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Fire at the railway station: स्टेशन मास्टर के कक्ष से लगी आग, झारसुगुड़ा रेलवे स्टेशन पर फैली अफरा-तफरी

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Fire at the railway station: स्टेशन मास्टर के कक्ष से लगी आग, झारसुगुड़ा रेलवे स्टेशन पर फैली अफरा-तफरी

Fire at the railway station: ओडिशा के झारसुगुड़ा में मंगलवार को एक चौंकाने वाला घटना सामने आई जब सुबह लगभग 11:30 बजे झारसुगुड़ा रेलवे स्टेशन के स्टेशन मास्टर के कमरे में अचानक आग लग गई। हालांकि इस घटना में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन आग लगने से स्टेशन परिसर में अफरा-तफरी मच गई। आग लगने के बाद काले धुएं के गुबार आसमान की ओर उठते देखे गए, जो कई मीटर दूर से भी साफ नजर आ रहे थे। इस अप्रत्याशित घटना ने यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों को भयभीत कर दिया।

स्टेशन परिसर में अफरातफरी और काला धुआं

आग लगने के बाद झारसुगुड़ा रेलवे स्टेशन पर मौजूद यात्रियों और स्टाफ में भय व्याप्त हो गया। स्टेशन परिसर में धुआं इतना घना था कि आसपास का माहौल धुंधला सा हो गया था। लोग तेजी से अपने-अपने स्थानों से हटने लगे ताकि वे आग और धुएं से सुरक्षित रह सकें। स्टेशन पर काले धुएं की लपटें इतनी उड़ीं कि वह आसपास के कई किलोमीटर दूर से भी दिखाई दे रही थीं। इस आग ने रेलवे स्टेशन के संचालन को प्रभावित कर दिया और आसपास के इलाके में भी दहशत फैल गई।

दमकल विभाग ने किया आग पर काबू

आग लगने की सूचना मिलते ही स्थानीय दमकल विभाग की दो दमकल गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। दमकलकर्मियों ने तुरंत आग बुझाने के लिए काम शुरू किया और कई घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह से नियंत्रण पा लिया गया। आग के और फैलने से बचाने के लिए व्यापक प्रयास किए गए। इस प्रयास से बड़ा नुकसान टल गया। हालांकि आग लगने के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। दमकल विभाग के साथ-साथ रेलवे अधिकारी भी मौके पर मौजूद हैं और स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

आग लगने के कारणों की जांच जारी

रेलवे प्रशासन ने झारसुगुड़ा स्टेशन पर लगी आग की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक तौर पर तकनीकी खराबी या शॉर्ट सर्किट को आग लगने का मुख्य कारण माना जा रहा है, लेकिन स्थिति की पूरी जांच के बाद ही सटीक कारण सामने आएगा। रेलवे के अधिकारी और कर्मचारी लगातार स्टेशन परिसर में स्थिति पर नजर रखे हुए हैं ताकि आग से हुए नुकसान को कम किया जा सके और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। जांच पूरी होने तक रेलवे प्रशासन ने सावधानी बरतने के निर्देश जारी किए हैं।

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ED ने PACL घोटाले में 126 संपत्तियों पर की जबरदस्त जब्ती, कीमत 5 हजार करोड़

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ED ने PACL घोटाले में 126 संपत्तियों पर की जबरदस्त जब्ती, कीमत 5 हजार करोड़

केंद्रीय जांच एजेंसी, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने PACL लिमिटेड से जुड़े वित्तीय घोटाले के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। ED ने दिल्ली और पंजाब में स्थित 126 संपत्तियों को जब्त किया है, जिनकी कुल कीमत ₹5,046.91 करोड़ आंकी गई है। यह मामला एक धोखाधड़ी निवेश योजना से जुड़ा है, जिसमें कंपनी ने पूरे देश में लाखों निवेशकों से लगभग ₹48,000 करोड़ जुटाए। निवेशकों को जमीन देने का वादा किया गया, लेकिन अधिकांश निवेशकों को न तो जमीन मिली और न ही उनकी राशि वापस हुई।

