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YouTube Shorts में बड़ा बदलाव! क्या डिसलाइक बटन गायब होने वाला है, यूजर्स में हलचल

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YouTube Shorts में बड़ा बदलाव! क्या डिसलाइक बटन गायब होने वाला है, यूजर्स में हलचल

YouTube Shorts आज के समय में बेहद लोकप्रिय हो चुके हैं। Instagram Reels और Facebook Shorts की तरह इन्हें भी लगातार स्क्रॉल करके देखा जा सकता है, जिस वजह से यूजर्स घंटों तक शॉर्ट वीडियो देखते रहते हैं। इसी तेजी से बढ़ती लोकप्रियता के बीच YouTube अब Shorts के इंटरफेस में एक अहम बदलाव की तैयारी कर रहा है। यह बदलाव सीधे तौर पर Dislike (थंब्स-डाउन) बटन से जुड़ा हुआ है। कई यूजर्स ने हाल ही में नोटिस किया है कि उन्हें Shorts पर डिस्लाइक बटन दिखाई नहीं दे रहा। दरअसल, YouTube फिलहाल इस बटन को हटाने या उसकी जगह बदलने का परीक्षण कर रहा है, ताकि यह समझा जा सके कि यूजर्स की प्रतिक्रिया और प्लेटफॉर्म पर व्यवहार पर इसका क्या असर पड़ता है।

क्या बदलने वाला है YouTube Shorts में?

लेटेस्ट रिपोर्ट्स के मुताबिक आने वाले दिनों में YouTube Shorts को डिस्लाइक करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। अभी जो थंब्स-डाउन बटन, लाइक बटन के ठीक नीचे स्क्रीन के कोने में दिखाई देता है, उसे वहां से हटाया जा सकता है। इसके पीछे YouTube की एक बड़ी वजह यह है कि कंपनी के अनुसार कई यूजर्स Dislike और Not Interested बटन के बीच फर्क नहीं समझ पाते। इसी कारण YouTube इन दोनों विकल्पों को मिलाने पर विचार कर रहा है। भविष्य में संभव है कि एक ही बटन से आप यह बता सकें कि आपको कोई शॉर्ट पसंद नहीं आया या फिर आप ऐसे कंटेंट में बिल्कुल भी दिलचस्पी नहीं रखते। यानी अगर कोई Short आपको पसंद नहीं है या आप उसे दोबारा नहीं देखना चाहते, तो उसी एक बटन से YouTube को फीडबैक दिया जा सकेगा।

Dislike बटन की नई पोजिशन कैसी हो सकती है?

YouTube सिर्फ डिस्लाइक बटन का काम ही नहीं बदल रहा, बल्कि उसकी पोजिशन भी बदलने की तैयारी में है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ यूजर्स को यह बटन “Dislike” नाम से दिख सकता है, जबकि कुछ के लिए इसे “Not Interested” लेबल के साथ दिखाया जा सकता है। यह पूरी तरह YouTube के टेस्टिंग रिजल्ट पर निर्भर करेगा। सबसे अहम बदलाव यह हो सकता है कि थंब्स-डाउन बटन को अब सीधे स्क्रीन पर दिखाने की बजाय Overflow Menu यानी तीन डॉट्स वाले ऑप्शन के अंदर शिफ्ट कर दिया जाए। यह मेन्यू Shorts के टॉप-राइट कॉर्नर में मौजूद होता है। इसका मतलब साफ है कि अब किसी Short को डिस्लाइक करने के लिए यूजर को पहले तीन डॉट्स पर टैप करना होगा और फिर वहां से विकल्प चुनना होगा।

यूजर्स के अनुभव पर क्या पड़ेगा असर?

इस बदलाव का सीधा असर यूजर्स के व्यवहार पर पड़ सकता है। जहां एक तरफ Like बटन पहले की तरह मुख्य स्क्रीन पर मौजूद रहेगा और उसे दबाना बेहद आसान होगा, वहीं दूसरी तरफ Dislike या Not Interested का विकल्प इस्तेमाल करने के लिए अतिरिक्त स्टेप्स लेने पड़ेंगे। इससे साफ संकेत मिलता है कि YouTube चाहता है कि लोग ज्यादा से ज्यादा कंटेंट को लाइक करें, जबकि नेगेटिव फीडबैक देने की प्रक्रिया थोड़ी कठिन हो। हालांकि, कंपनी का मानना है कि इससे यूजर्स बेहतर तरीके से अपनी पसंद-नापसंद को दर्शा पाएंगे और एल्गोरिदम को यह समझने में मदद मिलेगी कि किस तरह का कंटेंट उन्हें नहीं दिखाना चाहिए। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह बदलाव यूजर्स को कितना पसंद आता है और क्या इससे Shorts देखने का अनुभव बेहतर होता है या नहीं।

