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Himanta Biswa Sarma वीडियो विवाद में फंसे, FIR न होने पर विपक्ष ने कोर्ट में मामला दायर किया

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Himanta Biswa Sarma वीडियो विवाद में फंसे, FIR न होने पर विपक्ष ने कोर्ट में मामला दायर किया

असम के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) और CPI ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है और उनसे कार्रवाई की मांग की है। वरिष्ठ वकील निज़ाम पासा, जो याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, ने मामले की जल्दी सुनवाई की अपील की है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस (CJI) ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जैसे-जैसे चुनाव करीब आते हैं, चुनाव का एक हिस्सा सुप्रीम कोर्ट में भी लड़ाई में बदल जाता है।

तुरंत हस्तक्षेप की मांग

याचिकाकर्ता के वकील ने चीफ जस्टिस के समक्ष कहा, “हम इस कोर्ट से तुरंत हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं। असम के वर्तमान मुख्यमंत्री के कुछ बेहद परेशान करने वाले भाषण सामने आए हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट हुआ है जिसमें वह एक विशेष समुदाय के लोगों पर गोली चलाते दिख रहे हैं। इस संबंध में शिकायतें दर्ज कराई गई हैं, लेकिन अभी तक कोई FIR दर्ज नहीं की गई है।” इस मांग पर CJI ने कहा कि वह मामले पर विचार करेंगे और सुनवाई की तारीख निर्धारित करेंगे।

Himanta Biswa Sarma वीडियो विवाद में फंसे, FIR न होने पर विपक्ष ने कोर्ट में मामला दायर किया

हिमंता बिस्वा शर्मा के विवादित बयान

Himanta Biswa Sarma के हालिया बयान पूरे राज्य में हलचल पैदा कर चुके हैं। पिछले सप्ताह उन्होंने कांग्रेस पार्टी को ‘बांग्लादेशी घुसपैठियों का समर्थक’ कहा और पूछा कि क्या पार्टी असम के लोगों के साथ है या “मियाँ” समुदाय के साथ। एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान गोलाघाट में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, “कांग्रेस को स्पष्ट करना चाहिए कि वह असमिया लोगों के साथ है या मियाँ समुदाय के साथ। मियाँ शब्द मुख्यतः असम में बंगाली भाषी मुस्लिम समुदाय के लिए इस्तेमाल किया जाता है। गैर-बंगाली भाषी लोग आमतौर पर इन्हें बांग्लादेशी घुसपैठी मानते हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि मियाँ लोग पहले असम के पश्चिमी हिस्सों जैसे बारपेटा और ढुबरी में बसे थे, लेकिन अब वे डूलियाजन और मार्गेरिटा जैसे शहरों तक फैल चुके हैं।

वीडियो को लेकर विवाद

हिमंता बिस्वा शर्मा एक वीडियो को लेकर भी विवाद में फंस गए हैं। असम BJP इकाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें alleged तौर पर शर्मा को राइफल लेकर दो लोगों की ओर निशाना साधते और फायर करते हुए दिखाया गया है। वीडियो में एक व्यक्ति टोपी पहने हुए है और दूसरे के दाढ़ी है, और कैप्शन में लिखा है “Point Blank Shot।” इस वीडियो ने राजनीतिक गलियारों में और सोशल मीडिया पर चर्चा और आलोचना की लहर पैदा कर दी है। इसके चलते भाजपा और विपक्षी दलों के बीच गर्मागरम बहस शुरू हो गई है और सुप्रीम कोर्ट से मामले में हस्तक्षेप की मांग की गई है।

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अक्षरधाम में 108 फीट विशाल प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा देख हर कोई रह गया हैरान

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अक्षरधाम में 108 फीट विशाल प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा देख हर कोई रह गया हैरान

दिल्ली के विश्व प्रसिद्ध स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर में गुरुवार को एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक पल देखने को मिला जब तपोमूर्ति श्रीनीलकंठवर्णी की 108 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा विधि संपन्न की गई। यह दिव्य अनुष्ठान वैश्विक BAPS संस्था के प्रमुख महंतस्वामी महाराज के करकमलों द्वारा मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुआ। इस भव्य आयोजन में अमेरिका यूरोप अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया समेत दुनिया भर से 300 से अधिक संत और महंत शामिल हुए। पूरे परिसर में भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला और वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।

पंचधातु से बनी 108 फीट ऊंची अद्भुत प्रतिमा

यह प्रतिमा पंचधातु से निर्मित है और इसे एक ही चरण में तैयार किया गया है जो इसे और भी विशेष बनाता है। करीब एक साल की मेहनत के बाद तैयार हुई इस प्रतिमा को 8 फीट ऊंचे पृष्ठतल पर स्थापित किया गया है। इस विशाल मूर्ति के निर्माण में अक्षरधाम के शिल्पी संतों के साथ लगभग 50 कारीगरों और स्वयंसेवकों ने अपना योगदान दिया। इस प्रतिमा में भगवान स्वामीनारायण के नीलकंठवर्णी रूप की कठिन तपस्या को दर्शाया गया है जो उन्होंने पुलहाश्रम मुक्तिनाथ में एक पैर पर खड़े रहकर की थी। यह मूर्ति न केवल कला का उत्कृष्ट उदाहरण है बल्कि आध्यात्मिक तप और त्याग का जीवंत प्रतीक भी है।

