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Manipur Violence: मणिपुर में नई सरकार के 24 घंटे बाद भड़की हिंसा, चूराचांदपुर में तनाव फैल गया

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Manipur Violence: मणिपुर में नई सरकार के 24 घंटे बाद भड़की हिंसा, चूराचांदपुर में तनाव फैल गया

Manipur Violence: मणिपुर के चूराचांदपुर में उपमुख्यमंत्रियों नेमचा किपगेन और लोसी दीखो के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान फिर हिंसा भड़क उठी है। इस दौरान सुरक्षाबलों और भीड़ के बीच झड़पें हुईं। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस का उपयोग किया। मणिपुर में पिछले कई वर्षों से जारी हिंसा के बीच केंद्र सरकार ने पिछले साल राष्ट्रपति शासन लगाया था। इसके बाद हाल ही में युमनाम खेमचंद सिंह की अगुवाई में नई सरकार बनी थी।

सरकार गठन के 24 घंटे बाद ही हिंसा का विस्फोट

मणिपुर में राष्ट्रपति शासन हटने और युमनाम खेमचंद सिंह की नई सरकार के गठन के मात्र 24 घंटे बाद ही हिंसा की स्थिति पैदा हो गई। कूकी समुदाय के समूहों ने चूराचांदपुर में सड़कों पर उतरकर अपने समुदाय के विधायकों को सरकार गठन में भाग लेने से मना किया। उन्होंने पूर्ण बंद और प्रदर्शन का आह्वान भी किया। कई जगहों से फायरिंग की खबरें भी मिलीं। कूकी-जॉ क्षेत्र में संयुक्त मोर्चा 7 ने 12 घंटे के बंद का एलान किया है।

Manipur Violence: मणिपुर में नई सरकार के 24 घंटे बाद भड़की हिंसा, चूराचांदपुर में तनाव फैल गया

नेमचा किपगेन की नियुक्ति से कूकी-जॉ समुदाय में नाराजगी

हिंसा की मुख्य वजह उपमुख्यमंत्री पद पर नेमचा किपगेन की नियुक्ति को लेकर कूकी-जॉ समुदाय में रोष है। कूकी-जॉ विधायक की सरकार में भागीदारी से समुदाय में असंतोष पनपा है, जिससे चूराचांदपुर जिले में नए सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। तुइबोंग इलाके में तनावपूर्ण स्थिति बनी रही, जिसके चलते प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच तीव्र झड़पें हुईं। स्थानीय प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए हैं।

सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, स्थिति पर कड़ी नजर

घटना के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है ताकि स्थिति और बिगड़ने से रोका जा सके। प्रशासन ने सभी संबंधित पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। वहीं, तनाव की वजह से स्थानीय लोग दहशत में हैं और अपने घरों में सीमित रहना पसंद कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में लेने के लिए सभी संभव कदम उठाए जा रहे हैं। आने वाले समय में हालात सुधारने के लिए राजनीतिक स्तर पर भी प्रयास जारी हैं।

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UP News: एक लाख गुमशुदगी और कार्रवाई सिर्फ 9700 मामलों में हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी

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UP News: एक लाख गुमशुदगी और कार्रवाई सिर्फ 9700 मामलों में हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी

UP News: उत्तर प्रदेश में लगातार लोगों के लापता होने की घटनाएं सामने आ रही हैं। परिजनों द्वारा थानों में शिकायतें दर्ज कराई जा रही हैं, लेकिन बड़ी संख्या में मामलों में पुलिस की कार्रवाई न के बराबर बताई जा रही है। इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने बुधवार को स्वतः संज्ञान लिया। कोर्ट ने राज्य में तेजी से बढ़ रहे लापता व्यक्तियों के मामलों को जनहित से जुड़ा मानते हुए एक जनहित याचिका दर्ज की। अदालत के सामने जो आंकड़े रखे गए, उन्होंने न केवल न्यायपालिका को बल्कि पूरे सिस्टम को झकझोर कर रख दिया। बीते दो वर्षों में एक लाख से अधिक लोग लापता हुए, लेकिन बहुत कम मामलों में ही प्रभावी कार्रवाई की गई।

हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी और चिंता

सुनवाई के दौरान लखनऊ बेंच ने पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए। न्यायमूर्ति अब्दुल मोइन और न्यायमूर्ति बबीता रानी की खंडपीठ ने कहा कि लापता व्यक्तियों से जुड़े मामलों में तुरंत और संवेदनशील कार्रवाई की आवश्यकता होती है, लेकिन अधिकारियों का रवैया हैरान करने वाला है। अदालत ने इन आंकड़ों को चौंकाने वाला बताया और साफ शब्दों में कहा कि यह स्थिति बेहद गंभीर है। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि मामले को दोबारा अगले ही दिन सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए ताकि प्रशासन से जवाबदेही तय की जा सके। अदालत का मानना है कि इस तरह की लापरवाही समाज में असुरक्षा की भावना को बढ़ाती है।

