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Congress neta’s ‘cheaper LPG for infiltrators’ offer sparks row | India News – Times of India

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Congress neta's ‘cheaper LPG for infiltrators’ offer sparks row | India News - Times of India
कांग्रेस नेता की 'घुसपैठियों के लिए सस्ती एलपीजी' पेशकश पर विवाद छिड़ गया है
कांग्रेस के झारखंड प्रभारी गुलाम अहमद मीर (पीटीआई फोटो)

बोकारो/रांची: उछाल मार रहा है कांग्रेस झारखंड कार्य प्रभारित गुलाम अहमद मीरदेने का वादा है सब्सिडी वाली रसोई गैस “घुसपैठियों” को सिलेंडर, भाजपा मीर के बयान को ”राष्ट्र-विरोधी” करार दिया और कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया। कांग्रेस ने बीजेपी पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि पार्टी हिंदू-मुस्लिम राजनीति पर अड़ी हुई है.
एक वीडियो में, मीर को बेरमो के चंद्रपुरा में एक रैली में यह कहते हुए सुना जा सकता है, “अगर हमारी पार्टी राज्य में सरकार बनाती है तो 1 दिसंबर से गैस सिलेंडर की कीमत 450 रुपये प्रति सिलेंडर तक कम हो जाएगी। यह सभी को प्रदान किया जाएगा – हिंदू, मुस्लिम, एससी, एसटी, ‘घुसपैठियों‘ – बिना किसी भेदभाव के। मीर के वादे पर प्रतिक्रिया करते हुए, पीएम मोदी महाराष्ट्र के पनवेल में एक रैली में कहा, “यह उस खेल का उदाहरण है जो वोट पाने के लिए वे (कांग्रेस) देश के साथ और आपके बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के साथ खेल रहे हैं।”
बीजेपी झारखंड प्रभारी ने कहा, ”यही कांग्रेस का असली रंग है.” शिवराज सिंह चौहान देवघर में कहा. कांग्रेस ने प्रतिक्रियाओं को “प्रचार” कहा। कांग्रेस के लाल किशोर नाथ शाहदेव ने कहा, ‘बीजेपी झारखंड में घुसपैठियों और हिंदू-मुसलमान से आगे नहीं बढ़ पा रही है. वे मानसिक रूप से दिवालिया हो गए हैं क्योंकि उन्हें एहसास हो गया है कि लोगों ने धार्मिक ध्रुवीकरण के उनके एजेंडे को खारिज कर दिया है।

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संसद में बड़ा सियासी भूचाल, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी

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संसद में बड़ा सियासी भूचाल, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी

ओम बिरला: बजट सत्र की शुरुआत से ही संसद का माहौल लगातार तनावपूर्ण बना हुआ है। राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। लगभग हर दिन लोकसभा की कार्यवाही हंगामे की भेंट चढ़ती रही, जिसके चलते स्पीकर ओम बिरला को कई बार सदन स्थगित करना पड़ा। विपक्षी दलों का आरोप है कि उन्हें अपनी बात रखने का पूरा अवसर नहीं दिया जा रहा, जबकि सत्ता पक्ष को प्राथमिकता मिल रही है। इसी मुद्दे को लेकर संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है और अब यह टकराव एक बड़े राजनीतिक कदम की ओर बढ़ता दिख रहा है।

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी

सूत्रों के मुताबिक विपक्षी दलों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि आज लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने से पहले कई विपक्षी नेता कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर पहुंचे, जहां इस मुद्दे पर अहम बैठक हुई। इस बैठक में विभिन्न विपक्षी दलों ने मौजूदा संसदीय हालात और स्पीकर की भूमिका पर चर्चा की। विपक्ष का मानना है कि सदन की कार्यवाही निष्पक्ष रूप से नहीं चलाई जा रही और यही वजह है कि अब संवैधानिक प्रक्रिया के तहत अविश्वास प्रस्ताव लाने का विकल्प चुना जा रहा है। माना जा रहा है कि इस कदम से संसद की राजनीति और ज्यादा गरमा सकती है।

संसद में बड़ा सियासी भूचाल, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी

सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव चरम पर

बजट सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव इस कदर बढ़ गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब भी पूरा नहीं दे सके। विपक्ष खासकर कांग्रेस की महिला सांसदों ने सदन में जोरदार विरोध किया और प्रधानमंत्री की सीट के पास तक पहुंच गईं। इस कारण प्रधानमंत्री को अपना भाषण बीच में ही रोकना पड़ा। स्पीकर की ओर से विपक्ष को शांत करने और सदन की गरिमा बनाए रखने की कई कोशिशें की गईं, लेकिन हंगामा थमने का नाम नहीं ले रहा था। इसी दौरान सदन के कामकाज में बाधा डालने के आरोप में विपक्ष के आठ सांसदों को निलंबित कर दिया गया, जिसे लेकर विपक्ष और अधिक आक्रामक हो गया।

