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India’s Fastest Growing State: असम का GSDP 2.4 लाख करोड़ से बढ़कर 3.5 लाख करोड़, पूरे उत्तर-पूर्व को नई दिशा

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India's Fastest Growing State: असम का GSDP 2.4 लाख करोड़ से बढ़कर 3.5 लाख करोड़, पूरे उत्तर-पूर्व को नई दिशा

India’s Fastest Growing State: भारत के विकसित राज्यों में महाराष्ट्र, गुजरात, केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक शामिल हैं। हालांकि, हाल ही में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की एक रिपोर्ट ने चौंकाने वाला तथ्य उजागर किया है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में असम की अर्थव्यवस्था अन्य राज्यों की तुलना में काफी तेज़ी से बढ़ी है। यह न केवल पूरे उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में सबसे अधिक योगदान देने वाला राज्य बन गया है, बल्कि इसने देश की आर्थिक वृद्धि में भी महत्वपूर्ण हिस्सेदारी बनाई है।

असम की अर्थव्यवस्था ने अन्य राज्यों को पीछे छोड़ा

RBI के डेटा के अनुसार, 2020 से 2025 के बीच असम का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) स्थिर मूल्य पर 45 प्रतिशत बढ़ा, जो किसी भी अन्य राज्य की तुलना में सबसे अधिक है। 2020 में असम का GSDP ₹2.4 लाख करोड़ था, जो 2025 में बढ़कर ₹3.5 लाख करोड़ हो गया। इस तेज़ वृद्धि का श्रेय कृषि, तेल और गैस, और बुनियादी ढांचे में निवेश की तीव्र वृद्धि को दिया जा सकता है। यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि भारत में आर्थिक विकास अब केवल कुछ क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कई अन्य राज्यों तक फैल गया है।

राष्ट्रीय स्तर पर अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन

राष्ट्रीय स्तर पर, भारत का जीडीपी 2020 में ₹145.35 लाख करोड़ से बढ़कर 2025 में ₹187.97 लाख करोड़ हो गया, जो पांच वर्षों में 29 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। RBI के अनुसार, शीर्ष 10 तेजी से बढ़ती राज्य अर्थव्यवस्थाओं ने 45 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की, जो राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है। यह आंकड़ा यह स्पष्ट करता है कि कुछ राज्यों की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है और ये देश की आर्थिक तस्वीर को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

अन्य राज्यों की आर्थिक वृद्धि

पिछले पांच वर्षों में उत्तर प्रदेश ने 35 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, और उसका GSDP ₹11.7 लाख करोड़ से बढ़कर ₹15.8 लाख करोड़ हो गया। इसके बाद राजस्थान ने 34 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की, जिसमें उसकी अर्थव्यवस्था ₹6.8 लाख करोड़ से बढ़कर ₹9.1 लाख करोड़ हो गई। बिहार और आंध्र प्रदेश दोनों ने 33 प्रतिशत की वृद्धि हासिल की। बिहार का GSDP ₹4.0 लाख करोड़ से बढ़कर ₹5.3 लाख करोड़ हुआ, जबकि आंध्र प्रदेश का GSDP ₹6.5 लाख करोड़ से बढ़कर ₹8.7 लाख करोड़ हो गया। छत्तीसगढ़ और झारखंड ने भी 31 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की, जबकि तेलंगाना ने 30 प्रतिशत की वृद्धि के साथ शीर्ष दस राज्यों में जगह बनाई, इसका GSDP ₹6.4 लाख करोड़ से बढ़कर ₹8.4 लाख करोड़ हुआ। यह डेटा दिखाता है कि अब आर्थिक विकास केवल दक्षिण या पश्चिमी राज्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूर्वोत्तर और अन्य हिस्सों में भी तेजी से फैल रहा है।

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Share Market Crash: शेयर मार्केट में भारी गिरावट, विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बढ़ाया दबाव

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Share Market Crash: शेयर मार्केट में भारी गिरावट, विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बढ़ाया दबाव

Share Market Crash: बजट से पहले कारोबार के आखिरी दिन गुरुवार को शेयर बाजार का माहौल बेहद नकारात्मक रहा। लगातार तीन सत्रों तक बढ़त के बाद गुरुवार को बाजार गिरावट के साथ खुला। सुबह 9:30 बजे BSE सेंसेक्स करीब 619 अंकों की भारी गिरावट के साथ 81,947 के स्तर पर था, जबकि निफ्टी 171 अंकों की कमजोरी के साथ 25,248 के पास कारोबार कर रहा था। यह गिरावट ऐसे समय आई है जब संसद में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आर्थिक सर्वे प्रस्तुत किया, जिसमें भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत विकास का अनुमान लगाया गया। बावजूद इसके बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली जो निवेशकों की चिंता को बढ़ा रही है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दबाव

