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मिडिल ईस्ट तनाव और अमेरिकी महंगाई से एशियाई बाजारों में भारी गिरावट

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मिडिल ईस्ट तनाव और अमेरिकी महंगाई से एशियाई बाजारों में भारी गिरावट

मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और संयुक्त राज्य अमेरिका में महंगाई के आंकड़ों के बढ़ते दबाव का असर एशियाई शेयर बाजारों में साफ देखा गया। भारतीय बाजार में BSE Sensex शुरुआती कारोबार में करीब 1,000 अंक तक गिर गया। निवेशकों के बीच अचानक घबराहट का माहौल बन गया। एशिया के प्रमुख सूचकांकों में भी भारी दबाव रहा। जापान का Nikkei 225 करीब 2% तक टूटा और बाद में 57,947 के स्तर पर 1.5% की गिरावट के साथ कारोबार करता दिखा।

एशियाई सूचकांक और अमेरिकी फ्यूचर्स पर दबाव

एशियाई बाजारों में शुरुआती कारोबार में 900 अंकों से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। हांगकांग का Hang Seng Index 1.7% गिरकर 26,165 पर पहुंच गया, जबकि शेनजेन का Shenzhen Component Index 109 अंक टूटकर 14,386 पर था। दक्षिण कोरिया में सार्वजनिक अवकाश के कारण बाजार बंद रहा। अमेरिकी फ्यूचर्स में भी दबाव देखा गया। S&P 500, Dow Jones Industrial Average और NASDAQ Composite में शुरुआती कारोबार में 1% से अधिक गिरावट आई, हालांकि बाद में रिकवरी के साथ यह गिरावट 0.6% तक सीमित रही।

मिडिल ईस्ट तनाव और अमेरिकी महंगाई से एशियाई बाजारों में भारी गिरावट

वैश्विक अनिश्चितता के बीच सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने की कीमतों में उछाल आया। यूएस गोल्ड फ्यूचर्स करीब 2.58% चढ़कर 5,382.60 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गए। तेल बाजार में भी हलचल रही। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में दो जहाजों पर हमले की खबरों के बाद तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई। अमेरिकी बेंचमार्क क्रूड तेल शुरुआती कारोबार में 8% तक उछला, हालांकि बाद में यह 4% की बढ़त के साथ 69.60 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करने लगा। वैश्विक तेल मानक Brent Crude 4.5% बढ़कर 76.17 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

करेंसी बाजार में अमेरिकी डॉलर मजबूत

मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर मजबूत रहा। डॉलर 156.29 जापानी येन से बढ़कर 156.04 येन पर पहुंच गया। वहीं यूरो 1.1788 डॉलर से फिसलकर 1.1812 डॉलर पर था। कुल मिलाकर, मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका में महंगाई के आंकड़ों ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। इसका असर इक्विटी, कमोडिटी और करेंसी बाजारों में एक साथ देखने को मिला है। निवेशक इस समय सुरक्षित निवेश और बाजार की चाल पर नजर बनाए हुए हैं।

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निवेशकों की नजर वैश्विक तेल बाजार पर, कीमतें $76 से $81 प्रति बैरल तक जा सकती हैं

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निवेशकों की नजर वैश्विक तेल बाजार पर, कीमतें $76 से $81 प्रति बैरल तक जा सकती हैं

28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान के कई संवेदनशील ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई की। इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर Ayatollah Ali Khamenei की मौत हुई। इस घटना ने पहले से तनावपूर्ण पश्चिम एशिया की स्थिति को और गंभीर बना दिया है। इस क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ने के कारण वैश्विक तेल बाजार में गतिविधियां तेज हो गई हैं और निवेशक तेल की कीमतों पर गहरी नजर बनाए हुए हैं। विशेष रूप से तेल आयातक देशों जैसे भारत पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।

ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद किया, सप्लाई में होगी कमी

ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जारी विवाद के बीच ईरानी सरकार ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की घोषणा की है। यह मार्ग बंद होने से कच्चे तेल की सप्लाई में कमी आएगी। दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल इसी मार्ग से गुजरता है। इस कारण से सप्लाई में रुकावट होने पर तेल की कीमतों में और तेजी आने की संभावना है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस कदम से वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ेगी और भावों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है।

निवेशकों की नजर वैश्विक तेल बाजार पर, कीमतें $76 से $81 प्रति बैरल तक जा सकती हैं

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, निवेशकों की नजर

तेल बाजार में हाल ही में अस्थिरता के बीच कीमतों ने तेजी दिखाई है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, IG Group के रिटेल ट्रेडिंग प्रोडक्ट में वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) की कीमत $75.33 प्रति बैरल तक पहुंच गई। यह शुक्रवार की बंद कीमत से लगभग 12 प्रतिशत अधिक है। अन्य मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमत $76 से $81 प्रति बैरल तक पहुँच सकती है। निवेशक और तेल कंपनियां लगातार बाजार की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व और वैश्विक असर

