टेक्नॉलॉजी

ChatGPT की चालाकी पर फुलस्टॉप! जानिए कैसे पकड़ में आएगा फेक AI कंटेंट

Published

on

आजकल छात्र हों या ब्लॉगर्स, स्टार्टअप हों या बड़ी कंपनियां, सभी ChatGPT जैसे AI टूल्स का जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में जब कोई आपके सामने कोई कंटेंट लाता है तो यह जानना जरूरी हो जाता है कि वह असली है या AI ने लिखा है। खासकर रिसर्च, पढ़ाई या प्रोफेशनल रिपोर्ट्स में इसकी जांच बहुत अहम हो जाती है।

AI कंटेंट पहचानने वाले टूल्स का इस्तेमाल करें

कई ऐसे खास टूल्स हैं जो बता सकते हैं कि कंटेंट इंसान ने लिखा है या AI ने। इन टूल्स में Originality.ai, GPTZero, Copyleaks AI Content Detector, Sapling AI Detector और Writer.com AI Detector प्रमुख हैं। इन पर आप कंटेंट को कॉपी-पेस्ट करें और ये टूल आपको बता देंगे कि कितनी प्रतिशत सामग्री AI जनरेटेड है और कितनी इंसानी है।

डेटा और फैक्ट्स की जांच जरूर करें

AI टूल्स कभी-कभी पुराने या गलत आंकड़े भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इसलिए कंटेंट में दिए गए डेटा, तिथियों और रिपोर्ट्स को इंटरनेट पर सर्च करें। अगर किसी वेबसाइट, रिपोर्ट या रिसर्च का हवाला दिया गया है तो उसे क्रॉस चेक करें कि वह वाकई मौजूद है या नहीं और क्या वह अपडेटेड है।

प्लेज़रिज़्म यानी नकल की जांच करें

हालांकि ChatGPT मूल कंटेंट तैयार करता है, लेकिन इंटरनेट पर मौजूद कुछ वाक्यों या लाइनों का दोहराव हो सकता है। इसलिए Grammarly, Turnitin या Quetext जैसे प्लेजरिज़्म चेकर का इस्तेमाल करें। इससे पता चलेगा कि क्या वही कंटेंट पहले से कहीं और प्रकाशित हो चुका है।

सही जानकारी का मूल्य समझें

AI टूल्स ने कंटेंट बनाना आसान कर दिया है लेकिन अंधविश्वास से बचना जरूरी है। जब बात किसी रिसर्च पेपर, यूनिवर्सिटी असाइनमेंट या कॉर्पोरेट रिपोर्ट की हो तो आपको इस बात की जांच करनी चाहिए कि सामग्री विश्वसनीय है या नहीं। ऊपर बताए गए तरीकों से आप आसानी से पहचान सकते हैं कि कोई आर्टिकल इंसान ने लिखा है या मशीन ने।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Trending

Copyright © 2025 India365 News | All Rights Reserved