UP News: एक लाख गुमशुदगी और कार्रवाई सिर्फ 9700 मामलों में हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी

एक लाख से अधिक शिकायतें और बेहद कम कार्रवाई

यह पूरा मामला एक याचिका के दौरान सामने आया, जिसे विक्रम प्रसाद नामक व्यक्ति ने दायर किया था। याचिकाकर्ता का आरोप था कि उनका बेटा जुलाई 2024 में लापता हो गया और पुलिस ने उसे ढूंढने में कोई रुचि नहीं दिखाई। इसी याचिका की सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। हलफनामे के अनुसार, 1 जनवरी 2024 से 18 जनवरी 2026 के बीच राज्य में लगभग 1 लाख 8 हजार 300 लापता व्यक्तियों की शिकायतें दर्ज की गईं। लेकिन इनमें से केवल करीब 9 हजार 700 मामलों में ही पुलिस ने किसी तरह की कार्रवाई शुरू की। बाकी मामलों में न तो जांच तेज की गई और न ही कोई ठोस कदम उठाया गया।

जनहित याचिका दर्ज करने का आदेश और आगे की सुनवाई

इन तथ्यों को देखते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस के सुस्त रवैये पर नाराजगी जाहिर की। अदालत ने माना कि यह सिर्फ एक व्यक्ति का मामला नहीं है, बल्कि पूरे राज्य से जुड़ा गंभीर जनहित का मुद्दा है। इसी कारण कोर्ट ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि इस मामले को “इन रे मिसिंग पर्सन्स इन द स्टेट” शीर्षक से जनहित याचिका के रूप में दर्ज किया जाए। साथ ही अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह से विस्तृत जवाबी हलफनामा भी मांगा गया है। कोर्ट ने साफ किया कि इस मामले में जिम्मेदारी तय की जाएगी और लापता लोगों की तलाश के लिए ठोस व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। अब इस मामले की अगली सुनवाई गुरुवार को होगी, जिस पर पूरे प्रदेश की निगाहें टिकी हुई हैं।

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Alankar Agnihotri: इस्तीफे के बाद बरेली पहुंचे अलंकार अग्निहोत्री, सरकार को दिया बड़ा अल्टीमेटम

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Alankar Agnihotri: इस्तीफे के बाद बरेली पहुंचे अलंकार अग्निहोत्री, सरकार को दिया बड़ा अल्टीमेटम

इस्तीफे के बाद पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट और पीसीएस अधिकारी Alankar Agnihotri मंगलवार को बरेली पहुंचे। बरेली पहुंचते ही उन्होंने सरकार और प्रशासन के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया। लाल फाटक स्थित परशुराम धाम पर उनके समर्थकों ने जोरदार स्वागत किया। हाथों में फूल मालाएं और बैनर लिए समर्थक देखो देखो शेर आया के नारे लगाते नजर आए। माहौल पूरी तरह राजनीतिक संदेशों और नारों से गूंजता रहा। मीडिया से बातचीत में अलंकार अग्निहोत्री ने अपने इस्तीफे के बाद पहली बार खुलकर प्रतिक्रिया दी और कहा कि वह दबाव और डर की राजनीति से पीछे हटने वाले नहीं हैं।

आरोप पत्र को बताया हास्यास्पद, कार्रवाई से नहीं डरने का दावा

मीडिया से बात करते हुए Alankar Agnihotri ने सरकार द्वारा दिए गए आरोप पत्र को पूरी तरह हास्यास्पद करार दिया। उन्होंने कहा कि अगर अपने हक और अपने समाज की बात करना गुनाह है तो वह यह जुर्म बार बार करेंगे। उन्होंने साफ कहा कि किसी भी तरह की कार्रवाई या नोटिस से उन्हें डर नहीं लगता। उनके अनुसार आरोप पत्र में कई तथ्य गलत हैं और सच्चाई को तोड़ मरोड़ कर पेश किया गया है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अपनी बात रखना अपराध नहीं हो सकता। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह अपने लीगल एडवाइजर से सलाह लेकर आरोप पत्र का कानूनी जवाब देंगे और इस लड़ाई को अदालत तक ले जाने से पीछे नहीं हटेंगे।

Alankar Agnihotri: इस्तीफे के बाद बरेली पहुंचे अलंकार अग्निहोत्री, सरकार को दिया बड़ा अल्टीमेटम

