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Dargah vs. Temple dispute: तमिलनाडु सरकार को झटका, थिरुपरंकुंद्रम पर कार्तिगई दीपम जलाने की अनुमति मिली
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मिसाइल, ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के खतरे के बीच पायलटों की सुरक्षा सवालों में
एयरलाइन पायलट एसोशिएशन ऑफ इंडिया (ALPA India) ने एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी सर्कुलर जारी किया है, जिसमें भारतीय लाइसेंस पर उड़ान भरने वाले सभी पायलटों को मिडिल ईस्ट के हवाई क्षेत्र में बढ़ते खतरों के प्रति सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। ALPA India के अनुसार, इस क्षेत्र में जारी युद्ध और तेजी से बदलते हालात सिविल एविएशन के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर रहे हैं। एडवाइजरी में चेतावनी दी गई है कि कई जगह एयरस्पेस अचानक बंद हो सकता है और मिसाइल या ड्रोन हमलों का खतरा बना हुआ है।
इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और गलत पहचान का खतरा
ALPA India ने बताया कि युद्ध और तनावपूर्ण हालात के कारण इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर का खतरा भी बढ़ गया है। इसके अलावा, सिविल एयरक्राफ्ट की गलत पहचान (misidentification) होने की आशंका भी बढ़ गई है। इसका मतलब है कि किसी भी एयरक्राफ्ट को संभावित खतरे के रूप में देखा जा सकता है, जो पायलटों और क्रू मेंबर्स की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती पेश करता है। एडवाइजरी में पायलटों को हवाई क्षेत्र में किसी भी अप्रत्याशित घटना के लिए पूरी तरह तैयार रहने की सलाह दी गई है।

इंश्योरेंस को लेकर गंभीर चेतावनी
ALPA India ने खास तौर पर इंश्योरेंस (बीमा) को लेकर गंभीर चिंता जताई है। एडवाइजरी में बताया गया कि युद्ध क्षेत्र या हाई रिस्क एयरस्पेस में उड़ान भरने पर बीमा कंपनियां वॉर रिस्क नियमों के तहत कवरेज सीमित कर सकती हैं या पूरी तरह वापस ले सकती हैं। इसका सीधा असर पायलटों और क्रू मेंबर्स की सुरक्षा और बीमा सुरक्षा पर पड़ता है। एडवाइजरी में कहा गया है कि पायलट उड़ान से पहले अपनी एयरलाइन से इंश्योरेंस और war-risk कवरेज की जानकारी अवश्य लें।
पायलटों के लिए सख्त निर्देश और वैश्विक असर
ALPA India ने पायलटों को निर्देश दिया है कि वे हर उड़ान से पहले NOTAMs (Notice to Airmen) को ध्यान से पढ़ें और ऑपरेशनल ब्रीफिंग व कंपनी एडवाइजरी का पालन करें। संबंधित रूट के लिए जोखिम आकलन (risk assessment) करना अनिवार्य है। मिडिल ईस्ट में जारी वैश्विक तनाव का असर अब सिविल एविएशन पर भी स्पष्ट रूप से दिखने लगा है। ऐसे में यह एडवाइजरी पायलटों और विमानन कर्मियों की सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है।
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असम चुनाव से पहले कांग्रेस में दलबदल की आंधी, क्या भाजपा को मिलेगा सीधा फायदा
असम की राजनीति में इस समय कांग्रेस पार्टी कई मुश्किलों से गुजर रही है। लगातार हो रही दल-बदल की घटनाओं ने पार्टी की स्थिति को कमजोर कर दिया है। साल 2016 से कांग्रेस राज्य की सत्ता से बाहर है और आगामी विधानसभा चुनावों में उसे भारतीय जनता पार्टी के मजबूत संगठन से मुकाबला करना होगा। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में भाजपा सरकार ने पिछले वर्षों में कई विकास और कल्याणकारी योजनाएं शुरू की हैं जिनका असर राज्य की राजनीति पर साफ दिखाई देता है। ऐसे में कांग्रेस के सामने न केवल चुनावी रणनीति बनाने की चुनौती है बल्कि संगठन को फिर से मजबूत करने की भी बड़ी जिम्मेदारी है।
कांग्रेस को कहां मिल सकता है फायदा
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्य में बढ़ती एंटी इनकंबेंसी यानी सत्ता विरोधी लहर कांग्रेस के लिए एक अवसर बन सकती है। खासतौर पर अल्पसंख्यक मतदाता और बंगाली भाषी मुस्लिम समुदाय का समर्थन कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में जोरहाट सीट से गौरव गोगोई की बड़ी जीत ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाया है। पार्टी ने इस बार उन्हें मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाकर चुनावी मैदान में उतारने का फैसला किया है। इससे कांग्रेस को उम्मीद है कि युवा नेतृत्व और स्थानीय मुद्दों के सहारे वह भाजपा को कड़ी टक्कर दे सकेगी।

