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Galaxy S26 Ultra की Privacy Display फीचर में दोष, डिस्प्ले क्वालिटी प्रभावित होने की रिपोर्ट

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Galaxy S26 Ultra की Privacy Display फीचर में दोष, डिस्प्ले क्वालिटी प्रभावित होने की रिपोर्ट

हाल ही में सैमसंग ने भारत और वैश्विक स्तर पर अपनी नई Galaxy S26 सीरीज़ लॉन्च की है। इस सीरीज़ का सबसे प्रीमियम मॉडल Galaxy S26 Ultra पहली बार Privacy Display फीचर के साथ पेश किया गया है। हालांकि यह फोन अभी बिक्री के लिए उपलब्ध नहीं है, लेकिन कुछ शुरुआती यूज़र्स ने इस फीचर में एक बड़ी कमी उजागर की है। Android Authority की रिपोर्ट के अनुसार, Roland Quandt ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Bluesky पर Privacy Display फीचर की तस्वीर साझा की और बताया कि इसे ऑन और ऑफ करने पर डिस्प्ले की क्वालिटी में अंतर दिखाई देता है। जब Privacy Display बंद होता है, तो स्क्रीन के सभी पिक्सल काम करते हैं, लेकिन जब इसे ऑन किया जाता है, तो डिस्प्ले की ब्राइटनेस कम हो जाती है। इससे साफ पता चलता है कि Privacy Display ऑन होने पर डिस्प्ले की इमेज क्वालिटी प्रभावित होती है।

Samsung Galaxy S26 Ultra डिस्प्ले की तकनीक

Samsung Galaxy S26 Ultra में दो प्रकार के पिक्सल्स का इस्तेमाल किया गया है। इनमें से कुछ ‘नैरो’ पिक्सल केवल सीधे सामने से दिखाई देते हैं, जबकि चौड़े पिक्सल सामान्य एंगल से दिखाई देते हैं और स्क्रीन को साइड से देखने पर जानकारी छिप जाती है। यही कारण है कि Privacy Display ऑन होने पर इमेज क्वालिटी कम लगती है। एक अन्य यूज़र ने Galaxy S25 Ultra और S26 Ultra की तुलना की और बताया कि नई डिस्प्ले टेक्नोलॉजी में कुछ नयापन तो है, लेकिन प्राइवेसी मोड में तस्वीर की डिटेल्स कम दिखती हैं।

Galaxy S26 Ultra की Privacy Display फीचर में दोष, डिस्प्ले क्वालिटी प्रभावित होने की रिपोर्ट

Galaxy S26 Ultra की प्रमुख विशेषताएं

Galaxy S26 Ultra में 6.9-इंच का AMOLED 2X डिस्प्ले है जो 120Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करता है। यह फोन Qualcomm Snapdragon 8 Elite Gen 5 प्रोसेसर से लैस है, और 16GB RAM तथा 1TB स्टोरेज के साथ आता है। Privacy Display के साथ यह फोन 5000mAh की पावरफुल बैटरी सपोर्ट करता है, जिसमें 60W फास्ट चार्जिंग और 25W वायरलेस चार्जिंग की सुविधा भी है।

कैमरा और सॉफ्टवेयर फीचर्स

फोन के बैक में क्वाड कैमरा सेटअप है। इसमें 200MP का मेन कैमरा, 50MP का टेलीफोटो कैमरा, 50MP का पेरिस्कोप कैमरा और 10MP का अल्ट्रा-वाइड कैमरा शामिल है। सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए 12MP का कैमरा दिया गया है। Galaxy S26 Ultra OneUI 8 ऑपरेटिंग सिस्टम पर चलता है, जो Android 16 पर आधारित है। भारत में इस फोन की शुरुआती कीमत ₹1,39,999 रखी गई है। यह प्रीमियम फोन प्राइवेसी और पावर दोनों का ध्यान रखते हुए पेश किया गया है, लेकिन Privacy Display के कारण कुछ यूज़र्स को डिस्प्ले क्वालिटी में कमी महसूस हो रही है।

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नौकरी तलाश में AI का बढ़ता रोल. रिज्यूमे से इंटरव्यू तक बदल रही है पूरी प्रक्रिया

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नौकरी तलाश में AI का बढ़ता रोल. रिज्यूमे से इंटरव्यू तक बदल रही है पूरी प्रक्रिया

आज के समय में नौकरी पाना पहले की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है खासकर व्हाइट कॉलर जॉब्स के क्षेत्र में। कंपनियां नई भर्ती करने में पहले से अधिक सतर्क हो गई हैं और मौजूदा कर्मचारियों को बनाए रखने पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं। ऐसे माहौल में फ्रेशर्स और यंग प्रोफेशनल्स के लिए स्थायी नौकरी हासिल करना आसान नहीं रह गया है। इसके साथ ही डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन जॉब पोर्टल्स ने आवेदन की प्रक्रिया को सरल बना दिया है लेकिन इसी कारण एक ही पद के लिए सैकड़ों से हजारों आवेदन आने लगे हैं जिससे प्रतिस्पर्धा कई गुना बढ़ गई है।

