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Google AI Plus भारत में उपलब्ध, उपयोगकर्ताओं के लिए AI टूल्स और मुफ्त क्लाउड स्टोरेज का नया मौका
Google ने अपनी नई AI Plus सेवा भारत में लॉन्च कर दी है। इस खास सेवा के जरिए यूजर्स को Gemini 3 Pro और Nano Banana Pro जैसे AI टूल्स का एक्सेस मिलेगा। इसके साथ ही, यूजर्स को Gmail पर 200GB का मुफ्त क्लाउड स्टोरेज भी मिलेगा। Google ने AI Plus सर्विस के लिए एक प्रारंभिक ऑफर भी पेश किया है, जिससे उपयोगकर्ता इन सभी सुविधाओं का लाभ कम लागत में उठा सकते हैं। यह कदम AI टेक्नोलॉजी को आम यूजर्स तक पहुँचाने और उनके डिजिटल अनुभव को बेहतर बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
Google AI Plus की सदस्यता और कीमतें
Google AI Plus सेवा की मासिक सदस्यता ₹399 में उपलब्ध है। वहीं, अगर कोई यूजर 6 महीने की सदस्यता लेता है, तो इसकी कीमत केवल ₹199 प्रति माह होगी। इसके अलावा, Google AI Pro सेवा उपयोगकर्ताओं के लिए मुफ्त में उपलब्ध होगी। AI Plus सदस्यता के तहत यूजर्स को Google Gemini AI के सभी नवीनतम मॉडल्स का भी मुफ्त एक्सेस मिलेगा। Google का यह नया प्लेटफ़ॉर्म AI टूल्स, क्लाउड स्टोरेज और क्रिएटिव टूल्स का एक संयोजन पेश करता है, जो छात्रों, शोधकर्ताओं और कंटेंट क्रिएटर्स के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकता है।
AI Plus के प्रमुख लाभ
AI Plus सेवा के तहत यूजर्स को Gemini का सबसे स्मार्ट मॉडल Gemini 3 Pro मुफ्त में मिलेगा। इसके अलावा, Nano Banana Pro तक सीमित एक्सेस मिलेगा, जिसका इस्तेमाल गहन शोध और इमेज जनरेशन के लिए किया जा सकेगा। वीडियो क्रिएशन के लिए Veo 3.1 Fast का भी उपयोग किया जा सकेगा। हर महीने यूजर्स को 200 AI क्रेडिट्स भी मिलेंगे। इसके साथ ही, AI आधारित फिल्म बनाने वाला टूल Flow, इमेज-टू-वीडियो जेनरेशन टूल Whisk, और Gemini के सभी Google ऐप्स जैसे Gmail, Google Docs और Google Photos में एक्सेस मिलेगा। इसके अलावा, यूजर्स को NotebookLM और 200GB क्लाउड स्टोरेज की सुविधा भी दी जाएगी।
Google AI Pro: प्रीमियम विकल्प
Google AI Pro सर्विस की मासिक सदस्यता ₹1950 में उपलब्ध है। इसमें AI Plus की सभी सेवाएं शामिल हैं। Pro उपयोगकर्ताओं को हर महीने 1000 AI क्रेडिट्स मिलेंगे और उन्हें 2TB क्लाउड स्टोरेज का लाभ भी मिलेगा। शुरुआती ऑफर के तहत, जो यूजर AI Plus सदस्यता लेते हैं, उन्हें AI Pro का एक महीने का मुफ्त सब्सक्रिप्शन भी मिलेगा। इससे उपयोगकर्ता पहले AI Plus का अनुभव कर सकते हैं और फिर जरूरत पड़ने पर AI Pro की प्रीमियम सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं। Google का यह कदम AI टेक्नोलॉजी को अधिक सुलभ और किफायती बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।
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Google Search का विवादित जवाब, एलोन मस्क ने तकनीक की विश्वसनीयता पर उठाया सवाल
