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Anil Agarwal ने खोया अपना प्रिय बेटा अग्निवेश, हार्ट अटैक ने छीना साथ

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Anil Agarwal ने खोया अपना प्रिय बेटा अग्निवेश, हार्ट अटैक ने छीना साथ

संयुक्त राज्य अमेरिका में वेदांता समूह के संस्थापक Anil Agarwal के पुत्र अग्निवेश अग्रवाल का अचानक निधन हो गया है। अनिल अग्रवाल ने अपने बेटे के आकस्मिक निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, 49 वर्षीय अग्निवेश अग्रवाल न्यूयॉर्क में हार्ट अटैक की वजह से दुनिया से विदा हो गए। कुछ दिन पहले स्कीइंग के दौरान चोट लगने के बाद वे माउंट सीनाई अस्पताल में उपचाराधीन थे। उपचार के दौरान उनका दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। यह खबर वेदांता समूह के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल और उनके परिवार के लिए अपूरणीय दुःख लेकर आई है।

Anil Agarwal ने सोशल मीडिया पर इस दुखद खबर को साझा करते हुए लिखा, “हम सोचते थे कि बुरे समय खत्म हो गए, लेकिन किस्मत ने कुछ और ही सोचा था। अचानक हुए दिल के दौरे ने हमारा बेटा हमसे छीन लिया।” उन्होंने आगे लिखा, “मेरा प्रिय पुत्र अग्निवेश हमें बहुत जल्दी छोड़ गया। वह केवल 49 वर्ष का था। युवा, जीवंत और सपनों से भरा हुआ। हमने सोचा था कि अब सब ठीक हो जाएगा, लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था।”

Anil Agarwal का व्यवसायिक सफर और शुरुआती जीवन

Anil Agarwal का जन्म 24 जनवरी 1954 को बिहार की राजधानी पटना में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पटना के मिलर स्कूल से प्राप्त की। बचपन से ही उनकी सीखने की भूख और दृढ़ संकल्प ने उन्हें देश के प्रमुख उद्योगपतियों में से एक बनने की ओर अग्रसर किया। उनका व्यवसायिक सफर 1970 के दशक के मध्य शुरू हुआ जब उन्होंने धातु के स्क्रैप का व्यापार शुरू किया।

1976 में उन्होंने वेदांता कंपनी की स्थापना की। शुरुआत में वेदांता केवल स्क्रैप मेटल के व्यापार में था। लेकिन अनिल अग्रवाल की मेहनत और दूरदर्शिता ने कंपनी को तेजी से बढ़ाया और वेदांता को धातु उद्योग में एक प्रसिद्ध नाम बना दिया। उनके इस योगदान के कारण उन्हें ‘मेटल किंग’ के नाम से भी जाना जाता है।

घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यवसाय का विस्तार

1986 में अनिल अग्रवाल ने मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में कदम रखा और स्टरलाइट इंडस्ट्रीज की स्थापना की, जो शुरू में जेली-फिल्ड केबल का निर्माण करती थी। कुछ वर्षों के भीतर कंपनी ने तेजी से विस्तार किया और 1993 तक यह देश की पहली निजी क्षेत्र की तांबा गलाने और परिष्कृत करने वाली फैक्ट्री बन गई।

2011 में उन्होंने भारत एल्यूमिनियम कंपनी (BALCO) में नियंत्रण हिस्सेदारी खरीदी और बाद में हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड में निवेश किया। इन सौदों ने वेदांता को एल्यूमिनियम और जिंक के क्षेत्र में एक विशेष पहचान दिलाई। यह अनिल अग्रवाल के व्यवसायिक जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ था जिसने वेदांता को वैश्विक मंच पर मजबूती से स्थापित किया।

अनिल अग्रवाल की कुल संपत्ति और वेदांता का वित्तीय आंकड़ा

फोर्ब्स के अनुसार, वर्ष 2026 में अनिल अग्रवाल की कुल संपत्ति लगभग ₹35,000 करोड़ आंकी गई है। वित्तीय वर्ष 2021-22 में वेदांता का टर्नओवर लगभग ₹1,31,192 करोड़ रहा। उनके अधिकांश आय के स्रोत वेदांता समूह के विभिन्न क्षेत्रों से आते हैं।