लगातार हो रहे दलबदल से कमजोर हुआ संगठन
पिछले एक दशक में कांग्रेस को असम में कई बड़े राजनीतिक झटके लगे हैं। राज्य के मौजूदा मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा भी कभी कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में शामिल थे लेकिन बाद में भाजपा में शामिल हो गए। हाल ही में कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन बोरा और तीन अन्य विधायकों के भाजपा में जाने से पार्टी को नया झटका लगा है। जमीनी स्तर पर संगठन की कमजोरी भी कांग्रेस के लिए बड़ी समस्या बनती जा रही है। चाय बागान के मजदूर जो कभी कांग्रेस के मजबूत वोट बैंक माने जाते थे अब धीरे धीरे भाजपा की ओर झुकते नजर आ रहे हैं। इससे कांग्रेस की चुनावी रणनीति पर भी असर पड़ रहा है।
सत्ता विरोधी माहौल कांग्रेस के लिए अवसर
राजनीतिक परिस्थितियों के बीच कांग्रेस के पास अभी भी वापसी का मौका है। यदि पार्टी सत्ता विरोधी लहर को सही तरीके से भुना पाती है तो चुनावी समीकरण बदल सकते हैं। कांग्रेस के पास यह अवसर भी है कि वह एनडीए गठबंधन के भीतर असंतुष्ट नेताओं और कार्यकर्ताओं को अपने साथ जोड़ सके। हालांकि लगातार हो रहा दलबदल और संगठनात्मक कमजोरी पार्टी के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। दूसरी ओर सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन की मजबूत चुनावी मशीनरी और प्रशासनिक पकड़ कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकती है। आने वाले चुनावों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कांग्रेस इस राजनीतिक संघर्ष में खुद को फिर से मजबूत कर पाती है या भाजपा अपनी पकड़ और मजबूत कर लेती है।
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मिका सिंह के बॉडीगार्ड ने 30 साल पहले कहा था, ‘तुम खुद स्ट्रगल कर रहे हो’
बॉलीवुड और पंजाबी संगीत के चर्चित गायक मिका सिंह आज करोड़ों दिलों पर राज करते हैं। उनके गाने “आज की पार्टी” और “सावन में लग गई आग” युवाओं में हिट हुए और उन्हें स्टारडम दिलाया। आज मिका सिंह शानदार जिंदगी जी रहे हैं और उनके चारों ओर सुरक्षा के लिए कई बॉडीगार्ड्स हैं। लेकिन मिका ने खुलासा किया कि उनके वर्तमान बॉडीगार्ड ने शुरू में उन्हें स्ट्रगलर कहकर काम करने से मना कर दिया था।
बॉडीगार्ड कार्तार का मज़ेदार किस्सा
फिल्ममेकर फराह खान हाल ही में मिका सिंह के दिल्ली स्थित फार्महाउस पर गईं। वीडियो में मिका ने अपने बॉडीगार्ड कार्तार को फराह से मिलवाया। मिका ने कहा, “ये हैं कार्तार भाई।” जब कार्तार ने फराह के पैर छूने के लिए झुकें, मिका ने मजाकिया अंदाज में बताया, “ये बिल्कुल डिकेंट नहीं हैं। जब मैं उनसे 30 साल पहले मिला, मैंने कहा कि ‘तुम लंबा चौड़ा हो, क्या तुम मेरे बॉडीगार्ड बनोगे?’ उन्होंने कहा, ‘तुम पहले काम शुरू करो, तुम तो खुद स्ट्रगल कर रहे हो।’” फराह ने पूछा कि क्या यह सच है, और कार्तार ने हां में सिर हिलाया। मिका ने आगे कहा कि उन्होंने कड़ी मेहनत की और करियर बनाया ताकि कार्तार को बॉडीगार्ड के रूप में रख सकें।

मिका सिंह की शुरुआती संगीत यात्रा
मिका ने अपने संगीत सफर और परिवार के योगदान के बारे में भी साझा किया। उन्होंने बताया कि उनके पिता गुरुद्वारे में कीर्तन गाया करते थे और संगीत से गहरी लगाव रखते थे। “पंजाब के अधिकतर सिंगर्स की शुरुआत गुरुद्वारे में होती है। वहां वे ग़ुरबानी सीखते हैं और राग पकड़ते हैं। मैं भी कीर्तन में तबला बजाता था। वाहेगुरु की कृपा है कि हम आज यहां तक पहुंचे हैं। उस समय मैंने सोचा था कि जब मैं खूब पैसा कमाऊंगा, तो जरूर अपने फार्महाउस में एक गुरुद्वारा बनाऊंगा।”
मिका सिंह का फार्महाउस: गाना, पूजा और गुरुद्वारा
मिका ने अपने फार्महाउस में गुरुद्वारा और मंदिर भी बनवाया है। यह उनके परिवार की धार्मिक परंपरा और संगीत प्रेम का प्रतीक है। उनका मानना है कि मेहनत और समर्पण से ही सपनों को हकीकत में बदला जा सकता है। मिका की कहानी यह भी दर्शाती है कि संघर्ष के समय में धैर्य और आत्मविश्वास ही सफलता की कुंजी हैं। आज वह सिर्फ संगीत जगत में नहीं, बल्कि समाजिक और धार्मिक दृष्टि से भी अपनी पहचान बना चुके हैं।
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