हॉर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित है और यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है। इसे विश्व के प्रमुख ऊर्जा मार्गों में से एक माना जाता है। कतर, जो दुनिया का सबसे बड़ा LPG निर्यातक है, अपने लगभग सभी LPG का निर्यात इसी मार्ग के माध्यम से करता है। इसलिए हॉर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से वैश्विक तेल और गैस बाजार में अस्थिरता बढ़ने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सप्लाई और बाधित हुई तो कच्चे तेल की कीमतों में और उछाल देखने को मिल सकता है।

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M&M शेयरों की बढ़त पर निवेशकों की नजर, 2025-28 में राजस्व में 15% वृद्धि का अनुमान

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M&M शेयरों की बढ़त पर निवेशकों की नजर, 2025-28 में राजस्व में 15% वृद्धि का अनुमान

शेयर बाजार में इस समय महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M) के शेयरों को लेकर चर्चा जोरों पर है। ब्रोकरेज फर्म Nuvama ने दावा किया है कि कंपनी के शेयरों में वर्तमान स्तर से ₹900 से अधिक की वृद्धि की संभावना है। कंपनी के मजबूत प्रदर्शन और आने वाले नए उत्पादों के चलते Nuvama ने इस शेयर को ‘Buy’ रेटिंग दी है और 31 मार्च 2026 तक इसके लिए ₹4,400 का लक्ष्य निर्धारित किया है।

पिछले दस सालों में निवेशकों को मिले शानदार रिटर्न

M&M, जो BSE Sensex पर सूचीबद्ध है, का मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹4,34,178.09 करोड़ है। पिछले दस वर्षों में इस शेयर ने निवेशकों को लगभग 450% रिटर्न दिए हैं। लगातार मजबूत प्रदर्शन और भरोसेमंद नतीजों के कारण निवेशकों का भरोसा इस शेयर पर बना हुआ है। Nuvama का मानना है कि कंपनी की मजबूत रणनीतियों और नए उत्पाद लॉन्च से यह प्रदर्शन और बेहतर होगा।

M&M शेयरों की बढ़त पर निवेशकों की नजर, 2025-28 में राजस्व में 15% वृद्धि का अनुमान

ऑटो, फार्म और ईवी व्यवसाय में तेजी का संकेत

Nuvama का विश्लेषण है कि M&M की ऑटो और फार्म सेक्टर में वृद्धि की संभावना मजबूत है। आगामी SUV मॉडल और नए प्रोडक्ट लॉन्च कंपनी के राजस्व में 2025-28 के बीच 15% CAGR वृद्धि लाएंगे। इसके अलावा, कृषि क्षेत्र में सरकारी नीतियों और सुधारों के चलते M&M के फार्म बिजनेस में भी 13% CAGR वृद्धि की उम्मीद है। कंपनी इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेक्टर में BE7 और Vision सीरीज जैसे नए मॉडल के साथ भी मजबूती से आगे बढ़ रही है।

निर्यात क्षेत्र में भी कंपनी मजबूत स्थिति में

Nuvama ने यह भी कहा है कि M&M की उत्तर अमेरिका, ब्राजील और ASEAN देशों में मजबूत उपस्थिति निर्यात के लिहाज से कंपनी के लिए अवसर पैदा करेगी। इसके चलते 2025 से 2028 के बीच निर्यात में भी लगभग 12% CAGR वृद्धि की उम्मीद है। इस तरह कंपनी का समग्र प्रदर्शन निवेशकों के लिए आकर्षक बना हुआ है और शेयर में तेजी आने की संभावना काफी उच्च मानी जा रही है।

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Tax Evasion Scam: बिरयानी के गायब बिलों से खुला 70,000 करोड़ का टैक्स घोटाला

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Tax Evasion Scam: बिरयानी के गायब बिलों से खुला 70,000 करोड़ का टैक्स घोटाला

Tax Evasion Scam: डिजिटल युग में अपराध करना जितना आसान दिखता है, पकड़ा जाना उससे भी ज्यादा तय हो गया है। ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला देशभर के रेस्टुरेंट कारोबार से सामने आया है, जहां “गायब” किए गए बिरयानी और अन्य खाद्य पदार्थों के बिलों ने करीब 70,000 करोड़ रुपये के टैक्स चोरी घोटाले का पर्दाफाश कर दिया। 2019 से अब तक 1.77 लाख रेस्टुरेंट्स के बिलिंग डेटा की जांच में पाया गया कि औसतन 27 प्रतिशत बिक्री को दबाया जा रहा था। यह सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि संगठित और सुनियोजित हेराफेरी का बड़ा नेटवर्क था। कुल मिलाकर लगभग 70,000 करोड़ रुपये का टर्नओवर छिपाया गया, जिससे सरकार को अरबों डॉलर के राजस्व नुकसान की आशंका है। शुरुआती जांच में यह मामला सीमित लगा, लेकिन जैसे-जैसे डेटा की परतें खुलीं, टैक्स चोरी का दायरा कई राज्यों तक फैलता दिखाई दिया।

