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Nitish Kumar की अगुवाई में NDA का भव्य विजय जश्न, बिहार राजनीति में बदलाव और जातिवाद की हार
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के परिणाम इतिहास में एक नया मोड़ लेकर आए हैं। Nitish Kumar के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को प्रचंड बहुमत मिला, जबकि परंपरागत जातिवाद की राजनीति को करारी हार का सामना करना पड़ा। 243 सीटों वाली विधानसभा में NDA ने 200 से अधिक सीटें जीतकर दो-तिहाई बहुमत हासिल किया, जिससे विपक्ष को धराशायी होना पड़ा। इस चुनाव में मतदाताओं ने यह संदेश स्पष्ट कर दिया कि अब बिहार में विकास और सुशासन ही प्रमुख मुद्दा हैं, न कि केवल जाति।
महिला और युवा वोटर ने बदल दी तस्वीर
इस चुनाव में महिला और युवा मतदाताओं ने निर्णायक भूमिका निभाई। उनके मतों ने ग्रैंड अलायंस को सिर्फ 35 सीटों तक सीमित कर दिया। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, ग्रैंड अलायंस को केवल 38 प्रतिशत वोट ही मिले। यह जीत यह दर्शाती है कि बिहार में जातिगत समीकरण अब कमजोर पड़ गए हैं और विकास आधारित राजनीति को जनता ने सर्वोपरि रखा। विशेषज्ञों के अनुसार, अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC), दलित और गैर-यादव वोटरों का व्यापक गठबंधन NDA की सफलता की मुख्य वजह रहा। रिकॉर्ड महिला भागीदारी ने भी ग्रैंड अलायंस की स्थिति को प्रभावित किया। पहले चरण में 69 प्रतिशत और दूसरे चरण में 74 प्रतिशत मतदान हुआ।
विकास और सुशासन के लिए निर्णायक वोट
बिहार के मतदाताओं ने इस बार ‘जंगल राज’ के खिलाफ एकजुट होकर वोट दिया। महिलाओं और युवाओं ने विकास और सुशासन को प्राथमिकता दी। सभी जातियों के लोगों ने अपने भविष्य की उम्मीद NDA के विकास मॉडल में देखी। परिणामस्वरूप, लंबे समय के बाद बिहार में जातिगत समीकरण टूट गए और NDA ने प्रचंड जीत दर्ज की। ग्रैंड अलायंस केवल 35 सीटों पर सिमट गया। यह स्पष्ट संदेश है कि बिहार की जनता अब जातिवाद से ऊपर उठकर विकास, कानून-व्यवस्था और सुशासन के लिए मतदान कर रही है।
NDA की जीत का मुख्य कारण: सुशासन और व्यापक विकास
NDA ने चुनाव में ‘जंगल राज’ के खिलाफ अपने मुख्य अभियान के तहत कानून-व्यवस्था, शराब बंदी और महिलाओं के सशक्तिकरण को प्रमुखता दी। इसके साथ ही ग्रामीण संपर्क, सामाजिक कल्याण योजनाओं, सड़क निर्माण, हवाई अड्डों का विस्तार, नई ट्रेन सेवाएं, बिजली पहुंच और शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने जैसे विकास कार्यों को भी जोर दिया। इन सब कारकों के चलते NDA ने सभी जातियों के मतदाताओं का विश्वास जीता और बिहार में प्रचंड बहुमत से जीत दर्ज की। यह जीत स्पष्ट रूप से बताती है कि अब बिहार में जनता का प्राथमिक एजेंडा केवल जातिवाद नहीं बल्कि विकास और सुशासन है।