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दिल्ली में गिरफ्तार बाबा चैतन्यानंद सरस्वती, 17 महिलाओं से यौन शोषण और करोड़ों की धोखाधड़ी का खुलासा

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दिल्ली पुलिस ने बाबा चैतन्यानंद सरस्वती को गिरफ्तार किया है। उन पर 17 महिलाओं के साथ दुष्कर्म करने का आरोप है। इसके अलावा, उनके खिलाफ करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े का मामला भी सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार बाबा ने लगभग 40 करोड़ रुपये का गबन किया। उन्होंने दो पासपोर्ट बनाए और प्रधानमंत्री कार्यालय का नाम धोखाधड़ी के लिए इस्तेमाल किया। अपने प्रभाव का दिखावा करने के लिए बाबा अपने सहयोगियों को लोगों से प्रधानमंत्री कार्यालय से जुड़े होने का दावा करने के लिए कहते थे।

दो फर्जी पासपोर्ट का खुलासा

जांच में यह भी सामने आया कि बाबा चैतन्यानंद के पास दो पासपोर्ट थे। पहला पासपोर्ट स्वामी पार्थ सरथी के नाम से और दूसरा उनके वास्तविक नाम स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती के नाम से था। दोनों पासपोर्ट फर्जी दस्तावेजों से बनवाए गए थे। पहले पासपोर्ट में जन्मस्थान दार्जीलिंग और पिता का नाम स्वामी घनानंद पुरी लिखा गया था। दूसरे पासपोर्ट में जन्मस्थान तमिलनाडु और गुरु का नाम स्वामी दयानंद सरस्वती लिखा गया। इसके अलावा उनके पास दो बैंक खाते भी थे, जो अलग-अलग नामों पर थे।

फर्जी विजिटिंग कार्ड और झूठी पहचान

पुलिस ने बाबा के पास से कई फर्जी विजिटिंग कार्ड भी बरामद किए। इनमें से एक कार्ड में बाबा ने खुद को संयुक्त राष्ट्र का स्थायी राजदूत बताया, जबकि दूसरे कार्ड में वे ब्रिक्स देशों के संयुक्त आयोग के सदस्य और भारत के विशेष दूत होने का दावा कर रहे थे। इन फर्जी दस्तावेजों और कार्डों का इस्तेमाल बाबा ने अपने प्रभाव और प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए किया।

छिपने की रणनीति और मोबाइल फोन

जांच में यह भी पता चला कि गिरफ्तारी से पहले बाबा वृंदावन, आगरा और मथुरा में छिपे थे। इस दौरान उन्होंने 13 से अधिक बार होटल बदल दिए। उनके पास तीन मोबाइल फोन मिले, जिसमें एक iPhone भी शामिल था। मोबाइल और पासपोर्ट की जांच से पुलिस को बाबा की योजनाबद्ध गतिविधियों और फर्जीवाड़े का पूरा नेटवर्क समझने में मदद मिली।

बाबा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और भविष्य की योजना

दिल्ली पुलिस ने बाबा के खिलाफ गंभीर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। उनके धोखाधड़ी, यौन अपराध और फर्जीवाड़े के मामलों की अलग-अलग जांच चल रही है। पुलिस का उद्देश्य है कि सभी पीड़ितों को न्याय मिले और बाबा के फर्जी नेटवर्क को पूरी तरह उजागर किया जाए। इस गिरफ्तारी से यह संदेश गया कि कोई भी व्यक्ति चाहे कितना भी बड़ा प्रभावशाली क्यों न हो, कानून की नजरों से नहीं बच सकता।

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