राहुल गांधी, निलंबन और नोटिस की रणनीति

विपक्ष की नाराजगी का एक बड़ा कारण राहुल गांधी को लोकसभा में बोलने न दिए जाने का मुद्दा भी है। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने पूर्व सेनाध्यक्ष एमएम नरवणे की एक अप्रकाशित पुस्तक के अंश पढ़ते हुए चीन और लद्दाख से जुड़े मसले उठाए थे। चेयर की ओर से यह कहा गया कि किसी अप्रकाशित पुस्तक के अंश पढ़ना संसदीय नियमों के खिलाफ है, जिसके बाद भारी हंगामा हुआ। विपक्ष लगातार राहुल गांधी को बोलने देने और निलंबित किए गए आठ सांसदों की बहाली की मांग कर रहा है। सूत्रों का कहना है कि लगभग सभी विपक्षी दल स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर सहमत हो चुके हैं और जल्द ही लोकसभा महासचिव को इसका औपचारिक नोटिस सौंपा जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो यह मौजूदा संसद सत्र का सबसे बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम साबित हो सकता है।

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First census: जनसंख्या का रिकॉर्ड इतिहास, 9 फरवरी से जुड़ा भारत का सबसे बड़ा प्रशासनिक कदम

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First census: जनसंख्या का रिकॉर्ड इतिहास, 9 फरवरी से जुड़ा भारत का सबसे बड़ा प्रशासनिक कदम

First census: आज भारत दुनिया का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश बन चुका है। अनुमान के अनुसार देश की आबादी 147 करोड़ से भी ज्यादा हो चुकी है। इतनी बड़ी आबादी की सही गिनती करना अपने आप में एक विशाल और जटिल प्रशासनिक कार्य है। इसी प्रक्रिया को जनगणना कहा जाता है जिसे भारत के सबसे बड़े सरकारी अभियानों में गिना जाता है। भारत के इतिहास में 9 फरवरी का दिन इसलिए खास माना जाता है क्योंकि इसी दिन साल 1951 में आजाद भारत की पहली जनगणना की शुरुआत हुई थी। यह जनगणना केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं थी बल्कि आजादी के बाद देश की सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक स्थिति को समझने का एक मजबूत आधार भी बनी।

1951 की पहली जनगणना कब और कैसे हुई

आजाद भारत की पहली जनगणना 9 फरवरी 1951 को शुरू हुई थी और यह 28 फरवरी 1951 तक चली थी। इसके बाद 1 मार्च से 3 मार्च तक पुनरीक्षण का कार्य किया गया ताकि किसी भी तरह की त्रुटि को सुधारा जा सके। इस जनगणना के दौरान नागरिकों से नाम, पारिवारिक संबंध, जन्म स्थान, लिंग, आयु, आर्थिक स्थिति, आजीविका के साधन, धर्म, मातृभाषा और साक्षरता जैसी विस्तृत जानकारियां जुटाई गईं। भारत के बंटवारे के बाद देश की सीमाएं बदल चुकी थीं। बड़ी संख्या में लोगों का पलायन हुआ था और धार्मिक आधार पर जनसंख्या का संतुलन भी बदला था। इन्हीं कारणों से 1951 की जनगणना ऐतिहासिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि इसी ने नए भारत की वास्तविक तस्वीर दुनिया के सामने रखी।

First census: जनसंख्या का रिकॉर्ड इतिहास, 9 फरवरी से जुड़ा भारत का सबसे बड़ा प्रशासनिक कदम

1951 की जनसंख्या और सामाजिक स्थिति

1951 की जनगणना के अनुसार उस समय भारत की कुल जनसंख्या 36 करोड़ 10 लाख 88 हजार 90 थी। उस दौर में देश की साक्षरता दर बेहद कम थी और केवल लगभग 18 प्रतिशत लोग ही पढ़े लिखे थे। औसत जीवन प्रत्याशा मात्र 32 वर्ष थी जो उस समय स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति को दर्शाती है। लिंगानुपात की बात करें तो प्रति 1000 पुरुषों पर महिलाओं की संख्या 946 थी। धार्मिक आंकड़ों के अनुसार भारत की जनसंख्या में 84.1 प्रतिशत हिंदू, 9.8 प्रतिशत मुस्लिम, 2.3 प्रतिशत ईसाई, 1.9 प्रतिशत सिख और शेष अन्य धर्मों के लोग शामिल थे। ये आंकड़े उस समय के सामाजिक ढांचे और जीवन स्तर को समझने में अहम भूमिका निभाते हैं।

