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Cargo Ship Fire: अरब सागर में उठी आग की लपटें! मालवाहक जहाज में धमाकों से मचा हड़कंप, केरल तट पर छाया खतरे का साया
Cargo Ship Fire: केरल के कोझिकोड जिले के बेयपोर तट के पास एक सिंगापुर ध्वजांकित कार्गो शिप में आग लग गई है। यह कंटेनर शिप 270 मीटर लंबी है और मुंबई की ओर आ रही थी। जहाज में कई विस्फोट और आग की घटनाएं हुई हैं। कई कंटेनर समुद्र में गिर गए हैं।
डेक के नीचे विस्फोट हुआ बताया गया है
कोस्ट गार्ड के अनुसार जहाज के डेक के नीचे विस्फोट हुआ है। इस हादसे में जहाज के 4 क्रू मेंबर्स लापता बताए जा रहे हैं जबकि 5 लोग घायल हुए हैं। जहाज पर कुल 22 क्रू मेंबर्स थे जो कंटेनराइज्ड कार्गो के साथ यात्रा कर रहे थे।
MV WAN HAI 503 on passage from Colombo to Nhava Sheva reported an explosion under deck in position 315, Kochi 130. 04 crew reported missing and 05 crew injured. The ship was carrying containerised cargo with a total crew of 22. CGDO on task diverted for assessment. ICGS Rajdoot… https://t.co/bZeEO2LG4M pic.twitter.com/tvQVlQuerm
— ANI (@ANI) June 9, 2025
इंडियन कोस्ट गार्ड और नौसेना ने भेजी मदद के लिए टीम
सीजीडीओ की ओर से घटना का आकलन करने के लिए कर्मी भेजे गए हैं। नई मंगलुरु से आईसीजीएस राजदूत, कोच्चि से आईसीजीएस अर्नवेश और अगत्ती से आईसीजीएस शचेत को सहायता के लिए भेजा गया है। सभी टीमें स्थिति को नियंत्रित करने में लगी हैं।
18 क्रू सदस्यों को बचाया गया है
रक्षा सूत्रों की जानकारी के अनुसार केरल तट के पास जलती हुई कंटेनर शिप से 18 क्रू सदस्यों को नौसेना और कोस्ट गार्ड ने सफलतापूर्वक बचा लिया है। बचाव अभियान तेजी से जारी है ताकि और लोगों को सुरक्षित निकाला जा सके।
घायल और लापता क्रू सदस्यों की खोज जारी
हालांकि 18 क्रू सुरक्षित हैं लेकिन अभी 4 सदस्य लापता हैं और 5 घायल हैं। उनके स्वास्थ्य और खोज अभियान पर पूरी नजर बनी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति गंभीर है और आग को जल्द से जल्द नियंत्रित करना जरूरी है।
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Manipur Violence: मणिपुर में नई सरकार के 24 घंटे बाद भड़की हिंसा, चूराचांदपुर में तनाव फैल गया
Manipur Violence: मणिपुर के चूराचांदपुर में उपमुख्यमंत्रियों नेमचा किपगेन और लोसी दीखो के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान फिर हिंसा भड़क उठी है। इस दौरान सुरक्षाबलों और भीड़ के बीच झड़पें हुईं। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस का उपयोग किया। मणिपुर में पिछले कई वर्षों से जारी हिंसा के बीच केंद्र सरकार ने पिछले साल राष्ट्रपति शासन लगाया था। इसके बाद हाल ही में युमनाम खेमचंद सिंह की अगुवाई में नई सरकार बनी थी।
सरकार गठन के 24 घंटे बाद ही हिंसा का विस्फोट
मणिपुर में राष्ट्रपति शासन हटने और युमनाम खेमचंद सिंह की नई सरकार के गठन के मात्र 24 घंटे बाद ही हिंसा की स्थिति पैदा हो गई। कूकी समुदाय के समूहों ने चूराचांदपुर में सड़कों पर उतरकर अपने समुदाय के विधायकों को सरकार गठन में भाग लेने से मना किया। उन्होंने पूर्ण बंद और प्रदर्शन का आह्वान भी किया। कई जगहों से फायरिंग की खबरें भी मिलीं। कूकी-जॉ क्षेत्र में संयुक्त मोर्चा 7 ने 12 घंटे के बंद का एलान किया है।

नेमचा किपगेन की नियुक्ति से कूकी-जॉ समुदाय में नाराजगी
हिंसा की मुख्य वजह उपमुख्यमंत्री पद पर नेमचा किपगेन की नियुक्ति को लेकर कूकी-जॉ समुदाय में रोष है। कूकी-जॉ विधायक की सरकार में भागीदारी से समुदाय में असंतोष पनपा है, जिससे चूराचांदपुर जिले में नए सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। तुइबोंग इलाके में तनावपूर्ण स्थिति बनी रही, जिसके चलते प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच तीव्र झड़पें हुईं। स्थानीय प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए हैं।
सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, स्थिति पर कड़ी नजर
