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GST Reforms: सोने की कीमत घटेगी या आम आदमी का बजट बिगड़ेगा?
GST Reforms: भारत में सोना और चांदी न केवल निवेश का जरिया हैं, बल्कि यह हर घर की परंपरा और भावनाओं से जुड़ा हुआ है। त्योहारों और शादियों के सीजन में सोने की खरीदारी एक परंपरा बन चुकी है। ऐसे में सोने-चांदी की कीमतों पर टैक्स का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ता है। इसी बीच सितंबर के पहले हफ्ते में होने वाली जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक से सोने और चांदी के कारोबारियों के साथ-साथ आम लोगों को भी बड़ी उम्मीदें हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देश को संबोधित करते हुए जीएसटी स्ट्रक्चर में बड़े बदलावों का संकेत दिया था। सरकार ने साफ कर दिया है कि जल्द ही जीएसटी स्लैब्स को सरल किया जाएगा और नए ढांचे में केवल दो स्लैब – 5% और 18% ही होंगे। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि सोने और चांदी पर जीएसटी घटेगा या बढ़ेगा?
मौजूदा समय में क्या है सोने पर टैक्स?
अभी सोने की खरीद पर 3 प्रतिशत की दर से जीएसटी वसूला जाता है। यानी यदि आप 50,000 रुपये का सोना खरीदते हैं, तो उस पर 1,500 रुपये जीएसटी देना पड़ता है। यह टैक्स सीधे ग्राहक की जेब पर असर डालता है और कुल कीमत बढ़ा देता है।
एक्सपर्ट्स का क्या मानना है?
टैक्स विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियों का कहना है कि जीएसटी रिफॉर्म्स के तहत सोने पर लगने वाले टैक्स में 0.5% से 1% तक की कटौती हो सकती है। अगर यह होता है तो सोना कुछ हद तक सस्ता हो जाएगा और आम लोगों के लिए खरीदना आसान होगा।
उदाहरण के तौर पर, अगर जीएसटी 3% से घटाकर 2% कर दिया जाता है, तो 50,000 रुपये के सोने पर जीएसटी सिर्फ 1,000 रुपये देना होगा। यह सीधा फायदा ग्राहकों को मिलेगा और मांग बढ़ने की संभावना है।

GST Reforms: सोने की कीमत घटेगी या आम आदमी का बजट बिगड़ेगा?
कारोबारियों की आशंका
हालांकि, कारोबारियों में एक डर भी है। उन्हें आशंका है कि सरकार सोने पर जीएसटी घटाने के बजाय इसे बढ़ाकर 5% कर सकती है। अगर ऐसा हुआ, तो सोना खरीदना और महंगा हो जाएगा। 50,000 रुपये के सोने पर जीएसटी 2,500 रुपये देना पड़ेगा। ऐसे में आम आदमी का बजट गड़बड़ा जाएगा और त्योहारों के दौरान सोने की बिक्री पर असर पड़ सकता है।
चांदी पर भी पड़ेगा असर
जीएसटी स्ट्रक्चर में बदलाव का असर केवल सोने ही नहीं बल्कि चांदी की कीमतों पर भी पड़ेगा। अभी चांदी पर भी 3% जीएसटी लगता है। अगर इसमें कटौती होती है तो चांदी भी सस्ती होगी और ग्रामीण इलाकों में इसकी मांग बढ़ सकती है। वहीं टैक्स बढ़ने पर यह धातु भी महंगी हो जाएगी।
आम आदमी को कैसे मिलेगी राहत?
अगर जीएसटी घटता है तो त्योहारों और शादियों के सीजन में सोने-चांदी की खरीदारी आसान होगी। इससे न केवल आम उपभोक्ता को फायदा मिलेगा बल्कि ज्वेलरी कारोबार में भी रौनक लौटेगी। मांग बढ़ने से बाजार को मजबूती मिलेगी और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
वहीं अगर टैक्स बढ़ाया गया, तो सोना महंगा होने से लोग नकली या अनऑर्गेनाइज्ड बाजारों की ओर रुख कर सकते हैं। इसका असर सरकार की जीएसटी से होने वाली कमाई पर भी पड़ सकता है।
क्यों जरूरी हैं जीएसटी रिफॉर्म्स?