शेयर बाजार में आई गिरावट की प्रमुख वजह विदेशी निवेशकों द्वारा शेयरों की भारी बिक्री है। जनवरी महीने में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने अब तक 43,686 करोड़ रुपये के भारतीय शेयर बाजार से निकाले हैं। यह आउटफ्लो पिछले साल 2025 के रिकॉर्ड 19 बिलियन डॉलर से भी अधिक है। अकेले 29 जनवरी को ही विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 394 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जिससे बाजार में दबाव और बढ़ गया। हालांकि घरेलू निवेशकों ने 2,638 करोड़ रुपये के शेयर खरीदकर बाजार को कुछ हद तक संभालने की कोशिश की है, लेकिन विदेशी बिकवाली का असर साफ तौर पर देखने को मिल रहा है।

रुपये में गिरावट से बढ़ा अनिश्चितता का माहौल

डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी भी बाजार पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही है। गुरुवार को रुपया 91.9850 के लगभग अपने अब तक के निचले स्तर पर पहुंच गया, जबकि शुक्रवार को यह 91.9125 के स्तर पर खुला। इस महीने रुपये में करीब 2.3 की गिरावट आई है, जो सितंबर 2022 के बाद की सबसे खराब प्रदर्शन वाली अवधि के करीब है। कमजोर रुपये से कंपनियों की इनपुट लागत बढ़ने का खतरा रहता है, जो खासकर उन सेक्टर्स के लिए चुनौती बन सकता है जो कच्चे माल या इंपोर्ट पर निर्भर हैं। निवेशक इस स्थिति को लेकर सतर्क हो गए हैं क्योंकि इससे कंपनियों के मुनाफे और बाजार पर दबाव बढ़ने की संभावना बनी रहती है।

सेक्टोरल इंडेक्स में भी भारी कमजोरी

बाजार में आई गिरावट केवल प्रमुख इंडेक्स तक सीमित नहीं रही, बल्कि सेक्टोरल इंडेक्स भी गिरावट की मार झेल रहे हैं। शुरुआती कारोबार में निफ्टी इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी इंडेक्स 1 फीसदी से अधिक गिरा, जिसमें इसके सभी शेयर नीचे नजर आए। मेटल इंडेक्स में तो लगभग 4 फीसदी की गिरावट हुई, जिससे हिंडाल्को और टाटा स्टील जैसे बड़े शेयर प्रभावित हुए। इसके अलावा फाइनेंशियल, ऑयल एंड गैस और कैपिटल गुड्स सेक्टर भी दबाव में रहे। क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतें और भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं बाजार की अस्थिरता को और बढ़ा रही हैं। जियोजित के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. वी के विजयकुमार के अनुसार बजट के नजदीक आने के साथ बाजार को वैश्विक स्तर पर कई हेडविंड्स और टेलविंड्स का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि जियोपॉलिटिकल तनाव और बढ़ती क्रूड कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चुनौतियां पैदा कर रही हैं, जो निवेशकों की धारणा पर असर डाल रही हैं।

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Budget 2026 में रियल एस्टेट को उद्योग का दर्जा मिलने की बड़ी उम्मीदें

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Budget 2026 में रियल एस्टेट को उद्योग का दर्जा मिलने की बड़ी उम्मीदें

Budget 2026 को लेकर रियल एस्टेट सेक्टर की नजरें सरकार पर टिकी हुई हैं। इस बार का बजट 1 फरवरी को पेश किया जाएगा, जिसमें रियल स्टेट इंडस्ट्री के लिए कई अहम फैसलों की उम्मीद है। बिल्डर्स और डेवलपर्स चाहते हैं कि सरकार उन्हें औद्योगिक क्षेत्र का दर्जा दे ताकि उन्हें लंबी अवधि के कम ब्याज वाले लोन और बेहतर फंडिंग विकल्प मिल सकें। साथ ही, वे चाहते हैं कि जमीन से जुड़े काम ऑनलाइन हों और मंजूरी मिलने की प्रक्रिया को तेज किया जाए। इसके अलावा, एक आसान सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम भी लागू हो, जिससे सरकारी मंजूरियां एक ही प्लेटफॉर्म से मिल सकें और कामकाज में तेजी आए। ये सभी मांगें इस सेक्टर की स्थिरता और मजबूती के लिए अहम मानी जा रही हैं।

संगठनों और बिल्डर्स का मानना

रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़े विभिन्न संगठन और बिल्डर्स इस बात पर सहमत हैं कि उद्योग का दर्जा मिलने से उनकी पूंजी जुटाने की क्षमता बढ़ेगी। बिल्डर्स का कहना है कि यह मांग लंबे समय से की जा रही है और अब वे बजट से इस दिशा में पॉलिसी सपोर्ट की उम्मीद लगाए हुए हैं। इससे न सिर्फ निवेशकों को भरोसा मिलेगा, बल्कि सेक्टर की स्थिरता भी बढ़ेगी। प्रदीप अग्रवाल, जो सिग्नेचर ग्लोबल इंडिया के संस्थापक और चेयरमैन हैं, का मानना है कि इस क्षेत्र को औद्योगिक दर्जा मिलने पर फंडिंग आसान हो जाएगी और इससे देश की आर्थिक प्रगति को बल मिलेगा। वहीं, ट्राइबेका डेवलपर्स के सीईओ रजत खंडेलवाल ने भी कहा कि स्थायी नीतियों से न सिर्फ घर बनाने वालों बल्कि खरीदारों को भी लाभ मिलेगा।