एससी एसटी एक्ट पर बड़ा बयान, 7 फरवरी तक सरकार को अल्टीमेटम

पूर्व पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने एससी एसटी एक्ट को काला कानून बताते हुए केंद्र सरकार को 7 फरवरी तक का अल्टीमेटम दे दिया। उन्होंने कहा कि यह कानून समाज में भेदभाव को बढ़ावा दे रहा है और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। उन्होंने मांग की कि संसद का विशेष सत्र बुलाकर इस कानून को समाप्त किया जाए। अलंकार अग्निहोत्री ने चेतावनी दी कि अगर 7 फरवरी तक सरकार ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो वह दिल्ली कूच करेंगे। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन सिर्फ व्यक्तिगत नहीं होगा बल्कि देशव्यापी रूप लेगा। उनके मुताबिक यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति की नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की लड़ाई है।

सनातन परंपरा और राजनीति पर तीखा प्रहार

अलंकार अग्निहोत्री ने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर ऐसे कानून बना रही है जिससे समाज बंटे और लोगों के बीच तनाव बढ़े। उन्होंने कहा कि जब कोई इसके खिलाफ आवाज उठाता है तो उसे दबाने की कोशिश की जाती है। प्रयागराज में शंकराचार्य से जुड़ी मारपीट की घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने प्रशासन से सार्वजनिक माफी की मांग की। उन्होंने कहा कि बटुकों की शिखा पकड़कर मारपीट करना बेहद शर्मनाक है और यह सनातन परंपरा का अपमान है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सनातन परंपरा के साथ ऐसा व्यवहार जारी रहा तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। राजनीतिक दलों और नेताओं पर हमला बोलते हुए उन्होंने उन्हें रीढ़विहीन बताया और कहा कि आज के नेता बिना ऊपर से निर्देश मिले कोई फैसला नहीं ले पाते।

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Allahabad High Court ने बुलडोजर तोड़फोड़ पर कहा, न्यायपालिका के अधिकारों का है उल्लंघन

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Allahabad High Court ने बुलडोजर तोड़फोड़ पर कहा, न्यायपालिका के अधिकारों का है उल्लंघन

Allahabad High Court ने उत्तर प्रदेश में बुलडोजर के माध्यम से लगातार संपत्तियों के तोड़े जाने पर गंभीर नाराजगी व्यक्त की है। यह नाराजगी सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद जारी अतिक्रमण तोड़फोड़ पर है। हाईकोर्ट ने कहा कि कई मामलों में अपराध होते ही तत्काल मकान के निवासियों को तोड़फोड़ के नोटिस भेजे जाते हैं और फिर कानूनी प्रक्रियाओं का हवाला देते हुए संपत्ति को ध्वस्त कर दिया जाता है। अदालत ने इस कृत्य को न केवल अवैध बल्कि न्यायिक शक्तियों के दुरुपयोग के रूप में देखा है।

यह टिप्पणियां इलाहाबाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के न्यायमंडल, न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन ने हामिरपुर के कुछ निवासियों द्वारा दायर याचिका की सुनवाई के दौरान कीं। याचिकाकर्ताओं ने अपनी संपत्तियों को बुलडोजर कार्रवाई से बचाने के लिए न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की थी। अदालत ने याचिकाकर्ताओं के पक्ष में खड़े होकर कहा कि राज्य में न्यायपालिका के आदेशों की अवहेलना कर संपत्तियों को तोड़ा जा रहा है, जो किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद भी जारी है फौरी तोड़फोड़ की घटनाएं

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद उत्तर प्रदेश में कई स्थानों पर दंडात्मक तोड़फोड़ की घटनाएं जारी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया था कि संपत्तियों को दंड स्वरूप तोड़ना शक्तियों के पृथक्करण का उल्लंघन है, क्योंकि दंड देने का अधिकार केवल न्यायपालिका के पास है। इसके बावजूद ऐसे तोड़फोड़ कार्यों को कानूनी प्रक्रिया का नाम देकर जारी रखा जा रहा है, जो संवैधानिक रूप से गलत है और सामाजिक न्याय के लिए खतरा है।

कानूनी और संवैधानिक मूल्यों के प्रति अदालत का मजबूत रुख

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि किसी भी कार्रवाई को संविधान और कानून के दायरे में रहकर ही किया जाना चाहिए। दंड स्वरूप संपत्तियों को तोड़ना केवल अपराधियों को न्याय देना नहीं बल्कि एक सख्त और गैरकानूनी कदम है। अदालत ने सरकार और प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करें और किसी भी प्रकार की अवैध तोड़फोड़ को रोकें। कोर्ट ने यह संदेश भी दिया है कि न्यायपालिका की भूमिका और शक्तियों का सम्मान जरूरी है, अन्यथा संविधान की मूल भावना को खतरा होगा।

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