भारत में लंबे समय से जीएसटी स्ट्रक्चर जटिल माना जा रहा है। कई स्लैब्स होने से उपभोक्ता और कारोबारियों दोनों के लिए असमंजस की स्थिति बनती है। अब सरकार इसे आसान बनाकर केवल दो स्लैब – 5% और 18% – रखने की तैयारी में है। इसका फायदा यह होगा कि टैक्स स्ट्रक्चर ज्यादा पारदर्शी और सरल होगा।
सोने और चांदी पर जीएसटी में कटौती से आम आदमी को राहत मिल सकती है और बाजार में मांग बढ़ सकती है। वहीं टैक्स बढ़ने से कीमतें और महंगी होंगी, जिससे लोगों का बजट गड़बड़ा सकता है। अब सबकी नजरें सितंबर में होने वाली 56वीं जीएसटी काउंसिल की बैठक पर टिकी हैं। यह बैठक तय करेगी कि सोना-चांदी खरीदने वालों को इस फेस्टिव सीजन में राहत मिलेगी या उन्हें ज्यादा जेब ढीली करनी पड़ेगी।
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घरेलू गैस सिलेंडरों में 14.2 किलोग्राम की जगह 10 किलोग्राम की संभावना
गुल्फ़ देशों में जारी संघर्ष का असर अब भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर भी दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति बाधित होने के कारण आयात में कमी आई है। इसके परिणामस्वरूप तेल विपणन कंपनियों के पास उपलब्ध स्टॉक तेजी से घट रहा है। इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार और कंपनियां दोनों ही आवश्यक कदम उठाने की तैयारी कर रही हैं। Economic Times की रिपोर्ट के अनुसार घरेलू गैस सिलेंडरों में एलपीजी की आपूर्ति को घटाने पर विचार किया जा रहा है। योजना यह है कि हर सिलेंडर में 14.2 किलोग्राम की बजाय लगभग 10 किलोग्राम गैस दी जाएगी। ऐसा करने से कुल उपलब्ध आपूर्ति में कमी होने के बावजूद अधिक परिवारों तक गैस पहुंचाई जा सकेगी।
आयात पर बढ़ा दबाव
देश में एलपीजी आयात की स्थिति फिलहाल चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। वर्तमान में, गल्फ़ देशों से नई खेपें नहीं आ रही हैं। पिछले सप्ताह लगभग 92,700 टन गैस दो जहाजों के माध्यम से पहुंची, जो पूरे देश की एक दिन की खपत के बराबर है। वहीं, वाणिज्यिक उपयोगकर्ताओं के लिए आपूर्ति फिर से शुरू होने से उपलब्ध सीमित स्टॉक पर और दबाव पड़ गया है। पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने हाल ही में कई बार कहा कि देश में एलपीजी की स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है।

कम मात्रा वाले सिलेंडरों की कीमत कैसे तय होगी
अगर सिलेंडरों में गैस की मात्रा कम करने का निर्णय लागू किया गया तो इसकी कीमत अनुपात के आधार पर तय की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, ऐसे सिलेंडरों पर विशेष स्टिकर लगाया जाएगा ताकि स्पष्ट हो कि इसमें कम मात्रा की गैस है। इसके लिए बॉटलिंग प्लांट्स को अपनी आंतरिक प्रणालियों में बदलाव करना होगा और आवश्यक नियामक अनुमोदन प्राप्त करने के बाद ही यह प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
कंपनियों की चिंताएं और संभावित विरोध
इस योजना को लेकर संबंधित कंपनियों ने भी अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं। उनका मानना है कि अचानक सिलेंडरों के वजन में कमी से उपभोक्ताओं में भ्रम पैदा हो सकता है। इसके चलते जनता में असंतोष और विरोध की भावना पैदा होने की संभावना है। विशेष रूप से उन राज्यों में, जहां विधानसभा चुनाव होने हैं, वहां यह स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है। कंपनियों के अनुसार, यदि अगले महीने स्थिति और बिगड़ती है, तो यह गंभीर चिंता का विषय बन सकता है।
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ईरान तनाव और तेल कीमतों से रुपये में गिरावट, डॉलर के मुकाबले ऑल-टाइम लो पर पहुंचा
हाल के दिनों में वैश्विक बाजारों में अस्थिरता और ईरान से जुड़े युद्ध जैसे हालातों के बीच भारतीय रुपया लगातार दबाव में है। 18 मार्च को रुपया गिरकर अपने ऑल-टाइम लो 92.62 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल और अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों की बेचने की गतिविधियों ने रुपये पर दबाव बढ़ा दिया है। गोल्डमैन सैक्स के अनुसार, दक्षिण एशियाई देशों में भारतीय रुपये की स्थिति सबसे कमजोर बनी हुई है और अगले साल यह डॉलर के मुकाबले 95 रुपये तक गिर सकता है। यदि ऐसा होता है, तो भारतीय अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है।
पिछले महीने रुपये में गिरावट और RBI की रणनीति
पिछले एक महीने में भारतीय रुपये में करीब 1.77 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। विदेशी निवेशकों ने मार्च महीने में लगभग 5.5 अरब डॉलर की इक्विटी भारतीय बाजार से निकाल ली, जिससे निफ्टी 50 करीब 8 प्रतिशत तक गिर गया। भारतीय रिजर्व बैंक लगातार बाजार में हस्तक्षेप कर रुपये पर दबाव कम करने की कोशिश कर रहा है। आरबीआई ने हाल के समय में एक ही सप्ताह में करीब 18 से 20 अरब डॉलर की बिक्री की है, ताकि मुद्रा को स्थिर रखा जा सके। हालांकि, मौजूदा वैश्विक और घरेलू आर्थिक परिस्थितियां रुपये को मजबूती देने में चुनौतीपूर्ण साबित हो रही हैं।