अनिल अग्रवाल का यह सफर गरीबी से लेकर देश के सबसे बड़े उद्योगपतियों में शामिल होने तक की प्रेरणादायक कहानी है। उनके पुत्र अग्निवेश के निधन से वेदांता परिवार और भारतीय उद्योग जगत को गहरा सदमा पहुंचा है। यह घटना न केवल परिवार के लिए बल्कि पूरी व्यावसायिक दुनिया के लिए एक बड़ी क्षति है।

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Gold Silver Price Today: सोने-चांदी के दामों में भारी गिरावट, आज 10 ग्राम सोना खरीदने पर होगी बड़ी बचत

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Gold Silver Price Today: सोने-चांदी के दामों में भारी गिरावट, आज 10 ग्राम सोना खरीदने पर होगी बड़ी बचत

Gold Silver Price Today: सोने और चांदी के दामों में सोमवार, 2 फरवरी को घरेलू फ्यूचर्स मार्केट में तेज गिरावट देखी गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 5 फरवरी 2026 को समाप्त होने वाले सोने के फ्यूचर्स कांट्रैक्ट की कीमत ₹1,39,868 प्रति 10 ग्राम से खुली। पिछले ट्रेडिंग दिन सोने का बंद भाव ₹1,42,510 था। 2 फरवरी को सुबह 10 बजे तक सोने का भाव करीब ₹1,35,589 प्रति 10 ग्राम पर आ गया, जो पिछले दिन की तुलना में लगभग ₹6,900 की गिरावट दर्शाता है। शुरुआती ट्रेडिंग में सोने ने ₹1,41,085 का उच्च स्तर भी देखा।

चांदी के दाम भी इसी तरह गिरावट के साथ कारोबार कर रहे हैं। 5 मार्च 2026 को समाप्त होने वाले चांदी के फ्यूचर्स की कीमत MCX पर ₹2,48,875 प्रति किलोग्राम थी, जो पिछले बंद भाव से लगभग ₹16,700 कम है। शुरुआती ट्रेडिंग में चांदी ₹2,67,501 तक पहुंची थी। इस गिरावट के कारण आज सोना और चांदी खरीदना आम लोगों के लिए कुछ हद तक सस्ता हो गया है।

प्रमुख शहरों में सोने की कीमतें (प्रति 10 ग्राम)

देश के प्रमुख शहरों में सोने की कीमतें अलग-अलग हैं, जो इस प्रकार हैं—दिल्ली में 24 कैरेट सोना ₹1,51,680, मुंबई में ₹1,51,530, चेन्नई में ₹1,52,180, कोलकाता में ₹1,51,530, अहमदाबाद में ₹1,51,580, लखनऊ में ₹1,51,680, पटना में ₹1,51,580 और हैदराबाद में ₹1,51,530 प्रति 10 ग्राम के आस-पास ट्रेड हो रहा है। 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने के दाम भी लगभग समान स्तर पर हैं। इन दामों में आई गिरावट बजट 2026 की घोषणा के बाद आई आर्थिक अनिश्चितता और बाजार की प्रतिक्रिया का नतीजा है।

बजट के बाद सोना-चांदी के दामों में आई गिरावट से आम जनता को राहत

बजट 2026 के घोषणा के अगले दिन सोना और चांदी के दामों में आई यह गिरावट आम जनता के लिए राहत लेकर आई है। चूंकि ये कीमती धातुएं निवेश और उपहार के लिए महत्वपूर्ण हैं, इसलिए दामों में कमी का मतलब है कि लोग इन्हें सस्ते दामों में खरीद पाएंगे। खासकर त्योहारों और शादी के सीजन में यह गिरावट खरीदारों के लिए फायदेमंद साबित होगी। निवेशकों के लिए भी यह मौका है कि वे सोने-चांदी में अपनी पूंजी लगा सकें, जब बाजार में गिरावट हो।

आगे का रुख: बाजार पर नजर रखनी जरूरी

हालांकि आज सोने-चांदी के दाम कम हुए हैं, लेकिन आगे बाजार का रुख आर्थिक नीतियों, वैश्विक मांग, डॉलर की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्वर्ण व चांदी की कीमतों पर निर्भर करेगा। निवेशकों और आम लोगों को चाहिए कि वे इस उतार-चढ़ाव पर नजर रखें और सही समय पर ही खरीद-बिक्री करें। विशेषज्ञ भी सलाह देते हैं कि क्रिप्टो और स्टॉक मार्केट की तरह ही सोना-चांदी में भी समझदारी से निवेश करना चाहिए, ताकि किसी भी वित्तीय जोखिम से बचा जा सके।

