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Karur accident: विजय ने कहा- ‘यह न होनी चाहिए थी, मेरी पार्टी अधिकारियों को बुरी तरह प्रभावित न करें
Karur accident: तमिलनाडु के करूर में हुए भयानक स्टैम्पेड में 41 लोगों की मौत के बाद टीवी होस्ट और अभिनेता विजय ने गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “मैंने अपने जीवन में कभी इतनी दर्दनाक स्थिति का सामना नहीं किया। मैं बहुत दुखी हूँ… राजनीति को अलग रखते हुए, हम हमेशा पुलिस से अनुमति लेकर कार्यक्रम करते हैं। लेकिन जो होना नहीं चाहिए था, वह हो गया। मैं जल्द ही पीड़ितों से मिलूंगा और इस दुखद घटना में खोए परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएँ व्यक्त करता हूँ।” उन्होंने यह भी बताया कि उनके पार्टी के कई अधिकारी इस घटना के बाद पुलिस द्वारा हिरासत में लिए गए हैं।
पार्टी अधिकारियों की सुरक्षा की अपील
विजय ने मुख्यमंत्री से अपील की, “मुख्यमंत्री जी, कृपया मेरे पार्टी अधिकारियों को कोई नुकसान न पहुँचाएँ। आप चाहें तो मेरे घर या कार्यालय आकर मुझसे कार्रवाई कर सकते हैं, लेकिन उनसे नहीं। सच जल्द ही सामने आएगा।” उन्होंने आगे कहा, “मैं भी एक इंसान हूँ। जब इतने लोग प्रभावित हुए हैं, तो मैं कैसे उन्हें छोड़कर वापस जा सकता हूँ? मैं नहीं गया क्योंकि मैं सुनिश्चित करना चाहता था कि कोई और अप्रिय घटना न हो।” विजय ने अपने शब्दों के माध्यम से परिवारों के नुकसान की भरपाई करने में असमर्थता जताई, लेकिन उन्होंने अस्पताल में उपचाराधीन लोगों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की।
#WATCH | TVK chief and actor Vijay says, "I have never faced such a painful situation in my life. I am in deep pain… Leaving aside all politics, we always request permission from the police for a safe place. But things that shouldn't have happened have happened… I will soon… pic.twitter.com/JcZlg96UH5
— ANI (@ANI) September 30, 2025
जनता और प्रशासन के प्रति प्रतिक्रिया
विजय ने कहा, “हमने पाँच जिलों में अभियान चलाया, लेकिन यह घटना करूर में क्यों और कैसे हुई? जनता सब जानती है और देख रही है। करूर के लोगों की बातों से लगता है जैसे ईश्वर स्वयं ने सब कुछ प्रकट कर दिया हो। सच्चाई जल्द ही सामने आएगी। मैंने केवल दिए गए स्थान पर जाकर भाषण दिया। इसके बावजूद हमारी पार्टी के सदस्यों और सोशल मीडिया टीम के खिलाफ FIR दर्ज की जा रही है। मुख्यमंत्री जी, यदि आप मुझसे बदला लेना चाहते हैं, तो मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन उनसे कुछ न करें।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके राजनीतिक अभियान को और मजबूती से जारी रखा जाएगा।
राज्यसभा सांसद का बयान
करूर स्टैम्पेड पर प्रतिक्रिया देते हुए राज्यसभा सांसद रेखा शर्मा ने कहा, “प्रशासन के पास कोई जवाब नहीं है क्योंकि गलती उनके पास है। पहले उन्होंने एक छोटे क्षेत्र में बड़ी भीड़ को इकट्ठा होने दिया और पुलिस, पानी या एम्बुलेंस की कोई व्यवस्था नहीं की। कलेक्टर हमसे नहीं मिल रहे हैं क्योंकि मुझे लगता है कि इस घटना के लिए वे जिम्मेदार हैं। हमने अपने सवाल भेजे हैं, जिनका उन्हें जवाब देना होगा।” इस बयान से स्पष्ट है कि प्रशासन की लापरवाही और बड़े कार्यक्रमों में सुरक्षा प्रबंधों की कमी इस दुखद घटना की मुख्य वजह मानी जा रही है।
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बंगाल चुनाव से पहले बड़ा सियासी झटका AIMIM-AJUP गठबंधन खत्म होने से हलचल
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ओवरटेक विवाद में थार सवारों का हमला, बस स्टाफ पर चाकू और फायरिंग
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में एक मामूली ओवरटेक विवाद ने अचानक हिंसक रूप ले लिया और चार लोगों की जान पर बन आई। भवारना थाना क्षेत्र के बैरघट्टा में बुधवार रात बीड़ से दिल्ली जा रही एक निजी वॉल्वो बस को रास्ता न देने पर महिंद्रा थार सवार बदमाशों ने हमला कर दिया। यह घटना न केवल सड़क सुरक्षा पर सवाल खड़े करती है बल्कि यह भी दिखाती है कि छोटी सी बहस किस तरह जानलेवा बन सकती है। हमलावरों ने बस को जबरन रुकवाया और चालक परिचालक समेत अन्य लोगों पर चाकू से हमला कर दिया। इतना ही नहीं दहशत फैलाने के लिए हवाई फायरिंग भी की गई जिससे इलाके में अफरा तफरी मच गई।
चार लोग गंभीर रूप से घायल, अस्पताल में भर्ती
इस हमले में वॉल्वो बस के चालक सुंदर सिंह और राज कुमार के साथ विजय कुमार और परिचालक प्रवेश कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी घायलों को पहले थुरल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया जहां उनकी हालत गंभीर देखते हुए कुछ को टांडा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। घायलों के बयान के अनुसार हमलावर बेहद आक्रामक थे और उन्होंने बिना किसी चेतावनी के हमला कर दिया। यह घटना यात्रियों और आम लोगों के लिए बेहद डरावनी साबित हुई क्योंकि सड़क पर चल रही बस को इस तरह निशाना बनाना एक गंभीर अपराध माना जा रहा है।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई, तीन आरोपी गिरफ्तार