भर्ती प्रक्रिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका

भर्ती प्रक्रिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। कंपनियां अब ऑटोमेटेड सिस्टम और एआई आधारित टूल्स के जरिए रिज्यूमे स्क्रीनिंग और उम्मीदवारों की शॉर्टलिस्टिंग कर रही हैं। इससे समय की बचत होती है और सही उम्मीदवार चुनने में मदद मिलती है। लेकिन इसका एक नतीजा यह भी है कि अब उम्मीदवारों को अपने प्रोफाइल को और अधिक प्रभावशाली बनाना पड़ता है ताकि वे इन सिस्टम्स और रिक्रूटर्स दोनों का ध्यान आकर्षित कर सकें।

नौकरी तलाश में AI का बढ़ता रोल. रिज्यूमे से इंटरव्यू तक बदल रही है पूरी प्रक्रिया

रिज्यूमे और कवर लेटर में AI का सही उपयोग

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रिज्यूमे और कवर लेटर को बेहतर बनाने में काफी उपयोगी साबित हो सकता है। यह भाषा को सुधारने प्रोफेशनल टोन देने और दस्तावेज को सही संरचना में तैयार करने में मदद करता है। हालांकि अगर हर उम्मीदवार AI का समान तरीके से उपयोग करेगा तो सभी रिज्यूमे एक जैसे दिखने लग सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि AI का उपयोग केवल सहायक उपकरण के रूप में किया जाए और अपने अनुभव स्किल्स और व्यक्तिगत जानकारी को खास तरीके से प्रस्तुत किया जाए। जिस कंपनी में आवेदन कर रहे हैं उसके अनुसार रिज्यूमे को कस्टमाइज करना अधिक प्रभावी रणनीति है।

इंटरव्यू तैयारी नेटवर्किंग और जॉब स्कैम से सावधानी

नौकरी पाने के लिए केवल अच्छा रिज्यूमे पर्याप्त नहीं है। उम्मीदवार को अपनी स्किल्स नेटवर्किंग और प्रोफाइल को भी मजबूत करना होता है। आज के समय में AI से जुड़ी बुनियादी जानकारी होना भी जरूरी हो गया है क्योंकि आने वाले समय में कई जॉब्स में इसका उपयोग बढ़ेगा। इंटरव्यू की तैयारी में भी AI मदद कर सकता है जहां उम्मीदवार मॉक इंटरव्यू और संभावित प्रश्नों का अभ्यास कर सकते हैं। लेकिन इंटरव्यू के दौरान AI का सहारा लेकर जवाब देना उचित नहीं है। साथ ही जॉब स्कैम से भी सतर्क रहना जरूरी है क्योंकि फर्जी ऑफर और धोखाधड़ी के मामले बढ़ रहे हैं। किसी भी जॉब ऑफर की पुष्टि हमेशा आधिकारिक स्रोत से करना चाहिए।

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WhatsApp में ड्यूल अकाउंट और AI फीचर्स iPhone पर भी अब होंगे उपलब्ध

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WhatsApp में ड्यूल अकाउंट और AI फीचर्स iPhone पर भी अब होंगे उपलब्ध

दुनिया भर में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले मैसेजिंग ऐप WhatsApp ने अपने प्लेटफॉर्म को और अधिक स्मार्ट और यूजर-फ्रेंडली बनाने के लिए कई नए फीचर्स पेश किए हैं। इस अपडेट का मुख्य उद्देश्य यूजर्स के चैटिंग अनुभव को आसान, सुरक्षित और अधिक सुविधाजनक बनाना है। खास बात यह है कि इस बार iPhone यूजर्स को भी लंबे समय से इंतजार किए जा रहे कई महत्वपूर्ण फीचर्स का लाभ मिलने जा रहा है। कंपनी लगातार अपने यूजर्स की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नए बदलाव कर रही है, जिससे ऐप का उपयोग और बेहतर हो सके।

Android और iPhone के बीच चैट ट्रांसफर हुआ आसान

इस अपडेट का सबसे बड़ा आकर्षण नया चैट ट्रांसफर फीचर है, जिसकी मदद से यूजर्स अब आसानी से Android और iPhone के बीच अपना पूरा डेटा ट्रांसफर कर सकेंगे। इसमें केवल मैसेज ही नहीं, बल्कि फोटो, वीडियो, कॉल हिस्ट्री और ग्रुप तथा कम्युनिटी से जुड़ा डेटा भी शामिल होगा। इस सुविधा के आने से फोन बदलने की प्रक्रिया काफी सरल हो जाएगी और यूजर्स को अपने महत्वपूर्ण चैट या मीडिया के खोने की चिंता नहीं करनी पड़ेगी। यह फीचर खास तौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी साबित होगा जो अक्सर डिवाइस बदलते हैं या नए फोन पर स्विच करते हैं।