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Budget 2026 में नई डिजाइन इंस्टिट्यूट पूर्व भारत में खुलने का ऐतिहासिक फैसला

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Budget 2026 में नई डिजाइन इंस्टिट्यूट पूर्व भारत में खुलने का ऐतिहासिक फैसला

Budget 2026: 1 फरवरी 2026 को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लगातार नौवीं बार देश का बजट पेश किया। इस बार के बजट में शिक्षा क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गईं। बजट में आयुर्वेद, फार्मास्यूटिकल्स, डिजाइन, तकनीकी शिक्षा और विद्यार्थियों की सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया गया है। बजट 2026 इस बात का स्पष्ट संकेत देता है कि आने वाले वर्षों में शिक्षा को रोजगार और विकास से सीधे जोड़ने की योजना है। इसके तहत पारंपरिक चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए तीन नए आयुर्वेद संस्थान स्थापित करने की घोषणा की गई है। साथ ही दवाओं की गुणवत्ता नियंत्रण के लिए ड्रग टेस्टिंग लैब्स को भी अपग्रेड किया जाएगा।

शिक्षा क्षेत्र में नए विश्वविद्यालय टाउनशिप का निर्माण

इस बजट का एक बड़ा और महत्वूपर्ण कदम देश के शिक्षा परिदृश्य को बदलने वाला है। सरकार ने पूरे देश में पांच विश्वविद्यालय टाउनशिप बनाने का ऐलान किया है। इन टाउनशिप में शिक्षा, अनुसंधान, छात्रावास, खेलकूद और स्टार्टअप्स के लिए समर्पित सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को ऐसा माहौल प्रदान करना है जहां वे पढ़ाई के साथ-साथ नवाचार और नए विचारों पर काम कर सकें। इसके अलावा पांच नए विश्वविद्यालय खोलने की भी घोषणा की गई है, जिससे उच्च शिक्षा तक पहुंच बेहतर होगी और विभिन्न राज्यों में शिक्षा के नए अवसर उत्पन्न होंगे।

फार्मास्यूटिकल शिक्षा को मिलेगा बल

फार्मास्यूटिकल सेक्टर पर भी बजट में खास जोर दिया गया है। इस क्षेत्र को मजबूत करने के लिए तीन नए फार्मास्यूटिकल शिक्षा संस्थान खोलने की घोषणा की गई है। ये संस्थान दवा निर्माण, अनुसंधान और गुणवत्ता नियंत्रण पर केंद्रित होंगे। इससे भारत के फार्मास्यूटिकल सेक्टर की स्थिति और मजबूती पाएगी और देश में दवाओं के क्षेत्र में नवाचार और प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।

डिजाइन शिक्षा और डिजिटल कौशल को मिलेगी नई उड़ान

बजट में पूर्वी भारत में एक नया भारतीय डिजाइन संस्थान (IIND) खोलने की घोषणा की गई है। इससे इस क्षेत्र के छात्रों को बेहतर शिक्षा प्राप्त करने का मौका मिलेगा और उन्हें देश के दूसरे हिस्सों में स्थानांतरित होने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके साथ ही डिजिटल और क्रिएटिव स्किल्स को बढ़ावा देने के लिए ABGC कंटेंट क्रिएटर लैब्स शुरू की जाएंगी। IIT मुंबई की मदद से देश के 15,000 सेकेंडरी स्कूलों और 500 कॉलेजों में ये लैब्स स्थापित की जाएंगी। इन लैब्स में छात्र डिजिटल कंटेंट, गेमिंग, एनीमेशन और नई तकनीकों से जुड़ी स्किल्स सीख सकेंगे। वित्त मंत्री ने हर जिले में उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए लड़कियों के छात्रावास बनाने की भी घोषणा की है, जिससे छात्राओं को बेहतर शिक्षा के लिए सुविधाजनक और सुरक्षित माहौल मिलेगा।

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Budget 2026 में क्रिप्टोकरेंसी पर बड़ा बदलाव या पुराने नियमों का ही सफर जारी

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Budget 2026 में क्रिप्टोकरेंसी पर बड़ा बदलाव या पुराने नियमों का ही सफर जारी