रुपये के टूटने के कारण और संभावित प्रभाव
गोल्डमैन सैक्स के भारतीय अर्थशास्त्री शांतनु सेनगुप्ता के अनुसार, रुपये के 95 प्रति डॉलर तक गिरने का अनुमान मुख्यतः अमेरिका-इजरायल संघर्ष और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के संभावित बंद होने की आशंका पर आधारित है। चालू खाते के घाटे में वृद्धि भी इसका बड़ा कारण है। उच्च तेल मूल्य, निवेशकों की निकासी और वैश्विक आर्थिक तनाव ने भारतीय रुपये को कमजोर कर दिया है। यदि रुपया और नीचे गिरता है, तो आयात महंगा होगा, मुद्रास्फीति बढ़ेगी और आम जनता के लिए रोजमर्रा की चीजों की कीमतें और बढ़ सकती हैं।
आर्थिक वृद्धि और महंगाई पर असर
रुपये की कमजोरी का असर भारत की आर्थिक वृद्धि पर भी देखने को मिल सकता है। गोल्डमैन सैक्स ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर का पूर्व अनुमान 7.0 प्रतिशत से घटाकर 6.5 प्रतिशत कर दिया है। इसके अलावा, महंगाई दर में 30 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी और चालू खाता घाटा 0.8 प्रतिशत बढ़कर जीडीपी के 1.2 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। यह संकेत हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था को अगले वर्ष कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है और रुपये की मजबूती और आर्थिक स्थिरता के लिए सरकार और RBI को सतर्क उपाय करने होंगे।
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भारतीय शेयर बाजार में सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट, निवेशक दबाव में
भारतीय शेयर बाजार बुधवार को फिर से बड़ी गिरावट के साथ खुला। सेंसेक्स अपनी शुरुआती बढ़त खोकर अब 1000 अंक से ज्यादा टूट चुका है और 77,100-77,200 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। वहीं, निफ्टी भी 300 से ज्यादा अंक गिरकर 23,900 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे चला गया। निवेशकों पर एनर्जी संकट, Essential Commodities Act के लागू होने और विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दबाव साफ दिख रहा है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशक फिलहाल सतर्क हैं और पॉजिटिव खबरों के इंतजार में हैं।
टॉप गेनर्स और लूजर्स की स्थिति
दिन के कारोबार में Wipro, Tata Steel, Power Grid, Hindalco, Tech Mahindra के शेयरों में तेजी देखने को मिली। वहीं, बैंकिंग सेक्टर में दबाव रहा और Kotak Mahindra Bank, ICICI Bank, HDFC Bank, Axis Bank, Bajaj Finserv के शेयर गिरावट में रहे। ऑटो सेक्टर में भी बिकवाली देखी गई, जिसमें Mahindra & Mahindra, TVS Motors शामिल हैं। टॉप लूजर्स में Reliance Industries और Bharti Airtel भी शामिल रहे। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक और घरेलू घटनाओं के चलते निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।

एशियाई और वॉल स्ट्रीट का रुख
बुधवार को एशियाई बाजारों में तेल की कीमतों में कमी के चलते तेजी देखी गई। जापान का निक्केई 225 1.36 प्रतिशत बढ़ा, जबकि टॉपिक्स 1.22 प्रतिशत की तेजी में रहा। दक्षिण कोरिया का कोस्पी 2.52 प्रतिशत और कोस्डैक स्मॉल-कैप 1.39 प्रतिशत बढ़ा। हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स फ्यूचर्स 25,936 पर कारोबार करता दिखा। वहीं, वॉल स्ट्रीट मंगलवार को लाल निशान में बंद हुआ। S&P 500 0.21 प्रतिशत गिरकर 6,781.48 पर बंद हुआ और डॉव जोन्स 34.29 अंक या 0.07 प्रतिशत लुढ़ककर 47,706.51 पर बंद हुआ। नैस्डैक कंपोजिट 0.01 प्रतिशत बढ़कर 22,697.10 पर बंद हुआ।
क्रूड तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव
बुधवार सुबह कच्चे तेल की कीमतें हल्की गिरावट के बाद ऊपर चली गईं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान में युद्ध समाप्त होने के संकेत मिलने के बाद WTI क्रूड 0.03 प्रतिशत गिरकर 83.43 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। वहीं, ब्रेंट क्रूड 119.50 डॉलर से गिरकर 87-90 डॉलर के दायरे में आ गया। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने वैश्विक बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए 182 मिलियन बैरल से ज्यादा तेल आपातकालीन भंडार से जारी करने का प्रस्ताव रखा है। इससे तेल की सप्लाई में सुधार की उम्मीद है।
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