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Apple का नया AI वियरेबल डिवाइस अगले साल होगा लॉन्च, होगा OpenAI को टक्कर

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Apple का नया AI वियरेबल डिवाइस अगले साल होगा लॉन्च, होगा OpenAI को टक्कर

टेक जगत में खबर है कि Apple अगले साल एक नया पहनने योग्य (wearable) AI डिवाइस लॉन्च कर सकता है। यह डिवाइस आकार में एयरटैग के समान होगा, लेकिन यह Apple के लिए एक नया प्रयोग भी होगा। कंपनी इस डिवाइस के जरिए अपनी स्थिति आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) डिवाइस मार्केट में मजबूत करना चाहती है। यह डिवाइस एक पतली और गोलाकार डिस्क के रूप में होगा, जिसमें एल्यूमिनियम और ग्लास की फिनिश हो सकती है। इसकी डिजाइन और तकनीकी खूबियों को लेकर कई जानकारियां सामने आई हैं जो इसे बाजार में अनोखा बनाती हैं।

कैमरे और ऑडियो फीचर्स से लैस होगा डिवाइस

इस छोटे डिवाइस में दो कैमरे फ्रंट पर होंगे। एक सामान्य लेंस होगा और दूसरा वाइड-एंगल लेंस होगा, जो यूजर के आसपास का फोटो और वीडियो कैप्चर कर सकेगा। इसके अलावा, इसमें तीन माइक्रोफोन भी होंगे जो आसपास की आवाज़ को पकड़ेंगे और एक बिल्ट-इन स्पीकर भी मौजूद होगा। डिवाइस के साइड में एक फिजिकल बटन होगा, जिससे इसे कंट्रोल किया जा सकेगा। इसे चार्ज करने के लिए मैग्नेटिक इंडक्टिव चार्जिंग सिस्टम इस्तेमाल किया जाएगा, जो Apple वॉच की तरह काम करेगा। इन खूबियों के साथ यह डिवाइस तकनीकी दृष्टि से काफी एडवांस होगा।

OpenAI के पहनने योग्य डिवाइस से मुकाबला

Apple का यह डिवाइस अभी विकास के प्रारंभिक चरण में है। कंपनी इसे OpenAI के पहले पहनने योग्य डिवाइस के साथ प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार कर रही है। OpenAI का यह डिवाइस इस साल के दूसरे भाग में लॉन्च होने की संभावना है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि Apple का डिवाइस एक स्वतंत्र प्रोडक्ट के रूप में काम करेगा या फिर एयरपॉड्स और स्मार्ट ग्लासेस जैसे अन्य डिवाइसेज पर निर्भर रहेगा। लेकिन दोनों कंपनियां AI पहनने योग्य तकनीक में एक-दूसरे को टक्कर देने के लिए तैयार हैं।

OpenAI का ऑडियो डिवाइस “Sweetpea”

OpenAI, जो ChatGPT का निर्माता है, अपनी तरफ से भी एक ऑडियो डिवाइस लॉन्च करने वाला है, जिसे संभवतः सितंबर तक बाजार में लाया जाएगा। इस डिवाइस का नाम “Sweetpea” हो सकता है और यह इयरफोन के आकार में होगा। यह डिवाइस पूरी तरह वॉइस कंट्रोल्ड होगा और इसमें ChatGPT का इंटीग्रेशन होगा। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार यह डिवाइस इयरफोन जैसा दिखेगा, लेकिन इसमें स्मार्टफोन के कंपोनेंट्स का इस्तेमाल होगा, जिससे इसकी कीमत काफी अधिक हो सकती है। इसे एक छोटे कंप्यूटर के रूप में भी देखा जा रहा है जो यूजर को AI के जरिए संवाद करने की सुविधा देगा।

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Smartphone Lost in Train: रेलवे में मोबाइल चोरी पर बड़ी कार्रवाई, IMEI ब्लॉक कर फोन होगा बेकार

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Smartphone Lost in Train: रेलवे में मोबाइल चोरी पर बड़ी कार्रवाई, IMEI ब्लॉक कर फोन होगा बेकार

