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गोल्डमैन सैक्स ने भारत की जीडीपी ग्रोथ घटाकर 5.9 प्रतिशत किया, महंगाई बढ़ने का खतरा
गोल्डमैन सैक्स ने कारोबारी साल 2025-26 के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान घटाकर 5.9 प्रतिशत कर दिया है। इससे पहले बैंक ने 7 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान लगाया था। इस गिरावट का मुख्य कारण वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं। बैंक के विश्लेषकों ने कहा कि ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता पैदा कर दी है, जिससे भारत की आर्थिक वृद्धि पर असर पड़ेगा।
तेल की बढ़ती कीमतों और मुद्रा में गिरावट ने बढ़ाई आर्थिक चुनौतियां
गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट के अनुसार ब्रेंट क्रूड की कीमत मार्च में 105 डॉलर और अप्रैल में 115 डॉलर प्रति बैरल रहेगी। इसके अलावा साल की चौथी तिमाही में यह गिरकर 80 डॉलर प्रति बैरल हो जाएगी। विदेशी मुद्रा में बढ़ी लागत और रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले गिरकर 93-95 रुपये प्रति डॉलर पर पहुंच गया है। इससे आयात महंगा हुआ है और मुद्रास्फीति बढ़ने की संभावना है। बैंक ने कहा कि 2026 में मुद्रास्फीति 4.6 प्रतिशत तक पहुंच सकती है, जो भारतीय रिजर्व बैंक की स्वीकार्य सीमा के भीतर है।
चालू खाता घाटा और रेपो दर में संभावित बदलाव
गोल्डमैन सैक्स ने कहा कि 2026 में भारत का चालू खाता घाटा GDP का 2 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। अक्टूबर-दिसंबर 2025 में यह 1.3 प्रतिशत था। मुद्रा में गिरावट और तेल की बढ़ी कीमतें आम आदमी और उद्योग दोनों पर दबाव डाल सकती हैं। इस वजह से भारतीय रिजर्व बैंक संभवतः मौद्रिक नीति में बदलाव करेगा और रेपो दर में 50 बेसिस पॉइंट्स की वृद्धि कर सकता है। इससे कर्ज महंगा होगा और महंगाई पर नियंत्रण पाने में मदद मिलेगी।
आम आदमी पर असर और कंपनियों की रणनीति
महंगाई में वृद्धि से आम आदमी की जेब पर असर पड़ेगा। कच्चे तेल की बढ़ी कीमतें ऑटोमोबाइल, लॉजिस्टिक्स और कई अन्य कंपनियों के मुनाफे को प्रभावित करेंगी। कंपनियां इसे महंगाई के जरिए ग्राहकों पर डाल सकती हैं। पहले अनुमान था कि RBI रेपो दर में कटौती करेगा, लेकिन अब 0.50 प्रतिशत बढ़ोतरी की संभावना है। इससे घरेलू बाजार में वित्तीय रणनीति और निवेश योजनाओं पर भी असर पड़ेगा।