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Bihar में कांट्रैक्ट कर्मचारियों पर लाठीचार्ज, राहुल गांधी ने मोदी-नीतीश सरकार को लताड़ा

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Bihar Assembly Elections से पहले राज्य में कांट्रैक्ट कर्मचारियों का मुद्दा गरमाया हुआ है। बुधवार को पटना में BJP कार्यालय के सामने न्याय और अधिकारों की मांग करने पहुंचे भूमि मापन से जुड़े कांट्रैक्ट कर्मचारियों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपने रोजगार और हक की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार और प्रशासन उनकी समस्याओं को नजरअंदाज कर रहे हैं।

राहुल गांधी की प्रतिक्रिया

इस मामले पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी अपनी आवाज उठाई है। राहुल गांधी ने इंस्टाग्राम पर लिखा कि रोजगार मांगने पर लाठीचार्ज होता है, अधिकार मांगने पर अत्याचार होते हैं। उन्होंने लिखा कि इस बार बिहार के युवाओं ने इस गुंडा एनडीए सरकार को उसकी असली जगह दिखाने का समय आ गया है और अब इसका काउंटडाउन शुरू हो चुका है।

कांग्रेस की आलोचना और सरकार पर आरोप

कांग्रेस ने भी इस मामले को लेकर इंस्टाग्राम पर अपनी पोस्ट साझा की। कांग्रेस का कहना है कि पटना में BJP कार्यालय के बाहर अपने हक की मांग करते हुए प्रदर्शन कर रहे कांट्रैक्ट कर्मचारियों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जिसमें कई लोग घायल हो गए। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि नीतिश कुमार की राज्य सरकार और केंद्र की मोदी सरकार अत्याचार की सरकार बन चुकी हैं। कांग्रेस ने यह भी चेतावनी दी कि जल्द ही बिहार की जनता इस अत्याचार को समाप्त करेगी और उन्हें सबक सिखाएगी।

प्रदर्शन का हाल और पुलिस की कार्रवाई

कांट्रैक्ट कर्मचारियों के प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और उन्होंने जोरदार नारे लगाए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने पहले शांतिपूर्वक समझाने का प्रयास किया, लेकिन जब प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हुए, तो पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। इस दौरान हल्की धक्का-मुक्की और झड़प भी हुई, जिसमें कई कर्मचारी घायल हुए। कुछ कर्मचारियों को गंभीर सिर की चोटें भी आई हैं।

कर्मचारियों की शिकायतें और असंतोष

लाठीचार्ज के बाद प्रदर्शनकारियों में गहरा आक्रोश है। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई को अनुचित और अत्याचारी बताया। प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का कहना है कि सरकार लगातार उनकी मांगों को नजरअंदाज कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक महीने तक शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने के बावजूद प्रशासन का कोई अधिकारी उनके पास वार्ता के लिए नहीं आया। कर्मचारियों का कहना है कि उनका हक सुरक्षित होना चाहिए और उनकी आवाज को अनसुना नहीं किया जाना चाहिए।

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