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Kiren Rijiju Vs Rahul Gandhi: राहुल गांधी पर झूठ बोलने की सीमा पार करने का आरोप, किरण रिजिजू का करारा जवाब

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Kiren Rijiju Vs Rahul Gandhi: राहुल गांधी पर झूठ बोलने की सीमा पार करने का आरोप, किरण रिजिजू का करारा जवाब

Kiren Rijiju Vs Rahul Gandhi: संसद के मानसून सत्र में विपक्षी नेता राहुल गांधी ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने सरकार पर लड़ाकू पायलटों के हाथ बाँधने का आरोप लगाया। राहुल गांधी ने कहा कि 1971 के युद्ध के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सेना को पूरी आज़ादी दी थी, लेकिन आज की सरकार पायलटों को सही तरीके से काम नहीं करने दे रही है। उन्होंने कहा कि यह सेना की नहीं, बल्कि सरकार की गलती है।

किरण रिजिजू का राहुल गांधी पर करारा जवाब

केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने राहुल गांधी के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा कि झूठ बोलने की भी एक सीमा होती है। रिजिजू ने लोगों से कहा कि वे राहुल गांधी को यह बता दें कि ‘अब बहुत हो गया’। उन्होंने राहुल गांधी से अनुरोध किया कि वे संसद की गरिमा बनाए रखें। उन्होंने कहा कि कई विपक्षी नेता संसद का सम्मान करते हैं, लेकिन राहुल गांधी ने न केवल अपनी गरिमा गिराई बल्कि भारत की प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचाया।

राहुल गांधी के आरोपों का विरोध

राहुल गांधी ने दावा किया था कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद सरकार ने सेना के पायलटों के हाथ बांध दिए। उन्होंने कहा कि सरकार ने आतंकवादियों से लड़ने में कड़ाई नहीं दिखाई और जैसे एक बार किसी को थप्पड़ मार दिया तो फिर दूसरा नहीं मारा। राहुल गांधी की इस आलोचना ने सत्ताधारी दल को जवाब देने के लिए मजबूर कर दिया।

सेना प्रमुख का ऑपरेशन सिंदूर पर खुलासा

इसी दौरान भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने ऑपरेशन सिंदूर के बारे में कई अहम बातें साझा कीं। उन्होंने कहा कि सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सेना को पूरी छूट दी थी। सेना ने अपनी योजना के अनुसार पाकिस्तान को जवाब दिया। भारतीय वायुसेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के कम से कम पांच लड़ाकू विमान और एक AWACS विमान भी गिराए गए। यह भारत की सैन्य शक्ति और योजना की सफलता का परिचायक है।

राजनीतिक बयानबाजी में सटी सेना की भूमिका

इस पूरे विवाद के बीच सेना की भूमिका को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। जबकि विपक्ष सरकार की आलोचना कर रहा है, सेना प्रमुख और केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि सेना को हर संभव समर्थन मिला और ऑपरेशन सिंदूर एक सफल सैन्य अभियान था। इस बहस ने देश में सुरक्षा और राजनीतिक नीतियों को लेकर गहरी चर्चाओं को जन्म दिया है।

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दिल्ली हाईकोर्ट ने अरविंद केजरीवाल समेत 23 आरोपियों को CBI मामले में नोटिस जारी किया

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दिल्ली हाईकोर्ट ने अरविंद केजरीवाल समेत 23 आरोपियों को CBI मामले में नोटिस जारी किया

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली एक्साइज पॉलिसी घोटाले से जुड़े सीबीआई मामले में अरविंद केजरीवाल और राउस एवेन्यू कोर्ट द्वारा बरी किए गए 23 अन्य व्यक्तियों को नोटिस जारी किए हैं। कोर्ट ने मामले की सुनवाई अब 16 मार्च को करने का फैसला किया है। इसके अलावा, हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है जिसमें मामले की जांच कर रहे सीबीआई अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया था।

सोमवार को सीबीआई की याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य आरोपियों की रिहाई पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। सीबीआई ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। सीबीआई की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट से आग्रह किया कि केजरीवाल, सिसोदिया और 23 अन्य आरोपियों की रिहाई पर रोक लगाई जाए, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। न्यायालय ने ट्रायल कोर्ट से कहा कि ईडी का मामला तब तक स्थगित रखा जाए जब तक हाईकोर्ट सीबीआई की संशोधन याचिका पर निर्णय न ले।