CBI ने 2014 में शुरू की जांच, ED ने PMLA के तहत मामला दर्ज किया

PACL घोटाले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने 2014 में शुरू की थी। इसके बाद ED ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत मामला दर्ज किया। जांच में सामने आया कि कंपनी ने शेल कंपनियों और नकली लेन-देन के जरिए निवेशकों की राशि को धोखाधड़ी से शुद्ध किया। सुप्रीम कोर्ट ने 2016 में निवेशकों की राशि की वापसी के लिए समिति बनाई थी, लेकिन इसके बावजूद कंपनी की संपत्तियों की अवैध बिक्री और हेराफेरी जारी रही। ED के अनुसार अब तक इस मामले में कुल ₹22,656 करोड़ की संपत्तियों को जब्त किया जा चुका है।

ED ने PACL घोटाले में 126 संपत्तियों पर की जबरदस्त जब्ती, कीमत 5 हजार करोड़

देश के सबसे बड़े वित्तीय धोखाधड़ी और पोंजी योजना मामलों में से एक

PACL यानी पर्ल्स एग्रोटेक कॉर्पोरेशन लिमिटेड घोटाला भारत के सबसे बड़े वित्तीय धोखाधड़ी और पोंजी योजना मामलों में गिना जाता है। यह ‘कलेक्टिव इन्वेस्टमेंट स्कीम’ (CIS) के रूप में संचालित होती थी। निवेशकों को उनके पैसे दोगुना करने या जमीन देने का लालच दिया जाता था। इसके तहत कृषि और रियल एस्टेट परियोजनाओं में निवेश का वादा करके लोगों से पैसा इकट्ठा किया जाता था।

पोंजी योजना की चालाकी और आरोपी संस्थापक

जांच में पता चला कि PACL ने पोंजी योजना के रूप में काम किया। नए निवेशकों से मिली राशि का इस्तेमाल पुराने निवेशकों को भुगतान करने और एजेंटों को भारी कमीशन देने में किया गया। इस योजना के पीछे पर्ल्स ग्रुप के संस्थापक निर्मल सिंह भंगू थे, जिनका अगस्त 2024 में निधन हो गया। अभी भी इस मामले की जांच जारी है और ED और अन्य जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क और निवेशकों की राशि की वापसी पर काम कर रही हैं।

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राउज एवेन्यू कोर्ट ने लालू और राबड़ी की याचिका खारिज कर दिया, बड़ा झटका

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राउज एवेन्यू कोर्ट ने लालू और राबड़ी की याचिका खारिज कर दिया, बड़ा झटका

दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने दोनों की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया। यह याचिका लैंड-फॉर-जॉब्स मामले में ‘अनरिलायड’ दस्तावेज उपलब्ध कराने की थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि हर दस्तावेज प्राप्त करना आरोपियों का अधिकार नहीं है। पहले अभियोजन पक्ष अपने सबूत पेश करेगा, उसी आधार पर सुनवाई होगी। बिना ठोस बचाव के आरोपियों को अतिरिक्त दस्तावेज मांगने की अनुमति नहीं है।

अन्य आरोपियों की याचिकाएं भी खारिज

विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने लालू के निजी सचिव आर.के. महाजन और रेलवे के पूर्व महाप्रबंधक महीप कपूर की याचिकाएं भी खारिज कर दीं। महाजन ने एक और कपूर ने 23 दस्तावेज उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। कोर्ट ने कहा कि ये दस्तावेज अभियोजन पक्ष की शिकायत में भरोसेमंद नहीं हैं और इनका उद्देश्य मुकदमे को लंबा खींचने का प्रतीत होता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसी याचिकाओं से न्यायिक प्रक्रिया अव्यवस्थित और उल्टी गंगा बहाने जैसी बन सकती है।

राउज एवेन्यू कोर्ट ने लालू और राबड़ी की याचिका खारिज कर दिया, बड़ा झटका

आरोपियों के इरादों पर संदेह

न्यायाधीश गोगने ने 35 पृष्ठों के आदेश में कहा कि आरोपियों द्वारा जिरह की आड़ में न्यायिक प्रक्रिया पर वैधानिक नियंत्रण हथियाने की कोशिश हो रही है। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि आरोपियों का गुप्त उद्देश्य कार्यवाही को लंबा खींचना है। कोर्ट ने निष्पक्ष सुनवाई और शीघ्र समापन सुनिश्चित करने के लिए साक्ष्यों को वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप दर्ज करने पर जोर दिया।