टेक्नोलॉजी की दुनिया के चर्चित नाम एलोन मस्क एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर अपने बेबाक और सटीक कमेंट्स के लिए जाने जाने वाले मस्क ने इस बार Google Search की कार्यप्रणाली पर अप्रत्यक्ष रूप से सवाल उठाए हैं। उन्होंने एक यूजर के पोस्ट को रीपोस्ट करते हुए गूगल के एक अजीब और भ्रमित करने वाले सर्च रिजल्ट पर चुप्पी तोड़ी। इस पोस्ट में दिखाया गया था कि जब गूगल से पूछा गया, “अगला साल 2027 है क्या?” तो गूगल ने contradictory यानी विरोधाभासी जवाब दिया, जो तकनीकी जगत में चर्चा का विषय बन गया।
गूगल के जवाब में दो विरोधाभासी तथ्य
मामला यह था कि गूगल ने सही जानकारी भी दी और गलत जानकारी भी। गूगल ने यह बताया कि अगला साल 2026 है, जिसके बाद 2027 आता है। लेकिन वहीं नीचे उसी रिजल्ट में यह भी दिखाया गया कि 2026 वर्तमान साल है और 2027 अगला साल है। इस तरह की विपरीत जानकारी ने उपयोगकर्ताओं को भ्रमित कर दिया। खासकर तब जब यह जानकारी पूरी निश्चितता के साथ प्रदर्शित हो रही हो, तो इसे स्वीकार करना मुश्किल हो जाता है। मस्क ने इस मामले पर बस इतना कहा कि “सुधार की गुंजाइश है,” जो एक छोटा लेकिन बहुत सशक्त व्यंग्य था। उनका संदेश साफ था कि विश्व की सबसे भरोसेमंद सर्च इंजन भी गलतियां कर सकती है।
2026 is not working great for Google 😑 pic.twitter.com/KZlpqkwko3
— X Freeze (@XFreeze) January 6, 2026
गूगल सर्च और उपयोगकर्ताओं की भरोसेमंदी
गूगल सर्च लंबे समय से इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की पहली पसंद रही है। चाहे आसान सवाल हों या जटिल जानकारी, लोग बिना शंका के गूगल पर भरोसा करते हैं। एआई चैटबॉट्स के आने तक गूगल को लगभग हर सवाल का जवाब समझा जाता था। लेकिन इसी भरोसे ने कभी-कभी समस्याएं भी पैदा की हैं। अक्सर लोग बिना किसी जांच-पड़ताल के गूगल के जवाबों को सच्चाई मान लेते हैं, जो जोखिम भरा हो सकता है। तारीख जैसे मामूली विषय पर हुई गलती भी भ्रम बढ़ाती है, लेकिन अगर ऐसा वित्तीय, स्वास्थ्य या कानूनी जानकारियों में हो तो नतीजे बहुत गंभीर हो सकते हैं। इसलिए बड़ी टेक कंपनियों से शून्य त्रुटि की उम्मीद होती है।
तकनीक की बढ़ती जिम्मेदारी और उपयोगकर्ताओं के लिए सीख
खोज इंजन भी गलत हो सकते हैं, यह बात आमतौर पर लोग मानना पसंद नहीं करते। लेकिन सच यह है कि गूगल समेत सभी सर्च प्लेटफॉर्म्स अपने डेटा स्रोतों, AI मॉडल्स और ऑटोमेटेड सिस्टम पर निर्भर होते हैं। कभी-कभी डेटा में टकराव होने से गलत या पुरानी जानकारी आ सकती है। खासकर Features जैसे Featured Snippets और Instant Answers में त्रुटियां हो सकती हैं। आज जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तेजी से विकसित हो रहा है, तो टेक कंपनियों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वे सटीक, पारदर्शी और भरोसेमंद जानकारी दें। मस्क का यह कमेंट सिर्फ मजाक नहीं, बल्कि एक चेतावनी भी है कि तकनीकी दुनिया को लगातार सुधार करते रहना चाहिए।
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