सीबीआई का आरोप: पूरी साजिश वैज्ञानिक तरीके से साबित

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि इस मामले में हर पहलू साबित किया गया है। उनका कहना है कि यह दिल्ली के इतिहास में सबसे बड़ा घोटाला है और उनके अनुसार यह देश के लिए शर्मनाक मामला है। उन्होंने बताया कि पूरी साजिश की वैज्ञानिक जांच की गई और हर पहलू साबित हुआ। आरोप है कि इसमें हवाला के जरिए और देश के विभिन्न हिस्सों में पैसा ट्रांसफर किया गया। सभी मुख्य गवाहों से मजिस्ट्रेट के सामने पूछताछ की गई। उन्होंने कहा कि कुल 164 बयानों में स्पष्ट किया गया कि साजिश कैसे रची गई, रिश्वत किसे दी गई और किसके माध्यम से हुई।

दिल्ली हाईकोर्ट ने अरविंद केजरीवाल समेत 23 आरोपियों को CBI मामले में नोटिस जारी किया

उदाहरण के तौर पर एक व्यक्ति विजय नायर, जो एक राजनीतिक पार्टी के कम्युनिकेशन इंचार्ज हैं, उन्होंने कहा कि लगभग ₹100 करोड़ की रिश्वत दी गई। इसमें से ₹44.50 करोड़ हवाला के जरिए ट्रांसफर किए गए और वैज्ञानिक जांच के अनुसार यह पैसा गोवा में पार्टी के चुनावों में इस्तेमाल हुआ। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि साजिश का सबूत केवल आरोपों से नहीं बल्कि दस्तावेज, ईमेल और व्हाट्सऐप चैट्स के माध्यम से पेश किया गया।

12 दिनों में 600-पेज का फैसला, तेजी से न्याय की कोशिश

तुषार मेहता ने कहा कि जांच में कई दस्तावेज इकट्ठा किए गए, जिसमें ईमेल और व्हाट्सऐप चैट्स शामिल हैं। उन्होंने बताया, “यह सब हवा में नहीं बनाया गया। दुर्भाग्य से हमें कोर्ट को पूरी तरह मनाने में सफलता नहीं मिली, लेकिन हमने सभी सबमिशन पूरे किए और कोर्ट ने 12 दिनों में 600-पेज का फैसला सुनाया।” उन्होंने कहा कि तेजी से न्याय एक लक्ष्य है, लेकिन उसका परिणाम गलत नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जब हम किसी साजिश का आरोप लगाते हैं, तो उसका हर पहलू साबित करना जरूरी होता है।

मेहता ने कहा कि साजिश कभी खुले तौर पर नहीं रची जाती और हर तत्व को एक साथ रखकर ही इसे साबित किया जा सकता है। इस दौरान हाईकोर्ट ने 23 व्यक्तियों सहित केजरीवाल को नोटिस जारी किए। सॉलिसिटर जनरल ने सभी 23 की रिहाई पर रोक की मांग की, लेकिन कोर्ट ने CBI को झटका देते हुए इसे खारिज कर दिया। अब मामला 16 मार्च को हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए तय किया गया है, और इस फैसले से राजनीति और न्यायिक प्रक्रिया दोनों ही क्षेत्र में नई हलचल मची हुई है।

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क्लेमेंटटाउन में प्रेमी-प्रेमिका ने आपा खोकर एक-दूसरे पर ताबड़तोड़ चाकू से वार किया

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क्लेमेंटटाउन में प्रेमी-प्रेमिका ने आपा खोकर एक-दूसरे पर ताबड़तोड़ चाकू से वार किया

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के क्लेमेंटटाउन क्षेत्र के ओगल भट्टा इलाके में शनिवार को एक भयावह घटना सामने आई। एक निजी शिक्षण संस्थान में पढ़ने वाले प्रेमी और प्रेमिका के बीच हुई अनबन ने हिंसक रूप ले लिया। दोनों ने गुस्से में आकर रसोई में रखे चाकू से एक-दूसरे पर हमला कर दिया। घटना में दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।

MCA के छात्र थे दोनों, लंबे समय से चल रहा था विवाद

पुलिस सूत्रों के अनुसार घायल युवक 21 वर्षीय मूल रूप से मेरठ का रहने वाला है और युवती 21 वर्ष की देहरादून निवासी है। दोनों क्लेमेंटटाउन स्थित एक निजी शिक्षण संस्थान में MCA प्रथम वर्ष के छात्र हैं। बताया जा रहा है कि दोनों के बीच लंबे समय से प्रेम संबंध थे, लेकिन पिछले कुछ दिनों से रिश्तों में कड़वाहट और विवाद बढ़ गया था। इसी कारण दोनों में शनिवार को कहासुनी और लड़ाई हुई।

क्लेमेंटटाउन में प्रेमी-प्रेमिका ने आपा खोकर एक-दूसरे पर ताबड़तोड़ चाकू से वार किया