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आई और तुरंत इलाके में घेराबंदी शुरू कर दी। पुलिस ने बिना नंबर की काली महिंद्रा थार को कब्जे में लिया और तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों की पहचान पंजाब के पठानकोट निवासी बलविंदर सिंह और अलीश तथा होशियारपुर निवासी निशान पाल के रूप में हुई है। पुलिस ने मौके से चाकू और पिस्टल भी बरामद किए हैं जिनका इस्तेमाल हमले और फायरिंग में किया गया था। इसके अलावा वाहन की तलाशी के दौरान नशीला पदार्थ भी बरामद हुआ जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।
गंभीर धाराओं में केस दर्ज, जांच जारी
कांगड़ा पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की कई गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है जिसमें हत्या के प्रयास और शस्त्र अधिनियम शामिल हैं। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि आरोपियों के पास अवैध हथियार और नशीले पदार्थ कहां से आए और क्या उनका कोई पुराना आपराधिक इतिहास रहा है। इस घटना के बाद इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और पुलिस लगातार गश्त कर रही है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। यह मामला एक बार फिर यह सवाल उठाता है कि सड़क पर बढ़ती आक्रामकता और कानून का डर खत्म होने से समाज में कितनी बड़ी समस्या खड़ी हो रही है।
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एकता की बैठक में घमासान, बीजेडी कार्यकर्ताओं की हाथापाई से मचा सियासी तूफान
ओडिशा के पुरी जिले के निमापड़ा विधानसभा क्षेत्र में बीजू जनता दल की एक अहम बैठक उस समय विवादों में घिर गई जब पार्टी के दो गुटों के बीच तीखी झड़प हो गई। यह बैठक बेगुनिया इलाके के जगुलेई पीठ में आयोजित की गई थी जिसका मकसद संगठन को मजबूत करना और कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल बढ़ाना था। शुरुआत में माहौल सामान्य था और नेता कार्यकर्ताओं को एकजुट रहने का संदेश दे रहे थे। लेकिन अचानक किसी मुद्दे को लेकर बहस शुरू हुई और देखते ही देखते स्थिति बेकाबू हो गई। इस घटना ने पार्टी के अंदर चल रहे तनाव को खुलकर सामने ला दिया है।
धक्का-मुक्की और हाथापाई से बिगड़े हालात
जैसे ही बहस बढ़ी दोनों गुटों के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए और मामला धक्का-मुक्की तक पहुंच गया। कुछ ही पलों में यह विवाद हाथापाई में बदल गया जिससे बैठक स्थल पर अफरा-तफरी मच गई। वहां मौजूद वरिष्ठ नेताओं और अन्य कार्यकर्ताओं ने किसी तरह बीच-बचाव कर स्थिति को नियंत्रित किया। हालांकि इस दौरान कार्यक्रम पूरी तरह बाधित हो गया और बैठक का उद्देश्य अधूरा रह गया। इस घटना ने यह साफ कर दिया कि जमीनी स्तर पर पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच मतभेद काफी गहरे हो चुके हैं जो कभी भी बड़े विवाद का रूप ले सकते हैं।

दिलीप नायक की गैरमौजूदगी बना विवाद का कारण
सूत्रों के मुताबिक यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब बीजेडी के पूर्व विधायक प्रत्याशी दिलीप नायक जेल में हैं और उनकी गैरमौजूदगी में संगठन को संभालने की कोशिश की जा रही है। इसी दौरान सुब्रत छतोई लगातार बैठकों के जरिए कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन नेतृत्व को लेकर अंदरूनी असंतोष और गुटबाजी ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। कार्यकर्ताओं के बीच आपसी तालमेल की कमी और नेतृत्व को लेकर असहमति इस झड़प की बड़ी वजह मानी जा रही है। यह घटना इस बात का संकेत है कि पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।
पार्टी की एकता पर उठे सवाल
जगुलेई पीठ में हुई इस घटना के बाद बीजेडी की एकता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिस बैठक का मकसद संगठन को मजबूत करना था वही बैठक पार्टी के भीतर की कमजोरियों को उजागर कर गई। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि अगर समय रहते इन मतभेदों को दूर नहीं किया गया तो इसका असर आगामी चुनावों पर पड़ सकता है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है लेकिन यह घटना पार्टी नेतृत्व के लिए एक चेतावनी बनकर सामने आई है। आने वाले समय में सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि संगठन को एकजुट रखते हुए कार्यकर्ताओं के बीच भरोसा और संतुलन कायम किया जाए।
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