Business
विदेशी निवेशकों ने बदला रुख, इन भारतीय कंपनियों पर जताया भरोसा
घरेलू शेयर बाजार में हालिया गिरावट और उतार-चढ़ाव के बीच विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) चुनिंदा भारतीय कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी तेजी से बढ़ा रहे हैं। आमतौर पर एफआईआई गहन रिसर्च और लंबी अवधि के आकलन के बाद ही निवेश का फैसला लेते हैं, ऐसे में उनका यह कदम बाजार के लिए अहम संकेत माना जा रहा है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, सिर्फ एक तिमाही में विदेशी निवेशकों ने 14 कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी करीब 50 प्रतिशत से अधिक बढ़ाई है। यह रुझान बताता है कि वैश्विक निवेशक मौजूदा गिरावट को अवसर के रूप में देख रहे हैं और मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों पर दांव लगा रहे हैं।
आर्टेमिस मेडिकेयर सर्विसेज में बढ़ी विदेशी दिलचस्पी
हेल्थकेयर सेक्टर की कंपनी आर्टेमिस मेडिकेयर सर्विसेज में विदेशी निवेशकों की रुचि अचानक बढ़ी है। सितंबर 2025 तिमाही में जहां एफआईआई की हिस्सेदारी महज 0.37 प्रतिशत थी, वहीं दिसंबर तिमाही तक यह बढ़कर 12.47 प्रतिशत पर पहुंच गई। यह वृद्धि दर्शाती है कि विदेशी निवेशक कंपनी के भविष्य को लेकर आशावादी हैं। हालांकि, शेयर बाजार में कंपनी के प्रदर्शन पर दबाव देखा गया है। दिसंबर तिमाही के बाद शेयरों में करीब 12 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। 2 मार्च को बीएसई पर कंपनी का शेयर 2.92 प्रतिशत या 6.95 रुपये की गिरावट के साथ 231.15 रुपये पर बंद हुआ। इसके बावजूद एफआईआई की बढ़ती हिस्सेदारी यह संकेत देती है कि वे लंबी अवधि के दृष्टिकोण से निवेश कर रहे हैं।

नॉलेज मरीन एंड इंजीनियरिंग वर्क्स पर भी भरोसा
विदेशी निवेशकों ने नॉलेज मरीन एंड इंजीनियरिंग वर्क्स में भी अपनी हिस्सेदारी उल्लेखनीय रूप से बढ़ाई है। सितंबर 2025 में एफआईआई की हिस्सेदारी 0.74 प्रतिशत थी, जो दिसंबर तिमाही तक बढ़कर 11.01 प्रतिशत हो गई। यह उछाल दर्शाता है कि मरीन और इंजीनियरिंग सेक्टर में संभावनाओं को लेकर वैश्विक निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है। शेयर प्रदर्शन की बात करें तो आखिरी कारोबारी दिन कंपनी के शेयरों में तेजी देखी गई। शेयर 2.40 प्रतिशत या 38.55 रुपये की बढ़त के साथ 1646.40 रुपये पर बंद हुए। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इंफ्रास्ट्रक्चर और पोर्ट से जुड़े प्रोजेक्ट्स में बढ़ती गतिविधियों का फायदा कंपनी को मिल सकता है।
बैंक ऑफ महाराष्ट्र में भी बढ़ी भागीदारी
पब्लिक सेक्टर बैंक बैंक ऑफ महाराष्ट्र में भी विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी में इजाफा हुआ है। सितंबर 2025 में एफआईआई की भागीदारी 2.35 प्रतिशत थी, जो दिसंबर तिमाही तक बढ़कर 4.92 प्रतिशत हो गई। तिमाही समाप्त होने के बाद बैंक के शेयरों में करीब 21 प्रतिशत की मजबूती दर्ज की गई, हालांकि हालिया कारोबारी सत्र में एनएसई पर इसमें 3.72 प्रतिशत की गिरावट आई। इसके बावजूद एफआईआई की बढ़ती हिस्सेदारी यह संकेत देती है कि वे बैंकिंग सेक्टर में संभावनाएं देख रहे हैं। कुल मिलाकर, बाजार की गिरावट के बीच विदेशी निवेशकों का यह रुख यह दर्शाता है कि वे मजबूत बैलेंस शीट और विकास की संभावनाओं वाली कंपनियों पर भरोसा जता रहे हैं।
Business
मिडिल ईस्ट तनाव और अमेरिकी महंगाई से एशियाई बाजारों में भारी गिरावट
मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और संयुक्त राज्य अमेरिका में महंगाई के आंकड़ों के बढ़ते दबाव का असर एशियाई शेयर बाजारों में साफ देखा गया। भारतीय बाजार में BSE Sensex शुरुआती कारोबार में करीब 1,000 अंक तक गिर गया। निवेशकों के बीच अचानक घबराहट का माहौल बन गया। एशिया के प्रमुख सूचकांकों में भी भारी दबाव रहा। जापान का Nikkei 225 करीब 2% तक टूटा और बाद में 57,947 के स्तर पर 1.5% की गिरावट के साथ कारोबार करता दिखा।
