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1st July से बदल जाएंगे कई जरूरी नियम, PAN से लेकर रेलवे टिकट तक होगा सीधा असर
1st July 2025 से अगर आप नया PAN कार्ड बनवाना चाहते हैं तो अब सिर्फ जन्म प्रमाण पत्र या अन्य आईडी कार्ड से काम नहीं चलेगा। आधार कार्ड अनिवार्य कर दिया गया है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के नए नियमों के तहत अब पैन कार्ड के लिए आधार नंबर का सत्यापन अनिवार्य होगा। यह फैसला धोखाधड़ी और दोहरे पैन कार्ड से जुड़ी समस्याओं पर रोक लगाने के उद्देश्य से लिया गया है। इसलिए अगर आपने अभी तक आधार कार्ड नहीं बनवाया है या उसमें कोई गड़बड़ी है तो जल्द से जल्द उसे अपडेट करवा लें।
तत्काल टिकट बुकिंग में भी होगा आधार और OTP जरूरी
रेलयात्रियों के लिए एक बड़ा बदलाव 1 जुलाई से लागू होने जा रहा है। अब IRCTC वेबसाइट या मोबाइल ऐप से तत्काल टिकट बुकPAN PAN करने के लिए आधार वेरीफिकेशन जरूरी होगा। इसके अलावा, 15 जुलाई से जब भी आप तत्काल टिकट बुक करेंगे तो आपके मोबाइल पर OTP आएगा, जिसे डालने के बाद ही टिकट कन्फर्म होगा। PRS यानी रेलवे स्टेशन पर मौजूद काउंटर से भी जब आप टिकट बुक कराएंगे तब भी OTP अनिवार्य होगा। इसका उद्देश्य फर्जी बुकिंग रोकना और टिकट प्रणाली को पारदर्शी बनाना है।
GST रिटर्न भरने के नियमों में होगा बड़ा बदलाव
जीएसटी रिटर्न भरने वालों के लिए भी जुलाई से एक कड़ा नियम लागू हो रहा है। GST नेटवर्क (GSTN) ने 7 जून 2025 को घोषणा की थी कि मासिक भुगतान फॉर्म GSTR-3B अब जुलाई से एडिट नहीं किया जा सकेगा। यानी अगर आपने कोई गलती कर दी तो उसे सुधारने का विकल्प नहीं मिलेगा। साथ ही, तीन साल की समयसीमा के बाद कोई भी टैक्सपेयर अपना रिटर्न फाइल नहीं कर पाएगा। इसलिए अब समय पर और ध्यान से रिटर्न भरना अनिवार्य हो गया है।
HDFC के क्रेडिट कार्ड यूजर्स के लिए भी बदलेगा सिस्टम
अगर आपके पास HDFC बैंक का क्रेडिट कार्ड है तो ये खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। 1 जुलाई से बैंक अपने रिवॉर्ड प्रोग्राम और शुल्कों में बड़ा बदलाव करने जा रहा है। अब ₹10,000 से ज्यादा के हर महीने के खर्च पर 1% शुल्क लगेगा। इसके अलावा, अगर आप ₹50,000 से ज्यादा का यूटिलिटी बिल, ₹10,000 से ज्यादा ऑनलाइन गेमिंग, ₹15,000 से ज्यादा का फ्यूल या थर्ड पार्टी ऐप से एजुकेशन पेमेंट करते हैं तो भी 1% एक्स्ट्रा फीस लगेगी। यानी कार्ड का स्मार्ट इस्तेमाल अब और जरूरी हो जाएगा।
बदलाव आपके जीवन को सीधे प्रभावित करेंगे
ये सभी बदलाव आम आदमी के दैनिक जीवन को प्रभावित करने वाले हैं। चाहे आप पैन कार्ड बनवा रहे हों, ट्रेन से सफर कर रहे हों या फिर अपने बिजनेस के लिए जीएसटी रिटर्न भर रहे हों, हर जगह आपको इन नए नियमों का पालन करना होगा। खासतौर पर टेक्नोलॉजी आधारित सेवाओं में OTP और आधार वेरीफिकेशन को लेकर सरकार अब कोई ढील नहीं देना चाहती। इसलिए बेहतर होगा कि आप समय रहते इन नियमों की जानकारी ले लें और खुद को अपडेट रखें।
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भारतीय शेयर बाजार में सेंसेक्स और निफ्टी में भारी तेजी के पीछे की वजहें क्या हैं
भारतीय शेयर बाजार में सोमवार, 23 फरवरी को जबरदस्त तेजी देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 600 अंक से अधिक उछल गया और निफ्टी 50 ने 25,750 के स्तर को पार कर लिया। निवेशकों में खरीदारी की भावना साफ नजर आ रही है। कारोबारी दिन की शुरुआत में इस तेजी ने निवेशकों को भरोसा दिया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह तेजी कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारणों से प्रेरित है।
