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Bihar Election: तेज प्रताप यादव का बड़ा वादा, महुआ में बनेगा क्रिकेट स्टेडियम और इंडिया-पाक मैच, चुनावी माहौल गरम
Bihar Election 2025 में तेजस्वी यादव अपना जोर लगा रहे हैं और अगले मुख्यमंत्री बनने का दावा कर रहे हैं। इस बीच उनके बड़े भाई तेज प्रताप यादव ने RJD से अलग होकर अपनी नई पार्टी, जनशक्ति जनता दल (JJD) बनाई है और महुआ विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं। तेज प्रताप ने शनिवार को कहा कि अगर उन्हें महुआ सीट से जीत मिली, तो वह महुआ में एक क्रिकेट स्टेडियम बनाएंगे और भारत-पाकिस्तान मैच का आयोजन करेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस मैच का टॉस वह खुद करेंगे।
महुआ को बनाएंगे विश्वस्तरीय मंच
अपने बोल्ड अंदाज के लिए जाने जाने वाले तेज प्रताप ने कहा कि पूरे विश्व को महुआ का नाम पता चलेगा। उन्होंने मीडिया से कहा कि महुआ सीट पर उन्हें कोई मुकाबला नहीं है और जनता उन्हें समर्थन देगी। तेज प्रताप का यह वादा उनके चुनावी अभियान को खास बनाता है और युवाओं को जोड़ने का प्रयास करता है। उनके अनुसार, यह परियोजना न केवल खेल क्षेत्र को विकसित करेगी बल्कि महुआ को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान भी देगी।

RJD और NDA के उम्मीदवार भी मैदान में
महुआ से RJD ने मौजूदा विधायक मुकेश रोशन को टिकट दिया है, जो तेजस्वी यादव के करीबी सहयोगी माने जाते हैं। वहीं NDA की ओर से केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की पार्टी LJP (रामविलास) के संजय कुमार सिंह इस सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में तेज प्रताप की जीत की संभावना कुछ हद तक अनिश्चित दिखाई देती है। महुआ में राजनीतिक मुकाबला कड़ा होने वाला है और तेज प्रताप को अपने प्रचार में पूरी ताकत लगानी होगी।
तेजस्वी यादव पर तीखा प्रहार
तेज प्रताप ने अपने छोटे भाई तेजस्वी यादव पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि तेजस्वी “जन नेता” नहीं हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि कई वरिष्ठ नेता जैसे जेपी लोhia, कर्पूरी ठाकुर और लालू प्रसाद यादव ही असली जन नेता हैं। तेज प्रताप ने कहा कि तेजस्वी केवल पिता लालू प्रसाद यादव की वजह से इस पद तक पहुंचे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जब तेजस्वी वास्तविक जन नेता बनेंगे, तभी वे उन्हें यह उपाधि देंगे।
लालू यादव को बनाएंगे संरक्षक
तेज प्रताप ने यह भी स्पष्ट किया कि वे अपनी पार्टी के संरक्षक के रूप में लालू यादव को बनाए रखेंगे। इससे संकेत मिलता है कि वे पिता के राजनीतिक अनुभव और मार्गदर्शन को अपने चुनावी अभियान में शामिल करना चाहते हैं। यह कदम उनकी नई पार्टी की वैधता और बिहार में राजनीतिक पहचान को मजबूत करने की दिशा में है। महुआ सीट से उनका यह चुनावी अभियान कई तरह के राजनीतिक खेल और रणनीतियों को उजागर करता है।
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Putin India Visit: रूस पर निर्भरता घटने के बीच पुतिन भारत दौरे पर, रक्षा और ऊर्जा साझेदारी पर होगी अहम बातचीत
