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पहली बार भारतीय प्रधानमंत्री Narendra Modi को मिला ‘The Grand Commander’ सम्मान, जानिए क्यों?
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India-Brazil Trade Deal: भारतीय शेयर बाजार में आने वाले महीनों में इन तीन शेयरों से बन सकता बड़ा मुनाफा
India-Brazil Trade Deal: भारतीय शेयर बाजार में पिछले कुछ दिनों से उतार-चढ़ाव का दौर जारी है। इसी बीच कई ब्रोकरेज फर्म कुछ शेयरों को लेकर पॉजिटिव हैं और उनका मानना है कि आने वाले समय में इनमें जबरदस्त तेजी देखने को मिल सकती है। विशेषज्ञों की राय के अनुसार निवेशक इन शेयरों पर ध्यान दें, क्योंकि ये लंबे समय में बेहतर रिटर्न दे सकते हैं।
रिलायंस इंडस्ट्रीज: 10 लाख करोड़ रुपये के निवेश से कंपनी बनेगी पॉवरफुल
दुनिया की प्रसिद्ध ब्रोकरेज फर्म मॉर्गन स्टेनली ने रिलायंस इंडस्ट्रीज को अपनी टॉप पिक लिस्ट में शामिल किया है। फर्म ने इसके लिए 1,803 रुपये का टारगेट प्राइस तय किया है। मॉर्गन स्टेनली का अनुमान है कि रिलायंस आने वाले 7 सालों में 10 लाख करोड़ रुपये के निवेश से कंपनी की दिशा बदल सकता है। निवेश का मुख्य फोकस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ग्रीन एनर्जी पर रहेगा। जियो और रिटेल बिजनेस के विस्तार जैसी रफ्तार कंपनी फिर से दिखा सकती है, यही कारण है कि यह शेयर ब्रोकरेज की पसंदीदा सूची में है।

टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS): OpenAI साझेदारी से कारोबार में नए अवसर
आईटी सेक्टर के शेयरों में हालिया उतार-चढ़ाव के बीच, मॉर्गन स्टेनली ने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज को ओवरवेट रेटिंग दी है। फर्म ने TCS के लिए 3,540 रुपये का टारगेट प्राइस तय किया है। ब्रोकरेज का मानना है कि OpenAI के साथ साझेदारी TCS के कारोबार में नए अवसर खोल सकती है। निवेशकों के लिए यह संकेत है कि कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी और टेक्नोलॉजी लीडरशिप दोनों मजबूत बनी रहेगी।
लेंसकार्ट: 12 फीसदी तक तेजी की संभावना
ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने लेंसकार्ट शेयरों को लेकर पॉजिटिव रुख अपनाया है। फर्म ने लेंसकार्ट के लिए 600 रुपये का टारगेट प्राइस तय किया है। वर्तमान स्तर से यह लगभग 27 फीसदी ऊपर है, जबकि अगले 12 महीनों में अनुमानित तेजी करीब 12.3 फीसदी हो सकती है। फर्म का मानना है कि लेंसकार्ट का मार्केट विस्तार और ऑनलाइन रिटेल स्ट्रैटेजी कंपनी के शेयरों में मजबूती ला सकती है।
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39 poachers arrested: 24 घंटे की AI निगरानी से शिकारियों की हर हरकत पकड़ी गई, जंगल में मचा हड़कंप
39 poachers arrested: ओड़िशा के मयूरभंज जिले में सिमिलिपाल वन्यजीव अभ्यारण्य में वन्यजीव अपराध के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई में 39 शिकारियों को गिरफ्तार किया गया। यह ऑपरेशन पूरी तरह से आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से सफल हुआ। अभ्यारण्य में लगाए गए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से लैस निगरानी कैमरों ने शिकारियों की गतिविधियों को पकड़ा। वन विभाग ने बताया कि यह कार्रवाई वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सफलता मानी जा रही है।
AI कैमरों ने पकड़ी शिकारियों की हर हरकत
सूत्रों के अनुसार, सिमिलिपाल अभ्यारण्य के दक्षिणी डिवीजन में शिकारियों की गतिविधियों को AI कैमरों ने रीयल टाइम में रिकॉर्ड किया। ये हाई-टेक कैमरे पूरे 24 घंटे जंगल की निगरानी करते हैं। जैसे ही कोई संदिग्ध गतिविधि होती है, कैमरा तुरंत वन अधिकारियों को घटना का सटीक स्थान और समय सूचित करता है। इस तकनीक ने वन अधिकारियों को शिकारियों की चाल पर तुरंत कार्रवाई करने का अवसर दिया और बड़े हादसे को टाल दिया।

