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माघ स्नान विवाद में ममता कुलकर्णी का बड़ा हमला: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद हैं अहंकारी?

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माघ मेला स्नान के विवाद ने एक बार फिर राजनीति और धर्म के बीच की खाई को गहरा कर दिया है। इस विवाद में ममता कुलकर्णी ने भी अपनी आवाज उठाई है और उन्होंने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को ‘अहंकारी’ बताते हुए सख्त आलोचना की है। उनका कहना है कि धार्मिक गरिमा और संतता की बजाय शंकराचार्य ने अपने अहंकार को आगे बढ़ाया, जो कि किसी भी आध्यात्मिक नेता के लिए शर्मनाक है।

कुलकर्णी ने कहा कि माघ मेला में प्रशासन के नियमों का पालन करना हर किसी का फर्ज होता है। पिछले साल रथ और पालकी के कारण जो दुर्घटनाएं हुईं, उसे भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने अविमुक्तेश्वरानंद से सवाल किया कि क्या उन्होंने सिर्फ ‘अमृत स्नान’ की अहमियत समझी या फिर वे राजनीति में उलझे हुए हैं? 15 मिनट के अनुरोध को नजरअंदाज करना संतों के लिए ठीक नहीं।

सीएम योगी आदित्यनाथ को माफी मांगने की बजाय ममता का मानना है कि शंकराचार्य को अपनी भूल का प्रायश्चित करना चाहिए क्योंकि उनके व्यवहार से न केवल उनका सम्मान गिरा बल्कि उनके अनुयायियों का भी अपमान हुआ।

ममता कुलकर्णी ने खुद को किसी पार्टी का एजेंट मानने से इनकार करते हुए कहा कि भगवा वस्त्र पहनना किसी राजनीतिक दल की पहचान नहीं है, बल्कि सच्चाई और आत्मज्ञान ही किसी व्यक्ति की पहचान होनी चाहिए।

साथ ही, उन्होंने आनंद गिरि महाराज द्वारा रामभद्राचार्य पर की गई अपमानजनक टिप्पणियों की भी कड़ी निंदा की। उनका कहना था कि विकलांगता और आध्यात्मिकता में कोई विरोधाभास नहीं है और ऐसे बयान किसी भी आध्यात्मिक पद के लिए शर्मनाक हैं।

अंत में ममता ने सवाल उठाया कि अविमुक्तेश्वरानंद किसके दलाल हैं और क्या वे स्नान करने आए थे या राजनीति करने। उन्होंने साफ कहा कि धर्म और राजनीति को एक साथ नहीं चलाया जा सकता। माघ मेला स्नान विवाद अब नई राजनीति और आध्यात्मिक लड़ाई का रूप लेता जा रहा है।

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