व्यापार
Gold loan vs Selling gold: गोल्ड बेचने से पहले ये मत भूलना—गोल्ड लोन का राज़ आपकी सोच बदल देगा!
जीवन में ऐसे कई मौके आते हैं जब अचानक पैसों की ज़रूरत पड़ जाती है। कुछ लोग इसके लिए इमरजेंसी फंड तैयार रखते हैं, लेकिन कई लोगों के पास ऐसी कोई व्यवस्था नहीं होती। भारत में बहुत-से परिवारों के पास सोना सुरक्षित रूप से रखा रहता है, जिसे ज़रूरत के समय बेचा भी जा सकता है या उसके बदले गोल्ड लोन भी लिया जा सकता है। अक्सर यह सवाल उठता है कि इमरजेंसी में कौन-सा तरीका बेहतर है—सोना बेच देना या गोल्ड लोन लेना? इस सवाल का जवाब आपकी आवश्यकता, समय और वित्तीय क्षमता पर निर्भर करता है। दोनों विकल्पों के अपने फायदे और नुकसान हैं, जिन्हें समझना बेहद जरूरी है।
गोल्ड बेचने का विकल्प: पैसा तुरंत, पर सोना हमेशा के लिए खत्म
अगर आप सोना बेचकर पैसे हासिल करते हैं, तो इसका सबसे बड़ा फायदा यही है कि आपको तुरंत नकद राशि मिल जाती है और उस पर कोई ब्याज या अतिरिक्त शुल्क नहीं देना पड़ता। आपको जितना मूल्य सोने का मिलता है, वह पूरा पैसा आपकी जेब में आता है। लेकिन इसका नुकसान यह है कि सोना एक बार बिक गया तो वह हमेशा के लिए चला जाता है। आगे चलकर आप उसे दोबारा हासिल नहीं कर सकते, जब तक कि फिर से खरीद न लें। कई बार बाजार में सोने की कीमतें बढ़ी हुई होती हैं, जिससे बेचने में फायदा हो सकता है, लेकिन भाव कम होने पर नुकसान भी झेलना पड़ सकता है। इसलिए अगर आपको बड़ी रकम लंबे समय के लिए चाहिए और आप ब्याज चुकाने की क्षमता नहीं रखते, तब सोना बेचना एक सीधा और झंझट-रहित विकल्प बन जाता है।

गोल्ड लोन: ज़रूरत भी पूरी, सोना भी सुरक्षित
गोल्ड लोन आजकल बैंकों और NBFCs द्वारा आसानी से उपलब्ध हो जाता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि आप अपना सोना सुरक्षित रखते हुए भी पैसे प्राप्त कर सकते हैं। लोन लेते समय बैंक आपके सोने को सुरक्षित रखता है और जैसे ही आप लोन राशि तथा ब्याज चुका देते हैं, आपका सोना वापस मिल जाता है। ब्याज का भुगतान इस विकल्प की एकमात्र अतिरिक्त लागत है। गोल्ड लोन उन लोगों के लिए बेहतरीन है जिन्हें थोड़े समय के लिए पैसे चाहिए—जैसे 3 महीने, 6 महीने या 1 साल। इसके अलावा, गोल्ड लोन की प्रक्रिया भी काफी तेज होती है; दस्तावेज़ कम लगते हैं और रकम जल्दी मिल जाती है। लेकिन ध्यान रहे कि अगर समय पर लोन नहीं चुका पाए, तो आपका सोना नीलाम भी किया जा सकता है।
अंतिम फैसला: कब क्या चुनें?