जंगल में छापेमारी और हथियारों की जब्तगी
AI सिस्टम के अलर्ट के बाद विशेष बाघ संरक्षण बल और वन विभाग ने संयुक्त अभियान चलाया। जंगल में घेराबंदी और तलाशी अभियान के दौरान कुल 39 शिकारियों को गिरफ्तार किया गया। इन आरोपियों के पास से बड़ी मात्रा में हथियार और विस्फोटक भी बरामद हुए। इसमें नौ देसी बंदूकें, 20 धनुष, कई धारदार हथियार, विस्फोटक और विभिन्न शिकार उपकरण शामिल थे। यह दर्शाता है कि जंगल में बड़े पैमाने पर शिकार की योजना बनाई जा रही थी।
वन्यजीव संरक्षण में आधुनिक तकनीक का बड़ा योगदान
गिरफ्तार किए गए सभी आरोपी सिमिलिपाल अभ्यारण्य के पास उदला थाना क्षेत्र के निवासी बताए गए हैं। AI आधारित निगरानी प्रणाली द्वारा दी गई सटीक जानकारी ने इस बड़े शिकार अभियान को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वन विभाग ने आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले की जांच अभी जारी है। यह कार्रवाई वन्यजीव संरक्षण में आधुनिक तकनीक और चौकस प्रशासन के संयोजन की बड़ी सफलता मानी जा रही है।
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President Alar Karis: भारत दौरे पर अलार कारिस, अक्षरधाम में किया अभिषेक और प्रार्थना
President Alar Karis: एस्टोनिया गणराज्य के राष्ट्रपति अलार कारिस इन दिनों भारत दौरे पर हैं। अपने विशेष प्रतिनिधिमंडल के साथ वे नई दिल्ली स्थित स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर पहुंचे, जहां उनका पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया। राष्ट्रपति कारिस के साथ भारत में एस्टोनिया की राजदूत मार्गे लूप, राष्ट्रपति कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारी, विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधि और एस्टोनिया के डिजिटल व एआई क्षेत्र से जुड़े प्रमुख सदस्य मौजूद थे। इसके अलावा एआई-लीप (AI-Leap) के प्रतिनिधि भी इस यात्रा में शामिल रहे। मंदिर परिसर पहुंचने पर दिव्यामृतदास स्वामी, ज्ञानमुनिदास स्वामी और अन्य वरिष्ठ सदस्यों ने उनका अभिनंदन किया। इस दौरान राष्ट्रपति और उनके प्रतिनिधिमंडल ने मंदिर की भव्यता और आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव किया।
भारत-एस्टोनिया मैत्री संबंधों को मिलेगा नया आयाम
इस अवसर पर परम पूज्य महंत स्वामी महाराज ने राष्ट्रपति कारिस को व्यक्तिगत पत्र भेजकर उनके आगमन के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने एस्टोनिया और उसके नागरिकों की शांति, समृद्धि तथा राष्ट्रपति के उत्तम स्वास्थ्य और सफलता के लिए प्रार्थना की। पत्र में यह आशा भी जताई गई कि भारत और एस्टोनिया के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध आपसी समझ, सहयोग और संवाद के माध्यम से और मजबूत होंगे। दोनों देशों के बीच डिजिटल नवाचार, प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्रों में पहले से सहयोग की संभावनाएं हैं, और इस यात्रा को उस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आध्यात्मिक और सांस्कृतिक जुड़ाव कूटनीतिक संबंधों को और अधिक गहराई प्रदान करता है।

“बहुत प्रभावशाली अनुभव” – राष्ट्रपति कारिस
अक्षरधाम मंदिर की यात्रा के बाद राष्ट्रपति अलार कारिस ने अपने अनुभव को “बहुत प्रभावशाली” बताया। उन्होंने भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को प्रेरणादायक बताया और गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए आभार व्यक्त किया। अपने संदेश में उन्होंने लिखा, “मंदिर भ्रमण के लिए धन्यवाद। मैं फिर से आने की आशा करता हूं। यह अनुभव अत्यंत प्रभावशाली रहा। आइए भारत और एस्टोनिया के बीच शांति और अच्छे संबंधों के लिए प्रार्थना करें।” राष्ट्रपति और उनके प्रतिनिधिमंडल ने मंदिर में अभिषेक भी किया और वैश्विक शांति, सद्भाव और सभी समुदायों के कल्याण के लिए प्रार्थना की। इस यात्रा ने दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संवाद को एक नई दिशा दी है।
सांस्कृतिक बोट क्रूज से जाना भारत की विरासत का इतिहास
मंदिर परिसर में राष्ट्रपति कारिस और उनके प्रतिनिधिमंडल ने सांस्कृतिक बोट क्रूज का भी अनुभव किया। इस क्रूज के माध्यम से भारत की समृद्ध विरासत, दर्शन, विज्ञान और मानव सभ्यता में योगदान की झलक प्रस्तुत की गई। प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय सभ्यता की प्राचीन उपलब्धियों और आधुनिक प्रगति के समन्वय को करीब से समझा। यह यात्रा केवल एक औपचारिक दौरा नहीं, बल्कि दो देशों के बीच सांस्कृतिक और वैचारिक संवाद का प्रतीक बनकर उभरी। डिजिटल और एआई क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने यह भी संकेत दिया कि भारत और एस्टोनिया नवाचार, तकनीक और अंतर-सांस्कृतिक समझ के माध्यम से भविष्य की साझेदारी को मजबूत करने के इच्छुक हैं।
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