनाव फैल गया

नेमचा किपगेन की नियुक्ति से कूकी-जॉ समुदाय में नाराजगी

हिंसा की मुख्य वजह उपमुख्यमंत्री पद पर नेमचा किपगेन की नियुक्ति को लेकर कूकी-जॉ समुदाय में रोष है। कूकी-जॉ विधायक की सरकार में भागीदारी से समुदाय में असंतोष पनपा है, जिससे चूराचांदपुर जिले में नए सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। तुइबोंग इलाके में तनावपूर्ण स्थिति बनी रही, जिसके चलते प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच तीव्र झड़पें हुईं। स्थानीय प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए हैं।

सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, स्थिति पर कड़ी नजर

घटना के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है ताकि स्थिति और बिगड़ने से रोका जा सके। प्रशासन ने सभी संबंधित पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। वहीं, तनाव की वजह से स्थानीय लोग दहशत में हैं और अपने घरों में सीमित रहना पसंद कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में लेने के लिए सभी संभव कदम उठाए जा रहे हैं। आने वाले समय में हालात सुधारने के लिए राजनीतिक स्तर पर भी प्रयास जारी हैं।

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