वर्तमान जनसंख्या और भारत में जनगणना का इतिहास

वर्तमान समय में भारत चीन को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश बन गया है। पीआईबी के अनुसार भारत की जनसंख्या में हर साल करीब 1.5 करोड़ लोगों की वृद्धि होती है जो विश्व में सबसे अधिक है। दुनिया की कुल आबादी का लगभग 17 प्रतिशत हिस्सा भारत में निवास करता है। विभिन्न रिपोर्टों के मुताबिक भारत की आबादी 147 करोड़ के आंकड़े को पार कर चुकी है और साक्षरता दर बढ़कर 80 प्रतिशत से अधिक हो गई है। भारत में जनगणना हर 10 साल में कराई जाती है। साल 2011 में आखिरी जनगणना हुई थी जबकि 2021 की जनगणना कोरोना महामारी और अन्य कारणों से टल गई। भारत में आधुनिक जनगणना की शुरुआत ब्रिटिश शासन में हुई थी जब 1872 में लॉर्ड मेयो के समय पहली बार यह प्रक्रिया कराई गई। नियमित जनगणना 1881 से शुरू हुई और तब से हर दशक में यह प्रक्रिया जारी रही। इससे भी पहले ऋग्वेद, कौटिल्य के अर्थशास्त्र और अकबर की आईन ए अकबरी में जनसंख्या गणना के उल्लेख मिलते हैं जो बताते हैं कि भारत में जनगणना की परंपरा बेहद प्राचीन रही है।

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चेन्नई एयरपोर्ट पर घना कोहरा, तीन उड़ानों का रूट बदला, यात्रियों में भारी खलबली

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चेन्नई एयरपोर्ट पर घना कोहरा, तीन उड़ानों का रूट बदला, यात्रियों में भारी खलबली

चेन्नई एयरपोर्ट पर रविवार सुबह मौसम ने यात्री और एयरपोर्ट स्टाफ दोनों की मुश्किलें बढ़ा दीं। सुबह के समय घने कोहरे की वजह से कई घंटों तक उड़ानें बाधित रहीं। खासकर सुबह साढ़े पांच बजे से दृश्यता इतनी कम हो गई कि कई फ्लाइटों का रूट बदलना पड़ा। कोहरे ने न केवल उड़ानों की लैंडिंग और टेकऑफ़ प्रक्रिया को प्रभावित किया बल्कि यात्रियों के लिए भी परेशानी बढ़ा दी। चेन्नई आने वाली कम से कम तीन फ्लाइटों को नजदीकी हवाई अड्डों की ओर मोड़ दिया गया, जिससे हवाई यातायात प्रभावित हुआ।

दृश्यता 150 मीटर तक कम, उड़ानों का रूट बदला गया

मौसम विभाग और एयरपोर्ट अधिकारियों की मानें तो रविवार तड़के चेन्नई मीनांबक्कम एयरपोर्ट पर मध्यम से घना कोहरा छाया रहा। सुबह साढ़े पांच बजे तक दृश्यता लगभग 1500 मीटर थी, जो तेजी से गिरकर साढ़े छह बजे तक 350 मीटर रह गई। इसके बाद दृश्यता में और गिरावट आई और लगभग साढ़े सात बजे तक यह 150 मीटर तक पहुंच गई। इस कम दृश्यता के कारण कई उड़ानों में देरी हुई और कुछ फ्लाइटों को अन्य हवाई अड्डों की ओर रूट बदलने के लिए मजबूर होना पड़ा।

चेन्नई एयरपोर्ट पर घना कोहरा, तीन उड़ानों का रूट बदला, यात्रियों में भारी खलबली

उड़ानें तिरुचिरापल्ली और बेंगलुरु की ओर मोड़ी गईं

अधिकारियों ने बताया कि कोहरे के चलते कुआलालंपुर और हैदराबाद से आने वाली दो उड़ानों को तिरुचिरापल्ली की ओर डायवर्ट कर दिया गया। वहीं एक निजी एयरलाइन की फ्लाइट को बेंगलुरु वापस लौटना पड़ा। इससे यात्रियों को काफी असुविधा हुई और एयरपोर्ट पर तनाव की स्थिति बनी रही। हालांकि अधिकारियों ने बताया कि जैसे-जैसे दिन बढ़ा, दृश्यता में सुधार हुआ और उड़ानों का संचालन सामान्य होने लगा। यात्रियों से भी धैर्य रखने का अनुरोध किया गया।

मौसम में सुधार की उम्मीद, उड़ान संचालन जल्द होगा सामान्य

मौसम विभाग ने बताया कि दिन के दौरान कोहरे में कमी आने की संभावना है और दृश्यता सामान्य होने लगेगी। इससे एयरपोर्ट पर उड़ानों का संचालन जल्द ही सामान्य होने की उम्मीद है। हालांकि इस घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया कि घने कोहरे और खराब मौसम के चलते हवाई यातायात प्रभावित हो सकता है। एयरपोर्ट प्रशासन ने यात्रियों से सहयोग और धैर्य बनाए रखने की अपील की है ताकि वेड़ बेहतर तरीके से उड़ान संचालन सुनिश्चित किया जा सके।

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