अक्षरधाम में 108 फीट विशाल प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा देख हर कोई रह गया हैरान

नीलकंठवर्णी की तपस्या और आध्यात्मिक यात्रा का संदेश

भगवान स्वामीनारायण ने मात्र 11 वर्ष की आयु में घर परिवार त्याग कर लोक कल्याण के लिए एक लंबी आध्यात्मिक यात्रा शुरू की थी। इस दौरान उन्होंने लगभग 12 हजार किलोमीटर की यात्रा कर भारत के प्रमुख तीर्थ स्थलों जैसे बद्रीनाथ केदारनाथ कैलाश मानसरोवर कामाख्या पुरी रामेश्वरम और द्वारका का भ्रमण किया। इसी यात्रा के दौरान उन्होंने नीलकंठवर्णी नाम धारण किया। इस प्रतिमा के माध्यम से तप त्याग करुणा और मानव सेवा जैसे वैश्विक मूल्यों को जन जन तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है ताकि समाज में सकारात्मक सोच और आध्यात्मिक जागरूकता को बढ़ावा मिल सके।

विश्व शांति का संदेश और भव्य आयोजन की झलक

इस महा उत्सव की शुरुआत एक दिन पहले श्रीनीलकंठवर्णी विश्व शांति महायज्ञ के साथ हुई थी जिसमें वैदिक विधि से पूजा अर्चना की गई। महंतस्वामी महाराज ने इस अवसर पर विश्व शांति और आपसी भाईचारे की कामना की। उन्होंने वर्तमान समय में दुनिया के विभिन्न हिस्सों में चल रहे संघर्षों को समाप्त करने की प्रार्थना की और सफेद कबूतर उड़ाकर शांति का संदेश दिया। इस आयोजन ने न केवल धार्मिक बल्कि वैश्विक स्तर पर एकता और सद्भाव का संदेश दिया है। यह आयोजन आने वाले समय में आध्यात्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक पहचान को और मजबूत करेगा।

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अक्षरधाम में 108 फीट विशाल प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा, दुनिया देखेगी ऐतिहासिक क्षण

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अक्षरधाम में 108 फीट विशाल प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा, दुनिया देखेगी ऐतिहासिक क्षण

दिल्ली का स्वामीनारायण अक्षरधाम एक बार फिर इतिहास रचने जा रहा है। गुरुवार को यहां तपोमूर्ति श्रीनीलकंठवर्णी की 108 फीट ऊंची विशाल प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी। यह आयोजन वैश्विक BAPS संस्था के प्रमुख ब्रह्मस्वरूप महंतस्वामी महाराज के सान्निध्य में होगा। पंचधातु से निर्मित यह प्रतिमा अपनी तरह की दुनिया की पहली ऐसी विशाल मूर्ति है जो भगवान के कठिन तप को दर्शाते हुए एक चरण पर खड़ी है। इस ऐतिहासिक आयोजन को लेकर तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं और देश-विदेश से सैकड़ों संत और श्रद्धालु इसमें शामिल होने पहुंच रहे हैं।

विश्वभर से संतों का जुटान और भव्य आयोजन

इस विशेष अवसर पर यूरोप, अमेरिका, अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया सहित दुनियाभर से 300 से अधिक संत और महंत दिल्ली पहुंचे हैं। ब्रह्मस्वरूप महंतस्वामी महाराज 19 मार्च को ही दिल्ली पहुंच गए थे। इसके बाद 21 मार्च को उनके स्वागत में भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। 22 मार्च को पंचकुला और कुरुक्षेत्र में नए BAPS मंदिरों की मूर्ति प्रतिष्ठा भी संपन्न हुई। इसी दौरान संतों और भक्तों ने फूलों की होली का उत्सव मनाया। 23 मार्च को पेरिस मंदिर में स्थापित होने वाली मूर्ति का पूजन भी किया गया। इन सभी आयोजनों ने इस महोत्सव को और भी भव्य बना दिया है।

अक्षरधाम में 108 फीट विशाल प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा, दुनिया देखेगी ऐतिहासिक क्षण

श्रीनीलकंठवर्णी का तप और आध्यात्मिक यात्रा

भगवान स्वामीनारायण ने मात्र 11 वर्ष की आयु में घर छोड़कर सात वर्षों तक पूरे भारत में कठिन तप और यात्रा की थी। इस दौरान उन्होंने 12 हजार किलोमीटर से अधिक की पदयात्रा की और हिमालय, बद्रीनाथ, केदारनाथ, कैलाश मानसरोवर, मुक्तिनाथ, कामाख्या, रामेश्वरम, पुरी, नासिक, पंढरपुर और द्वारका जैसे प्रमुख तीर्थों का भ्रमण किया। इस आध्यात्मिक यात्रा के दौरान उन्होंने ‘नीलकंठ वर्णी’ नाम धारण किया। उनकी तपस्या, त्याग और सेवा का यह स्वरूप आज भी लोगों को प्रेरित करता है और यही भाव इस प्रतिमा के माध्यम से जीवंत किया गया है।