राज्यों में बड़े स्तर पर गड़बड़ी, हजारों PAN रडार पर

जांच के दौरान कई राज्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आईं। कर्नाटक में लगभग 2,000 करोड़ रुपये के डिलीट लेन-देन का पता चला, जबकि तेलंगाना में करीब 1,500 करोड़ रुपये की बिक्री छिपाई गई। तमिलनाडु, महाराष्ट्र और गुजरात में भी बड़े स्तर पर गड़बड़ियां सामने आई हैं। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के 3,734 PAN की जांच में 5,000 करोड़ रुपये से अधिक की दबाई गई बिक्री उजागर हुई। सिर्फ 40 रेस्टुरेंट्स के सैंपल में ही करीब 400 करोड़ रुपये का बिना घोषित टर्नओवर मिला। कुछ जगहों पर तो लगभग 25 प्रतिशत तक की बिक्री जानबूझकर छिपाई गई थी। इन खुलासों के बाद केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया है। अब विभाग पुनर्निर्मित बिलों का मिलान आयकर रिटर्न और बैंक रिकॉर्ड से कर रहा है, और जल्द ही नोटिस व भारी जुर्माने की कार्रवाई शुरू होने की संभावना है।

Tax Evasion Scam: बिरयानी के गायब बिलों से खुला 70,000 करोड़ का टैक्स घोटाला

हैदराबाद से शुरू हुआ खुलासा, सॉफ्टवेयर से मिला बड़ा सबूत

पूरे मामले की शुरुआत हैदराबाद में एक नियमित जांच के दौरान हुई। आयकर विभाग के अधिकारी एक रेस्टुरेंट में पहुंचे, जहां सब कुछ सामान्य लग रहा था—ग्राहक भोजन कर रहे थे और काउंटर पर बिलिंग जारी थी। लेकिन अधिकारियों ने गौर किया कि रेस्टुरेंट में मौजूद ग्राहकों की संख्या और बिलिंग सिस्टम में दर्ज बिलों की संख्या में मेल नहीं था। कुछ नकद बिल थोड़ी देर के लिए सिस्टम में दिखाई देते और फिर गायब हो जाते थे। प्रिंटेड सारांश तो सही दिख रहे थे, लेकिन सॉफ्टवेयर लॉग कुछ और कहानी बयान कर रहे थे। जांच में पता चला कि कई रेस्टुरेंट एक ही बिलिंग सॉफ्टवेयर का उपयोग कर रहे थे। जब जांच अहमदाबाद स्थित सॉफ्टवेयर प्रदाता के बैकएंड तक पहुंची, तो देशभर के एक लाख से अधिक रेस्टुरेंट्स का लगभग 60 टेराबाइट डेटा सामने आया। हैदराबाद की डिजिटल लैब में विशेषज्ञों ने डिलीट किए गए बिलों को दोबारा जोड़ना शुरू किया और हर लेन-देन के पीछे छिपी डिजिटल ट्रेल को उजागर किया।

AI की मदद से रिकवर हुए डिलीट बिल, बढ़ सकती है कानूनी कार्रवाई

जांच एजेंसियों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स की मदद से डिलीट किए गए बिलों को रिकवर किया। विश्लेषण में सामने आया कि छह वर्षों में संबंधित रेस्टुरेंट्स ने लगभग 2.43 लाख करोड़ रुपये के बिल जनरेट किए थे, जिनमें से 13,000 करोड़ रुपये से अधिक के बिल रिकॉर्ड होने के बाद मिटा दिए गए थे। कुछ रेस्टुरेंट रोजाना कुछ नकद बिल हटाते थे, जबकि कुछ ने पूरे 30 दिनों के बिल एक साथ डिलीट कर दिए। स्पष्ट है कि कम बिक्री दिखाकर कम टैक्स चुकाने की मंशा से यह खेल खेला गया। अब विभाग इस डेटा के आधार पर बड़े स्तर पर नोटिस जारी करने और जुर्माना लगाने की तैयारी में है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्रवाई आने वाले समय में डिजिटल टैक्स निगरानी को और सख्त करेगी और टैक्स चोरी करने वालों के लिए यह बड़ा चेतावनी संदेश साबित होगी।

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