अमेरिका से मिली सकारात्मक खबर का असर
वैश्विक स्तर पर अमेरिका से आई खबर ने भारतीय बाजार को मजबूती दी है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए इंपोर्ट टैरिफ को रद्द करने का फैसला किया था। इसके बाद यूरोप और अमेरिकी बाजार में तेजी देखने को मिली। विशेषज्ञों का कहना है कि इस कदम से अंतरराष्ट्रीय मांग और सप्लाई चेन से जुड़े सेक्टरों को सकारात्मक संकेत मिला। हालांकि बाद में ट्रंप ने टैरिफ को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने का ऐलान किया, लेकिन निवेशकों का भरोसा घरेलू बाजार पर बना रहा। टेक्सटाइल और एक्सपोर्ट सेक्टर की कंपनियों के शेयर 2 से 8 प्रतिशत तक उछल गए।

वैश्विक बाजारों की मजबूती
वैश्विक बाजारों में आई तेजी ने भी भारतीय बाजार को सहारा दिया। एशियाई बाजारों में कॉस्पी 1.5 फीसदी की तेजी के साथ खुला। अमेरिका में शुक्रवार को लगभग 1 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली थी। हालांकि चीन और जापान में छुट्टी होने की वजह से वहां आज कारोबार बंद है। निवेशक वैश्विक बाजारों से प्रेरणा लेकर घरेलू बाजार में सक्रिय रहे। विशेषज्ञ मानते हैं कि वैश्विक बाजारों में स्थिरता और सकारात्मक संकेत भारतीय निवेशकों के लिए भरोसे का संकेत हैं।
क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट
सप्ताह की शुरुआत में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भी बाजार की तेजी का एक अहम कारण रही। अमेरिका और ईरान के बीच न्यूक्लियर बातचीत के तीसरे दौर की संभावना ने भू-राजनीतिक तनाव को कम करने के संकेत दिए। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 75 सेंट या 1.05 फीसदी गिरकर 71.01 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में यह नरमी भारत जैसे बड़े आयातक देशों के लिए राहतभरी है। इससे महंगाई पर दबाव कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।
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FIIs Investment February 2026: फरवरी में विदेशी निवेशकों ने दिखाया भरोसा, भारतीय शेयर बाजार में उठा नई उम्मीद
FIIs Investment February 2026: भारतीय शेयर बाजार में हाल के महीनों में विदेशी निवेशकों (FIIs) की बिकवाली के बाद फरवरी 2026 में एक राहत भरी खबर सामने आई है। आंकड़ों के अनुसार, अब तक विदेशी संस्थागत निवेशकों ने लगभग 16,912 करोड़ रुपये का निवेश किया है। इससे पहले पिछले कुछ महीनों में विदेशी निवेशकों ने बाजार से जमकर निकासी की थी। विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियों के तिमाही नतीजों में सुधार और आर्थिक संकेतकों की मजबूती से इस भरोसे को बढ़ावा मिला है। इस बदलाव से निवेशकों के बीच सकारात्मक माहौल देखने को मिल रहा है।
फरवरी में विदेशी निवेशकों की खरीदारी
फरवरी महीने में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में मजबूत खरीदारी दिखाई है। आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 16,912 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। इसके विपरीत, जनवरी में विदेशी निवेशकों ने करीब 35,962 करोड़ रुपये बाजार से बाहर निकाले थे। वर्ष 2026 की शुरुआत से शुद्ध निकासी लगभग 19,050 करोड़ रुपये रही। फरवरी में आए इस बदलाव ने बाजार में उम्मीद जगाई है और घरेलू निवेशकों का भी भरोसा पहले से बढ़ा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कंपनियों की ग्रोथ लगातार बेहतर बनी रहती है तो यह ट्रेंड जारी रह सकता है।