Putin India Visit: रूस के राष्ट्रपति वलादिमीर पुतिन 4-5 दिसंबर, 2025 को वार्षिक भारत-रूस शिखर सम्मेलन के लिए नई दिल्ली आएंगे। यह उनकी भारत यात्रा यूक्रेन युद्ध के बाद पहली है, जिसने वैश्विक कूटनीति और रक्षा आपूर्ति श्रृंखलाओं को बदल दिया। हालाँकि भारत अब रूस पर अपनी लंबे समय से चली आ रही रक्षा निर्भरता को संतुलित कर रहा है, लेकिन ऊर्जा व्यापार पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है। इस दो दिवसीय बैठक में दोनों देशों के बीच रक्षा, परमाणु ऊर्जा, तेल और गैस, अंतरिक्ष, प्रौद्योगिकी और व्यापार के क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा होगी। विशेष ध्यान नई पीढ़ी के एयर-डिफेंस सिस्टम पर होगा, जिसमें रूस के S-500 सिस्टम पर चर्चा होने की संभावना है। भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के ड्रोन खतरे का मुकाबला करने के लिए रूस का S-400 सिस्टम इस्तेमाल किया था।
रूस का रक्षा क्षेत्र में महत्व
दशकों तक भारत के अधिकांश सैन्य उपकरण रूस से आए। 2000 और 2010 के दशक में रूस का हिस्सा 70% से अधिक था, 2002 में यह 89% और 2012 में 87% तक पहुंच गया। लेकिन 2014 के बाद यह तेजी से घटकर 2019 में 38% और 2019-2023 में केवल 36% रह गया, जो पिछले 60 वर्षों में सबसे कम है। अब फ्रांस और अमेरिका से आयात बढ़ गया है। फिर भी रूस का महत्व बना हुआ है, क्योंकि पुराने सोवियत सिस्टम की मरम्मत रूस में ही होती है, कुछ प्रमुख हथियार जैसे परमाणु पनडुब्बियां और उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम केवल कुछ देशों से ही मिलते हैं। इसके अलावा, मिसाइल रक्षा और हाइपरसोनिक तकनीक में रूस कई पश्चिमी देशों से आगे है।

भारत की नई रक्षा खरीद रणनीति
भारत की प्राथमिकताएं बदल गई हैं। अब विमानों की खरीद की बजाय ध्यान निम्नलिखित पर है: एयर-डिफेंस सिस्टम, मिसाइल, नौसेना प्लेटफार्म, बख्तरबंद वाहन और संयुक्त उत्पादन एवं तकनीकी हस्तांतरण। इसके दो मुख्य कारण हैं: आपूर्ति विविधता – यूक्रेन युद्ध के दौरान आपूर्ति रुकावटों ने सिखाया कि किसी एक देश पर निर्भरता जोखिम भरी हो सकती है; और स्थानीय उत्पादन बढ़ाना – आत्मनिर्भर भारत के तहत कई रूसी सिस्टम जैसे AK-203 राइफल और ब्रह्मोस मिसाइल का स्थानीय उत्पादन बढ़ाया गया।
ऊर्जा व्यापार और पुतिन की यात्रा का महत्व
रक्षा पर निर्भरता घटने के बावजूद ऊर्जा व्यापार ने भारत-रूस संबंध को मजबूत किया है। 2022 में पश्चिमी प्रतिबंधों के बाद रूस ने भारत को सस्ता कच्चा तेल आपूर्ति करना शुरू किया। भारत, जो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है, ने इसका पूरा लाभ उठाया। 2020-21 में रूस से आयात 1.4% था, जो 2022-23 में 6.5% और 2023-24 तथा 2024-25 में लगभग 9% तक पहुंच गया। हालांकि, भारत का रूस को निर्यात केवल 1% के आसपास है। भारत मशीनरी, दवाइयां, इलेक्ट्रिकल सामान और समुद्री उत्पाद बेचता है, लेकिन तेल और गैस जैसे उच्च-मूल्य उत्पाद खरीदता है, जिससे व्यापार संतुलन रूस के पक्ष में है।
पुतिन की इस यात्रा में कई महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल होंगे: S-500 एयर डिफेंस डील, संयुक्त उत्पादन और नई तकनीक में सहयोग, और ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर और किफायती बनाना। यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब भारत अमेरिका, फ्रांस और जापान के साथ रक्षा सहयोग बढ़ा रहा है। इस बैठक से यह स्पष्ट होगा कि भारत और रूस अपने दशकों पुराने साझेदारी को नई वैश्विक और आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप कैसे ढालते हैं।
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