Budget 2026: हाल के वर्षों में भारत में क्रिप्टोकरेंसी और अन्य वर्चुअल डिजिटल असेट्स (VDAs) में निवेशकों की संख्या में तेज़ी से बढ़ोतरी हुई है। हालांकि इस क्षेत्र में निवेश करना आसान नहीं है क्योंकि यहां भारी टैक्स बोझ निवेशकों को परेशान करता है। वर्तमान में लागू कर प्रणाली ने कई निवेशकों को उलझन में डाल दिया है और वे सही दिशा नहीं पकड़ पा रहे। अब जब बजट 2026 पेश होने में मात्र एक दिन बचा है, तो क्रिप्टो उद्योग से जुड़े लोगों, टैक्स विशेषज्ञों और निवेशकों की उम्मीदें फिर से बढ़ गई हैं। सभी की निगाहें सरकार की ओर टिकी हैं कि क्या इस बार टैक्स और नियमों में कोई बड़ा बदलाव होगा या फिर पुरानी प्रणाली जारी रहेगी। आइए जानते हैं क्रिप्टो निवेशकों की बजट से क्या-क्या अपेक्षाएं हैं।

निवेशकों की बजट 2026 से मुख्य अपेक्षाएं

वर्तमान में वर्चुअल डिजिटल असेट्स से होने वाली कमाई पर 30 प्रतिशत की फ्लैट टैक्स दर लगती है, जिसमें केवल संपत्ति की खरीद लागत को ही कटौती के रूप में माना जाता है। इसके अलावा हर लेन-देन पर 1 प्रतिशत टीडीएस (टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स) काटा जाता है, जिससे सरकार को निवेश गतिविधियों का पूरा रिकॉर्ड मिलता है। हालांकि ये सख्त नियम निवेशकों के लिए अतिरिक्त बोझ साबित हो रहे हैं। लगातार टीडीएस कटौती से व्यापार के लिए उपयोग होने वाली रकम लॉक हो जाती है, जिससे छोटे निवेशकों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसी कारण कई निवेशक विदेशी एक्सचेंज या गैर-आधिकारिक प्लेटफॉर्म की ओर रुख कर रहे हैं जहां नियम अपेक्षाकृत आसान हैं। इस स्थिति का सीधा असर देश के घरेलू क्रिप्टो बाजार पर भी पड़ रहा है। ऐसे में निवेशक अब टैक्स प्रणाली में बदलाव और राहत की उम्मीद लगाए हुए हैं।

बजट 2022 ने बदला था क्रिप्टो टैक्सेशन का रुख

भारत सरकार ने डिजिटल संपत्तियों की ओर कुछ वर्षों पहले ध्यान देना शुरू किया था। डिजिटल ट्रांजेक्शन्स में तेजी से वृद्धि को इसके पीछे मुख्य कारण माना गया। इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री ने बजट 2022 में स्पष्ट किया था कि क्रिप्टो और अन्य डिजिटल असेट्स के व्यापार और दायरे में इतनी वृद्धि हुई है कि इनके लिए एक अलग टैक्स सिस्टम बनाना जरूरी हो गया है। इस घोषणा से यह साफ हो गया कि सरकार अब इन संपत्तियों को औपचारिक वित्तीय प्रणाली का हिस्सा मानती है और इन्हें टैक्स नेट में लाना चाहती है।

आगे क्या हो सकता है बजट में?

बजट 2026 के संदर्भ में क्रिप्टो उद्योग, निवेशकों और टैक्स विशेषज्ञों की उम्मीदें हैं कि सरकार टीडीएस की दर कम करे या इसे फिलहाल के मुकाबले और भी निवेशकों के अनुकूल बनाए। साथ ही टैक्स की दरों में कुछ राहत मिले ताकि छोटे निवेशक इस बाजार में और सहजता से आ सकें। इसके अलावा, कुछ लोग यह भी चाहते हैं कि क्रिप्टो को पूरी तरह से पारदर्शी और नियमबद्ध करने के लिए एक व्यापक कानून बनाया जाए, जिससे निवेशकों को सुरक्षा और स्पष्टता मिले। अगर सरकार इन पहलुओं पर सकारात्मक कदम उठाती है, तो यह घरेलू क्रिप्टो बाजार को मजबूत करने में मदद करेगा और भारत को इस क्षेत्र में वैश्विक प्रतिस्पर्धा के करीब ले जाएगा।

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