एशियाई सूचकांक और अमेरिकी फ्यूचर्स पर दबाव
एशियाई बाजारों में शुरुआती कारोबार में 900 अंकों से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। हांगकांग का Hang Seng Index 1.7% गिरकर 26,165 पर पहुंच गया, जबकि शेनजेन का Shenzhen Component Index 109 अंक टूटकर 14,386 पर था। दक्षिण कोरिया में सार्वजनिक अवकाश के कारण बाजार बंद रहा। अमेरिकी फ्यूचर्स में भी दबाव देखा गया। S&P 500, Dow Jones Industrial Average और NASDAQ Composite में शुरुआती कारोबार में 1% से अधिक गिरावट आई, हालांकि बाद में रिकवरी के साथ यह गिरावट 0.6% तक सीमित रही।

वैश्विक अनिश्चितता के बीच सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने की कीमतों में उछाल आया। यूएस गोल्ड फ्यूचर्स करीब 2.58% चढ़कर 5,382.60 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गए। तेल बाजार में भी हलचल रही। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में दो जहाजों पर हमले की खबरों के बाद तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई। अमेरिकी बेंचमार्क क्रूड तेल शुरुआती कारोबार में 8% तक उछला, हालांकि बाद में यह 4% की बढ़त के साथ 69.60 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करने लगा। वैश्विक तेल मानक Brent Crude 4.5% बढ़कर 76.17 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
करेंसी बाजार में अमेरिकी डॉलर मजबूत
मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर मजबूत रहा। डॉलर 156.29 जापानी येन से बढ़कर 156.04 येन पर पहुंच गया। वहीं यूरो 1.1788 डॉलर से फिसलकर 1.1812 डॉलर पर था। कुल मिलाकर, मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका में महंगाई के आंकड़ों ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। इसका असर इक्विटी, कमोडिटी और करेंसी बाजारों में एक साथ देखने को मिला है। निवेशक इस समय सुरक्षित निवेश और बाजार की चाल पर नजर बनाए हुए हैं।
Business
निवेशकों की नजर वैश्विक तेल बाजार पर, कीमतें $76 से $81 प्रति बैरल तक जा सकती हैं
28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान के कई संवेदनशील ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई की। इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर Ayatollah Ali Khamenei की मौत हुई। इस घटना ने पहले से तनावपूर्ण पश्चिम एशिया की स्थिति को और गंभीर बना दिया है। इस क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ने के कारण वैश्विक तेल बाजार में गतिविधियां तेज हो गई हैं और निवेशक तेल की कीमतों पर गहरी नजर बनाए हुए हैं। विशेष रूप से तेल आयातक देशों जैसे भारत पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।
ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद किया, सप्लाई में होगी कमी
ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जारी विवाद के बीच ईरानी सरकार ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की घोषणा की है। यह मार्ग बंद होने से कच्चे तेल की सप्लाई में कमी आएगी। दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल इसी मार्ग से गुजरता है। इस कारण से सप्लाई में रुकावट होने पर तेल की कीमतों में और तेजी आने की संभावना है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस कदम से वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ेगी और भावों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है।

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, निवेशकों की नजर