तीसरे व्यक्ति की वजह से बढ़ा विवाद

पुलिस जांच में यह भी पता चला है कि छात्रा पिछले कुछ समय से किसी अन्य युवक के संपर्क में थी। इस कारण छात्रा और छात्र के बीच अनबन चल रही थी। शनिवार को छात्रा इस मुद्दे पर बात करने के लिए छात्र के कमरे पर आई। बातचीत के दौरान बहस इतनी बढ़ गई कि दोनों आपा खो बैठे और तैश में आकर उन्होंने चाकू उठाकर एक-दूसरे पर हमला कर दिया। आसपास के लोगों ने चीख-पुकार सुनकर पुलिस को सूचना दी।

गंभीर चोटें और अस्पताल में इलाज

संघर्ष के दौरान छात्रा की गर्दन पर गंभीर चोट आई, जिसे डॉक्टरों ने सफल ऑपरेशन के बाद स्थिर कर दिया। छात्र भी घायल है और फिलहाल दोनों की हालत स्थिर बताई जा रही है। पुलिस ने घटना की जांच शुरू कर दी है और बताया कि यह मामला प्रेम विवाद और तीसरे व्यक्ति की एंट्री से संबंधित लग रहा है। घटना ने क्षेत्र में सनसनी मचा दी है और लोगों में चिंता का माहौल है।

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दिल्ली कोर्ट ने गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और दो अन्य को जबरन वसूली मामले में बरी किया

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दिल्ली कोर्ट ने गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और दो अन्य को जबरन वसूली मामले में बरी किया

गुजरात की जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को दिल्ली की साकेत कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने लॉरेंस बिश्नोई और दो अन्य आरोपियों को जबरन वसूली और धमकी देने के मामले में सबूतों की कमी के आधार पर बरी कर दिया। मामला अप्रैल 2023 में दर्ज की गई FIR से जुड़ा था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि बिश्नोई और उनके साथी एक वकील से 1 करोड़ रुपये की रंगदारी मांग रहे थे। साकेत कोर्ट की CJM नूपुर गुप्ता ने तीनों को IPC की धारा 386, 387 और 120B के तहत दंडनीय अपराधों से मुक्त कर दिया।

कोर्ट का फैसला: केवल आरोप से दोष नहीं सिद्ध

CJM नूपुर गुप्ता ने फैसला सुनाते हुए कहा कि आरोपियों के खिलाफ केवल शिकायतकर्ता के बयान और उनके डिस्क्लोजर स्टेटमेंट के अलावा कोई ठोस सबूत मौजूद नहीं था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि IPC की धारा 386 के तहत अपराध साबित होने के लिए, डर दिखाकर प्रॉपर्टी, पैसा या कोई कीमती सिक्योरिटी की असल में डिलीवरी होना आवश्यक है। इस मामले में ऐसा कुछ नहीं हुआ था, केवल मांग और धमकी दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ कॉल करने या रकम मांगने से दोष साबित नहीं होता।

दिल्ली कोर्ट ने गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और दो अन्य को जबरन वसूली मामले में बरी किया

मामला और जांच का विवरण

शिकायतकर्ता रमन दीप सिंह ने सनलाइट कॉलोनी पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि 23-24 अप्रैल 2023 की रात को उन्हें अनजान नंबर से लगातार कॉल आए और जान से मारने की धमकी दी गई। शुरू में उन्होंने इन कॉल्स को नजरअंदाज किया, लेकिन धमकियां बढ़ने के बाद उन्होंने फॉर्मल शिकायत दर्ज कराई। जांच के बाद, दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने चार्जशीट में लॉरेंस बिश्नोई, हरेन सरपदादिया और आशीष शर्मा के खिलाफ चार्ज लगाते हुए मामला अदालत में पेश किया।

वकील और कोर्ट की भूमिका

आरोपियों के वकील ने तर्क दिया कि FIR में उनके क्लाइंट का नाम शामिल नहीं था और कोई सामान बरामद नहीं हुआ। गिरफ्तारी केवल सह-आरोपियों के डिस्क्लोजर स्टेटमेंट पर आधारित थी। कोर्ट ने इस तर्क को मान्यता देते हुए तीनों आरोपियों को बरी कर दिया। हालांकि, पहले मामले का संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने कहा था कि रिकॉर्ड में कुछ तथ्य अपराध की संभावित जिम्मेदारी दिखाते हैं, लेकिन अंततः सबूतों की कमी और जरूरी प्रॉपर्टी डिलीवरी न होने के कारण आरोप सिद्ध नहीं हो पाए।

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