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Malegaon Bomb Blast Case: साध्वी प्रज्ञा का पलटवार! बरी होने के बाद बोलीं, हिंदू आतंकवाद का झूठ बेनकाब हुआ

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2008 के Malegaon Bomb Blast Case में 17 साल बाद आखिरकार फैसला आया है। इस केस में साध्वी प्रज्ञा ठाकुर समेत सभी 7 आरोपियों को कोर्ट ने बरी कर दिया है। मुंबई की एनआईए विशेष अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता और आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिले। इस फैसले के बाद साध्वी प्रज्ञा भावुक हो गईं और उन्होंने कोर्ट में रोते हुए कहा कि 13 दिन की यातना और 17 साल की बदनामी का अंत हुआ है।

साध्वी प्रज्ञा का कांग्रेस पर वार

कोर्ट के फैसले के बाद साध्वी प्रज्ञा ने सोशल मीडिया पर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने लिखा कि जो लोग भगवा को आतंकवाद से जोड़ते थे आज उन्हें मुंह की खानी पड़ी है। उन्होंने लिखा कि यह फैसले सनातन, हिंदुत्व और भगवा की विजय है। साध्वी ने कांग्रेस को ‘भगवा आतंकवाद’ शब्द गढ़ने वाला बताया और कहा कि ऐसे लोगों को अब शर्म आनी चाहिए।

जेल से लेकर संसद तक का सफर

साध्वी प्रज्ञा का जीवन एक सन्यासी से जेल और फिर संसद तक का रहा है। उन्हें अक्टूबर 2008 में इस केस में गिरफ्तार किया गया था। जांच में सामने आया था कि धमाके में इस्तेमाल की गई बाइक उनके नाम पर रजिस्टर्ड थी। हालांकि 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी थी और 2019 में वे भोपाल से बीजेपी सांसद बनीं। कोर्ट से बरी होने के बाद उन्होंने अपने संघर्ष की कहानी साझा करते हुए कहा कि भगवा वस्त्र पहनने वालों को आतंकवादी बना दिया गया था।

मालेगांव धमाका: क्या था मामला

29 सितंबर 2008 को महाराष्ट्र के मालेगांव में एक मस्जिद के पास पार्क की गई बाइक में धमाका हुआ था। इस धमाके में 6 लोगों की मौत हो गई थी और 100 से ज्यादा घायल हुए थे। शुरुआती जांच के बाद मामला एटीएस के पास गया और फिर एनआईए ने इसकी जिम्मेदारी ली। इस मामले ने तब राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया था जब पहली बार हिंदू संगठनों के लोगों पर आतंकवाद का आरोप लगा।

अब क्या होगा राजनीतिक असर

इस फैसले के बाद भाजपा और अन्य हिंदू संगठनों को एक बड़ा नैतिक बल मिला है। वहीं कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को अपने पुराने बयानों का जवाब देना पड़ सकता है। साध्वी प्रज्ञा का बरी होना केवल एक कानूनी फैसला नहीं बल्कि देश की राजनीति पर भी गहरा असर डाल सकता है। अब आने वाले चुनावों में इस फैसले को लेकर बयानबाज़ी तेज होने की संभावना है।

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