रियल एस्टेट की भूमिका जीडीपी और रोजगार में

रियल एस्टेट सेक्टर का देश की आर्थिक संरचना में महत्वपूर्ण योगदान है। मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह सेक्टर देश की कुल जीडीपी में लगभग 7 प्रतिशत योगदान देता है और इससे 200 से अधिक जुड़ी हुई इंडस्ट्रीज में रोजगार मिलता है। प्रदीप अग्रवाल ने बताया कि अगर इस क्षेत्र को औद्योगिक दर्जा मिल जाता है, तो फंडिंग और पूंजी की उपलब्धता बेहतर होगी जिससे यह सेक्टर आर्थिक विकास में और अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेगा। उन्होंने यह भी अनुमान लगाया कि सही नीतियों और सरकारी सहयोग के चलते यह क्षेत्र 2047 तक देश की जीडीपी में 15 प्रतिशत तक योगदान कर सकता है, जो भारत के दीर्घकालिक विकास के लिए बेहद सकारात्मक होगा।

सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम की अहमियत

रियल एस्टेट डेवलपर्स खासतौर पर सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम की शुरुआत की उम्मीद कर रहे हैं। इस प्रणाली के तहत, विभिन्न विभागों की मंजूरियां और अनुमति एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मिलेंगी। इससे प्रक्रियाओं में तेजी आएगी और प्रोजेक्ट समय पर पूरे होंगे। साथ ही, इससे पारदर्शिता भी बढ़ेगी, जो भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को कम करने में मददगार साबित होगी। डेवलपर्स का मानना है कि इस तरह की डिजिटल व्यवस्था से न केवल सरकारी तंत्र में सुधार होगा बल्कि रियल एस्टेट सेक्टर की विश्वसनीयता भी बढ़ेगी। बजट 2026 में इस पहल को शामिल करने से इस क्षेत्र को मजबूती मिलने के साथ ही निवेशकों और ग्राहकों का भरोसा भी बढ़ेगा।

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क्या Vivo X200T 5G बना पाएगा Motorola को टक्कर? कीमत और कैमरा की पूरी जानकारी

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Vivo X200T 5G: कम कीमत में मिलेगी फ्लैगशिप कैमरा और दमदार परफॉर्मेंस

Vivo X200T 5G आखिरकार आज भारतीय बाजार में दस्तक देने वाला है। यह नया फ्लैगशिप स्मार्टफोन खासतौर पर उन यूजर्स के लिए है जो हाई-क्वालिटी कैमरा और बेहतर परफॉर्मेंस की तलाश में हैं लेकिन बजट को लेकर चिंतित हैं। कंपनी इसे दोपहर 12 बजे लॉन्च करेगी और फोन की बिक्री Flipkart और Vivo की आधिकारिक वेबसाइट पर शुरू होगी।

इस फोन की सबसे बड़ी खासियत है इसका ट्रिपल 50 मेगापिक्सल कैमरा सेटअप। इसमें प्राइमरी कैमरा के साथ 50MP अल्ट्रा वाइड और 50MP सुपर टेलीफोटो सेंसर भी मौजूद हैं, जो फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। सेल्फी के लिए फ्रंट में 32MP का कैमरा दिया गया है, जो वीडियो कॉलिंग और सेल्फी दोनों में शानदार प्रदर्शन करता है।

परफॉर्मेंस के लिहाज से Vivo X200T मीडियाटेक का दमदार Dimensity 9400 Plus प्रोसेसर लेकर आता है। यह प्रोसेसर मल्टीटास्किंग और गेमिंग के लिए खासा बेहतर माना जाता है। बैटरी की बात करें तो फोन में 6200mAh की बड़ी क्षमता वाली बैटरी दी गई है, जो 90W फास्ट चार्जिंग और 40W वायरलेस चार्जिंग सपोर्ट के साथ लंबे समय तक चलने की गारंटी देती है।

कीमत की बात करें तो टिप्स्टर संजू चौधरी के अनुसार, 12GB RAM और 256GB स्टोरेज वाले वेरिएंट की कीमत लगभग 59,999 रुपए हो सकती है। वहीं, 12GB/512GB वेरिएंट करीब 69,999 रुपए में उपलब्ध होगा। इसके अलावा चुनिंदा बैंक कार्ड्स पर 5000 रुपए तक का डिस्काउंट और 2000 रुपए के कूपन की भी सुविधा मिल सकती है।

Vivo X200T की यह कीमत इसे Motorola Signature जैसे प्रतिस्पर्धियों से सीधे मुकाबला करने वाला बनाती है। अब बस इंतजार है लॉन्च के ऑफिशियल रेट और सेल के दिन का, जो आज ही सामने आ जाएगा।

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