तेल बाजार में हाल ही में अस्थिरता के बीच कीमतों ने तेजी दिखाई है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, IG Group के रिटेल ट्रेडिंग प्रोडक्ट में वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) की कीमत $75.33 प्रति बैरल तक पहुंच गई। यह शुक्रवार की बंद कीमत से लगभग 12 प्रतिशत अधिक है। अन्य मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमत $76 से $81 प्रति बैरल तक पहुँच सकती है। निवेशक और तेल कंपनियां लगातार बाजार की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व और वैश्विक असर
हॉर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित है और यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है। इसे विश्व के प्रमुख ऊर्जा मार्गों में से एक माना जाता है। कतर, जो दुनिया का सबसे बड़ा LPG निर्यातक है, अपने लगभग सभी LPG का निर्यात इसी मार्ग के माध्यम से करता है। इसलिए हॉर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से वैश्विक तेल और गैस बाजार में अस्थिरता बढ़ने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सप्लाई और बाधित हुई तो कच्चे तेल की कीमतों में और उछाल देखने को मिल सकता है।
Business
M&M शेयरों की बढ़त पर निवेशकों की नजर, 2025-28 में राजस्व में 15% वृद्धि का अनुमान
शेयर बाजार में इस समय महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M) के शेयरों को लेकर चर्चा जोरों पर है। ब्रोकरेज फर्म Nuvama ने दावा किया है कि कंपनी के शेयरों में वर्तमान स्तर से ₹900 से अधिक की वृद्धि की संभावना है। कंपनी के मजबूत प्रदर्शन और आने वाले नए उत्पादों के चलते Nuvama ने इस शेयर को ‘Buy’ रेटिंग दी है और 31 मार्च 2026 तक इसके लिए ₹4,400 का लक्ष्य निर्धारित किया है।
पिछले दस सालों में निवेशकों को मिले शानदार रिटर्न
M&M, जो BSE Sensex पर सूचीबद्ध है, का मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹4,34,178.09 करोड़ है। पिछले दस वर्षों में इस शेयर ने निवेशकों को लगभग 450% रिटर्न दिए हैं। लगातार मजबूत प्रदर्शन और भरोसेमंद नतीजों के कारण निवेशकों का भरोसा इस शेयर पर बना हुआ है। Nuvama का मानना है कि कंपनी की मजबूत रणनीतियों और नए उत्पाद लॉन्च से यह प्रदर्शन और बेहतर होगा।

ऑटो, फार्म और ईवी व्यवसाय में तेजी का संकेत
Nuvama का विश्लेषण है कि M&M की ऑटो और फार्म सेक्टर में वृद्धि की संभावना मजबूत है। आगामी SUV मॉडल और नए प्रोडक्ट लॉन्च कंपनी के राजस्व में 2025-28 के बीच 15% CAGR वृद्धि लाएंगे। इसके अलावा, कृषि क्षेत्र में सरकारी नीतियों और सुधारों के चलते M&M के फार्म बिजनेस में भी 13% CAGR वृद्धि की उम्मीद है। कंपनी इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेक्टर में BE7 और Vision सीरीज जैसे नए मॉडल के साथ भी मजबूती से आगे बढ़ रही है।
निर्यात क्षेत्र में भी कंपनी मजबूत स्थिति में
Nuvama ने यह भी कहा है कि M&M की उत्तर अमेरिका, ब्राजील और ASEAN देशों में मजबूत उपस्थिति निर्यात के लिहाज से कंपनी के लिए अवसर पैदा करेगी। इसके चलते 2025 से 2028 के बीच निर्यात में भी लगभग 12% CAGR वृद्धि की उम्मीद है। इस तरह कंपनी का समग्र प्रदर्शन निवेशकों के लिए आकर्षक बना हुआ है और शेयर में तेजी आने की संभावना काफी उच्च मानी जा रही है।
-
Fashion9 years ago
These ’90s fashion trends are making a comeback in 2017
-
Fashion9 years ago
According to Dior Couture, this taboo fashion accessory is back
-
मनोरंजन9 years ago
The old and New Edition cast comes together to perform
-
Sports9 years ago
Steph Curry finally got the contract he deserves from the Warriors
-
Sports9 years ago
Phillies’ Aaron Altherr makes mind-boggling barehanded play
-
मनोरंजन9 years ago
Disney’s live-action Aladdin finally finds its stars
-
Business9 years ago
Uber and Lyft are finally available in all of New York State
-
मनोरंजन9 months agoKajra re Song: अमिताभ बच्चन ने किया था कजरा रे से इनकार! जानिए कैसे डायरेक्टर शाद अली ने मनाकर बदला उनका फैसला