Smartphone Lost in Train: अगर आपकी मोबाइल फोन ट्रेन में या स्टेशन पर यात्रा के दौरान खो जाए या चोरी हो जाए तो उसे वापस मिलने की संभावना अब काफी बढ़ गई है। रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और दूरसंचार विभाग (DoT) ने मिलकर एक बड़ा कदम उठाया है जिससे यात्रियों को मदद मिलेगी। अब RPF ने DoT के केंद्रीय उपकरण पहचान रजिस्टर (CEIR) पोर्टल से आधिकारिक तौर पर जुड़ाव कर लिया है। CEIR पोर्टल एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जिसके माध्यम से खोया या चोरी हुआ मोबाइल फोन का IMEI नंबर ब्लॉक किया जा सकता है। इससे न केवल फोन का उपयोग असंभव हो जाता है बल्कि उसे ट्रैक करना भी आसान हो जाता है। यह सुविधा पहले पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे में सफलतापूर्वक शुरू की गई थी और अब पूरे भारतीय रेलवे नेटवर्क में लागू कर दी गई है, जिससे लाखों यात्रियों को लाभ होगा।

डिजिटल तकनीक के जरिए रेलवे सुरक्षा में बड़ा सुधार

CEIR पोर्टल की शुरुआत और प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान RPF के महानिदेशक मनोज यादव ने बताया कि DoT के साथ यह साझेदारी रेलवे सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। डिजिटल तकनीक का उपयोग यात्रियों को पारदर्शी और भरोसेमंद तरीका प्रदान करेगा जिससे मोबाइल फोन की बरामदगी आसान हो जाएगी। इस कदम से जनता का रेलवे में विश्वास और मजबूत होगा। अब RPF तुरंत ही CEIR पोर्टल के जरिए खोए या चोरी हुए फोन का IMEI नंबर ब्लॉक कर सकेगा। एक बार ब्लॉक हो जाने पर फोन न तो इस्तेमाल किया जा सकेगा और न ही अवैध रूप से बेचा जा सकेगा। साथ ही जब भी कोई नया सिम फोन में लगाता है, तो सिस्टम को तुरंत सूचना मिल जाती है।

शिकायत कैसे करें और फोन कैसे पाएं वापस

अगर आपकी मोबाइल फोन ट्रेन यात्रा के दौरान खो जाती है तो आप रेल मदद पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत कर सकते हैं या 139 नंबर पर कॉल कर सकते हैं। यदि आप FIR दर्ज नहीं कराना चाहते तो CEIR पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया में भी मदद मिलती है। शिकायत दर्ज होने के बाद RPF की ज़ोनल साइबर सेल IMEI नंबर ब्लॉक कर देती है। जब भी फोन किसी नए सिम के साथ सक्रिय होगा, तो उसे उपयोग करने वाले को नजदीकी RPF पोस्ट पर फोन जमा करने का आदेश दिया जाता है। इसके बाद असली मालिक आवश्यक दस्तावेज दिखाकर अपना फोन वापस ले सकता है। यदि कोई सहयोग नहीं करता है तो FIR दर्ज कराई जाती है और मामला जिला पुलिस के पास भेज दिया जाता है। फोन मिलने के बाद मालिक CEIR पोर्टल के जरिए IMEI को अनब्लॉक करने का भी अनुरोध कर सकता है।

पूरे देश में लागू, यात्रियों को मिली बड़ी राहत

मई 2024 में शुरू हुए पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद यह सुविधा अब पूरे देश में लागू कर दी गई है। RPF का मानना है कि इस पहल से न केवल मोबाइल फोन चोरी पर काफी हद तक रोक लगेगी, बल्कि यात्रियों को अपने खोए हुए फोन जल्दी और सुरक्षित तरीके से वापस मिलने में भी मदद मिलेगी। इसके साथ ही RPF का ऑपरेशन अमानत भी यात्रियों के खोए हुए सामान को वापस दिलाने में सक्रिय रहा है। जनवरी 2024 से फरवरी 2025 के बीच ऑपरेशन अमानत के तहत 84 करोड़ रुपये से ज्यादा कीमती सामान बरामद कर 1.15 लाख से अधिक यात्रियों को लौटाया जा चुका है। CEIR के साथ जुड़ाव से अब मोबाइल फोन की सुरक्षा और भी मजबूत होगी और यात्रियों को इस डिजिटल युग में रेलवे पर भरोसा और बढ़ेगा।