अगर आपको लंबे समय के लिए बड़ी राशि चाहिए, और आप ब्याज का बोझ नहीं उठाना चाहते, तो सोना बेचना आपके लिए सरल और स्थायी समाधान हो सकता है। हालांकि, यह ध्यान रखें कि सोना दोबारा खरीदना महंगा पड़ सकता है। दूसरी ओर, अगर आपकी ज़रूरत थोड़े समय के लिए है, और आप EMI या ब्याज चुकाने की क्षमता रखते हैं, तो गोल्ड लोन सबसे सुरक्षित और समझदारी भरा विकल्प बन जाता है। इससे आपकी तत्काल जरूरत भी पूरी होती है और आपका सोना भी भविष्य के लिए सुरक्षित रहता है। इसलिए सही विकल्प वही है जो आपकी वर्तमान स्थिति, भविष्य की जरूरतों और वित्तीय क्षमता को संतुलित रूप से पूरा करे।
व्यापार
शेयर बाजार में सोमवार को उतार-चढ़ाव की आशंका. ग्लोबल संकेत और रुपये की कमजोरी से दबाव
देश
मिडिल ईस्ट तनाव से तेल बाजार में हलचल, $200 प्रति बैरल तक जा सकती हैं कीमतें
मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक तेल बाजार में अनिश्चितता और बेचैनी बढ़ा दी है। निवेश बैंक मैक्वेरी ग्रुप ने चेतावनी दी है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय तक बंद रहता है, तो कच्चे तेल की कीमतें $200 प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। यह स्थिति न केवल ऊर्जा बाजार, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर संकट खड़ा कर सकती है।
दरअसल, होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ईरान से जुड़े मौजूदा तनाव और संभावित संघर्ष के कारण इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है, जिससे सप्लाई में भारी कमी आ सकती है। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रेडर्स पहले ही अनुमान लगा रहे हैं कि ब्रेंट क्रूड की कीमतें निकट भविष्य में $150 प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। फिलहाल कीमतें करीब $107 प्रति बैरल के आसपास हैं, लेकिन हालात बिगड़ने पर यह तेजी से बढ़ सकती हैं।
अगर तेल की कीमतें $150 से $200 के बीच लंबे समय तक बनी रहती हैं, तो इसका सीधा असर महंगाई, परिवहन लागत और उत्पादन खर्च पर पड़ेगा। इससे वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ेगा और कई देशों की आर्थिक वृद्धि प्रभावित हो सकती है।
भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए यह स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण हो सकती है। बढ़ती कीमतों से पेट्रोल-डीजल महंगे हो सकते हैं और सरकारी वित्तीय संतुलन पर असर पड़ सकता है।
कुल मिलाकर, मिडिल ईस्ट का यह संकट आने वाले समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
व्यापार
शेयर बाजार में अचानक बड़ी गिरावट निवेशकों के लाखों करोड़ों डूबने का खतरा बढ़ा
दो दिनों की मजबूत तेजी के बाद शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में अचानक तेज गिरावट देखने को मिली। कारोबार की शुरुआत से ही बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ता गया और अंततः दिन के अंत तक निवेशकों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा। सेंसेक्स करीब 1,690 अंक टूटकर 73,583 के स्तर पर बंद हुआ जबकि निफ्टी भी 486 अंक गिरकर 22,819 पर आ गया। इस गिरावट ने बाजार के पूरे सेंटिमेंट को बदल दिया और तेजी का माहौल अचानक कमजोर पड़ गया। निवेशकों में सतर्कता बढ़ गई और कई लोगों ने मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी।
लगभग सभी सेक्टर्स में गिरावट मिडकैप और स्मॉलकैप भी दबाव में
शुक्रवार को बाजार के लगभग सभी सेक्टर लाल निशान में बंद हुए। खासतौर पर PSU बैंक और रियल्टी सेक्टर में 3 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा ऑटो, प्राइवेट बैंक, कैपिटल गुड्स और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर में भी करीब 2 प्रतिशत तक की कमजोरी देखने को मिली। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी इस गिरावट से अछूते नहीं रहे जहां मिडकैप इंडेक्स लगभग 2.2 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स करीब 1.7 प्रतिशत गिर गया। व्यापक स्तर पर हुई इस गिरावट ने संकेत दिया कि बाजार में दबाव केवल कुछ सेक्टर तक सीमित नहीं था बल्कि यह पूरे बाजार में फैला हुआ था।

प्रॉफिट बुकिंग और वैश्विक संकेतों का मिला संयुक्त असर
विशेषज्ञों के अनुसार पिछले दो कारोबारी दिनों में बाजार में लगभग 3.5 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली थी जिसके बाद निवेशकों ने मुनाफा वसूलना शुरू कर दिया। इसी प्रॉफिट बुकिंग का असर बाजार पर साफ दिखाई दिया और कई प्रमुख शेयरों में तेजी से गिरावट आई। इसके साथ ही वैश्विक स्तर पर भी नकारात्मक संकेतों ने बाजार पर दबाव बढ़ाया। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और अमेरिका तथा ईरान के बीच अनिश्चितता ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कमजोरी ने भी भारतीय बाजार को प्रभावित किया।
कच्चे तेल की कीमतों से बढ़ी चिंता भविष्य को लेकर अनिश्चितता कायम
कच्चे तेल की कीमतों का $100 प्रति बैरल के ऊपर बने रहना भी बाजार के लिए चिंता का प्रमुख कारण बना हुआ है। महंगे तेल से महंगाई बढ़ने की आशंका रहती है जिससे कंपनियों की लागत और मुनाफे पर असर पड़ सकता है। इसी कारण निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बचते नजर आ रहे हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में बाजार में उतार चढ़ाव जारी रह सकता है और यह वैश्विक परिस्थितियों तथा कच्चे तेल की कीमतों पर काफी हद तक निर्भर करेगा। यदि अंतरराष्ट्रीय हालात सुधरते हैं और तेल की कीमतों में गिरावट आती है तो बाजार में फिर से तेजी देखने को मिल सकती है।
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