खेल
अगर छक्का मार सकता हूं तो सिंगल क्यों लूं! – बिहार के लाल वैभव की कहानी ने सबको चौंकाया
एक सपना जो बिहार की गलियों से निकला और आईपीएल के स्टेडियम तक पहुंचा, अब भारत की नीली जर्सी की ओर दौड़ रहा है। हम बात कर रहे हैं वैभव सूर्यवंशी की – वही 14 साल का बल्लेबाज जिसने IPL 2025 में इतिहास रचते हुए 38 गेंदों में शतक जड़ दिया। ये सिर्फ एक रिकॉर्ड नहीं था, ये उस भरोसे का जवाब था जो उनके बचपन के कोच मनीष ओझा ने कई साल पहले जताया था।
IPL में सबसे युवा शतकवीर – सिर्फ 14 साल और 32 दिन में कमाल
गुजरात टाइटंस के खिलाफ राजस्थान रॉयल्स के लिए खेलते हुए जयपुर के मैदान पर वैभव ने ऐसा धमाका किया जिसे भुला पाना आसान नहीं। 101 रन, 38 गेंदें, 11 छक्के और 7 चौके – ये आँकड़े सिर्फ बल्लेबाजी नहीं, एक जुनून की गवाही दे रहे थे। उनके इस प्रदर्शन ने राजस्थान को आठ विकेट से जीत दिलाई और क्रिकेट के हर कोने में उनके नाम की गूंज छेड़ दी।
कोच ओझा बोले – “बिहार के लिए सूरज की किरण है वैभव”
मैच के बाद वैभव के कोच मनीष ओझा ने गर्व से कहा –
“यह सिर्फ एक पारी नहीं थी, यह बिहार जैसे राज्य के लिए उम्मीद की रौशनी थी। वैभव ने न सिर्फ अपने लिए बल्कि उस राज्य के लिए क्रिकेट की नई पहचान बनाई, जहां से राष्ट्रीय स्तर पर खिलाड़ी गिने-चुने आते हैं।”
ओझा को पूरा भरोसा है कि अगर वैभव ऐसे ही खेलते रहे, तो एक या दो साल में वो भारत की T20 टीम में खेलते दिखेंगे। उन्होंने कहा, “उसमें एक खास बात है – सीखने का जुनून और सोच की स्पष्टता।”
“अगर छक्का मार सकता हूं तो सिंगल क्यों?” – वैभव का स्वैग
ओझा ने एक दिलचस्प किस्सा साझा किया –
“दो साल पहले एक नेट प्रैक्टिस में मैंने वैभव से कहा – ‘थोड़ा एक-दो रन भी लिया करो।’ जवाब में उसने कहा – ‘अगर मैं छक्का मार सकता हूं, तो सिंगल की जरूरत क्या है?’ उस वक्त मैं मुस्कुरा दिया, लेकिन आज समझ आ रहा है कि उसकी सोच कितनी अलग थी।”
प्राकृतिक टैलेंट और फोकस – सफलता की कुंजी
कोच के मुताबिक वैभव कोई ‘हाइपर ट्रेनिंग प्रोडक्ट’ नहीं हैं, बल्कि एक नैचुरल टैलेंट हैं। वो जो सीखते हैं, उसे तुरंत अमल में लाते हैं। उनकी आक्रामक बल्लेबाजी, खुले दिमाग वाली सोच और स्मार्ट फैसले उन्हें बाकी युवा खिलाड़ियों से अलग बनाते हैं।
अंडर-19 और फर्स्ट क्लास से IPL तक का सफर
वैभव पहले ही भारत की अंडर-19 टीम के लिए खेल चुके हैं और जनवरी 2024 में फर्स्ट क्लास डेब्यू भी कर चुके हैं। इतनी कम उम्र में ये उपलब्धियां अपने आप में उनकी प्रतिभा की कहानी कहती हैं।
क्या अगला कदम भारत की जर्सी है?
अब सवाल यही है कि क्या वैभव भारत की सीनियर टीम में जगह बनाएंगे? उनके कोच, फैंस और क्रिकेट एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर चयनकर्ता आंखें खोलकर देखें, तो ये सपना जल्द हकीकत बन सकता है।
सिर्फ खिलाड़ी नहीं, प्रेरणा हैं वैभव
वैभव सूर्यवंशी आज सिर्फ एक आईपीएल स्टार नहीं, बल्कि हर उस युवा खिलाड़ी की प्रेरणा हैं जो सीमित संसाधनों से अनलिमिटेड सपने देखता है। और अगर ये सिलसिला ऐसे ही जारी रहा, तो अगली बार जब टीम इंडिया मैदान पर उतरेगी, शायद बिहार का एक चमकता सितारा उस नीली जर्सी में नजर आए।
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