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एलन मस्क को बड़ा झटका, मोबाइल पर Threads ने X को डेली यूजर्स में पछाड़ा

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एलन मस्क को बड़ा झटका, मोबाइल पर Threads ने X को डेली यूजर्स में पछाड़ा

सोशल मीडिया की दुनिया में लगातार बदलाव देखने को मिल रहे हैं और इसी कड़ी में मेटा ने एलन मस्क को एक बड़ा झटका दिया है। मेटा की माइक्रोब्लॉगिंग ऐप Threads ने मोबाइल प्लेटफॉर्म पर डेली एक्टिव यूजर्स के मामले में X को पीछे छोड़ दिया है। सिमिलरवेब की रिपोर्ट के मुताबिक एंड्रॉयड और iOS यूजर्स में Threads अब X से आगे निकल चुकी है। यह बदलाव इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि Threads को खासतौर पर ट्विटर यानी मौजूदा X की तर्ज पर ही लॉन्च किया गया था। शुरुआत में जहां Threads को लेकर काफी संदेह था वहीं अब यह ऐप तेजी से अपनी जगह मजबूत कर रही है। बीते कुछ महीनों में Threads की ग्रोथ ने यह साफ कर दिया है कि यूजर्स के बीच इसका भरोसा लगातार बढ़ रहा है।

मोबाइल प्लेटफॉर्म पर Threads की मजबूत पकड़

रिपोर्ट के अनुसार 7 जनवरी 2026 तक मोबाइल प्लेटफॉर्म्स पर Threads के 141.5 मिलियन डेली एक्टिव यूजर्स दर्ज किए गए हैं। वहीं दूसरी ओर X के एंड्रॉयड और iOS यूजर्स की संख्या करीब 125 मिलियन रही। यह आंकड़ा बताता है कि मोबाइल यूजर्स के बीच Threads ने साफ बढ़त बना ली है। इसके पीछे मेटा की रणनीति को बड़ा कारण माना जा रहा है। फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे बड़े प्लेटफॉर्म्स पर Threads का आक्रामक क्रॉस प्रमोशन किया गया। इससे यूजर्स को नए ऐप से जुड़ने में आसानी हुई। साथ ही Threads ने क्रिएटर्स पर फोकस बढ़ाया और लगातार नए फीचर्स जोड़े जिससे यूजर एंगेजमेंट में भी इजाफा हुआ। यही वजह है कि मोबाइल प्लेटफॉर्म पर Threads की मौजूदगी लगातार मजबूत होती चली गई।

Threads और X के बीच लगातार घटता अंतर

Threads और X के बीच यूजर्स का अंतर पिछले कुछ महीनों से लगातार कम हो रहा था। अगस्त 2025 में मेटा ने खुलासा किया था कि Threads के मंथली एक्टिव यूजर्स की संख्या 400 मिलियन को पार कर चुकी है। इसके बाद सिर्फ दो महीनों में ही इसके डेली एक्टिव यूजर्स 150 मिलियन के करीब पहुंच गए थे। अमेरिका जैसे बड़े बाजार में भी यह अंतर साफ नजर आने लगा है। जहां पहले X के डेली यूजर्स Threads से लगभग दोगुने थे वहीं अब यह फासला काफी हद तक कम हो चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर Threads इसी रफ्तार से आगे बढ़ती रही तो आने वाले समय में यह X को और कड़ी टक्कर दे सकती है।

वेब प्लेटफॉर्म पर अब भी X का दबदबा

हालांकि मोबाइल प्लेटफॉर्म पर Threads आगे निकल गई है लेकिन वेब के मामले में X की बादशाहत अभी भी कायम है। सिमिलरवेब के मुताबिक X पर रोजाना करीब 150 मिलियन डेली वेब विजिट दर्ज किए जाते हैं। इसके मुकाबले Threads.com और Threads.net दोनों को मिलाकर सिर्फ 8.5 मिलियन डेली विजिट ही हो पाते हैं। इसका मतलब साफ है कि वेब यूजर्स के बीच फिलहाल X का कोई ठोस विकल्प नहीं बन पाया है। बावजूद इसके मोबाइल यूजर्स में Threads की बढ़त यह संकेत जरूर देती है कि सोशल मीडिया का भविष्य धीरे धीरे मोबाइल की ओर और ज्यादा झुकता जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या Threads वेब प्लेटफॉर्म पर भी X को चुनौती दे पाएगी या नहीं।

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