विदेशी निवेशक किन सेक्टरों में कर रहे हैं भरोसा
विदेशी निवेशकों की गतिविधियां पूरे बाजार में समान नहीं रही। आईटी सेक्टर में एंथ्रोपिक शॉक का असर देखा गया, जिससे यहां विदेशी निवेशकों ने तेजी से बिकवाली की। वहीं, वित्तीय सेवाओं और कैपिटल गुड्स सेक्टर में खरीदारी का माहौल बना रहा। इन सेक्टरों को विदेशी निवेशकों का भरोसा मिला और इनके शेयरों में समर्थन बना। इससे संकेत मिलता है कि विदेशी निवेशक पूरे बाजार के बजाय चुनिंदा सेक्टरों पर ध्यान केंद्रित कर अपनी रणनीति बना रहे हैं।
निवेशकों के लिए आगे का नजरिया
विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी निवेशकों का भरोसा कंपनियों के नतीजों और आर्थिक स्थिरता पर निर्भर रहेगा। अगर तिमाही नतीजे मजबूत आते रहे और बाजार की स्थितियां सकारात्मक बनीं तो विदेशी निवेशक और घरेलू निवेशक दोनों ही भारतीय शेयर बाजार में निवेश बनाए रख सकते हैं। फरवरी का यह ट्रेंड निवेशकों के लिए एक आश्वस्त संकेत है कि भारतीय बाजार में सुधार के संकेत दिखाई दे रहे हैं। साथ ही यह बदलाव विदेशी निवेशकों के नजरिए और रणनीति में बदलाव का भी संकेत देता है।
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SIP Investment Returns Calculation: 20 साल में सिर्फ 1000 रुपये मासिक SIP से बन सकती है करोड़ों की संपत्ति
SIP Investment Returns Calculation: बदलते समय में सिर्फ पैसे कमाना ही काफी नहीं है, बल्कि उन्हें सही जगह निवेश करना भी जरूरी हो गया है। भारतीय निवेशकों के बीच म्यूचुअल फंड में SIP (Systematic Investment Plan) काफी लोकप्रिय विकल्प बन गया है। SIP की खासियत यह है कि इसमें निवेशक हर महीने छोटी-छोटी रकम निवेश करके लंबी अवधि में बड़ा फंड तैयार कर सकते हैं। इस योजना का मुख्य फायदा चक्रवृद्धि (Compounding) के जरिए पैसे की बढ़ोतरी है।
1000 रुपये की मासिक SIP से 20 साल में बन सकता है मजबूत फंड
यदि कोई निवेशक हर महीने 1000 रुपये की SIP करता है और इसे लगातार 20 वर्षों तक जारी रखता है, तो अनुमानित 12 प्रतिशत रिटर्न के आधार पर उसका कुल फंड लगभग 9.19 लाख रुपये तक पहुँच सकता है। इस दौरान निवेशक की कुल जमा राशि केवल 2.40 लाख रुपये होगी, जबकि लाभ के रूप में लगभग 6.79 लाख रुपये का फायदा मिलेगा। यह चक्रवृद्धि की शक्ति और लंबी अवधि के अनुशासित निवेश को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।

2000 रुपये की SIP से 20 साल में संपत्ति दोगुनी
अगर कोई निवेशक हर महीने 2000 रुपये की SIP करता है और इसे 20 साल तक जारी रखता है, तो अनुमानित 12 प्रतिशत रिटर्न के आधार पर उसके पास करीब 18.39 लाख रुपये का फंड तैयार हो सकता है। इस दौरान कुल निवेश 4.80 लाख रुपये होगा, जबकि संभावित लाभ लगभग 13.59 लाख रुपये तक पहुंच सकता है। यह उदाहरण दिखाता है कि मासिक निवेश में वृद्धि करने से लंबी अवधि में लाभ दोगुना या उससे अधिक हो सकता है।
3000 रुपये की SIP से 20 वर्षों में तैयार होगा बड़ा कॉर्पस
हर महीने 3000 रुपये की SIP निवेश करने से और इसे लगातार 20 साल तक बनाए रखने पर अनुमानित 12 प्रतिशत रिटर्न के आधार पर कुल कॉर्पस लगभग 27.59 लाख रुपये तक पहुंच सकता है। इस दौरान निवेशक की कुल जमा राशि 7.20 लाख रुपये होगी, जबकि संभावित कमाई करीब 20.39 लाख रुपये तक हो सकती है। यह दिखाता है कि सिस्टमेटिक निवेश और धैर्य के साथ छोटे निवेश भी लंबी अवधि में बड़ी संपत्ति में बदल सकते हैं।
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