विश्व शांति का संदेश और प्रतिमा की विशेषता

इस 108 फीट ऊंची प्रतिमा को 8 फीट ऊंचे आधार पर स्थापित किया गया है और इसे बनाने में लगभग एक वर्ष का समय लगा। पंचधातु से निर्मित इस प्रतिमा में कांस्य धातु का विशेष उपयोग किया गया है। करीब 50 कारीगरों और संतों ने मिलकर इसे तैयार किया है। यह प्रतिमा पुलहाश्रम में नीलकंठवर्णी द्वारा एक पैर पर खड़े होकर की गई कठिन तपस्या का प्रतीक है। महोत्सव की शुरुआत विश्व शांति महायज्ञ से हुई जिसमें महंतस्वामी महाराज ने वैश्विक एकता और शांति की कामना की। सफेद कबूतर उड़ाकर उन्होंने दुनिया में सद्भाव और मैत्री का संदेश दिया। गुरुवार सुबह 6 बजे से मुख्य प्राण-प्रतिष्ठा विधि शुरू होगी और इसके बाद इसका भव्य लोकार्पण किया जाएगा।

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कर्नाटक सरकार की नई डिजिटल डिटॉक्स नीति बच्चों की मोबाइल आदत पर लगाएगी सख्त रोक

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कर्नाटक सरकार की नई डिजिटल डिटॉक्स नीति बच्चों की मोबाइल आदत पर लगाएगी सख्त रोक

आज के दौर में मोबाइल फोन का इस्तेमाल हर उम्र के लोगों में बढ़ गया है। चाहे भोजन कर रहे हों या अन्य काम में व्यस्त हों, मोबाइल फोन हमेशा हाथ में रहता है। यह प्रवृत्ति अब बच्चों तक भी पहुंच गई है, जो तेजी से मोबाइल फोन की लत का शिकार हो रहे हैं। इस चिंता को देखते हुए कर्नाटक सरकार ने एक नई डिजिटल डिटॉक्स नीति तैयार की है।

नीति का उद्देश्य और स्क्रीन टाइम पर नियंत्रण

कर्नाटक की डिजिटल डिटॉक्स नीति का मुख्य उद्देश्य बच्चों को तकनीक के संतुलित और सीमित उपयोग के लिए प्रशिक्षित करना है। नीति का लक्ष्य बच्चों की मोबाइल पर निर्भरता को कम करना है। इसके तहत सिफारिश की गई है कि बच्चों को मोबाइल, टीवी और अन्य स्क्रीन का उपयोग विशेष रूप से मनोरंजन के लिए प्रतिदिन सिर्फ एक घंटे तक ही सीमित करना चाहिए। अत्यधिक स्क्रीन टाइम से तनाव, नींद की समस्याएं, ध्यान केंद्रित करने की क्षमता में कमी और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ता है।

कर्नाटक सरकार की नई डिजिटल डिटॉक्स नीति बच्चों की मोबाइल आदत पर लगाएगी सख्त रोक

स्कूलों में नीति लागू करने की योजना

सरकार इस नीति को स्कूलों में भी लागू करना चाहती है। इसके तहत स्कूलों में डिजिटल साक्षरता और ऑनलाइन सुरक्षा को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। प्रत्येक स्कूल में डिजिटल वेलनेस कमिटी स्थापित की जाएगी, जो छात्रों में मोबाइल की लत के लक्षण पहचानकर उचित काउंसलिंग प्रदान करेगी। इसके अलावा, शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे बच्चों की डिजिटल आदतों को समझ सकें और उन्हें सही मार्गदर्शन दे सकें। माता-पिता को घर पर स्क्रीन टाइम नियंत्रित करने और बच्चों को आउटडोर खेलों में शामिल करने के लिए दिशा-निर्देश दिए जाएंगे।

सोशल मीडिया और ऑनलाइन सुरक्षा पर रोक

नीति के तहत स्कूलों में विशेष समय तय किया जाएगा जब मोबाइल या अन्य तकनीकी उपकरणों का उपयोग पूरी तरह से प्रतिबंधित होगा। बच्चों को ऑफलाइन गतिविधियों में भाग लेने का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही उन्हें साइबरबुलिंग, ऑनलाइन धोखाधड़ी और शोषण से बचाव की रणनीतियों की भी शिक्षा दी जाएगी। कर्नाटक सरकार ने 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया एक्सेस पर पूरी तरह से प्रतिबंध की घोषणा की है, ताकि उनका मानसिक और शारीरिक विकास सुरक्षित रह सके।

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