Crypto fraud case के एक बड़े मामले में सीबीआई (CBI) ने दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा में 11 स्थानों पर छापेमारी कर बड़ी मात्रा में नकदी, विदेशी मुद्रा और सोना बरामद किया है। अधिकारियों के अनुसार, यह छापेमारी कथित साइबर अपराधियों के खिलाफ की गई, जो खुद को सरकारी अधिकारी बताकर लोगों से ठगी कर रहे थे।
इस दौरान सीबीआई ने 1.08 करोड़ रुपये नकद, 1000 अमेरिकी डॉलर और 252 ग्राम सोना जब्त किया। इसके अलावा, जांच एजेंसी को कई महत्वपूर्ण डिजिटल सबूत भी मिले हैं, जिनसे यह खुलासा हुआ है कि आरोपी VoIP आधारित कॉलिंग, डार्कनेट और क्रिप्टो वॉलेट्स का इस्तेमाल कर रहे थे।
साइबर ठगों पर शिकंजा, दो साल पुराने मामले में कार्रवाई
सीबीआई ने बताया कि यह मामला दो साल पुराना है, जिसमें अब जाकर बड़ी कार्रवाई की गई है। जांच एजेंसी ने दिल्ली में 9 और हरियाणा के हिसार में 2 स्थानों पर छापेमारी की। सीबीआई के प्रवक्ता ने कहा कि आरोपी गैरकानूनी गतिविधियों और क्रिप्टो फ्रॉड में लिप्त थे और वे खुद को सरकारी अधिकारी बताकर लोगों को ठगते थे।
सीबीआई की जांच के अनुसार, आरोपी तकनीकी सहायता के नाम पर लोगों से ठगी करते थे और उन्हें क्रिप्टोकरेंसी के रूप में पैसे ट्रांसफर करने के लिए प्रेरित करते थे। इसके बाद, यह पैसा कई क्रिप्टो वॉलेट्स के माध्यम से नकदी में बदला जाता था और फिर अलग-अलग खातों में भेजा जाता था।
कैसे देते थे ठगी को अंजाम?
सीबीआई द्वारा जब्त किए गए छह लैपटॉप, आठ मोबाइल फोन और एक आईपैड की जांच से यह पता चला है कि ठग एक सुनियोजित नेटवर्क के जरिए अपनी ठगी को अंजाम दे रहे थे।
ठगी का तरीका:
फर्जी टेक्निकल सपोर्ट कॉल: आरोपी फर्जी तकनीकी सहायता देने के बहाने लोगों से संपर्क करते थे।
सरकारी अधिकारी बनकर लोगों को डराना: ठग खुद को सरकारी अधिकारी बताते थे और लोगों को सरकारी कार्रवाई का डर दिखाकर उनसे पैसे वसूलते थे।
क्रिप्टोकरेंसी के जरिए ट्रांजेक्शन: लोगों को यह कहकर क्रिप्टोकरेंसी में पैसे ट्रांसफर करने के लिए प्रेरित किया जाता था कि यह एक सुरक्षित और गुप्त लेनदेन होगा।
फर्जी क्रिप्टो वॉलेट का इस्तेमाल: पैसे को कई क्रिप्टो वॉलेट्स में ट्रांसफर किया जाता था ताकि असली ट्रांजेक्शन का पता न लगाया जा सके।
डार्कनेट और VoIP कॉलिंग का सहारा: आरोपी डार्कनेट और VoIP कॉलिंग तकनीक का उपयोग करते थे ताकि उनकी असली पहचान छुपी रहे।
सीबीआई की छापेमारी में क्या-क्या बरामद हुआ?
सीबीआई द्वारा की गई छापेमारी में महत्वपूर्ण डिजिटल और भौतिक सबूत जब्त किए गए हैं। इनमें शामिल हैं:
1.08 करोड़ रुपये नकद
1000 अमेरिकी डॉलर की विदेशी मुद्रा
252 ग्राम सोना
6 लैपटॉप, 8 मोबाइल फोन और 1 आईपैड
VoIP आधारित कॉलिंग के लिए इस्तेमाल किए गए कंप्यूटर प्रोग्राम्स
डार्कनेट से जुड़े डिजिटल दस्तावेज
तीन आरोपियों के खिलाफ पहले ही दायर हो चुकी है चार्जशीट
सीबीआई ने इस मामले में पहले ही तीन आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी थी। अब इस छापेमारी के बाद, जांच एजेंसी को अन्य आरोपियों के खिलाफ भी नए सबूत मिले हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में और भी कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं।
सीबीआई की जांच यह भी संकेत देती है कि इस पूरे नेटवर्क में देश-विदेश के कई अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं। जांच एजेंसी अब इस मामले में और गहराई से जांच कर रही है ताकि सभी दोषियों को पकड़ा जा सके।
क्रिप्टो फ्रॉड से बचने के लिए सावधानियां
क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े ठगी के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। ऐसे में, साइबर अपराधियों से बचने के लिए आम लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां इस प्रकार हैं:
सरकारी अधिकारी बनकर कॉल करने वालों से सावधान रहें।
कोई भी व्यक्तिगत जानकारी या बैंकिंग डिटेल अज्ञात लोगों के साथ साझा न करें।
फर्जी तकनीकी सहायता या निवेश योजनाओं से बचें।
क्रिप्टोकरेंसी में कोई भी लेनदेन करने से पहले सही स्रोत की जांच करें।
अविश्वसनीय लिंक, ईमेल और अनजान कॉल्स से बचें।
सीबीआई द्वारा दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा में की गई छापेमारी से क्रिप्टो फ्रॉड से जुड़े बड़े रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। इस दौरान 1.08 करोड़ रुपये नकद, अमेरिकी डॉलर और सोना जब्त किया गया। आरोपियों ने सरकारी अधिकारी बनकर लोगों से ठगी की और क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से पैसे का हेरफेर किया।
जांच एजेंसी अब अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है और जल्द ही इस मामले में नए खुलासे हो सकते हैं। यह छापेमारी साइबर अपराध और डिजिटल ठगी के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है, जिससे आने वाले समय में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।