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असम में विधानसभा चुनाव से पहले नेहरू मूर्ति गिराने की घटना ने बढ़ाई राजनीति

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असम में विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी बीच कछार जिले से एक हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है। जानकारी के अनुसार, देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की 10 फीट ऊँची मूर्ति गिरा दी गई। यह घटना राज्य की राजनीति में नया विवाद पैदा कर रही है। स्थानीय लोग और राजनीतिक दल इस मामले में सवाल उठाते हुए जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

बीजेपी और आरएसएस कार्यकर्ताओं पर आरोप

स्थानीय लोगों और कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि बीजेपी और आरएसएस के कुछ कार्यकर्ताओं ने इस मूर्ति को गिराया। प्रतिमा गिरने की घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। घटना मंगलवार सुबह की बताई जा रही है, जब सुबह सैर करने वाले लोग मूर्ति को क्षतिग्रस्त अवस्था में देखकर चौंक गए। लोगों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद अधिकारी मौके पर पहुंचे और मामले की जांच शुरू की।

CCTV फुटेज में हुआ खुलासा

प्रदीप कुमार डे, कांग्रेस नेता, ने बुधवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि मूर्ति गिरने की सूचना मिलते ही उन्होंने पुलिस को सूचित किया। अधिकारियों ने शुरुआती जांच में दावा किया कि प्रतिमा अपने आप गिर गई, लेकिन आगे की जांच में सीसीटीवी फुटेज सामने आया। फुटेज में स्पष्ट देखा गया कि एक ग्रुप मशीन का उपयोग करते हुए मूर्ति को तोड़ रहा था। इस खुलासे ने घटना को और गंभीर बना दिया है और राजनीतिक हलकों में बहस तेज कर दी है।

राजनीति और कानून की नजरें

इस घटना के बाद राज्य में राजनीतिक तापमान बढ़ गया है। विपक्षी दल बीजेपी और आरएसएस के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वहीं, प्रशासन ने मामले की गहन जांच शुरू कर दी है और आरोपियों की पहचान के लिए सीसीटीवी और अन्य साक्ष्यों का अध्ययन किया जा रहा है। असम की सियासत में यह घटना विधानसभा चुनाव से ठीक पहले नया मोड़ लेकर आई है, और आने वाले दिनों में इसका राजनीतिक असर भी देखने को मिल सकता है।

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