कोर्ट ने स्पष्ट किया, न्यायिक कार्यवाही पर शर्त नहीं लगाई जा सकती

अदालत ने कहा कि आरोपियों का यह अनुरोध कि बचाव की तैयारी से पहले सभी या कुछ ‘अनरिलायड’ दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएं, अस्वीकार्य है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्यायिक कार्यवाही जारी रखने पर कोई शर्त लगाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। अदालत ने यह भी कहा कि आरोपियों को पहले ही उन दस्तावेजों का निरीक्षण करने का पर्याप्त अवसर दिया गया है, जो साक्ष्यों के उस समूह का हिस्सा हैं और अभियोजन पक्ष ने शिकायत में उनका इस्तेमाल नहीं किया।

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असम में कांग्रेस संकट के बीच गौरव गोगोई ने बोरदोलोई के इस्तीफे की खबरों का किया खंडन

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असम में कांग्रेस संकट के बीच गौरव गोगोई ने बोरदोलोई के इस्तीफे की खबरों का किया खंडन

असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एपीसीसी) के अध्यक्ष गौरव गोगोई ने वरिष्ठ सांसद प्रद्युत बोरदोलोई के इस्तीफे की अटकलों के बीच उनका बचाव किया। इस बयान से असम का राजनीतिक माहौल गरमा गया है। मीडिया से बात करते हुए गोगोई ने कहा कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा एक सुनियोजित मीडिया अभियान के जरिए बोरदोलोई की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। गोगोई ने इसे आगामी चुनावों से पहले कांग्रेस को कमजोर करने का राजनीतिक प्रयास बताया।

गोगोई का बोरदोलोई के बचाव में कड़ा रुख

गौरव गोगोई ने कहा कि असम के मुख्यमंत्री मीडिया के माध्यम से वरिष्ठ सांसद प्रद्युत बोरदोलोई की छवि को धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने बोरदोलोई को लेकर फैलाई जा रही गलत सूचनाओं पर चिंता व्यक्त की। गोगोई ने बताया कि उन्होंने कांग्रेस महासचिव जितेंद्र सिंह के साथ हाल ही में बोरदोलोई से मुलाकात की और राज्य की मौजूदा राजनीतिक स्थिति के साथ-साथ आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों पर विस्तृत चर्चा की। उनका कहना था कि बोरदोलोई कांग्रेस की एकता और मजबूती के प्रतीक हैं।

असम में कांग्रेस संकट के बीच गौरव गोगोई ने बोरदोलोई के इस्तीफे की खबरों का किया खंडन

कांग्रेस की एकजुटता का संकेत

बोरदोलोई के इस्तीफे की खबरों के बीच गोगोई की टिप्पणियों से यह संकेत मिलता है कि पार्टी नेतृत्व एकता का प्रदर्शन करना चाहता है। उन्होंने मीडिया में फैल रही अफवाहों का खंडन किया और कहा कि पार्टी की चुनावी संभावनाओं को प्रभावित करने के लिए ऐसा प्रयास किया जा रहा है। कांग्रेस के भीतर वरिष्ठ नेताओं के समर्थन से यह साफ हो गया कि पार्टी बोरदोलोई के राजनीतिक कदमों और उनके योगदान को लेकर गंभीर है और किसी भी तरह की गलतफहमी को बढ़ने नहीं देगा।

बोरदोलोई की राजनीतिक भूमिका और आगामी चुनावों पर नजर

प्रद्युत बोरदोलोई असम के प्रमुख राजनीतिक व्यक्तित्व में से एक हैं और 2019 से नागांव लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं। विधानसभा चुनावों से पहले उनके राजनीतिक कदमों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। गोगोई के बयान के बाद यह साफ हो गया है कि कांग्रेस पार्टी चुनावी रणनीति में बोरदोलोई की भूमिका को महत्व देती है और पार्टी की एकता को बनाए रखने के लिए पूरी कोशिश कर रही है। आगामी चुनावों में उनके समर्थन और अनुभव का कांग्रेस को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।

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