घटना के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है ताकि स्थिति और बिगड़ने से रोका जा सके। प्रशासन ने सभी संबंधित पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। वहीं, तनाव की वजह से स्थानीय लोग दहशत में हैं और अपने घरों में सीमित रहना पसंद कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में लेने के लिए सभी संभव कदम उठाए जा रहे हैं। आने वाले समय में हालात सुधारने के लिए राजनीतिक स्तर पर भी प्रयास जारी हैं।
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Alankar Agnihotri: इस्तीफे के बाद बरेली पहुंचे अलंकार अग्निहोत्री, सरकार को दिया बड़ा अल्टीमेटम
इस्तीफे के बाद पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट और पीसीएस अधिकारी Alankar Agnihotri मंगलवार को बरेली पहुंचे। बरेली पहुंचते ही उन्होंने सरकार और प्रशासन के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया। लाल फाटक स्थित परशुराम धाम पर उनके समर्थकों ने जोरदार स्वागत किया। हाथों में फूल मालाएं और बैनर लिए समर्थक देखो देखो शेर आया के नारे लगाते नजर आए। माहौल पूरी तरह राजनीतिक संदेशों और नारों से गूंजता रहा। मीडिया से बातचीत में अलंकार अग्निहोत्री ने अपने इस्तीफे के बाद पहली बार खुलकर प्रतिक्रिया दी और कहा कि वह दबाव और डर की राजनीति से पीछे हटने वाले नहीं हैं।
आरोप पत्र को बताया हास्यास्पद, कार्रवाई से नहीं डरने का दावा
मीडिया से बात करते हुए Alankar Agnihotri ने सरकार द्वारा दिए गए आरोप पत्र को पूरी तरह हास्यास्पद करार दिया। उन्होंने कहा कि अगर अपने हक और अपने समाज की बात करना गुनाह है तो वह यह जुर्म बार बार करेंगे। उन्होंने साफ कहा कि किसी भी तरह की कार्रवाई या नोटिस से उन्हें डर नहीं लगता। उनके अनुसार आरोप पत्र में कई तथ्य गलत हैं और सच्चाई को तोड़ मरोड़ कर पेश किया गया है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अपनी बात रखना अपराध नहीं हो सकता। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह अपने लीगल एडवाइजर से सलाह लेकर आरोप पत्र का कानूनी जवाब देंगे और इस लड़ाई को अदालत तक ले जाने से पीछे नहीं हटेंगे।

एससी एसटी एक्ट पर बड़ा बयान, 7 फरवरी तक सरकार को अल्टीमेटम
पूर्व पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने एससी एसटी एक्ट को काला कानून बताते हुए केंद्र सरकार को 7 फरवरी तक का अल्टीमेटम दे दिया। उन्होंने कहा कि यह कानून समाज में भेदभाव को बढ़ावा दे रहा है और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। उन्होंने मांग की कि संसद का विशेष सत्र बुलाकर इस कानून को समाप्त किया जाए। अलंकार अग्निहोत्री ने चेतावनी दी कि अगर 7 फरवरी तक सरकार ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो वह दिल्ली कूच करेंगे। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन सिर्फ व्यक्तिगत नहीं होगा बल्कि देशव्यापी रूप लेगा। उनके मुताबिक यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति की नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की लड़ाई है।
सनातन परंपरा और राजनीति पर तीखा प्रहार
अलंकार अग्निहोत्री ने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर ऐसे कानून बना रही है जिससे समाज बंटे और लोगों के बीच तनाव बढ़े। उन्होंने कहा कि जब कोई इसके खिलाफ आवाज उठाता है तो उसे दबाने की कोशिश की जाती है। प्रयागराज में शंकराचार्य से जुड़ी मारपीट की घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने प्रशासन से सार्वजनिक माफी की मांग की। उन्होंने कहा कि बटुकों की शिखा पकड़कर मारपीट करना बेहद शर्मनाक है और यह सनातन परंपरा का अपमान है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सनातन परंपरा के साथ ऐसा व्यवहार जारी रहा तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। राजनीतिक दलों और नेताओं पर हमला बोलते हुए उन्होंने उन्हें रीढ़विहीन बताया और कहा कि आज के नेता बिना ऊपर से निर्देश मिले कोई फैसला नहीं ले पाते।
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