Consumer Rights: अगर आपने अपने वाहन का बीमा कराया है और बीमा कंपनी अब आपका दावा नहीं दे रही है, तो चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। आप ई- जागृति पोर्टल के माध्यम से जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में शिकायत दर्ज कर न्याय पा सकते हैं। तमिलनाडु के धर्मपुरी जिले के कृष्णागिरी में एक उपभोक्ता के साथ ऐसा ही मामला सामने आया, जिसमें आयोग ने बैंक और बीमा कंपनी से कुल ₹1.48 लाख का भुगतान सुनिश्चित किया। उपभोक्ता ने अपने काम के लिए एक वाणिज्यिक वाहन खरीदा था, इसके लिए बैंक से ऋण लिया और ₹4.8 लाख का बीमा कराया। लेकिन, 9 दिसंबर 2020 को उसका वाहन चोरी हो गया।
बीमा कंपनी और बैंक की कार्रवाई
वाहन चोरी होने के बाद उपभोक्ता तुरंत पुलिस स्टेशन गया और शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद उसने बीमा कंपनी और बैंक को सूचित किया, लेकिन वाहन कभी नहीं मिला। इसके बावजूद बीमा कंपनी ने दावे का निपटान करने में विलंब किया। इसी दौरान बैंक ने उपभोक्ता से सम्पूर्ण राशि सहित ब्याज वसूल किया। उपभोक्ता इस अन्याय के कारण काफी परेशान था और न्याय की उम्मीद में आयोग का दरवाजा खटखटाया।
आसान तरीका: ई-जागृति पोर्टल से शिकायत
उपभोक्ता ने 13 मार्च 2025 को ई-जागृति पोर्टल के माध्यम से जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में शिकायत दर्ज कराई। आयोग ने सभी दस्तावेजों की समीक्षा की और दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। आयोग ने पाया कि बीमा कंपनी ने अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन किया और दावा भुगतान नहीं किया। साथ ही, बैंक ने भी अनुचित ब्याज वसूला। इस प्रकार, आयोग ने उपभोक्ता के पक्ष में निर्णय सुनाया।
आयोग का आदेश: ₹14.8 लाख का भुगतान
28 मई 2025 को जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बीमा कंपनी को उपभोक्ता को ₹4.8 लाख के साथ 12% ब्याज देने का आदेश दिया। इसके अलावा, बैंक को भी अनुचित रूप से वसूले गए ब्याज की वापसी करनी होगी। आयोग ने यह भी निर्देश दिया कि बीमा कंपनी और बैंक मिलकर उपभोक्ता को ₹10 लाख का मुआवजा भी दें। यह मामला अन्य उपभोक्ताओं के लिए उदाहरण बन गया कि अगर बीमा कंपनी या बैंक अपनी जिम्मेदारियों का पालन नहीं करता, तो न्याय पाने के लिए आयोग का सहारा लिया जा सकता है।