WhatsApp में ड्यूल अकाउंट और AI फीचर्स iPhone पर भी अब होंगे उपलब्ध

iPhone यूजर्स के लिए ड्यूल अकाउंट और स्टोरेज मैनेजमेंट टूल

अब iPhone यूजर्स भी एक ही डिवाइस में दो WhatsApp अकाउंट का उपयोग कर सकेंगे, जो पहले केवल Android पर उपलब्ध था। इस फीचर के जरिए यूजर्स अपने पर्सनल और वर्क अकाउंट को अलग-अलग मैनेज कर पाएंगे और जरूरत के अनुसार आसानी से स्विच कर सकेंगे। साथ ही, प्रोफाइल इंडिकेटर के जरिए एक्टिव अकाउंट की पहचान भी आसान होगी। इसके अलावा, नए स्टोरेज मैनेजमेंट टूल्स की मदद से बड़ी फाइल्स को पहचानकर हटाना आसान हो गया है, जिससे फोन की स्टोरेज को बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सकेगा और जरूरी चैट सुरक्षित रहेंगे।

AI फीचर्स से चैटिंग होगी और भी स्मार्ट, भारत में जल्द रोलआउट की उम्मीद

WhatsApp अब Meta के AI टूल्स के साथ और भी उन्नत हो रहा है, जिससे चैटिंग अनुभव और स्मार्ट बन जाएगा। नए AI फीचर्स के तहत यूजर्स फोटो एडिट कर सकेंगे, बैकग्राउंड बदल सकेंगे और अनचाहे ऑब्जेक्ट्स को हटाने की सुविधा भी मिलेगी। इसके अलावा AI आधारित राइटिंग हेल्प फीचर यूजर्स को चैट के दौरान बेहतर और उपयुक्त रिप्लाई सुझाएगा। फिलहाल ये सभी फीचर्स टेस्टिंग चरण में हैं और उम्मीद है कि अप्रैल के आसपास भारत में भी रोलआउट किए जा सकते हैं, जिससे यूजर्स को एक नया और उन्नत अनुभव मिलेगा।

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20 साल की युवती ने सोशल मीडिया लत के लिए Meta और YouTube को जिम्मेदार ठहराया

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20 साल की युवती ने सोशल मीडिया लत के लिए Meta और YouTube को जिम्मेदार ठहराया

अमेरिका के लॉस एंजेल्स कोर्ट ने सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। 20 साल की युवती कैली ने दावा किया था कि बचपन में सोशल मीडिया की लत ने उसके मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुँचाया। जूरी ने Meta और YouTube को दोषी मानते हुए कुल 3 मिलियन डॉलर यानी लगभग 28 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया। इस फैसले में Meta की जिम्मेदारी 70 प्रतिशत और YouTube की 30 प्रतिशत तय की गई।

युवती की कहानी और मानसिक स्वास्थ्य पर असर

कैली ने कोर्ट में बताया कि उसने 6 साल की उम्र में YouTube और 9 साल की उम्र में Instagram इस्तेमाल करना शुरू किया। सोशल मीडिया पर अत्यधिक समय बिताने के कारण वह धीरे-धीरे परिवार से दूर होती गई और 10 साल की उम्र में डिप्रेशन और एंजायटी के लक्षण विकसित होने लगे। उसने फोटो फिल्टर्स का अत्यधिक इस्तेमाल शुरू किया, जिससे उसकी खुद की छवि पर नकारात्मक असर पड़ा। मेडिकल टर्म में इसे ‘बॉडी डिस्मॉर्फिया’ कहा जाता है। जूरी ने माना कि इन प्लेटफॉर्म्स ने उसकी उम्र की पुष्टि करने या पहुंच सीमित करने के लिए प्रभावी प्रयास नहीं किए।

20 साल की युवती ने सोशल मीडिया लत के लिए Meta और YouTube को जिम्मेदार ठहराया

कंपनियों की प्रतिक्रिया और कानूनी लड़ाई

Meta के वकीलों ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कैली के जीवन की कठिनाइयां केवल सोशल मीडिया के कारण नहीं हैं। Google ने भी अपने प्लेटफॉर्म YouTube की सुरक्षा और जिम्मेदारी को लेकर इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देने की तैयारी की है। हालांकि, कैली के माता-पिता का कहना है कि यह टेक कंपनियों के खिलाफ बड़ी जीत है और इससे भविष्य में कंपनियों को बच्चों की सुरक्षा के प्रति जिम्मेदार बनना पड़ेगा।

भारत में सुरक्षा और एज वेरिफिकेशन की तैयारी

भारत में भी सरकार सोशल मीडिया और गेमिंग ऐप्स के लिए एज वेरिफिकेशन सिस्टम लागू करने पर विचार कर रही है। संसदीय समिति ने सोशल मीडिया, डेटिंग और गेमिंग प्लेटफॉर्म्स पर बैंकों जैसा KYC सिस्टम लाने पर जोर दिया है, ताकि लोग गलत उम्र बताकर अकाउंट नहीं बना सकें। इससे बच्चों की मानसिक स्वास्थ्य को खतरा कम होगा और प्लेटफॉर्म्स जिम्मेदार होंगे। कई राज्य सरकारें भी बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर बैन या उम्र आधारित कंट्रोल सिस्टम लागू करने की योजना बना रही हैं।

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