खेल
R Prajnananda की चाल से टूटा कार्लसन का गुरूर – फ्रीस्टाइल में भारत का जलवा!
R Prajnananda: फ्रीस्टाइल चेस ग्रैंड स्लैम में भारत के युवा ग्रैंडमास्टर आर प्रग्गनानंधा ने एक बार फिर दुनिया को हैरान कर दिया है। उन्होंने नॉर्वे के ग्रैंडमास्टर और विश्व नंबर 1 खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन को चौथे राउंड में हराकर एक बड़ी जीत हासिल की है। यह मुकाबला केवल 39 चालों में खत्म हो गया जो उनकी शानदार तैयारी और आत्मविश्वास का प्रमाण है। यह जीत प्रग्गनानंधा के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक मानी जा रही है।
तीनों फॉर्मेट में दिखाया कमाल
मैच में आर प्रग्गनानंधा ने कार्लसन के खिलाफ तीनों फॉर्मेट—क्लासिकल, रैपिड और ब्लिट्ज—में जीत दर्ज की। चौथे राउंड के इस मुकाबले में 10 मिनट + 10 सेकेंड के टाइम कंट्रोल के साथ खेले गए गेम में प्रग्गनानंधा का नियंत्रण पूरी तरह से दिखाई दिया। उन्होंने 93.9% की शानदार एक्यूरेसी से खेल दिखाया जबकि कार्लसन केवल 84.9% के नियंत्रण के साथ जूझते नजर आए। इससे साफ जाहिर है कि भारतीय खिलाड़ी अब किसी भी दबाव से डरते नहीं बल्कि आत्मविश्वास से भरपूर हैं।
Praggnanandhaa beats Carlsen and takes the sole lead in their group on 3.5/4! https://t.co/bULo6wDydU pic.twitter.com/uQvC0ljLzK
— chess24 (@chess24com) July 16, 2025
जीत के साथ टॉप पर पहुंचे प्रग्गनानंधा
इस मुकाबले में जीत हासिल कर प्रग्गनानंधा व्हाइट ग्रुप के आठ खिलाड़ियों में से 4.5 अंकों के साथ संयुक्त रूप से शीर्ष स्थान पर पहुंच गए हैं। उनकी निरंतरता और रणनीति ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है। उन्होंने पहले दौर में नोदिरबेक अब्दुसत्तोरोव से ड्रॉ खेला फिर दूसरे राउंड में असाउबायेवा को हराया और तीसरे राउंड में ब्लैक पीस से खेलते हुए कीमर को मात दी।
भारतीय खिलाड़ियों के खिलाफ कमजोर दिखे कार्लसन
गौर करने वाली बात यह है कि हाल ही में मैग्नस कार्लसन भारतीय खिलाड़ियों के सामने लगातार हार का सामना कर रहे हैं। इससे पहले मौजूदा वर्ल्ड चैंपियन डी गुकेश ने भी उन्हें हराया था। अब प्रग्गनानंधा की यह जीत इस बात की पुष्टि करती है कि भारत अब केवल उभरता हुआ नहीं बल्कि स्थापित शतरंज महाशक्ति बन चुका है।
फ्रीस्टाइल फॉर्मेट बना पसंदीदा
मैच के बाद प्रग्गनानंधा ने कहा कि उन्हें क्लासिकल से ज्यादा फ्रीस्टाइल फॉर्मेट पसंद है। उनका कहना था कि इस फॉर्मेट में रचनात्मकता और तेजी दोनों का मेल होता है जिससे खेलने में आनंद आता है। यह बयान भी दर्शाता है कि नई पीढ़ी के खिलाड़ी अब परंपरागत तरीकों से आगे बढ़कर नवीन सोच और साहस से खेलना पसंद करते हैं।